टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

September 2016

गूगल ऐलो इंस्टैंट मैसेंजर यूं तो मजेदार किस्म का, कृत्रिम बुद्धि वाला नया इंस्टैंट मैसेंजर है जिसे वाट्सएप्पिया और फ़ेसबुकिया दुनिया में डूबे लोगों को बाहर निकालने के लिए डिजाइन किया गया है, ऐसा प्रतीत होता है, परंतु शायद इसकी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ही इसे ले डूबेगी इसमें संदेह नहीं.

वाट्सएप्प के बेहद लोकप्रिय होने के पीछे एकमात्र कारण है - नो-नॉनसैंस, ईजी फ़ीचर, और इस्तेमाल में बेहद आसान. नो गिमिक एट ऑल.

परंतु गूगल ऐलो में तो गिमिक ही गिमिक है.

ख़ैर. हमें क्या. हम तो इसकी हिंदी टेस्ट करते हैं.

चलिए, देखें. इसका प्रारंभिक यूआई, सेटिंग आदि तो पूरा हिंदी-मय है. ग्रेट!

 

Screenshot_20160927-152144

 

आइए, अब इसकी असली हिंदी की जांच परख करते हैं. इसकी कृत्रिम बुद्धि में कुछ बल डालते हैं और हिंदी में कुछ पूछते हैं-

Screenshot_20160927-151902

ओह, ये क्या? ये हिंदी सीख रहा है. ठीक है, वैसे भी इसने मौसम को पहचान लिया और ब्रेकिंग न्यूज भी बता दिया.

मैंने कुछ और हिंदी में आसान सवाल जवाब किये, अनुवाद आदि के प्रयोग किये, परंतु अभी यह हिंदी में इनपुट लेने में पूरी तरह सक्षम नहीं है. अलबत्ता अंग्रेज़ी इनपुट लेने में कोई जवाब नहीं, और प्रायः हर किस्म की क्वैरी यह आसानी से ले लेता है और उत्तर भी सटीक मिलता है. एक बड़ी खूबी यह है कि इसका माइक्रोफ़ोन बोलकर हिंदी/अंग्रेजी इनपुट भी सटीकता से लेता है.

आइए, दुआ करें कि यह नया मैसेंजर लोकप्रिय हो, और गूगल के अन्य उत्पादों की तरह बेमौत मौत न मरे. इसमें वाकई काम की बहुत सी चीजें हैं जो एक जगह गुंथी गई हैं, जो शायद इस्तेमाल करते रहने से और बेहतर, और काम की हों.

फिर भी, परिणाम तो भविष्य के गर्भ में है!

यूँ, आप इसे आजमाने को गूगल प्लेस्टोर में जाकर गूगल ऐलो डाउनलोड कर सकते हैं. और हमें बता सकते हैं कि आपका अनुभव कैसा रहा?

बहुत बार,  कोई विंडोज पार्टीशन किसी त्रुटि की वजह से पंहुचयोग्य नहीं रह जाता और उसमें भंडारित सामग्री का उपयोग संभव नहीं रह जाता है.

ऐसा ही मेरे साथ हुआ और मेरे एक पोर्टेबल हार्ड डिस्क जिसमें तीन पार्टीशन थे, उसमें से एक पार्टीशन को विंडोज ने करप्ट बताना चालू कर दिया और उसकी सामग्री का उपयोग असंभव हो गया. जब भी उस पार्टीशन को ऐक्सेस करते तो उसे फार्मेट करने का मैसेज आता.

मैंने इसे ठीक करने के लिए इंटरनेट पर कुछ खोजबीन की तो एक हल मिला, उसे आजमाया तो मेरा वह खराब पार्टीशन चकाचक चल निकला.

ताकि सनद रहे और वक्त जरूरत पर काम आवे, यह उपाय निम्नानुसार दर्ज है -

यदि पोर्टेबल हार्ड डिस्क है तो उसे किसी लिनक्स कंप्यूटर पर कनेक्ट करें. ध्यान रहे कि उसमें ये दो टूल इंस्टाल हों -

ntfs-3g

तथा

ntfsprogs

यदि नहीं हैं तो आप इन्हें इस कमांड से इंस्टाल कर सकते हैं -

sudo apt-get install ntfs-3g

तथा

sudo apt-get install ntfsprogs

(यह लोकप्रिय उबुन्टू लिनक्स के लिए कमांड है, अन्य लिनक्स वितरण के लिए ये जुदा हो सकते हैं)

वैसे, मैंने एक ऐसा सिस्टम रेस्क्यू  लिनक्स वितरण प्रयोग में लिया जो इस तरह के काम के लिए ही बनाया गया है. यह केवल 150 मे.बा. डाउनलोड है और रेस्क्यू संबंधी तमाम काम करने में सक्षम है.

अधिक जानकारी व डाउनलोड के लिए यहाँ देखें -

http://www.system-rescue-cd.org/SystemRescueCd_Homepage

इसमें ये टूल अंतर्निर्मित हैं, और लाइव सीडी या पेन ड्राइव से बूट करने का विकल्प है. मैंने इसे पेन ड्राइव से बूट किया. पेन ड्राइव से बूट करने के लिए आप अपने पेन ड्राइव पर इसकी इमेज फ़ाइल को रफस बूटेबल यूएसबी ड्राइव से आसानी से बना सकते हैं. रफस बूटेबल पेन ड्राइव टूल को यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं -

https://rufus.akeo.ie/

image

रफस बूटेबल पेनड्राइव से मैंने एक 2 जीबी माइक्रो एसडी कार्ड को बूटेबल पेन ड्राइव बनाया.

