मंगलवार, 21 सितंबर 2004

विचित्र कथा

विचित्र कथा
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दोस्तों, यह कथा बड़ी विचित्र, परंतु सत्य है. भारतीय सेना से कुछ जवान कारगिल युद्ध के दौरान लापता हो गए थे जिन्हें सेना ने भगौड़ा घोषित कर दिया था. उनमें से एक मोहम्मद आरिफ़ भी था. उसकी नई नई शादी हुई गुड़िया से हुई थी. चूंकि आरिफ़ भगौड़ा घोषित हो गया और उसका कोई अता पता नहीं था, गुड़िया की शादी तौफ़ीक से कर दी गई. इस बीच खबर मिली कि आरिफ़ पाकिस्तान में युद्ध बंदी है. वह शीघ्र ही रिहा हो गया, तथा सेना ने भी अपनी ग़लती सुधार ली.
मगर, कहानी में ट्विस्ट यहाँ से शुरू होती हैः धर्माचार्यों, गांववासियों, पंचायत तथा अभिभावकों ने तय किया कि चूंकि आरिफ़ ने कभी भी गुड़िया को तलाक़ नहीं दिया था, अतः उसकी तौफ़ीक से हुई शादी शरीयत के अनुसार अवैध है लिहाजा उसे तौफ़ीक को छोड़कर आरिफ़ के पास वापस आना होगा.
इधर, आरिफ़ की शर्त है कि वह गुड़िया से मुहब्बत तो करता है, मगर उसके गर्भ में पल रहे बच्चे जो तौफ़ीक का है, उससे नहीं. गुड़िया को उसके अपने बच्चे को कहीं और छोड़ कर उसके पास आना होगा.
एक बच्चे, और एक माँ के दिल के लिए, या ख़ुदा, तूने ऐसी शरीयत क्यों बनाई? या तेरे बन्दे तेरी वाणी का अर्थ ग़लत निकाल रहे हैं?

ग़ज़ल
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अब सूरज को भी दीप दिखानी होगी
शायद कल कोई सुबह सुहानी होगी

क़लम सियाही और वही पुराने काग़ज
तब तो दुहराई गई वही कहानी होगी

सियासती खेल ने तोड़े हैं सब नियम
धावकों तुम्हें चाल नई सिखानी होगी

धर्म की शरण में कुछ और ही मिला
ता-उम्र हमें अपनी जख़्म छुपानी होगी

एक मर्तबा ही गया रवि ग़रीबों में
सोचता है उसकी नज़्म रूहानी होगी

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