June 2016

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यूँ तो इस तरह की मांग घोर-मूर्खता है, और उस मांग को सुनवाई के लिए स्वीकार करना उससे भी बड़ी, मैं चाहे जिस ऐप्प का इस्तेमाल करूं मेरी मर्जी,  किंतु  परंतु फिर भी, व्हाट्सएप्प पर बैन होना ही चाहिए. भला क्यूँ?

इसलिए -

व्हाट्सएप्प वैसे तो एक शानदार, नो-फ्रिल, मुफ़्त, सुंदर और बेहद काम का और बेहद आसान मैसेंजिंग टूल है जिसमें कुछ समय से वाइस कॉल की सुविधा भी हासिल हो गई है और वीडियो कॉल की सुविधा भी आने वाली है. फिर भी, इसे बैन होना चाहिए.

सबसे पहले तो इसलिए कि यह भले ही शानदार, नो-फ्रिल, मुफ़्त, सुंदर और बेहद काम का और बेहद आसान मैसेंजिंग टूल हो, मगर इसकी डिजाइन तकनीकी तौर पर बेहद घटिया (जानबूझ कर बनाया गया) है. यह डिफ़ॉल्ट रूप में सभी मीडिया को ऑटोमेटिक डाउनलोड कर लेता है और जल्दी ही आपका स्मार्टफ़ोन मरने (माने मेमोरी लॉस के मामले में Smile) लग जाता है. मैंने दर्जनों मासूमों को अपने स्मार्टफ़ोन को हैंग होते और वाट्सएप्प नहीं चलने का रोना रोते देखा है - उनके स्मार्टफ़ोन वाट्सएप्प द्वारा स्वचालित डाउनलोड किये मीडिया से इतने पैक होते हैं कि वे सांस भी नहीं ले पाते हैं. और, मीडिया भी क्या? तमाम समूहों से एक जैसे चुटकुले, फेल वीडियो आदि आदि जंक को हजारों दफा फारवर्ड मारे गए कचरे!

दूसरी बड़ी समस्या ये है कि जैसे ही आप वाट्सएप्प इंस्टाल करते हैं, यह आपके तमाम कॉन्टैक्ट स्वयं ही ऐक्सेस कर लेता है और इंडैक्सिंग कर पॉपुलेट कर लेता है. साथ ही यह यह भी दिखा देता है कि सामने वाला बंदा वाट्सएप्प पर है या नहीं - यानी आपकी वाट्सएप्पिया प्राइवेसी खत्म. अब हर कोई हर किसी को किसी न किसी ग्रुप में जोड़ घटा रहा है और वाट्सएप्पिया दुनिया ऐसे बढ़ती ही जा रही है!

तीसरी मगर सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह बहुत ही डाटा प्रिय है. इसके डेटा ऐक्सेस को बंद करने का कोई विकल्प इसकी सेटिंग में नहीं है और केवल रूट (एंड्राइड में) यूजर के रूप में ही संभव है. इसका क्या अर्थ हुआ? इसका अर्थ यह हुआ कि वाट्सएप्प बैक-ग्राउंड में चलता रहता है चलता रहता है. इसे बंद करने के बाद भी कुछ समय बाद यह फिर से स्वचालित चलने लग जाता है और पूरे समय डाटा ऐक्सेस करते रहता है. जैसे ही आपका स्मार्टफ़ोन इंटरनेट से कनेक्ट होता है, यह प्राथमिकता में संदेशों, मीडिया को डाउनलोड करने लग जाता है. इस तरह यह ऐप्प आपका सर्वाधिक डेटा-खाऊ ऐप्प बन जाता है. टेलिकाम सर्विस प्रोवाइडर कंपनियाँ वाट्सएप्प को इसीलिए पसंद करती हैं कि वो आपको उन कंपनी का डेटा बेचने में मदद करती है. आप कोई 1 जीबी डेटा रिचार्ज करवाते हैं पता चला कि चार दिन में खत्म हो गया. सारा किया धरा वाट्सएप्प का होता है. अधिकांश डेटा यही खाता है. बहुत कुछ ऐप्प के अपडेट और अपग्रेड भी खा जाते हैं.

भले ही वाट्सएप्प लोकप्रिय हो, सड़ियल चुटकुलों और उतने ही सड़ियल वीडियो को हजार बार फारवर्ड मारने में यह बेहद आसान ऐप्प हो, तो भी उपभोक्ताओं को डेटा का चूना लगाने में यह उस्ताद है तो इसकी ऐसी उस्तादी पर बैन लगाना चाहिए या नहीं?