 

लिनक्स सिस्टम में बूट होने पर आपको टर्मिनल पर यह कमांड देना होगा -

fdisk -l

 

आपको सिस्टम में लगे सभी हार्डडिस्क दिखेंगे. ध्यान से देखें कि वह कौन सा पार्टीशन है जो समस्या पैदा कर रहा है या करप्ट या खराब है. उसका नाम नोट कर लें. यह कुछ इस तरह दिखता है -

/dev/sdb

या

/dev/sdd1

जैसा कुछ.

अब  आप रूट यूजर के रूप में यह कमांड दें -

ntfsfix /dev/(आपका ड्राइव नाम जो खराब है)

कुछ ही देर में, यदि संभव हुआ और सबकुछ ठीक रहा तो पार्टीशन पुनः काम करने लायक रीस्टोर हो जाता है.

यूँ, विंडोज के भी कई प्रोग्राम हैं, परंतु वे भरोसे के लायक नहीं हैं. अलबत्ता डेटा रीस्टोर के कुछ विंडोज़ प्रोग्राम सचमुच लाजवाब हैं.

और, अब तो स्वयं कैबिनेट सचिव ने यह मान लिया है!!

image

उच्च अदालतों (हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट) के 50 प्रतिशत से अधिक मुकदमे सरकारी महकमों के हैं!

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि अफसरशाही कितनी निरंकुश, चलताऊ, निष्फिकर, मेरा क्या? एटीट्यूड वाली है, और अपने कंधों पर निर्णय का बोझ ढोना नहीं चाहती!

अनूप शुक्ल प्रेरित व्यंग्य जुगलबंदी सीरीज - 1 : मोबाइल

image

 

आयम डॉ. गुलाटी - एम.एम.एम.पी. - डॉ. गुलाटी ने अपने उसी गुरूर वाले अंदाज में अपना परिचय दिया.

एम.एम.एम.पी. मतलब?

एम.एम.एम.पी मतलब - मेरा मोबाइल ही मेरा परिचय है.

अच्छा, तो आपका मोबाइल कौन सा है?

इससे पहले कि डॉ. गुलाटी बड़े स्टाइल से, उसी गुरूर से अपना मोबाइल निकाल कर जनता को दिखाएँ, ताकि जनता ठहाके लगा सके, जरा आप अपना मोबाइल चेक कर लें. क्योंकि अब आप भी जुदा नहीं हैं. डॉ गुलाटी की तरह ही, आपका मोबाइल ही आपका परिचय है.

एक जमाना था जब आदमी का परिचय भिन्न-भिन्न तरीकों से लिया-दिया जाता था. ऊपर-ऊपर से आदमी का परिचय प्राप्त करने के लिए कोई प्रकटतः, प्रत्यक्ष साधन उपलब्ध नहीं था. कोई धोतीबाज आदमी भी ब्यूरोक्रैट निकल सकता था तो कोट-टाई डांटा हुआ आदमी ठेठ खेती-किसानी वाला भी हो सकता था. तब नाईकी और एडिडास के जूते और टिसॉट, पेबल की घड़ियाँ  भी तो नहीं थे जिनसे आदमी के व्यक्तित्व का अंदाजा लगाया जा सके. जब तक घुट-घुट कर आपसी परिचय का आदान प्रदान नहीं हो जाता था, ये कहना मुश्किल होता था कि यार, ये बंदा आखिर करता क्या है!

पर आज?

आज आपके और सामने वाले के हाथों में एक अदद मोबाइल है ना इंस्टैंट परिचय पाने के लिए!

घुट-घुट कर एक दूसरे का परिचय देने लेने की जरूरत ही नहीं!

उदाहरण के लिए, यदि आपके हाथों में अभी भी एक अदद फ़ीचर फ़ोन है, तो आप इस सदी के सबसे बड़े तकनीकी तौर पर दलित, वंचित आदमी हैं, ठीक उसी तरह जैसे कि आज जो भी ईमानदार बचा है, तो वो इस लिए कि उसे मौका नहीं मिला होता है. तो आपको भी स्मार्टफ़ोन का मौका नहीं मिला है, और आप भी मौका पड़ते ही एक अदद स्मार्टफ़ोन की ओर छलांग लगाने को तैयार बैठे हैं. अथवा यह भी हो सकता है कि आप स्मार्टफ़ोन से ऊबे-अघाए व्यक्ति हैं जो सबकुछ छोड़छाड़ कर, अपना फ़ेसबुक-ट्विटर प्रोफ़ाइल हटा-मिटाकर सन्यास लेकर वापस फ़ीचरफ़ोन की दुनिया में वापस आ गए हैं - जिसकी कि संभावना नगण्य ही है. ये भी हो सकता है कि आपकी कंपनी में स्मार्टफ़ोन बैन हो और आपको मजबूरी में सादे फ़ीचरफ़ोन लेकर चलने जैसी गांधीगिरी करनी पड़ रही हो!

यदि आपके हाथों में श्यामी, वनप्लस जैसे स्मार्टफ़ोन है, तो यकीन मानिए, आप इस सदी के सबसे अधिक होशियार, मितव्ययी आदमी हैं, जो पैसे की कीमत समझते हैं, टेक्नोलॉज़ी की परख रखते हैं. इसके साथ ही, आप उन डम्ब अमरीकियों को चिढ़ा रहे होते हैं, जो उतने ही डम्ब एप्पल फ़ोन को, जिसमें फ़ीचर के नाम से ज्यादा कुछ नहीं होता है, और टेक्नोलॉज़ी में कोई पाँच साल पीछे चल रहा है, दुगनी-तिगुनी कीमत देकर खरीदते हैं. आजकल वैसे भी, अमरीका में डम्ब और ट्रम्प का राइम बढ़िया चल रहा है, और उनके एप्पल से बाहर निकलने की संभावना कम ही है. इसलिए, भारत में एप्पल? ना बाबा ना! जो थोड़ा मोड़ा एप्पल किसी भारतीय के हाथ में दिखता है तो वो या तो धोखा खाया भारतीय होता है या फिर अमरीकी-नुमा भारतीय. वैसे, मैं अपनी बात कहूं तो एक बार मैं भी धोखा खा गया था, और धोखा खाने के मामले में एक बात अच्छी ये है कि आमतौर पर आदमी बार-बार धोखा नहीं खाता.

