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Wednesday, December 29, 2004

अनुगूंज में लालू की गूंज...

जय हो श्री 1008 श्री लालू महाराजा की
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लालू भगवान:

पिछले दिनों पटना के बहादुरपुर इलाके में लालू भक्तों द्वारा लालू वंदना पंडाल बनाया गया जिसमें लालू, राबड़ी तथा सोनिया के देवी-देवताओं सरीखी तथा अटल बिहारी और आडवाणी की राक्षसों जैसी मूर्तियाँ बनाई गईं और ‘लालू नाम केवलम्’ के मंत्रों के साथ देवताओं के उत्थान और राक्षसों के विनाश की कामना करते हुए यज्ञ किया गया और आहुतियाँ दी गईं. कार्यक्रम में लोगों की अच्छी-खासी उपस्थिति भी रही. चुनाव जो सर पर हैं, और टिकट पाने के ख्वाहिशमंदों की संख्या भी कम नहीं है. जय हो श्री 1008 श्री लालू महाराजा की. इससे पहले लालू चालीसा की रचना हो चुकी है और उसकी प्रतियाँ भी छप-बंट चुकी हैं. लालू को उनके भक्त कृष्णावतार बताते हुए कई यज्ञ पहले भी कर चुके हैं. पर क्या लालू यह भक्ति उनके कुर्सी पर बने रहते रह पाएगी या फिर उनके सत्ताहीन होने के उपरांत भी जारी रहेगी? यह बात लालू स्वयं ज्यादा जानते होंगे.

लालू भगवान और भगवान विश्वकर्मा:

बारंबार हो रही रेल दुर्घटनाओं को देखते हुए लालू जी अपने अख़बार ‘राजद’ (जो लालू का लालू के लिए लालू के द्वारा है) में फर्माते हैं कि सिर्फ भगवान विश्वकर्मा ही रेल दुर्घटनाओं को रोक सकते हैं. इसके लिए रेल मंत्री बनने के उपरांत उन्होंने भगवान विश्वकर्मा की पूजा की है. सच बात है- बाबा आदम के जमाने की पुरानी, खराब, सड़ती हुई इन्फ्रास्ट्रक्चर पर आधारित भारतीय रेलवे (अभी हाल ही में जो रेल दुर्घटना हुई, उसमें पुरानी सिग्नलिंग प्रणाली जो अंग्रेजों के समय की है, वह खराब हो गई, और उन्हीं अंग्रेजों के समय की काग़ज़ आधारित ट्रेन पास करने की प्रणाली उपयोग में ली जा रही थी, जिसमें मानवीय भूल लाज़िमी था) में दुर्घटनाओं को रोकना भगवान विश्वकर्मा के बस की ही बात है. आइए, हम भी मिल कर प्रार्थना करें कि भगवान विश्वकर्मा लालू जी की प्रार्थना सुन लें.

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लालू आरती:
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एक लालू भक्त ने हाल ही में ऑडियो कैसेट ‘श्री लालू आरती’ जारी किया है जिसमें जाहिर है भोजपुरी में लालू आरती है. कैसेट के कवर पर लालू, राबड़ी, लालू के साले साधु तथा सुभाष के देवताओं के रूप में चित्र हैं. इससे पहले जिस व्यक्ति ने लालू चालीसा की रचना की थी उसे राज्य सभा टिकट से नवाज़ा गया था. उम्मीद करते हैं कि लालू आरती गायक को कोई मंत्री पद शीघ्र मिलेगा. मैं भी सोच रहा हूँ कि लालू पर कोई लालूयादवायण (बतर्ज रामायण) लिख मारूँ तो मेरी भी गरीबी थोड़ी दूर हो सकेगी


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ग़ज़ल
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भारत भूमि का लालू हूँ
चारा खा भया कालू हूँ

कुल्हड़ मय सियासती
समोसों का तो आलू हूँ

माई दलित मेरे अपने
लो कहते हो मैं चालू हूँ

दूरी कैसी मुझसे मैं भी
भैंस के भेस में भालू हूँ

रवि कहे कैसे कुरसी की
भूख में सूख गया तालू हूँ

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माई=एमवाई, मुसलिम+यादव
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