बहरहाल आप इन उपायों से वाट्सएप्प की इन शरारतों पर बैन लगा सकते हैं -

सेटिंग में जाकर मीडिया स्वचालित डाउनलोड को डिसेबल कर दें. वही मीडिया डाउनलोड करें जिससे आप वास्तव में देखना चाहते हैं. इससे आपका भारी डेटा बचेगा और आप सड़ियल मीडिया को दसवीं बार देखने से भी बचेंगे!

ऐप्प स्टोर से फ़ाइल मैनेजर किस्म का कोई ऐप्प (यदि आपके स्मार्टफ़ोन में पहले से नहीं है तो, वैसे अधिकांश फ़ोनों - जैसे सेमसुंग आदि में पहले ही माई फ़ाइल नाम का फ़ाइल मैनेजर बाई डिफ़ॉल्ट इंस्टाल रहता है) इंस्टाल करें और वाट्सएप फ़ोल्डर के भीतर स्थित अवांछित मीडिया फ़ाइलों को समय समय पर हटाते रहें.

तो, चलिए, अब इस संदेश को कॉपी करें और अपने तमाम वाट्सएप्प संपर्क, समूह आदि में हर जगह, और हो सके तो कई-कई बार फारवर्ड मारें!

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और, सबसे बड़ी बात, मैं भारत में ही जन्मा हूँ, और मेरी शिक्षा दीक्षा भारत में ही हुई है. इतना ही नहीं, आज तक मैंने कोई विदेश यात्रा भी नहीं की है!

डिजिटल लाइब्रेरी में लाखों किताबें स्कैन कर अपलोड की गई हैं जिनमें हिंदी भाषा में भी तमाम उपयोगी व मनोरंजक किताबें हैं. अधिकांश पुरानी किताबें स्कैन कर अपलोड की जा चुकी हैं. बहुत संभव है कि पचास सौ साल पुरानी कोई किताब यदि आप किसी संदर्भ के लिए खोज रहे हों तो वह यहाँ स्कैन किया हुआ मिल जाए.

परंतु इस लाइब्रेरी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि स्कैन की हुई बहुमूल्य किताबें ऑनलाइन पठन पाठन के लिए ही उपलब्ध हैं और आमतौर पर एक विशेष प्लगइन को इंस्टाल किये बगैर इन्हें पढ़ पाना मुश्किल होता है.

यहाँ किताबों को डाउनलोड कर ऑफलाइन उपयोग करने की सुविधा प्रदान नहीं की गई है जिससे इस खूबसूरत प्रयास का लाभ अधिकांश लोग नहीं ले पाते.

इस समस्या को कुछ उत्साही, व समाज के लिए समर्पित डेवलपरों ने ठीक करने की कोशिश की है.

आप डिजिटल लाइब्रेरी की इन किताबों को एक टूल के जरिए पीडीएफ फ़ाइल के रूप में डाउनलोड कर सकते हैं. यह टूल निःशुल्क है.

इस टूल का नाम है डीएलआई डाउनलोडर

इसे आप यहाँ से -

http://www.shunyafoundation.com/

 

अथवा यहाँ से -

 

http://www.sanskritdocuments.org/scannedbooks/dlidownloader/

 

डाउनलोड कर सकते हैं.

 

यह टूल कैसे काम करता है?

यह टूल उपयोग में बेहद आसान है, और इसमें अंतर्निर्मित सर्च की सुविधा है जिससे आप डिजिटल लाइब्रेरी की किताबों को सर्च कर डाउनलोड कर सकते हैं, परंतु यदि आप डिजिटल लाइब्रेरी से सर्च कर उस किताब का बारकोड आईडी प्राप्त कर लें तो यह बेहद आसान हो जाएगा.

उदाहरण के लिए आपने डिजिटल लाइब्रेरी में नरेंद्र कोहली का कविता संग्रह परिणिति ढूंढा -

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अब आप उसका बारकोड नोट कर लें जो कि है  - 99999990007057.

अब आप डीएलआई डाउनलोडर चालू कर लें. और इसके सर्च बॉक्स में उक्त बार कोड को पेस्ट करें.

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आप देखेंगे कि उक्त किताब यहाँ दिखने लगेगी. उस पर दायाँ क्लिक करें. पीडीएफ फ़ाइल के रूप में डाउनलोड का विकल्प दिखेगा. उसे चुनें. बस, काम हो गया. थोड़ी ही देर में पूरी किताब पीडीएफ़ फाइल के रूप में आपके कंप्यूटर पर उपलब्ध होगी. किताब का आनंद उठाएं. चाहें तो इस पीडीएफ किताब को अपने मोबाइल उपकरण, किंडल या टैबलेट पर ट्रांसफर कर सकते हैं.