यदि किसी के हाथ में (अब भी) विंडोज़/लूमिया मोबाइल है तो उसके व्यक्तित्व के बारे में पक्के तौर पर यह कहा जा सकता है कि वो इंटीग्रिटी के मामले में पक्का है. वो बड़ा ही पक्का विश्वासी आदमी होगा. वो आँख-कान मूंदकर जिस किसी पर विश्वास कर लेता होगा, उस पर मरते दम तक विश्वास करता होगा. विंडोज़ फ़ोन मार्केट से बाहर हो गया है, चीजें उसमें चलती नहीं मगर फिर भी उसे जी जान से सीने से चिपकाए व्यक्ति के विश्वास, उसकी विंडोज़ के प्रति प्रतिबद्धता की प्रशंसा तो करनी ही होगी. मगर, हमें इनसे अच्छी खासी हमदर्दी भी दिखानी चाहिए.

अब आते हैं लाइफ़ मोबाइल की ओर. आप कहेंगे कि सेमसुंग, एचटीसी, हुआवेई, जेडटीई, ब्लैकबेरी, नोकिया, एलजी, नैक्सस, मोटो, पैनासोनिक, सोनी, माइक्रोमैक्स, इंटैक्स, डाटाविंड आदि-आदि का क्या? ओप्पो! अरे, ये भी तो, अनगिनत में से एक मोबाइल ब्रांड है. आज आप कोई भी शब्द ले लें. उससे मिलता जुलता किसी न किसी कंपनी का कोई न कोई वर्जन का मोबाइल फ़ोन मिल ही जाएगा. 33 करोड़ हिंदू देवी देवता की तरह मोबाइल ब्रांड और वर्जन भी इतने ही हैं. न एक कम न एक जियादा. यूँ, ये सब आम जनता के मोबाइल हैं. मैंने आम आदमी जानबूझकर नहीं कहा, नहीं तो समस्या हो सकती थी. तो ये बाकी के सब मोबाइल आम जनता के आम मोबाइल हैं. अपवादों को छोड़ दें तो कोई खास, विशिष्ट व्यक्तित्व नहीं. हमें क्या और चलताऊ ऐटीट्यूड युक्त.  अधिकांशतः में ये बात लागू है - आपके फ़ोन में लाखों ऐप्प इंस्टाल हो सकते हैं और हजारों फ़ीचर हैं, मगर आप में से  अधिकांश के लिए काम के केवल व्हाट्स्एप्प और फ़ेसबुक हैं! आम जनता के आम ऐप्प. बहुत हुआ तो ट्विटर बस. यकीन नहीं होता? अरे भाई, यकीन कर लो. और ये भी यकीन कर लो कि महज तीन टैप से सेटिंग में जाकर आप अपने फ़ोन का इंटरफ़ेस यानी भाषा हिंदी में बदल सकते हैं, और कीबोर्ड भी हिंदी में कर सकते हैं. अब बताएं? क्या आपके फोन की भाषा हिंदी है? क्या आपके फ़ोन का कीबोर्ड असल हिंदी है कि गूगल ट्रांसलिट्रेशन वाली Ram से रामा लिखने वाली? हिंदी बेचारी आपके फ़ोन में उपेक्षित पड़ी है, और आप धकाधक हिंदी पखवाड़े में उपेक्षित हिंदी के बारे में रोमन में लेख पे लेख, स्टेटस पे स्टेटस मारे जा रहे हैं! इन आम मोबाइलों के स्क्रीन पर महज एक झलक मारने की देरी है. मोबाइल मालिक के आम व्यक्तित्व का पता आम हो जाता है!

हाँ, तो बात हो रही थी लाइफ़ - एलवाईएफ़ मोबाइलों की. हाल-फिलहाल डेटा का तमाम आग पानी इन्हीं मोबाइलों में तो आ रहा है. बेखौफ आप यह बात यकीन से कह सकते हैं कि जिस किसी के पास भी वर्तमान में लाइफ़ मोबाइल है वो दुनिया के न सही, भारत के सबसे भाग्यशाली लोगों में से एक हैं. जिन्होंने पहले से इसे खरीदा हुआ है, जाहिर है वे भाग्यशाली होने के साथ-साथ बहुत बड़े वाले दूरदर्शी भी रहे हैं. अब यह अलग बात है कि यह अहोभाग्य केवल दिसंबर 2016 तक के लिए ही है.

चलिए, बहुत सी बातें हो गईं. अब तो आप कृपया बता दें कि आपका परिचय क्या है? ओह, नहीं, बस, आप ये बता दें कि आपका मोबाइल कौन सा है?

रेल्वे तो नहीं, परंतु आईआरसीटीसी सुझाव मांग रही है, जो अंततः रेलयात्रियों के लिए ही फायदेमंद होगी. यदि आप भी रेल आरक्षण आदि के लिए आईआरसीटीसी उपयोग करते होंगे तो आपके पास भी यह ईमेल आया होगा -

Dear IRCTC Users,
IRCTC is going to start Catering in trains at a very large Scale. It has already started
E-Catering Website for booking meals online which can be supplied in trains at your
seat.
IRCTC is also going to renovate and manage Railway Retiring Rooms at stations in
future.It is also in the process to launch Executive Lounges at all major Railway
Stations for Railway passenger's convenience.
You are requested to send your suggestions on any or all of the above services to
IRCTC. Suggestions may please be sent at following Mail IDs:
a) tc@irctc.co.in for Catering in Trains
b) ec@irctc.co.in for E-Catering Website
c) el@irctc.co.in for Executive Lounges
d) rr@irctc.co.in for Railway Retiring Rooms
Always at your service,
Indian Railway Catering and Tourism Corporation Limited.

