सोमवार, 21 अगस्त 2006

द ग्रेट इंडियन बाबूडम - भाग 1

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कॉमरेड, स्वतंत्रता दिवस पर काम करना तो आपराधिक-दंडनीय अपराध है!

चहुँ ओर स्वतंत्रता दिवस पर खुशियों की धूम थी. बधाइयों की धूम थी. छुट्टी की खुशियाँ थीं. और दारू-शारू के ढक्कनों के खोले जाने की लंबी लाइनें थीं.

परंतु इस बीच एक छोटे से खबर ने बहुत कम लोगों का ध्यान आकर्षित किया.



केरल में कुछ बीपीओ कंपनियों ने जिनका धंधा ही 24x7 चलता है, पंद्रह अगस्त के दिन भी अपने ऑफ़िस खुले रखने चाहे.

मगर यह क्या? केरल के कॉमरेडी बाबुओं ने उन कंपनियों को नोटिस दिया कि वे पंद्रह अगस्त, राष्ट्रीय त्यौहार के दिन काम करेंगे तो सरकारी नियमानुसार, उन पर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकेगा.

स्वतंत्रता दिवस पर कार्य करना तो सच्चे भारतीयों के लिए सचमुच आपराधिक कार्य है. इस दिन कार्य करना दंडनीय अपराध है. आखिर सैकड़ों वर्षों की गुलामी से मुक्ति उसी दिन मिली थी तो उस दिन को कार्य कर क्यों नष्ट किया जाए. उस दिन भरपूर छुट्टी मनाया जाए, छुट्टी की खुशियाँ मनाया जाए, मटरगश्ती किया जाए, तब वह दिन सार्थक होगा. और अगर कोई उस दिन कार्य करने को भी सोचेगा तो उस पर आपराधिक मुकदमा दायर कर ही देना चाहिए.

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रेखा (पत्नी) के कॉलेज में बहुत पहले ऐसे ही एक कॉमरेडी प्रिंसिपल हुआ करते थे. अपने आप को डॉक्टर प्रिंसिपॉल कहलाना पसंद करते थे और जब तक वे प्रिंसिपल की कुर्सी से रिटायर नहीं हुए, पैंट-कोट-टाई युक्त सूट में ही मिलते थे भले ही बाहर-भीतर जून के महीने में आग बरस रही हो. तो किस्सा यह है कि नई-नई नौकरी में आई रेखा ने किसी ऐसे ही राष्ट्रीय त्यौहार पर झंडा वंदन के पश्चात् उन डॉक्टर प्रिंसिपॉल महोदय से पूछ लिया कि कुछ लड़कियों के काम अधूरे रह गए हैं, तो क्या मैं आधे घंटे की क्लास ले लूं?

बस, वे कॉमरेडी डॉक्टर प्रिंसिपॉल भड़क उठे. भले ही वे स्वयं साल भर पहले साथी प्राध्यापक के पद पर रहे थे, परंतु उस वक्त वे प्रिंसिपॉल बन चुके थे. वे गुर्राए - जैसा कि सरकारी अफसर अपने मातहत पर गुर्राना अपना अधिकार समझता है - राष्ट्रीय त्यौहार के दिन कोई काम नहीं होता. राष्ट्रीय छुट्टी होती है. आपने ऐसे कैसे पूछ लिया? आपको ज्ञान होना चाहिए कि सरकारी नियम के अनुसार इस दिन कोई कार्य नहीं होता है. रेखा ने पलट कर कहा, मैंने सरल शब्दों में सिर्फ अनुमति के लिए पूछा था, हाँ या ना और इस लैंग्वेज में बात करने का आपको कोई अधिकार नहीं है.

तब से रेखा को पता चल गया कि राष्ट्रीय त्यौहार को कोई काम करता है भला? हमें भी पता होना चाहिए कि राष्ट्रीय त्यौहार मौज मजे के लिए होते हैं. छुट्टी मनाने के लिए होते हैं. उस दिन अगर कोई कार्य करता है तो वह आपराधिक कार्य करता है. उस पर अवश्य मुकदमा चलाया जाना चाहिए.

बहरहाल, आपने उस दिन क्या किया? सच में? झूठ!! नहीं चलेगा!!!

(कल एक और कहानी)

2 blogger-facebook:

  1. मेरा बस चले तो राष्ट्रीय त्योहारो के दिन एक घन्टा ज्यादा काम करना अनिवार्य कर दूं !

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  2. स्वतंत्र होने का मतलब है अपनी आवश्यकता के अनुरूप अपना तंत्र विकसित करना; और यह काम अब तक अधूरा है...

    उत्तर देंहटाएं

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