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संस्कृतडाक्यूमेंट.ऑर्ग से डाउनलोड किए प्रोग्राम का फ्रंटएंड कुछ भिन्न है, परंतु इसी तरह कार्य करता है -

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How to download digital library indi pdf e book as pdf file

पिछली पोस्ट में मैंने एक अच्छी, बढ़िया टेक्नोलॉज़ी - रिलायंस सीडीएमए के अवसान का मर्सिया पढ़ा था, और क्या खूब पढ़ा था.

और, रिलायंस सीडीएमए से रिलायंस 4 जी में मुफ़्त अपग्रेड के लिए पंजीकरण भी करवाया था.

इससे पहले मेरा रिलायंस सीडीएमए हाई स्पीड डांगल 1x स्पीड में मर मर कर चल रहा था, वो अब 1x स्पीड में भी मर गया - यानी बंद हो गया.

यह है डायलर का स्क्रीनशॉट -

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तो मैंने रिलायंस से लाइव चैट पर संपर्क किया.

पता चला कि 4 जी लांच ही नहीं हुआ है, और सीडीएमए सेवा को बंद कर दिया गया है.

जबकि सीडीएमए सेवा तब बंद होनी चाहिए थी, जब 4 जी सेवा पूरी तर लांच हो जाए और वर्तमान सीडीएमए ग्राहक बिना किसी परेशानी के 4जी में आसानी से त्वरित पोर्ट कर सकें.

नीचे प्रस्तुत है लाइव चैट का इतिहास जिससे पता चलता है कि रिलायंस सीडीएमए किस तरह से अपने ग्राहकों को फ्री 4 जी अपग्रेड के नाम से धोखा दे रही है - क्योंकि सपोर्ट को भी पता नहीं है कि 4 जी कब आएगा और सीडीएमए सेवा पहले ही बंद किये दे रहे हैं!

ravi: Hi

Reliance Live Chat: Connection established.

Reliance Live Chat: Initiating Call, Please Wait.

Reliance Live Chat: Welcome to Reliance Live Chat

Reliance Live Chat: Connecting... An agent will be with you shortly.

Reliance Live Chat: http://www.rcom.co.in

Reliance Live Chat: Welcome to Reliance Live Chat.

ravi: hi

ravi: my reliance dongle no is 93033xxxxxx

Pooja : Good Morning! Ravi, Let me confirm your number is 93033xxxxx, is it correct?

ravi: yes

ravi: i had upgraded it 7 days ago

ravi: but is not activated 4g

ravi: sim no 8991140024xxxxxxxxx

Pooja : As I have check the SIM is register

Pooja : Wait till the 4G will launch

ravi: but it is not working / activated

ravi: when will 4 g launch?

ravi: till then I am without any net connection?

ravi: I am from Bhopal

ravi: Bhopal MP

Pooja : Currently we do not have any update for the same

ravi: it is wrong that CDMA is closed without prior launch of 4g

ravi: is there any alternate to get net connection through this number?

Pooja : You need to use the CDMA device in 1X network mode

ravi: 1x mode is also closed clip_image001

ravi: dongle is showing no net connection

Pooja : Please wait till 4G launch

ravi: when will it happen?

ravi: my point is why they closed CDMA when 4 g is not launched

Pooja : I do understand your concern sir

Pooja : I really apologize for the Inconvenience caused to you.

Pooja : Is there anything else apart from this I may help you with?

ravi: I simply need my dongle / updated sim to work

ravi: At least you should give me time by which my problem will be resolved

Pooja : Sir, I told you above that Pooja [9:39:21 AM]:
Please wait till 4G launch

ravi: then I request you to please escalate this to seniors and keep my problem as pending / unresolved.

Pooja : Sure

Pooja : Do you have any more query apart from this?

ravi: no thanks

 

अकसर हम सरकारी महकमों यथा बीएसएनएल आदि को गरियाते हैं उनकी घटिया सेवा के लिए. परंतु यह प्राइवेट सेवा रिलायंस तो और भी गई बीती है. कहीं कोई प्लानिंग नहीं, कहीं कोई सुनवाई नहीं, और पूरी तरह सड़ियल.

ऐसी घटिया और सड़ियल सेवा का हश्र हम आप सब को पता है - कोई कुत्ता भी इन्हें नहीं पूछेगा. और, शायद इसी कारण, अच्छी टेक्नोलॉजी वाला रिलायंस का आरकॉम अपनी घटिया सेवा के कारण अरबों रुपयों के कर्ज में डूबा है, और उपभोक्ता माइग्रेट कर दूसरी सेवा में जा रहे हैं!