उनका यह ईमेल मेरे पास सही समय पर आया. हाल ही में मैंने एक रेल यात्रा की थी तो मेरे पास एक जरूरी सुझाव था.  मैने उन्हें यह सुझाव दिया है -

आदरणीय महोदय / महोदया,
हाल ही में मैं निजामुद्दीन  रेल्वे स्टेशन पर उतरा. शाम को लौटना था सो सोचा कि रिटायरिंग रूम में डेरा जमाया जाए, ताकि सहूलियत हो. परंतु वहाँ देखा कि रेल्वे की रिटायरिंग रूम में जगह है कि नहीं. काउंटर पर परमानेंट लिखा हुआ था - कोई भी कमरे खाली नहीं हैं.

बाजू के बोर्ड में कमरों की संख्या दिख रही थी - कुल 2 कमरे!

दिल्ली,  निजामुद्दीन रेल्वे स्टेशन में, केवल और केवल 2 कमरे.

यह क्या मजाक है.
या तो रेल्वे में रिटायरिंग रूम का फंडा खत्म कर दो या फिर इस मजाक को खत्म करो.

कम से कम सौ, दो सौ कमरे तो बनाओ. रेल्वे स्टेशन की बिल्डिंग के आसपास तमाम जगह हैं, जहाँ मल्टीस्टोरी होटल्स और कमर्शियल कॉम्प्लैक्स का निर्माण किया जा सकता है. परंतु नहीं. कोई सोच नहीं कोई प्लान नहीं.

शुक्र है कि अब इस दिशा में सोचा जा रहा है.

मेरा सुझाव है कि जगह की उपल्ब्धता और यात्रियों के आवागमन के आंकड़ों और डिमांड के मुताबिक, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत ही सही (यही उत्तम होगा, रखरखाव और परिचालन के लिए भी,) पर्याप्त रिटायरिंग रूम पर्याप्त सुविधा वाले बनाए जाएँ.

और, भगवान के लिए, निजामुद्दीन जैसे रेल्वे स्टेशन में, जहाँ हर घंटे हजारों यात्री आते जाते हैं, दिखाने के लिए 2 कमरे तो मत रखो!

सादर,
रवि

--

आप भी अपने सुझाव उन्हें भेज सकते हैं. कौन जाने सही में आपके सुझावों को अमल में ले आएं!

विंडोज 10 अनिवार्य अपग्रेड हो रहा है और तमाम नए सिस्टम विंडोज 10 में आ रहे हैं. परंतु हिंदी वालों के लिए जो नहीं आ रहा है वो है, यूनिकोड हिंदी टाइप करने के लिए पुराने, लोकप्रिय हिंदी रेमिंगटन जैसे कीबोर्ड. जिससे रेमिंगटन में दक्षता हासिल किए व रेमिंगटन के आदी लोगों को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

माइक्रोसॉफ़्ट भाषा इंडिया का इंडिक 2 -3 संस्करण जिसमें यूनिकोड हिंदी टाइप करने  रेमिंगटन (कृतिदेव 010 जैसे) जैसे कुंजीपट थे, वो भी विंडोज 10 में इंस्टाल नहीं हो रहे हैं और यदि इंस्टाल हो भी रहे हैं तो समस्या आ रही है और ठीक से काम नहीं कर रहे.

विंडोज 10 में रेमिंगटन हिंदी में टाइप करने के लिए वर्तमान में एक औजार है जो फिलहाल ठीक काम कर रहा है.

सरकारी राजभाषा की निम्न साइट से हिंदी टूल जिप फ़ाइल डाउनलोड करें.

http://rajbhasha.gov.in/hinditools.zip

इस फ़ाइल को कंप्यूटर पर किसी फ़ोल्डर में अनजिप करें.

वहाँ मौजूद हिंदी टूलकिट प्रोग्राम को चलाकर इंस्टाल करें.

फिर उसमें मौजूद सुविधा नामक प्रोग्राम को इंस्टाल करें. हो सकता है कि ये फाइलें हिडन हों. और दिखे नहीं. फोल्डर व्यू ऑपशन में हिडन फ़ाइलें दिखाएँ विकल्प चुन कर उपयोग में लें.

सुविधा इंस्टाल हो जाने के बाद आपके कंप्यूटर पर रेमिंगटन सहित कुछ अन्य कीबोर्ड इंस्टाल हो जाते हैं जिससे कि आप रेमिंगटन कीबोर्ड से यूनिकोड हिंदी में टाइप करने में सक्षम हो जाते हैं.

सुविधा इंस्टाल होने के बाद आपके कंप्यूटर स्क्रीन पर उसका यूटिलिटी आइकन इस तरह दिखेगा -

image

हिंदी - अंग्रेजी कीबोर्ड टॉगल करने के लिए स्क्रोल लॉक अथवा सुविधा आइकन में दिए टॉगल बटन का प्रयोग करें. रेमिंगटन अथवा अन्य जैसे कि फ़ोनेटिक आदि में हिंदी में टाइप करना हो तो कीबोर्ड सलेक्टर  से उस कीबोर्ड को चुनें. अधिक जानकारी के लिए सुविधा प्रोग्राम के आइकन पर दिए गए हेल्प बटन का उपयोग कर सकते हैं. यह प्रोग्राम विंडोज 10 में बढ़िया काम करता है. और आप किसी भी इनपुट विंडो में आईएमई की तरह रेमिंगटन कीबोर्ड से हिंदी में टाइप कर सकते हैं.

डिस्क्लेमर - इस पोस्ट का उद्देश्य केवल जन हित में सूचना प्रदान करना है. सॉफ़्टवेयर की उपलब्धता व उपयोग की कोई गारंटी/वारंटी नहीं, व अपने स्वयं के रिस्क पर डाउनलोड कर प्रयोग करें.

