टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

हाशिए पर भविष्य


नया ज्ञानोदय : एक संग्रहणीय विशेषांक

नया ज्ञानोदय का अक्तूबर 2006 का तीन सौ पृष्ठों का संग्रहणीय विशेषांक बच्चों के ऊपर लिखी गई रचनाओं पर केंद्रित है. इस अंक में मेरे द्वारा अनूदित कहानी - "एक कहानी छोटी सी एमी की" पृष्ठ 211 पर प्रकाशित हुई है. यह मार्मिक कहानी रचनाकार के पृष्ठों पर पहले ही आ चुकी है. अगर आपने नहीं पढ़ी हो तो अवश्य पढ़ें. यह कहानी बाद में भास्कर मधुरिमा में भी संक्षिप्त रुप में प्रकाशित हुई थी.

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नया ज्ञानोदय में छपी इस अनूदित कहानी को पढ़ूँगा जरूर। इसी अंक में मेरे एक मित्र व सहकर्मी महेन्द्र सिंह की रचना भी छपी है जिसे मैं अपने चिट्ठे पर पुनर्प्रकाशित करने जा रहा हूँ।

रवि भाई

बेहद मार्मिक कथा है और साथ ही बहुत शिक्षाप्रद. दिल भर आया पढ़ते पढ़ते. आपके साभार से इस कहानी तक पहुँचा, बहुत धन्यवाद.

समीर लाल

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