सोमवार, 12 जून 2017

व्यंग्य जुगलबंदी–38 : भारतीय खेती की असली, आखिरी कहानी

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दृश्य एक
पहला : यार! बहुत दिनों से कोई स्कीम नहीं लाए
दूसरा : सर, एक एकदम चकाचक स्कीम लाया हूँ. दिल खुश हो जाएगा.
पहला (खुश होकर, उम्मीद से) : बताओ बताओ
दूसरा : सर, एक योजना आई है. सेंट्रल की है. 50% सब्सिडी की. हर्बल, एलोवीरा या जेट्रोफा की खेती पर.
पहला : अच्छा! ये तो बढ़िया है.
दूसरा : सर, कोई पचासेक बड़े क्लाइंट आ गए हैं. सबसे बात हो गई है. सबके कागज़ात भी तैयार हो गए हैं. हर एक को उनकी जमीन के रकबे के अनुसार दो से पांच करोड़ के बीच फाइनेंस का मामला बनता है.
पहला : वाह! यार, तुम तो बड़े तेज निकले. इधर गाय बियाई नहीं, उधर दुहना चालू. हे हे हे... (कुटिल हँसी)
दूसरा :  हे हे हे... (बड़ी कुटिल हँसी). अब आप देख लीजिएगा, काम जल्दी हो जाए. कहीं अड़चन न आने पावे.
पहला : बिल्कुल.

दृश्य दो
पहला : यार! बहुत दिनों से कोई स्कीम नहीं लाए?
दूसरा : सर, वही तो लेके आया हूँ. याद है, पिछली दफा की 50% हर्बल खेती सब्सिडी योजना?
पहला :  हाँ हाँ, वो तो क्या बढ़िया स्कीम थी यार. मजा आ गया था.
दूसरा : हाँ, सर तो उसी में आगे हुआ ये है कि कुछ क्षेत्रों को अवर्षाग्रस्त घोषित किया जा रहा है, और 25% कर्जमाफी की बात हो रही है. अपने लोग इस क्षेत्र में नहीं आ पा रहे हैं. कुछ करें और इन्हें भी जोड़ लें तो बढ़िया स्कीम हो जाएगी.
पहला : वाह! यार क्या बात है! सही समय पे बताया. आज ही रिकमंडेशन जाने वाली है. तुम मुझे डिटेल दो अभी जोड़वाता हूँ.

दृश्य तीन
पहला : यार! बहुत दिनों से कोई स्कीम नहीं लाए?
दूसरा : अरे सर, इलैक्शन में बिजी था. वो क्या है ना अगली बार अपने को टिकिट मिलने का जुगाड़ लगाना है ना तो गोटियाँ बिठा रहे थे और क्या.
पहला : अच्छा, अच्छा. पर कोई स्कीम भी तो लाओ!
दूसरा : हाँ, हाँ, उसी सिलसिले में ही तो आया हूँ सर. नई सरकार की, मेनिफेस्टो के तहत कर्जमाफी की योजना बन रही है. पता चला है कि उसमें कुछ लिमिट होगी. तो, यदि हर्बल, अलोवीरा, जेट्रोफा पर लिमिट हटा दें तो मामला मस्त हो जाएगा.
पहला : अच्छा, वो पहले वाला सेंट्रल सब्सिडी वाला?
दूसरा : हाँ हाँ, वही.
पहला : यार, वो महकमा दूसरे के पास है, जिससे मेरी पटरी नहीं बैठती. फिर भी कुछ टुकड़े फेंक कर प्रयास किया जा सकता है.
दूसरा : तो कीजिए न सर! चकाचक काम हो जाएगा. 75% तो हो ही गया है भगवान की दया से. बाकी 25% ही तो बचा है. हें हें हें ... (कुटिल हँसी)
पहला : ये तो तुम सौ परसेंट की स्कीम ले आए यार! इसमें तो क्लाएंट भी बड़े इमानदार हैं. कुछ ठोस करना ही पड़ेगा. हें हें हें... (बड़ी कुटिल हँसी)

दृश्य चार
पहला : यार! इस बार बड़ी जल्दी आ गए? कोई नई स्कीम लाए हो?
दूसरा : वो क्या है ना सर, टाइम बढ़िया चल रहा है. सेलेब्रेशन टाइम. मिठाई का पैकेट लेकर आया हूँ. 100% स्कीम की मिठाई. शुद्ध मावे से बनी काजू कतली और स्विस चॉकलेट. आपका पिछला प्रयास सफल रहा था. सारी खेती 100% में सेटल हो गई. हें हें हें... (कुटिल हँसी)
पहला : मिठाई का टुकड़ा मुँह में रखते हुए – हें..हें..हें... (बड़ी कुटिल हँसी) पर, यार कोई नई स्कीम तो लाओ…

दूसरा : है ना सर. बिल्कुल है. किसान आंदोलन….
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