श्री जगदीप डांगी लंबे अरसे से हिंदी कंप्यूटिंग तकनीक के लिए दर्जनों विविध किस्म के सॉफ़्टवेयर डेवलप करते आ रहे हैं.

उनके तमाम हिंदी  सॉफ़्टवेयर बेहद काम के हैं. ये सॉफ़्टवेयर अब तक सशुल्क उपलब्ध थे. अब इन्हें श्री डांगी ने आम जन के लिए निःशुल्क जारी करने का मन बनाया है. प्रथम किश्त में उन्होंने रेमिंगटन व फ़ोनेटिक  आधारित शब्द संसाधक (वर्ड प्रोसेसर जिसमें रेमिंगटन कुंजी से यूनिकोड हिंदी में टाइप किया जा सकता है - ठीक वैसे ही जैसे कि आप कृतिदेव फ़ॉन्ट में टाइप कर रहे हों, मगर सामग्री यूनिकोड मंगल में प्राप्त होती है - यानी आपको अब फ़ॉन्ट कन्वर्शन की आवश्यकता नहीं.

इस टूल की आवश्यकता इसलिए भी अधिक हो गई थी, चूंकि नए विंडोज 10 संस्करणों में यूनिकोड में रेमिंगटन टाइपिंग की जो सुविधा हासिल थी, वो खत्म हो गई थी और जिन्हें रेमिंगटन में टाइप करने की आदत थी उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. उम्मीद है यह कमी अब पूरी होगी.

आज श्री डांगी ने यह पत्र अग्रेषित किया है -

 

जैसाकि आपसे चर्चा हुई थी मैं अपने दोनों टाइपिंग सॉफ्टवेयर के पूर्ण संस्करण नि:शुल्क प्रयोग के लिए जनहित में जारी करने हेतु आपको प्रेषित कर रहा हूँ. आगे भविष्य में और भी सॉफ्टवेयर जनहित में जारी करना चाहूंगा.

प्रखर देवनागरी लिपिक - (यूनिकोडित रेमिंगटन टंकण प्रणाली आधारित)

प्रखर देवनागरी लिपिक - (यूनिकोडित रेमिंगटन टंकण प्रणाली आधारित) : यह रेमिंगटन टंकण प्रणाली

आधारित एक सरल शब्द संसाधक है। इस सॉफ़्टवेयर के माध्यम से कंप्यूटर पर साधारण हिंदी रेमिंगटन टंकण

(हिंदी टाइपिंग) जानने वाले यूनिकोड आधारित देवनागरी लिपि (हिंदी, मराठी, संस्कृत) युक्त पाठ को एवम्

रोमन लिपि (अँग्रेज़ी) युक्त पाठ को अपने मन पसंद की-बोर्ड लेआउट यानि के रेमिंगटन की-बोर्ड लेआउट में

संयुक्त रूप से सहजता से टंकण कर सकते हैं। इस सॉफ़्टवेयर का संपूर्ण इंटरफ़ेस हिंदी में होकर यूनिकोड

आधारित देवनागरी लिपि में है। आज हमारे देश में लाखों लोग ऐसे हैं जोकि हिंदी टाइप-राइटर पर हिंदी

टाइपिंग (रेमिंगटन की-बोर्ड लेआउट) जानते हैं, लेकिन यदि वही लोग जब कंप्यूटर पर टाइपिंग करना चाहते हैं,

तब “प्रखर देवनागरी लिपिक” एक महत्वपूर्ण व उपयोगी सॉफ़्टवेयर है।

इसे इस लिंक से डाउनलोड कर निःशुल्क उपयोग करें -

http://dangisoft.com/users/freeware/DangiSoft Prakhar Devanagari Lipik.zip

 

 

प्रलेख देवनागरी लिपिक - (यूनिकोडित फ़ॉनेटिक इंग्लिश टंकण प्रणाली आधारित)

प्रलेख देवनागरी लिपिक - (यूनिकोडित फ़ॉनेटिक इंग्लिश टंकण प्रणाली आधारित) : यह सॉफ़्टवेयर यूनिकोड

आधारित देवनागरी (हिंदी, मराठी, संस्कृत) पाठ को फ़ॉनेटिक इंग्लिश की टंकण शैली अनुसार टंकित करने की

विशेष सुविधा प्रदान करता है। इस सॉफ़्टवेयर के माध्यम से देवनागरी लिपि एवम् रोमन लिपि युक्त पाठ को

संयुक्त रूप से एक ही पृष्ठ पर आसानी से टंकित किया जा सकता है। यह सॉफ़्टवेयर विशेष तौर पर उन

उपयोगकर्ताओं के लिये है, जोकि अँग्रेज़ी की टंकण शैली में टंकण जानते हैं। अँग्रेज़ी टंकण शैली के अनुसार ही

उपयोगकर्ता इस सॉफ़्टवेयर के माध्यम से देवनागरी (हिंदी, मराठी, संस्कृत) पाठ को टंकित कर सकते हैं।

इस सॉफ़्टवेयर को नीचे दिए लिंक से डाउनलोड कर निःशुल्क उपयोग करें -

http://dangisoft.com/users/freeware/DangiSoft Pralekh Devanagari Lipik.zip

इन दोनों सॉफ़्टवेयर को आजमाएँ और जो आपके काम का लगे उसे इस्तेमाल करें. कोई समस्या हो तो श्री जगदीप डांगी से संपर्क करें. ये सॉफ़्टवेयर यदि आपके काम आते हैं तो श्री जगदीप डांगी को धन्यवाद अवश्य दें. इससे निश्चित तौर पर अच्छे काम करने का हौसला और बढ़ता है.

