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कड़ी निंदा पर कुछ नोट शीट्स

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(काजल कुमार के कार्टून की पैरोडी

एक आरटीआई आवेदन लगाकर एक मंत्रालय की “कड़ी निंदा” पर तैयार की गई नोट-शीट की 2 प्रतियाँ हासिल की गई हैं जिनका मजमून आपके अवलोकनार्थ प्रस्तुत है –

कड़ी निंदा नोटशीट 1

देश में विभिन्न प्रकार की वांछित-अवांछित अप्रत्याशित और अप्रिय घटनाओं की मजम्मत करने के लिए और जनता में यह संदेश देने के लिए कि सरकार कार्य कर रही है और इन अप्रिय घटनाओं पर उसका रूख प्रकट करने के लिए आमतौर पर “कड़ी निंदा” शब्द का इस्तेमाल किया जाता है.

इस बीच, सोशल मीडिया आदि की सर्वहारा और आम-जन में अतिसंलिप्तता के वर्तमान दौर में यह पाया गया है कि यह शब्द “कड़ी निंदा” हास्य-व्यंग्य और हंसी ठट्ठा का पात्र बन गया है. सरकार की ओर से जब भी “कड़ी निंदा” वाला बयान जारी किया जाता है, सोशल मीडिया में चुटकुलों, मजाक, रोस्ट आदि की बाढ़ आ जाती है. और अब तो मेनस्ट्रीम मीडिया यानी अख़बार और टीवी में भी मजाक और हँसी ठट्ठों के दौर चलने लग जाते हैं.
अतः इस शब्द “कड़ी निंदा” के विकल्प के तौर पर कोई अन्य समानार्थी शब्द का उपयोग करने का विचार किया गया, जिसके लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई. कमेटी ने अपनी रपट में यह स्पष्ट दर्शाया कि इसके लिए किसी मल्टीनेशनल लिंग्विस्ट कंपनी की सेवाएं ली जाएँ. लिहाजा एक ग्लोबल ई-टैंडर जारी किया गया. न्यूनतम टेंडर राशि भरने वाले को इस कार्य का वर्क आर्डर नियमानुसार दिया गया और कंपनी ने तय समय सीमा के भीतर अपने विश्वस्तरीय संसाधनों का उपयोग कर यह अनुसंशा की है कि “कड़ी निंदा” शब्द के बदले “कड़ी भर्त्सना” शब्द का उपयोग किया जाए.

लिहाजा, सूचना प्रसारण से जुड़े समस्त विभागों, विभाग प्रमुखों को एक अत्यंत आवश्यक सर्कुलर जारी किया जाए जिसमें “कड़ी निंदा” के बदले “कड़ी भर्त्सना” शब्द का उपयोग किया जाए. “कड़ी निंदा” शब्द का उपयोग करने वालों पर घोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी, क्योंकि इससे सरकार की छवि खराब होती है, और सरकार हंसी-ठट्ठा का पात्र बनती है.

 
कड़ी निंदा नोटशीट 2

कड़ी निंदा नोटशीट 1 का अवलोकन करने की कृपा करें जिसकी प्रति इस नोटशीट के साथ संलग्न है. संलग्न नोट में यह स्पष्ट दर्शित है कि किस तरह “कड़ी निंदा” शब्द को उच्च स्तरीय समिति की सिफ़ारिश पर ई-टेंडर आदि प्रक्रिया का कानून-सम्मत पालन कर और पूर्ण पारदर्शिता से वैकल्पिक शब्द ““कड़ी भर्त्सना” का उपयोग करने के आदेश प्रदान किये गए थे.

यह आदेश लागू होने के उपरांत कुछ ही समय बाद से यह पाया गया कि आम, सर्वहारा जनता को “कड़ी भर्त्सना” शब्द से घोर आपत्ति हो गई. भाषाई पंडितों ने इसे हिंदी का सैंस्कृटाइज़ेशन करार दे दिया और तो और भाषा में परिशुद्धतावाद की खिलाफ़त करने वालों ने इसे हिंदी को कठिन बनाने की सरकारी चाल करार देकर अवार्ड वापसी का नया दौर चला दिया जो और भी अधिक सफल रहा. अधिकांश जनता “कड़ी भर्त्सना” शब्द का अर्थ नहीं समझती ऐसा अखबारी पत्रकारों के एक सर्वे में भी आया है. लोग भर्त्र्साना, भर्त्सर्साना, भरतसरना आदि आदि तरीके से इसे लिख रहे हैं, कोई इसे ठीक से लिख ही नहीं पा रहा. लोग ठीक से बोल नहीं पा रहे. यानी - समस्या, घोर समस्या. कई क्षेत्रों से इसके रोमनाइज़ेशन की घोर वकालत की गई है और बड़े आंदोलन चल रहे हैं.

रहा सवाल सोशल मीडिया का, तो “कड़ी भर्त्सना” की तो और भी ज्यादा खिल्ली उड़ने लगी. कार्टूनों, चुटकुलों, वनलाइनर और यहाँ तक कि व्यंग्य जुगल बंदी में भी “कड़ी भर्त्सना” पर व्यंग्य लेख लिखे गए. सरकार कई मौकों पर अपनी छीछालेदर से बचने के लिए अप्रिय घटनाओं की “कड़ी भर्त्सना” नहीं कर पाई. कुल मिलाकर “कड़ी भर्त्सना” ने “कड़ी निंदा” से भी बड़ी समस्या पैदा कर दी.

अतएव यह निर्णय लिया गया कि “कड़ी भर्त्सना” के लिए कोई अन्य सरल सा वैकल्पिक शब्द ढूंढा जाए. इसके लिए, सदा की तरह ही, जैसा कि नियम है, नियमानुसार एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई. इस नई कमेटी में इस नियम का यह ध्यान रखा गया कि पूर्व गठित कमेटी के 20 प्रतिशत से अधिक सदस्य न रखे जावें. कमेटी ने कोई पचास उच्चस्तरीय बैठकों के बाद अनुसंशा दी है कि इस कार्य के लिए ग्लोबल ई-टैंडरिंग के जरिए भरोसेमंद, सक्षम लिंग्विस्ट कंपनी का चयन किया जाए जो कि इस शब्द “कड़ी भर्त्सना” का हर तरह से सर्वे आदि कर हर लिहाज से स्वीकार्य वैकल्पिक शब्द सुझाए.

तदनुसार एक लिंग्विस्टिक कंपनी को यह कार्य-आदेश दिया गया जिसकी निविदा की दर न्यूनतम थी. निविदा के रेट पिछले सिमिलर कार्य से दो गुने थे जो वाजिब हैं क्योंकि पूरे विश्व में मंदी छाई है और इस दौरान रुपए का मूल्य और गिर गया था. इस कार्य के लिए वित्त विभाग की ऋणात्मक टीप और अस्वीकृति को पूर्व में ही निराकृत करने के लिए, फंड की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में से कटौती कर प्रावधान किया गया. कंपनी ने तय समय सीमा में कार्य पूर्ण कर कोई 2000 पृष्ठों में अपना निष्कर्ष प्रस्तुत किया है. समर्थन के दस्तावेज बीस हजार पृष्ठों में अलग से संलग्न हैं.

कंपनी के निष्कर्षानुसार “कड़ी भर्त्सना” के बदले “कड़ी निंदा” का उपयोग किया जाना चाहिए. तद्नुसार समस्त विभाग प्रमुखों को यह आदेशित किया जाए कि भविष्य में अप्रिय घटनाओं के संबंध में केवल “कड़ी निंदा” शब्द का ही प्रयोग करें.
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