मंगलवार, 4 जुलाई 2017

जीएसटी बनाम दुकालू

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दुकालू नंबर 1

30 तारीख की कत्ल की रात है. आज से दुकालू का भाग्य बदलने वाला है. उसके साथ ही उसके मुहल्ले, शहर, प्रांत, देश का भाग्य बदलने वाला है. सबकुछ बढ़िया होने वाला है. न केवल एक देश एक टैक्स सिस्टम होने वाला है, बल्कि बहुत सी चीजों पर कर यानी टैक्स भी कम होने वाला है जिससे चीजें सस्ती होंगी. वह खुश है कि सरकार को 500 तरह के एंट्री टैक्स, वेट टैक्स आदि आदि भिन्न भिन्न करों के बजाय अब उसे केवल एक ही टैक्स देना होगा. नोटबंदी के बाद यह टैक्सबंदी सरकार का देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने का सबसे बड़ा सर्जिकल स्ट्राइक है.

अपनी झुग्गी झोपड़ी में आराम से लेटा, अपने अनगिनत बार रिपेयर किए गए, सीआरटी – पिक्चर ट्यूब वाली 14 इंची टीवी में बिजली की कंटिया फंसा कर और केबल टीवी में जम्फर लगा कर वो संसद में अर्धरात्रि का बजने वाला घंटा उत्साह से देखता-सुनता है और उसका मन प्रफुल्लित हो जाता है. टीवी के डिबेट में जब वह सुनता है कि ऑडी और मर्सिडीज़ की लक्झ़री कारें सस्ती होंगी, हाई एंड, डिजाइनर मोटरसाइकलें सस्ती होंगी तो वो गद्गद होकर बादशाह का नया ताजा जारी रैप गुनगुनाने लगता है. वो कल्पना करने लगता है कि अब पूरा देश का टैक्स सिस्टम बेहद ईमानदार, पारदर्शी हो गया है और उसका देश भी विकसित देशों की सूची में नंबर एक की स्थिति में आ गया है. वो मन ही मन जीएसटी के विरोधियों को गरियाता है और अपने सेकण्ड हैंड स्मार्टफ़ोन, जिसकी बैटरी कब की मर चुकी है, उसे चार्जिंग में डाल कर नए सिरे से, नए उत्साह से जीएसटी के फायदे वाले संदेशों को फारवर्ड मारने में जुट जाता है.

दुकालू नंबर 2

30 तारीख की कत्ल की रात है. आज से दुकालू [जो अभिजात्य वर्ग में डी.आर. सिंह साहब के नाम (पूरा नाम दुकालू राम सिंह,) से जाने जाते हैं] का भाग्य बदलने वाला है. सबकुछ गर्त में जाने वाला है. कितना बढ़िया टैक्स सिस्टम था देश में जिसका कबाड़ा होने वाला है. सरकार ग़रीबों पर यह नया टैक्स सिस्टम लाकर जुल्म कर रही है. मैन्यूफ़ैक्चरिंग बंद हो जाएगा, बाजार में माल खत्म हो जाएगा, जिस वजह से कीमतें आसमान छूने लगेंगी. देश में महंगाई बढ़ेगी, जीडीपी का कबाड़ा होगा और देश अंधकार युग में चला जाएगा.

12 कारों की कैपेसिटी वाले ऑटोमेटिक गैराज युक्त अपने 5 बीएचके विला के टॉप फ्लोर पर स्थित पेंटहाउस में प्रीमियम एज्ड वाइन नेकेड ग्रेप की चुस्कियां मारते हुए अपने आयातित, 107 इंची, 4के डॉल्बी विज़न टीवी पर जब वो संसद में अर्धरात्रि का बजने वाला घंटा देखता-सुनता है तो उसकी आंखें नम होकर धुंधली हो जाती हैं और वो गम में डूब जाता है. टीवी के डिबेट में जब वो सुनता है कि तमाम उत्पाद करों की मार से महंगे हो जाएंगे, सिनेमा टिकट महंगे हो जाएंगे, मनोरंजन महंगा हो जाएगा, तो वो मेहंदी हसन की गाई गमगीन ग़ज़ल स्वयमेव गुनगुनाने लगता है. वो कल्पना करने लगता है कि अब पूरा देश का टैक्स सिस्टम जो अभी ढंग से चालू भी नहीं हुआ है, कोलैप्स हो जाएगा और बिजनेस का भट्ठा बैठ जाएगा क्योंकि टैक्स तो भले ही एक हो पर अनुपालन और रिटर्न तो 500 से अधिक है. वो अपने देश को कतार में सोमालिया के पीछे खड़ा पाता है. वो मन ही मन जीएसटी के समर्थकों को गरियाता है और अपने लेटेस्ट फ़्लैगशिप स्मार्टफ़ोन, जिसमें एक्सटर्नल और फास्ट, डैश चार्ज की सुविधा भी है, को उठाता है और जीएसटी के विरोध में अगले दिनों होने वाले विरोध प्रदर्शनों, लाबीइंग आदि की तैयारी में जुट जाता है.

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अब आपसे एक जेनुइन सवाल है. आप किस किस्म के दुकालू हैं? नंबर 1 के या नंबर 2 के?

4 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. तेल देखिए...तेल की धार देखिए...

    जय #हिन्दी_ब्लॉगिंग...

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  2. आप पूछ ही रहे हैं तो बता ही देते हैं हम दुकालू नंबर एक की ग्रेड में हैं.:)

    रामराम
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. ओह, मैं तो आपको किसी और नंबर का समझा था. :)

      हटाएं
  3. कैटेगरी तो पता नहीं...कौन से दुकालू हैं...हां जीएसटी को जितना समझ पाये हैं....उससे यह कराधान प्रणाली अच्छी प्रतीत होती है......या यूं कहें जीएसटी आने पर खुश हैं
    प्रणाम

    उत्तर देंहटाएं

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