श्री जगदीप डांगी का ईमेल पता है -

dangijs@gmail.com

श्री जगदीप डांगी को एक बार पुनः धन्यवाद.


वैसे, वैज्ञानिकों का बहुत बहुत धन्यवाद। झुककर जूते के फीते बांधने में, नेताओं की तरह मुझे भी बहुत अलाली आती है। अब ये बात जुदा है कि मुझे चमचों, सहायकों की कोई सुविधा हासिल नहीं है।


वैज्ञानिकों, इंजीनियरों तुम पर खुदा की मार पड़ेगी। पुरुषों के इस मनोरंजन को क्यों छीन रहे हो। साथ ही, भारत की जनसंख्या में जो थोड़ा मोड़ा रोक था वो भी एकदम से हट जाएगा।

clip_image001

(मेरे 3 जी कैपेबल फ़ोन (जिसमें 4 जी नहीं है)  में रिलायंस जियो माईफ़ाई हाटस्पाट उपकरण से फ़ोन में 4 जी कॉलिंग कैपेबिलिटी उपलब्ध है)

 

आपके पास नया, 4 जी VOLTE वाला फ़ोन नहीं है? और आप रिलायंस जियो का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे? कोई बात नहीं. निराश न हों. एक जुगाड़ से आप रिलायंस जियो का इस्तेमाल अपने पुराने 2जी/3जी फ़ोन से भी कर सकते हैं. वस्तुतः यह जुगाड़ आपके वर्तमान पुराने, एक सिम वाले फ़ोन को दो-सिम वाला फ़ोन बना देगा. मैं यह जुगाड़ बखूबी इस्तेमाल कर रहा हूँ और पूरी दक्षता के साथ, बिना किसी कमी या परेशानी के. वस्तुतः इस तरह से तो मुझे कुछ अतिरिक्त सुविधाएँ भी हासिल हैं!

इसके लिए आपको रिलायंस जियो का माईफ़ाई हॉटस्पाट उपकरण खरीदना होगा, या रिलायंस जियो का एक्टिवेटेड सिम किसी अन्य कंपेटिबल 4जी डांगल/हाई-फ़ाई हाटस्पाट में लगाकर सक्रिय करना होगा.

जब आप रिलायंस जियो का माईफ़ाई हॉटस्पाट उसमें रिलायंस का सिम लगाकर सक्रिय कर लेते हैं तो फिर उसके बाद अपने पुराने 2जी/3जी फ़ोन (एंड्रायड या आईफ़ोन) में माई जियो ऐप के तमाम ऐप्प ऐप्पस्टोर से डाउनलोड कर लें. खासतौर पर जियो जाइन. और जियो जाइन में एक खाता बनाकर पंजीकरण कर लें, और उसमें लॉगिन कर लें. पंजीकरण जियो स्मार्टफ़ोनों में स्वचालित होता है, परंतु माईफ़ाई हाटस्पाट के जरिए मैनुअली करना होगा. अब आपके माईफ़ाई हाटस्पाट से आपका फ़ोन जुड़ जाएगा. इसके लिए आपको आपके फ़ोन पर एक ओटीपी प्राप्त होगा, जिससे आपका रिलायंस जियो माईफाई आपके वर्तमान फ़ोन से जुड़ जाएगा. यह सारी विधि बेहद आसान है, और मिनटों में सेटअप किया जा सकता है. एक बात और, जब आप एक रिलायंस जियो सिम से अपने रिलायंस जियो जॉइन में पंजीकरण व लॉगिन कर फ़ोन को पंजीकृत कर लेते हैं तो आप कहीं भी सार्वजनिक उपलब्ध रिलायंस वाई-फाई हाट-स्पाट से भी यह सारी सुविधा, बगैर अपने माई-फाई हाटस्पाट के जरिए भी हासिल कर सकते हैं!

अब आप जब भी रिलायंस जियो के हाटस्पाट के जरिए इंटरनेट पर कनेक्ट होंगे तो जियो जाइन सक्रिय हो जाएगा और आप रिलायंस जियो के तमाम ऐप्प 4 जी फ़ोन की तरह ही पूरी तरह से इस्तेमाल कर सकेंगे. कोई अंतर नहीं. यही नहीं, अपने पुराने फ़ोन से ही आप अपने नए रिलायंस सिम के नंबर के जरिए भी कॉल लगा सकेंगे. इसके लिए बाकायदा काल करते समय पूछा जाता है. साथ ही, यदि आप चाहें तो इसकी सेटिंग में आप इसे कॉल करने वाला प्राथमिक ऐप्प के रूप में सेट भी कर सकते हैं.

हाँ, यदि आप कहीं बाहर जा रहे हों तो इस पोर्टेबल माईफ़ाई हाटस्पाट उपकरण को साथ में रखना जरूरी होगा. वैसे यह बहुत ही हैंडी किस्म का छोटा सा उपकरण है – एक छोटे कैंडीबार नुमा स्मार्टफ़ोन की तरह का - जिसे आसानी से कहीं भी लाया ले जाया जा सकता है. इसमें अंतर्निर्मित बैटरी भी है जो आराम से 8-10 घंटे चलता है. इस पोर्टेबल हाटस्पाट की एक और खूबी यह है कि इससे एक साथ 31 अन्य उपकरणों को जोड़ कर इंटरनेट का उपयोग किया जा सकता है.

 

How to use Reliance Jio Sim on  non 4G old / 2G-3G smartphone 

reliance jio sim free call

जीवन परिवर्तन का नाम है. और टेक्नोलॉजी जल्दी, और जल्दी परिवर्तन. कुछ अरसा ही तो हुआ था मिसकॉल को अपनी जिंदगी में शामिल किए हुए. और अब यह अपनी जिंदगी से अलविदा होने को तत्पर है.

