बुधवार, 11 अक्तूबर 2006

व्यंग्य: मेरी चाहत

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मेरी चाहत का वह नायाब इलेक्ट्रॉनिक वस्तु ...

किसी भी दिए गए समय में हर किसी की कोई न कोई चाहत होती है. बहुतों को सुबह उठते ही चाय की चाहत होती है, तो बहुतों को अख़बार की. अधिसंख्य को बढ़िया हाजत की चाहत होती है जो आजकल की मिलावटी दुनिया में दिनों दिन मुश्किलतर होता जा रहा है, लिहाजा कायम-नित्यम चूर्णों का बाजार गर्म होता जा रहा है. और इस पल, हो सकता है इस पृष्ठ को कदापि न पढ़ने की आपकी चाहत हो रही हो - यह चिट्ठा पोस्ट है या विज्ञापन पोस्ट. चिट्ठे में विज्ञापन है या विज्ञापन में चिट्ठा. जितना विज्ञापन इस चिट्ठे में है उतनी तो पुराने चावल के बोरों में इल्लियाँ भी नहीं होतीं और यहाँ तो मामला ‘चावल' चुनें या ‘इल्लियाँ' वाला है!

ठीक है, चलिए, मैं दूसरे तरीके से बात करता हूँ. क्या यह आपकी चाहत नहीं है जो आपकी सांसों को लगातार चला रही है, प्राणवायु को अंदर बाहर कर रही है? आपकी जीने की चाहत है जो आपकी सांसों को चलाए हुए है. परंतु मैं अलग हूँ. मैं अपनी उस एक ऐसे ‘ऑल-इन-वन' किस्म के तकनीकी ग़जॅट (उपकरण) की चाहत में मरा जा रहा हूँ जो न सिर्फ मेरा सारा कार्य निपटाने में सक्षम हो, बल्कि दूसरों के भी ढेरों काम कर सके! और, इसमें वास्तविक विस्तारणीयता व परिवर्धनीयता (स्केलेबिलिटी और अपग्रेडेबिलिटी) हो ताकि यह कभी भी पुराना न पड़े - जी हाँ, कभी भी पुराना न हो अन्यथा आज तो मैं कोई भी ग़जॅट खरीदता हूँ, छः महीने बमुश्किल गुजरते हैं और वह चलन से बाहर हो जाता है!

मैं निश्चित रूप से इसे ‘आई-मॉड' नाम देना चाहूंगा. ‘आई' कूल है यानी कि सदाबहार और सफल है जैसा कि ‘आई-पॉड' में ‘आई' कूल यानी कि सदाबहार-सफल है. ऊपर से आई-मॉड की तुक आई-पॉड से पूरी तरह से मिलती जुलती है. जाहिर है, इसके नामकरण में कोई समस्या नहीं है. वास्तविक समस्या तो उपयोगिताओं को शामिल करने का है - क्या-क्या छोंड़ें और क्या-क्या जोड़ें!

मेरे आई-मॉड में, जो कि किसी भी खूबसूरत स्त्री के खूबसूरत हाथों में आसानी से समा सकने वाले आकार का होगा, में निम्न सक्षमताएँ तो होनी ही चाहिएँ-

ट्राई बॅण्ड, ड्यूअल प्लेटफ़ॉर्म (सीडीएमए/जीएसएम दोनों), जीपीआरएस, वॅप इनेबल्ड मोबाइल फ़ोन की सुविधा हो - ताकि मेरा मोबाइल भारत में मोबाइल फ्रिक्वेंसी स्पेक्ट्रम के लिए चल रहे वर्तमान युद्ध में जीवित बना रह सके.

पीडीए (पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट) हो जिसमें विंडोज सीई / पॉम ओएस दोनों ही हों (पता नहीं कि कौन सा कब अच्छा परफ़ॉर्म करे), व ब्लूटूथ सक्षम हो (आखिर मुझे हर दूसरे मिनट में अपने ईमेल जाँच करने होते हैं तथा न्यूज़-फ़ीड ताज़ा करने होते हैं)

अंतर्निर्मित पूर्ण व्यवसायिक कैमरा व कैमकॉर्डर हो जिसमें अंतर्निर्मित मिनिएचर डीवीडी रेकॉर्डर हो - आखिर पिकासा, फ्लिकर और यू ट्यूब आपके लिए मुफ़्त उपलब्ध किसलिए हैं?