ऐसा हो नहीं सकता कि आज का, वर्तमान का कोई बंदा एमएलएम - यानी मल्टीलेवल मार्केटिंग के चक्कर में न फंसे. और, फंसे क्यों न? ये मार्केटियर एक से एक नायाब फंडे जुगाड़ते हैं चारा फेंकने को. इंटरनेट पर कई स्कीमें बाबा आदम के जमाने से चलती चली आ रही हैं, नई आती हैं पुरानी बंद होती हैं, लोग अपना पॉकेट जला लेते हैं एक दूसरे को आगाह करते हैं मगर फिर ट्रैप में फंस जाते हैं.

अब एमएलएम के तो ऐप्प भी बन गए हैं. पता नहीं कैसे और क्यों ये ऐप्प प्ले स्टोर में स्वीकार कर लिए गये हैं! ऐसे ऐप्प कहीं आपको भी दिखें तो दुर्व्यवहार की रिपोर्ट करें.

एक ऐसे ही ऐप्प का विज्ञापन इस ब्लॉग के एक पोस्ट में टिप्पणी के रूप में आया. आप भी देखें और सम्भल जाएं!

 

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ग्लोबलाइज़ेशन और इंटरनेशनलाइज़ेशन के चक्कर में भाषाएँ गड्ड मड्ड होती जा रही हैं. खासकर भारत में!

और, सबसे ज्यादा गड्ड मड्ड  अंग्रेज़ी-हिंदी हो रही है.

कहीं हिंग्लिश (हिंदी में इंग्लिश )  दिखता है, कहीं रोहिंदी (माने रोमन हिंदी). शुद्ध हिंदी तो आजकल दिखती ही नहीं.

नीचे चित्र में जो भाषा नजर आ रही है, वह एक बहुत पड़े ब्रांड के नई कार के आज के विज्ञापन की हिंदी भाषी अखबारों  की है. वैसे, इस विज्ञापन को हिंदी में जारी कर हिंदी भाषियों पर एक तरह से एहसान किया गया है, इसकी शायद जरूरत ही नहीं थी. ये डॉयलाग शायद ठीक रहता - एक अहसान करना कि कोई अहसान न करना.

पर, शायद इससे भला ही हो गया है. इस एहसान में एक नई भाषा खोज ली गई है.

देवलिश - देवनागरी-इंग्लिश.

 

नमूना आपने शायद पहले ही देख लिया हो -

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यह नई भाषा तो वाकई लाजवाब है. दमदार है. ट्रूली इंटरनेशल अपील है. मास एडॉप्टिबिलिटी की पूरी संभावना है. सरल सहज तो इतनी है कि अनपढ़ भी इसे सहजता से स्वीकार लें. ऐसी सुंदर सहज सरल भाषा आखिर बीसवी सदी में ही तो खोजी जा सकती थी, वो भी भारत भूमि पर.

शायद अन्य प्रमुख भारतीय भाषाओं में भी आज इसी तरह की खोज हुई हो - तमिल मलयाली तेलुगु मित्र बताएँ!

नई भाषा देवलिश (या, आप कोई नया अन्य नाम देना चाहें?) के उत्तरोत्तर विकास, प्रचार प्रसार और खूब फलने-फूलने के लिए शुभकामनाएँ!

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रिलायंस सीडीएमए - अलविदा

हर खूबसूरत चीज को एक दिन अपने अवसान का सामना करना ही पड़ता है.

रिलायंस सीडीएमए. जब यह सुविधा प्रारंभ हुई थी, तो पूरे भारत में इसके जैसी कनेक्टिविटी, डेटा बैंडविड्थ की सुविधा किसी भी अन्य मोबाइल सेवा प्रदाता में नहीं थी. मात्र 25 रुपए महीने में असीमित मात्रा में रिलायंस वेब मीडिया (?) से समाचार, वीडियो, ऑडियो आदि बहुत कुछ मिला करता था. हम अकसर आजतक के लाइव वीडियो से अपने मोबाइल फ़ोन में समाचार देखा करते थे और आसपास की जनता दांतों तले उंगली दबाए आश्चर्य करती थी कि वाह - टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ चुकी है! और कनेक्टिविटी की तो क्या कहें. कॉल ड्रॉप का तो नामोनिशान नहीं था और मैंने तो चलती ट्रेन में एल जी रिलायंस सीडीएमए फ़ोन के डेटा कनेक्शन का उपयोग करते हुए विश्व का पहला, चलती ट्रेन से हिंदी में ब्लॉग पोस्ट लिखा और प्रकाशित किया था Smile

बहरहाल.