“वहाँ पहुँचते ही मुझे मिसकॉल मार देना”

“बैलेंस नहीं है, मिसकॉल दे दूंगा”

“क्या मिसकॉल करते रहते हो. बात करना हो तो पैसे खर्च करो”

“कमीना कंजूस साला. जब देखो मिसकॉल मारते रहता है”

“यार, तूने मिसकॉल दिया था...”

ये कुछ वाक्यांश थे जो हमारी नित्य की जिंदगी में रच बस गए थे. मिसकॉल ने बहुतों का भला किया (होगा), तो बहुतों का बुरा भी किया (होगा). मिसकॉल एक तकनीक थी, तो एक हथियार भी था. एक नायाब औजार भी था, जिसके नायाब प्रयोग से बहुत सी व्यवसायिक सफलता की कहानियाँ भी गढ़ी-बुनी गईं. मिसकॉल मारकर आप अपने पसंदीदा रीयलिटी शो के अपने पसंदीदा विजेता को चुन सकते थे, तो मिसकॉल मारकर आप, बिना कोई धेला खर्च किए, अपने सही-सलामत होने का समाचार भी पूरी दक्षता से दे सकते थे.

मिसकॉल के पीछे की भारतीय फ़िलासफ़ी ही ये थी कि कॉल तो हो, परंतु वो मिस भी हो, कॉल पर एक पैसा भी खर्च न हो – यानी हींग लगे न फ़िटकरी, और रंग चोखा. भावना यही रहती थी कि मिसकॉल कर संदेश तो भेज दें कि भई, काम हो गया, गोटी जम गई, या ये अर्जेंसी है, और जेब से घेला न जाए.

और, अब रिलायंस जियो के वाइस-डेटा प्लान ने इस सुंदर, बहुतों के बेहद काम के, शानदार तकनीक – मिसकॉल का फंडा ही खत्म कर दिया है. रिलायंस जियो में तमाम कॉल फ्री है. एकदम मुफ़्त. आपका जियो सिम चालू है तो बिना किसी चिंता के देश में किसी भी नंबर पर असीमित कॉल करिए. कोई पैसा खर्च नहीं, कोई चार्ज नहीं. बीएसएनएल भी ऐसा प्लान ले आया है – 98 रुपए में विशिष्ट ब्रॉडबैण्ड उपयोगकर्ता चौबीसों घंटे असीमित, मुफ़्त कॉल कर सकते हैं. जल्द ही सभी कैरियर ऐसे प्लान लेकर आएंगे ही. यानी सभी जगह कॉल मुफ़्त होना ही है. ऐसे में कोई मिसकॉल क्यों करेगा? इधर, किसी ने कॉल किया नहीं, उधर किसी ने उठाया नहीं. क्योंकि इनकमिंग तो कब का फ्री है. यानी कॉल के मिस होने की संभावना शून्य.

यदि कोई अब भी मिसकॉल मारे, तो आप उसे क्या कहेंगे?

बहरहाल, इस आलेख को पसंद/नापसंद करने के लिए आप मुझे मेरे फ़ोन नंबर पर एक मिसकॉल/दो मिसकॉल अवश्य दें!

शायद ये आपका आखिरी मिसकॉल हो!

image

रिलायंस जियो की इन घोषणाओं पर यदि यकीन करें, और यदि ये वास्तव में डिलीवर हों, तो यकीनन भारत में इंटरनेटीय अनुभव में क्रांतिकारी परिवर्तन का आगाज़ हो चुका है.

मेरा अपना अनुभव भी कुछ ऐसा ही है.

मैं पिछले बीसेक साल से इंटरनेट का उपयोग करता आ रहा हूँ. तब से जब हम रतलाम से एसटीडी डायल कर इंदौर से इंटरनेट का उपयोग करते थे, 56 केबीपीएस मॉडम के द्वारा. तब इंटरनेट घंटे के हिसाब से मिलता था. 25 घंटे का पैक 100 रुपये और 100 घंटे का पैक 500 रुपए में. अब आप देखें कि 56 केबीपीएस में कितने घंटे में कितनी बड़ी फ़ाइल डाउनलोड होगी. परंतु, खैर, तब न डिजिटल कैमरे थे और न डाउनलोड करने के लिए डिजिटल फ़ोटो और मूवीज़. तब इंटरनेट रुक-रुक कर ही चलता रहता था, और यह अनुभव कमोबेश अब तक बना हुआ था. चाहे किसी भी इंटरनेट सेवा प्रदाता का प्लान ले लो, स्ट्रीमिंग से लेकर डेटा डाउनलोड में हमेशा अनुभव बाधित ही रहा. वैसे मैंने अपने बीस वर्षीय अनुभव में एयरटेल, रिलायंस इन्फ़ोकॉम, आइडिया, वोडाफ़ोन और बीएसएनएल को जांचा परखा है, और लगभग सभी टेक्नोलॉजी का उपयोग किया है - जीएसएम, सीडीएमए, आईपीटीवी, 2 जी, 3 जी व 4 जी.

अधिकतर समय, सेवा खराब होने के बावजूद, बीएसएनएल का ही उपयोग किया है, क्योंकि यहाँ कुछ एकाउंटिबिलिटी होती है, और सबसे बड़ी बात, बिलिंग में एक पैसे का भी घालमेल नहीं होता.

पर, लगता है कि अब यह स्थिति बदलेगी.

मैंने रिलायंस इन्फ़ोकॉम (जियो नहीं, )द्वारा मेरे लूटे जाने की भयानक कहानी आपको सुनाई थी. तब से मैं एक अदद बैकअप इंटरनेट प्लान के लिए खोजबीन कर रहा था. तो यह रिलायंस जियो नजर आया. मैंने इसका माई-फ़ाई इंटरनेट 4 जी पोर्टेबल हॉट  स्पॉट उपकरण हाल ही में लिया है. इसके साथ असीमित 90 दिन का डेटा व वाइस काल भी मुफ़्त मिला है. आज रिलायंस जियो एजीएम में इसे बढ़ाकर दिसंबर 16 तक करने की घोषणा की गयी है यानी एक महीने का उपयोग और मुफ़्त. इससे हॉट-स्पॉट उपकरण खरीदने में लगा पैसा तो पहले ही पूरा वसूल हो गया है.

