रेवडियाँ

समझदार की रेवड़ी
-----------
दोस्तों, एक दोहा तो आपने भी सुना - पढ़ा होगा. अंधा बाँटे रेवड़ी... परंतु अब रेवड़ी समझदार लोग देख-परख कर बाँटा करते हैं (रेवड़ी, वह भी बाँटने के लिए, भाई, आजकल समझदारों के पास ही होती है) और जाहिर है समझदार रेवड़ी किसको किसको बाँटेगा?



दो जजों की कमेटी ने जाँच के उपरांत पाया है कि जब बीजेपी सरकार में थी, तो उस दौरान जितने भी पेट्रोल पंपों के आबंटन हुए थे, उनमें से ७० प्रतिशत का आबंटन बीजेपी सरकार के सदस्यों के सम्बन्धियों और दोस्तों को अवैध रूप से दिए गए थे.

यह कोई नई बात है? यह तो जग जाहिर है कि सरकार में रहने के लिए, सरकार बनाने के लिए अधिसंख्य लोग लालायित क्यों रहते हैं? देश सेवा के लिए? क्या मज़ाक है!

-------------------------------

---
ग़ज़ल
***

अपने अपने हिस्से काट लीजिए
अपनों को पहले जरा छाँट लीजिए

हाथ में आया है सरकारी ख़जाना
दोस्तों में आराम से बाँट लीजिए

प्याले भ्रष्टाचार के मीठे हैं बहुत
पीजिए साथ व दूरियाँ पाट लीजिए

सभी ने देखी हैं अपनी संभावनाएँ
फिर आप भी क्यों न बाँट लीजिए

सार ये बचा है रवि कि देश को
काट सको जितना काट लीजिए

*-*-*
**
*
विषय:

एक टिप्पणी भेजें

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
कृपया ध्यान दें - स्पैम (वायरस, ट्रोजन व रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त)टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहां पर प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget