लिनक्स में वायरस!

लिनक्स वायरसः एक दुःस्वप्न
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विंडोज़ के लिए घटिया, रद्दी, वाहियात वायरस लिख-लिख कर जब उबकाई सी होने लगी तो ज़ेहन में बिजली सी कौंधी. चलो लिनक्स के लिए वायरस लिखा जाए. आखिर अब यह विंडोज़ के बाद दूसरे नंबर पर तो है ही अतः लोगों को ज्यादा न सही थोड़ा-मोड़ा नुकसान तो पहुँचाएगा ही सही. फटाफट एक ट्रोज़न हॉर्स लिखा जो रिमोट लिनक्स तंत्र में जा कर वहाँ के सीडी रॉम ड्राइव ट्रे को अंदर बाहर कर सकता था.

अब बारी आई उसके परीक्षण की. पर, अरे यह क्या? ट्रोज़न हॉर्स चलने के बजाए हर बार नए नए त्रुटि संदेश लेकर लौट आता था. जैसे कि तंत्र के /etc/fstab या mtab में कोई सीडी रॉम पारिभाषित नहीं है, कोई सीडी रॉम डिवाइस /dev में उपलब्ध नहीं है. या फ़िर सीडी रॉम ड्राइव सिर्फ रूट उपयोगक्ता के द्वारा ही माउन्ट / अनमाउन्ट किया जा सकता है. फ़िर ड्राइव माउन्ट / अनमाउन्ट करने के लिए अलग अलग अनुमतियों के कारण हर बार अलग अलग उपयोक्ताओं के पासवर्ड के त्रुटि संदेश ले आता था. ट्रोज़न चलने के बजाए यह भी त्रुटि बताता था कि सीडी रॉम ड्राइव माउन्ट / अनमाउन्ट नहीं किया जा सकता चूंकि उपकरण व्यस्त है. ख़ूब मगज़मारी के बाद भी बात नहीं बनी चूंकि हर दूसरे लिनक्स सिस्टम में या तो सीडी रॉम ड्राइव के माउन्ट होने की डिरेक्ट्री भिन्न होती थी, या अनुमतियाँ भिन्न मिलती थी या फ़िर वह उपयोक्ताओं के खाते में पारिभाषित ही नहीं होती थी! कुछ ख़तरनाक क़िस्म के, सुरक्षित लोगों ने तो कर्नेल मॉड्यूल में सीडी रॉम ड्राइव को शामिल ही नहीं किया था! मुझे ख़ासी कोफ़्त हुई. विंडोज़ के लिए दर्जनों वायरस चुटकी में लिख लेने वाला लिनक्स के लिए एक सड़ा सा ट्रोज़न नहीं लिख सकता! शर्म!शर्म!

अबकी बार मैं जबरदस्त तैयारी कर मैदान में उतरा और एक शानदार वायरस लिखा जो खुद-बखुद लिनक्स तंत्र में संस्थापित होकर वहां की फ़ाइलें नष्ट कर सकता था. पर यह क्या? परीक्षण के दौरान तो और भी अजीब - अजीब तरह की मुश्किलें आईं. किसी तंत्र में कम्पाइलर का कोई संस्करण संस्थापित नहीं था अतः वायरस सोर्स के द्वारा संस्थापित हो ही नहीं सकता था. कोई आरपीएम बाइनरी पैकेज़ को ही संस्थापना के लिए स्वीकार करता था तो किसी लिनक्स तंत्र में संस्थापना हेतु डेब पैकेज आवश्यक था. कहीं पर जीपीजी सुरक्षा कुंजी की आवश्यकता होती थी तो कहीं फ़ाइल डिपेंडेसीज़ के लफ़ड़े मिलते थे. मैंने यहाँ भी हार मान ली.

अंततः मैंने एक एक्स-विंडोज़ का वायरस लिखा. आख़िर विंडोज़ - एक्स विंडोज़ एक जैसे ही तो हैं.

अपनी जबर्दस्त चतुराई, समस्त कलाकारी और शैतानियत की पराकाष्ठा के उपयोग से मैंने अंततः एक्स विंडोज के लिए एक वायरस लिखा जो लिनक्स तंत्रों में घुसकर मारामारी मचा सकने की क्षमता रखता था. नेट पर वायरस जारी करने के बाद उसके द्वारा लोगों पर होने वाले असर के बारे में सोच सोच कर उत्तेजित, कंपित, उत्साहित और न जाने क्या क्या होता रहा. पर यह क्या? एक दिन बीता, दो दिन बीता, कई दिन बीत गए. कहीं कोई हलचल नहीं हुई, कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं हुई. ज़ाहिर सी बात थी अपना यह अभियान भी फ़ेल हो गया था. डरते डरते त्रुटियों की लॉग फ़ाइल खोली. पढ़ते पढ़ते रोना आ गया. हे भगवान! लिनक्स में तो तमाम तरह के विंडोज़ हैं. कोई टीडब्ल्यू एम उपयोग करता है, कोई ग्नोम २.४ तो कोई केडीई ३.२ वहीं किसी को एक्सएफ़सीई ४.२ का संस्करण पसंद है. लिहाज़ा मेरा वायरस हर जगह जाकर, क्यूटी, जीटीके और डबल्यूएक्स-विंडोज़ में कन्फ़्यूज़ होकर पैंगो बन जाता था कि इधर जाऊँ या उधर जाऊँ? किधर जाऊँ? कोई अपना एक्स-विंडोज़ वीटी ७ पर चलाता था तो कोई ४ पर या फिर ५ पर. कोई कोई तो एक साथ ही दो-तीन तरह के एक्स-विंडोज़ एक साथ ही वीटी ४,५,६,७ पर चला रहे होते थे तो किसी लिनक्स तंत्र का विंडो चलता हुआ दिखता तो कहीँ था, पर वह चलता कहीँ और रिमोट स्थान से था! विंडोज़ के नामी वायरस लेखक! लिनक्स में दिख गई तेरी औकात! रोते रोते मेरी हिचकियाँ बंध गईं.

तभी किसी ने मुझे झंझोड़ा. सपने में क्या कोई बग फ़िक्स नहीं हो रहा था क्या? पत्नी सुबह की चाय लेकर खड़ी थी. सुबह के क्षीण उजाले में उसका चिर प्रफ़ुल्लित चेहरा और भी निख़रा हुआ था. नहीं यार, दुःस्वप्न में तुम मुझसे बिछुड़ गई थीं- मैंने उसे अपनी ओर भींचते हुए कहा.
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क्या यह सत्य है कि लिनक्स के लिये कोई वायरस नहीं बना या नहीं बना सकता?

सागर,
ऐसा नहीं है. लिनक्स के लिए भी वायरस बन चुके हैं. परंतु ये उतनी ज्यादा मारकाट नहीं मचा सकते क्योंकि लिनक्स में हर स्तर पर उच्च सुरक्षा होती है और प्रत्येक मशीन का अपना अलग ही कॉन्फ़िगरेशन होता है. दूसरे शब्दों में कोई भी दो अलग उपयोक्ताओं की लिनक्स मशीन एक जैसी नहीं हो सकती!

रवि भाई , इधर वाईरस के हमलों से तंग आकर मैने अपने कम्पयूटर मे लिनक्स ( उबन्टू ) इन्सटाल करने का प्रयत्न किया , हाँलाकि वह कामयाब न हो पाया , कोई अच्छा लिन्कस बतायें जिसे मै अपने कम्पयूटर पर डाल सकूं । और जिसमे हिन्दी भी सपोर्ट हो ।

प्रभात भाई, वैसे तो रेडहेट के फेदोरा में हिन्दी समर्थन पूरा है क्योंकि उनका हिन्दी समेत भारतीय भाषाओं का एक लैब पुणे में कार्यरत है, और वे बढ़िया काम कर रहे हैं. मेरे विचार में फेदोरा या उबुन्टु या मंड्रिवा आपके लिए उत्तम रहेगा. मगर लिनक्स का प्रयोग आप सीधे सीडी से बूट कर भी कर सकते हैं. इंस्टालेशन के समय अतिरिक्त भाषा के रूप में हिन्दी विकल्प भी चुनें.

शैतान भी हैं आप? पता नहीं था। लीनक्स तो लीनाक्ष है। जैसे मैक्समूलर मोक्षमूलर।

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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