शनिवार, 23 सितंबर 2006

वोट बैंक का नया - पुराना चक्कर?

राजनीति में रिश्तेदारी का क्या काम?

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3 blogger-facebook:

  1. मुझे यहां ना तो वोट दिखाई दे रहा है और ना ही बैंक.. क्या गड़बड़झाला है जो आपके ब्लॉग पर चित्र दिखाई नहीं देते. मैं पीकेब्लॉग्स के रास्ते आपकी दुकान पर आता हूं. कृपया रहस्योद्घाटन करें. और ये दुकान आपको सजानी होगी. इन दिनों तो यहां अजब-गजब दिखता है रामसे की फ़िल्म की तरह.. और इसका क्या करूं जो कोड वेरीफ़िकेसन मांगता है. ये तो मुझे बार बार भगा देता है. इस बार फिर ट्राई मारता हूं.

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  2. रतलामीजी मुझे तो समझ ही नही आया कि पोस्ट कहाँ और विज्ञापन कहाँ है?

    माफी चाहता हुँ.

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  3. भाई नीरज, पंकज,

    पीकेब्लॉग्स पर विज्ञापनों का स्क्रिप्ट हट जाता है, परंतु चित्र दिखाई देते हैं. मैंने फिर से जाँच की है, और चित्र दिखाई दे रहे हैं. हो सकता है आपकी समस्या स्थानीय कंप्यूटर पर हो.

    हां, अब यह जरूर ध्यान रखूंगा कि सामग्री ज्यादा हो. सजावट हेतु सुझाव के लिए धन्यवाद. काम जारी है. जल्दी ही कुछ करता हूँ :)

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