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आधुनिक युग की गीता...

आधुनिक युग का वास्तविक धर्मग्रंथः व्हाई मेन लाई एण्ड वूमन क्राई

अगर किसी पुस्तक को खरीद कर, नहीं तो मांग कर, नहीं तो चुरा कर (बाई-बोरो-आर-स्टील) पढ़ना आवश्यक है, तो वह एलन और बारबरा पीस की पुस्तक “व्हाई मेन लाई एण्ड वूमन क्राई” (पुरूष क्यों झूठ बोलते हैं, और स्त्रियॉ क्यों रोती हैं) है.
इस युग की बाइबल, गीता और कुरान अगर किसी पुस्तक को कहा जाएगा तो वह इसी पुस्तक को कहा जाएगा. इस पुस्तक को आवश्यक रूप से पढ़ा जाने हेतु पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए. यह पुस्तक, चाहे आप स्त्री हों या पुरूष, आपकी आंखें हमेशा के लिए खोल देने के लिए, आपकी सोच को हमेशा के लिए बदल देने में पूर्णरूपेण सक्षम है. आइए देखें कि इस पुस्तक में आखिर है क्या?
दरअसल यह पुस्तक लेखक द्वय की अत्यंत प्रसिद्ध पूर्व पुस्तक “व्हाई मेन डोंट लिसन एण्ड वूमन कान्ट रीड मेप्स” (पुरूष सुन क्यों नहीं सकते और स्त्रियॉ नक्शे क्यों नहीं पढ़ सकतीं), जिसकी अब तक विश्व की 33 भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है और जिसकी 60 लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं, का ही विस्तार है. अपनी पूर्व पुस्तक में लेखक द्वय ने विभिन्न खोजों, अध्ययनों एवं विकास-वाद के सिद्धान्तों के आधार पर यह स्थापित करने की कोशिश की थी कि स्त्री और पुरूष न सिर्फ शारीरिक रूप से, वरन् मानसिक रुप से भी वे एक दूसरे से अत्यंत भिन्न होते हैं. और उनके बीच समस्या इन्हीं भिन्नताओं को न जानने और न समझने से ही होती हैं. उदाहरण के लिए – पुरूष का दिन भर का बोलने का कोटा 8000 शब्द प्रतिदिन है, तो यही कोटा स्त्रियों के लिए 20000 शब्द प्रतिदिन है, और जब पुरूष तनाव में होता है, तो शांति चाहता है, जबकि स्त्री अपना तनाव बोल कर हल्का करती है. जाहिर है, स्त्रियों को बोलने में आनंद आता है और अधिसंख्य पुरूष स्त्रियों के ज्यादा बोलने से चिढ़ते हैं जबकि वास्तविकता में यह बात भोजन पानी की तरह एक शारीरिक आवश्यकता है.
लेखकों ने पिछले दशक भर से, 30 से अधिक देशों की यात्राएं कर, सैकड़ों सेमिनार आयोजित कर एवं सैकड़ों प्रामाणिक पुस्तकों एवं खोजों का अध्ययन कर स्त्री और पुरूष के आचार व्यवहार में अंतर के इसी तरह के मजेदार परंतु जानने योग्य बातों को संकलित कर इस पुस्तक में पिरोया है. यही नहीं, सभी जानकारियॉ प्रामाणिक और मजेदार उदाहरण सहित दी गई हैं.
यूं तो इस पुस्तक के प्रत्येक पृष्ठ पर ज्ञान की बातें आपको मिलेंगी, परंतु कुछ पृष्ठों पर आश्चर्यपरक तथ्यों को चुटीले अंदाज में प्रस्तुत किया गया है. लेखक द्वय हालाकि अंग्रेज हैं, परंतु उन्होंने सम्पूर्ण वैश्विक समाज का अध्ययन कर उनके नतीजों को शामिल किया है. एक मजेदार उदाहरण वे देते हैं – अपने विश्व व्यापी भ्रमण के दौरान अफ्रीका के सुदूर इलाके के एक गांव में उन्होंने पाया कि दस बारह लंगोट धारी आदिवासी, एक झोपड़े में सरकार द्वारा शिक्षा के प्रसार हेतु लगाए गए सेटेलाइट टीवी के सामने बैठे हैं, और उनमें से प्रत्येक, बारी-बारी से रिमोट कंट्रोल अपने हाथ में लेकर चैनल बदलने (चैनल सर्फिंग) का आनंद ले रहे हैं. पुरूषों की यह आदत, जो स्त्रियों को खासा नागवार गुजरती है, जन्मजात होती है और न्यूयॉर्क से लेकर नई दिल्ली और बस्तर तक एकसार होती है.
इस पुस्तक से आप और भी जान पाएंगे कि-
• स्त्रियॉ क्यों टोकती हैं, और टोका-टोकी कभी काम क्यों नहीं आती.
• पुरूष रास्ता भटकने पर पूछने में क्यों शर्माते हैं.
• पुरूष पादते क्यों हैं, और वे इस शर्मदायक कष्ट से छुटकारा कैसे पा सकते है.
• पुरूष चुटकुले क्यों पसंद करते हैं – गमगीन माहौल में भी.
• स्त्रियॉ रोती क्यों हैं.
• स्त्रियॉ ज्यादा, और विस्तार से क्यों बोलती हैं.
• पुरुषों के तोंद क्यों निकलते हैं.
• पुरूष झूठ क्यों बोलते हैं.
• पुरूषों की ऑखें गोलाइयॉ देखने उबल क्यों पड़ती हैं.
• पार्टी में पुरूष धूसर सूट में ढंके और स्त्रियॉ रंगीन परिधानों में प्रकट क्यों होती हैं.
• इत्यादि

“इत्यादि” इसलिए कि, जैसा कि पहले ही कहा है, आपको इस पुस्तक के प्रत्येक पृष्ठ पर ज्ञान का अकूत भंडार मिलेगा.

दुर्भाग्य से यह पुस्तक अभी अंग्रेजी में उपलब्ध है. अतः हिन्दी या अन्य भारतीय भाषाओं के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा. अंग्रेजी में पाठन संभव न हो तो एक बेहतर सुझाव यह होगा कि इस पुस्तक को अपने किसी मित्र या परिचित को, जिसकी अंग्रेजी अच्छी हो, भेंट करें और आग्रह करें कि वे इसे अपने लिए और आपके लिए भी इसे पढें और आपको बताएं. आइए जल्दी करें, अपनी अज्ञानता को दूर करने में कहीं देर न हो जाए.

पुस्तकः व्हाई मेन लाई एण्ड वूमन क्राई (अंग्रेजी में)
लेखकः एलन + बारबरा पीस
प्रकाशकः मंजुल पब्लिशर्स, भोपाल. (भारत में)

विषय:

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I have read "Why Men Don't Listen..." book and my feelings towards this are exactly same. This book has introduced and reinforced the man-woman specialties which I found quite insightful, practical and interesting. And this is also why I hate political correctness on this topic. But I guess Allan and Barbara have made lot of money publishing same information in so many books :)

(Hindi not working at work)

maithily

बहुत बहुत अच्छी समीक्षा है.

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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