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अंतर्निर्मित स्पीकर सहित एएम-एफ़एम-वर्डस्पेस रेडियो तथा अंतर्निर्मित एफएम ट्रांसमीटर हो - मैं खाते-पीते-सोते मुझे संगीत चाहिए - और जितनी ज्यादा विविधता होगी उतना ही अच्छा.

अंतर्निर्मित टीवीट्यूनर कार्ड हो - आजकल की खूबसूरत महिलाएँ भले ही हवा पानी के बगैर जिंदा रह लें, सास-बहू सीरियलों के बगैर जिंदा नहीं रह सकतीं. यही हाल आकर्षक पुरुषों का है - वे बिग-ब्रदर व क्रिकेट जैसे लाइव शो व खेल के बगैर जिंदा नहीं रह सकते.

विस्तारणीयता सहित, हॉट स्वेपेबल, न्यूनतम 20 जीबी फ़लॅश मेमोरी हो. मेमोरी जितनी ज्यादा हो उतना ही अच्छा.

बाहर खींच कर निकाला जा सकने वाला स्विस-आर्मी चाकू सेट हो - बढ़िया स्विस-आर्मी चाकू के बगैर कोई भी भद्र पुरुष इस धरती पर सही ढंग से जीने की कामना नहीं कर सकता.

अंतर्निर्मित, शक्तिशाली टॉर्चलाइट तथा मिनिएचर पंखा हो जो कि मेरे जैसे भारतीयों के लिए अतिआवश्यक वस्तु की श्रेणी में आता है.

व्यक्तिगत एयर आयोनाइज़र, इलेक्ट्रॉनिक वाटर प्यूरीफ़ायर हो - प्रदूषित हवा और पानी से निजात पाने के लिए.

इलेक्ट्रिक शॉक गन हो - यह गन भले ही खूबसूरत स्त्रियों के उनके अपने बचाव के लिए बनाई गई है, परंतु भद्र पुरुषों की रक्षा करने में भी यह उतना ही समर्थ है.
इलेक्ट्रॉनिक मच्छर भगाने वाला यंत्र हो - मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, मंकीगुनिया और दर्जनों अन्य मच्छर जन्य बीमारियों से बचाव के लिए यह आज प्राथमिक आवश्यकताओं में आता है.

अलग किया जा सकने वाला बहु उपयोगी बाल पाइंट पेन हो जिससे कागज के साथ-साथ पीडीए के वर्ड दस्तावेज़ में भी लिखा जा सके.

स्कैनर - जो अंतर्निर्मित कैमरे के जरिए काम करे तथा मिनिएचर प्रिंटर हो.

मिनिएचर एलसीडी प्रोजेक्टर हो - जिसमें श्वेत दीवार पर 17 इंच चमकीले रंगीन छवि उतारने की क्षमता हो. आप भी इस बात की ताकीद करेंगे कि किसी फुरसत की दोपहरी में बड़े स्क्रीन पर क्रिकेट मैच या फ़ैशन शो देखने का अपना अलग ही आनंद है.

बैटरी की जरूरत कभी न हो - यह वातावरण की व सूर्य की रौशनी से, और हो सके तो शोर व ध्वनि प्रदूषण से अपनी शक्ति बनाए.

प्लेटिनम से बना ढांचा जिसमें असली हीरों से पच्चीकारी की गई हो (अब यह तो स्टेटस सिंबल और री सेल वेल्यू के लिए है - इससे आई-मॉड की फंक्शनलिटी से कोई लेना-देना नहीं).


शायद इतना बहुत है. मैं अपने आई-मॉड में हर्ले डेविडसन जैसे मोटरबाइक की फंक्शनलिटी व वैल्यू भी घुसाना चाहूँगा, परंतु फिर इसे किसी खूबसूरत स्त्री के खूबसूरत हाथों में समाना भी तो चाहिए!

(चित्र : साभार, डिजिट पत्रिका)

1 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:


  1. हज़ारों ख्वाईशें ऐसी,कि हर ख्वाईश पे दम निकले, बहुत निकले मगर फिर भी,ना जाने क्युँ कम निकले


    वाह भई, क्या बात है.

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