ताजमहल पर मेरा हक?
ताजमहल पर मालिकाना हक?
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एक ख़बर के अनुसार, ताजमहल के निर्माण के 250 वर्षों के पश्चात्, आगरा के शिया और सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड में उस के मालिकाना हक को लेकर तलवारें खिंच गईं हैं. हर एक की दलील यह है कि ताजमहल वस्तुत: उनके पंथ के व्यक्तियों की कब्र है, अत: मालिकाना हक उन्हीं का है. बोर्डों ने अपने-अपने दावे सरकार को सौंप दिए हैं. चर्चे हैं कि ताजमहल की मोटी वार्षिक आय पर निगाहें हैं. शहंशाह शाहजहाँ ने जिस प्रेम की अभिव्यक्ति की ख़ातिर इस खूबसूरत स्मारक का निर्माण करवाया था, उन्हें सपने में भी यह भान नहीं रहा होगा कि ताजमहल, ताज कॉरीडोर और मालिकाना हक जैसे छुद्र, विवादों में फँसता रहेगा.
अब अगर ऐसे दावे करने का हक किसी का बनता है, तो शीघ्र ही लाल क़िला और कुतुब मीनार पर भी दावे-प्रतिदावे करने वाले चले आएँगे. ये स्मारक विश्वधरोहर हैं, और इनपर किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा मालिकाना हक जताया जाना हास्यास्पद है. दरअसल, ताजमहल जैसे स्मारकों पर तो विश्व की प्रत्येक जनता का मालिकाना हक है.
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व्यंज़ल
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खुद पर नहीं अपना मालिकाना हक है
जताने चले जग में मालिकाना हक है
लोग कहते हैं ये मुल्क है तेरा अपना
बेघर तेरा बेहतरीन मालिकाना हक है
यहाँ खूब झगड़ लिए राम रहीम ईसा
वहाँ नहीं किसी का मालिकाना हक है
दिलों में दूरियाँ तब से और बढ़ गईँ
जब से प्रकट किया मालिकाना हक है
ले फिरे है अपनी रूह बाज़ारों में रवि
मोटे असामी का ही मालिकाना हक है
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4 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:
ताज़ा समाचार यह है कि विनय कटियार प्रभासाक्षी में कहते हैं - ताजमहल को हिन्दुओं के हवाले किया जाना चाहिए चूँकि यह राजा जयसिंह का तेजोमय महल था और इसके बीच में शिवलिंग था...
लगता है और भी दावेदार पैदा होंगे मालिकाना हक के लिए...
u have mantained a very nice blog, & that too in Hindi...it is just great...(I canmt write my comment in hindi as i cant type hindi:(),keep the good work going...:)
धन्यवाद नितिन.
यह कतई ज़रुरी नहीं है कि आप हिन्दी में ही पोस्ट करें. आपके अंग्रेजी टिप्पणियों का हमेशा स्वागत् है.
मुर्ख हैं वे जो इस पत्थर के मुर्दे के लिये पागल हैं दूसरी ओर इस देश की गरीबी नेताओं की हराम्खोरी नहीं दिखायी देती.
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