रिलायंस सीडीएमए अब बंद हो रही है. पिछले कुछ समय से इस सेवा में व्यवधान आने लग गए थे और इसकी पैन इंडिया कनेक्टिविटी में सेंध लग गई थी. मैंने इसका हाई स्पीड डांगल भी लिया हुआ था और उसमें 1 जीबी प्रतिमाह का लाइफ टाइम वैलिडिटी का पैक लिया हुआ था, जिसमें  मुझे 1 जीबी डेटा हर महीने मुफ़्त मिला करता है. आमतौर पर इसे मैं बैकअप के तौर तथा यात्रा आदि में इस्तेमाल करता रहा हूँ. पिछले कोई सालेक भर से इसमें तमाम तरह की कनेक्टिविटी की समस्या भी आने लगी थी और एक तरह से यह अप्रायोगिक ही हो गया था.

इस बीच अभी मैंने अपने इस डांगल से इंटरनेट कनेक्ट करने की कोशिश की तो यह मुझे 4जी अपग्रेड पन्ने पर ले गया.

तो पता चला कि रिलायंस की सीडीएमए सुविधा अब पूरी तरह बंद हो रही है. और तमाम सीडीएमए ग्राहकों को रिलायंस 4 जी में अपग्रेड करना होगा.

मैंने जब अपना पहला पहला स्मार्ट टाइप का फ़ोन लिया था, तो नोकिया सीडीएमए 7265 लिया था. सीडीएमए के लिए अच्छे फ़ोन भारत में रिलीज ही नहीं होते थे. एलजी का एक दो मॉडल आता था, एकाध सेमसुंग का आता था और नोकिया का तो केवल यही था. और जब पूरी तरह स्मार्टफ़ोन खरीदने का समय आया तो मजबूरन जीएसएम फ़ोन लेना पड़ा था और सीडीएमए को अलविदा कर नंबर पोर्ट करना पड़ गया था. दरअसल सीडीएमए टेक्नोलॉज़ी है तो जीएसएम से सुपीरियर, परंतु बैटरी बहुत खाने के कारण और अच्छे ब्रांड के फ़ोनों की अनुपलब्धता के कारण यह टेक्नोलॉजी लोगों के बीच लोकप्रिय नहीं हो पाई. और अब यह बंद हो रही है और सभी उपभोक्ताओं को रिलायंस 4 जी में अपग्रेड करना होगा. कायदे से यह अपग्रेड की प्रक्रिया एकदम आसान और स्मूथ होना चाहिए.

मगर, अभी भी रिलायंस सीडीएमए से - 4जी में माइग्रेशन में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं है. और आसान तो बिलकुल नहीं है.

आजकल के 24X7 कनेक्टिविटी के जमाने में मेरे वर्तमान रिलायंस सीडीएमए डांगल से नेटकनेक्ट+ बंद हो गया है. केवल लो स्पीड डेटा से कनेक्ट हो रहा है. अपग्रेड ऑप्शन भरने के 24 घंटे बाद भी इसका नया सिम एक्टिव नहीं हुआ है. अर्थ यह कि यदि मैं डेटा के लिए केवल रिलायंस सीडीएमए पर निर्भर होता तो अब तक मेरे ऊपर फ्रस्ट्रेशन का बड़ा अटैक आ चुका होता. शुक्र है कि मेरे पास ब्रॉडबैण्ड का एक अन्य प्लान भी है.

इस माइग्रेशन में एक और झटका हमें लगा है. ऊपर जो डांगल देख रहे हैं वो कोई दो हजार रुपयों में खरीदा गया था. माइग्रेशन के पूरा होते ही यह कूड़ा बन जाएगा. और हमें कोई इतनी ही कीमत का 4 जी डांगल / वाईफ़ाई राउटर जैसा कुछ उपकरण लेना होगा. चूंकि मेरे पास लाइफटाइम वैलिडिटी वाला प्लान है, और इसे मैं खोना नहीं चाहता इसलिए यह बेमतलब का खर्च झेलना होगा. खैर.

अलविदा रिलायंस सीडीएमए. हमारी ऑनलाइन उपस्थिति और ऑनलाइन इमेज, व्यक्तित्व बनाने में आपका भी बड़ा योगदान रहा है. उम्मीद करें कि 4जी एलटीई अपग्रेड में भी अनुभव उतना ही उन्नत और बेहतर होगा.

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