यही नहीं, इसमें और भी चीजें हैं जो आपके अनुभव को और परिपूर्ण बनाती हैं और आपके इंटरनेटी अनुभव को बदल सकती हैं -

image

(जियो-मैग्स - हर प्रमुख भाषा के प्रमुख व प्रसिद्ध पत्रिकाओं को आप यहाँ पढ़ सकते हैं)

 

जियो केवल इंटरनेट ही प्रदान नहीं करेगा, बल्कि यह आपको संपूर्ण मनोरंजन भी प्रदान करेगा.  इसमें जियो प्ले, जियो बीट, जियो ऑनडिमांड तो हैं हीं जिनसे आप गीत संगीत व फ़िल्मों का आनंद ले सकते हैं, इसमें जियो मैग्स भी है जिसमें आप भारतीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की तमाम प्रमुख व प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं के ताज़ा व पुराने अंकों को भी पढ़ सकते हैं.

भारत में जियो का आगमन हम इंटरनेट के उपयोगकर्ताओं के लिए इसलिए भी अच्छा है कि अब तमाम बाकी कंपनियाँ भी क्वालिटी सेवा, सस्ती सेवा देने में ध्यान देंगी नहीं तो वो बाजार से बाहर हो जाएंगी. बीएसएनएल और एयरटेल की हालिया घोषणा व प्लान को ही देख लें - अब महज एक हजार रुपल्ली में ट्रू अनलिमिटेड, ट्रू, फुल बैण्डविड्थ वाली ब्रॉडबैण्ड की बातें की जा रही हैं - नहीं तो कैप लगा कर अनलिमिटेड प्लान का तो सत्यानाश कर ही रही थीं! कंपनियाँ डेटा कीमतें 80 प्रतिशत तक कम कर रही हैं. इस लिए भी जियो को धन्यवाद कहना होगा.

परंतु आगे यह भी देखना होगा कि जब यूजर-बेस बढ़ेगा तो रिलायंस जियो इस बढ़े बैंडविड्थ उपयोग को कैसे हैंडल कर पाएगा. साथ ही, जब बिलिंग चालू होगी तो भले ही वाइस कॉल फ्री है, अनलिमिटेड है, और केवल डेटा के लिए ही पैसा लिया जाएगा ऐसा कहा जा रहा है, तो आपकी वॉइस कॉल एचडी क्वालिटी की होगी तो डेटा भी ज्यादा खाएगा और फिर यह मार किसे पड़ेगी? कहीं ऐसा न हो कि लौट के बुद्धू घर को आए!

जो भी हो, अभी तो चार महीने अंतहीन इंटरनेट डेटा और इंटरनेटीय मनोरंजन को लूटने के हैं. आप भी लूटें. हमने तो शुरूआत कर दी है!

और मेरा जियो अनुभव? पूरी तरह बदल गया. अब तक अबाधित. गीत-संगीत, मूवी, इंटरनेट पेजेस - सभी अबाधित. बिना किसी बफरिंग के!  आपका अनुभव क्या कहता है?

image

वैसे तो हर भारतीय सड़क, गड्ढों से परिपूर्ण होता है और हर सौ मीटर पर कोई दो सौ छोटे-बड़े किस्म के गड्ढे होते ही हैं. मगर फिर भी, इन्हें मापने, इनकी गिनती करने, रीयल टाइम स्थिति बताने वाला भी कोई ऐप्प होना चाहिए था कि नहीं?

और यह आवश्यकता भी अब पूरी हो गई है.

गड्ढेदार भारतीय सड़कों के लिए यह गर्व का दिन है. आखिर उनके अपने लिए भी उनका अपना, सही ऐप्प आ गया.

और, गड्ढेदार भारतीय सड़कों पर चलने वाले हम जैसे अनुभवी लोगों के लिए भी यह बहुत काम का है. अब हम अधिकाधिक गड्ढे वाली सड़कों का चुनाव कर सकेंगे ताकि उन रास्तों से जाकर हम अपना गड्ढेदार अनुभव बरकरार रख सकें और जमीन से, जमीन के गड्ढों से जुड़े रह सकें. चिकनी, बेगड्ढेदार सड़कें भी कोई सड़कें होती हैं? और उन पर चलने का भी कोई अनुभव होता है? नहीं. सही अनुभव, जीवंत अनुभव, जीवन का अनुभव तो न्यूनतम डेढ़-दो फ़ीट गड्ढेदार सड़कों में चलने, वाहन चलाने में ही आता है.

इस ऐप्प से एक और फ़ायदा होगा. जिन सड़कों में पर्याप्त गड्ढे नहीं हैं उनका रीयलटाइम में पता लगाया जाकर उनमें पर्याप्त गड्ढे किए जाने के पर्याप्त उपाय किये जा सकेंगे. काम में व सरकारी फ़ाइलों में डूबे सरकारी बाबुओं के लिए एक अदद काम और बढ़ जाएगा, मगर इसमें कोई मुश्किल इसलिए नहीं होगी क्यूंकि इसमें पर्याप्त, मलाईदार टेंडरीय संभावनाएँ निहित हैं.

गड्ढों के भी दिन फिरते हैं!

अन्य रचनाएँ

[random][simplepost]

व्यंग्य

[व्यंग्य][random][column1]

विविध

[विविध][random][column1]

हिन्दी

[हिन्दी][random][column1]

तकनीकी

[तकनीकी][random][column1]

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

[random][column1]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget