March 2016

वर्चुअल रीयलिटी क्या इतना सस्ता हो गया है?

जी हाँ!

यदि आप एचटीसी, सेमसुंग या इसी तरह के महंगे वर्चुअल रीयलिटी डिवाइस का सपना देख रहे हैं, तो इस सपने को सस्ते में पूरा करने का समय आ गया है.

अब आप बेहद सस्ते में, महज 180 रुपए तक में भी वर्चुअल रीयलिटी का आनंद ले सकते हैं.

जरा नीचे अमेजन साइट पर किए गए सर्च के स्क्रीनशॉट पर निगाह मारें -

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गूगल कार्डबोर्ड कंपेटिबल वर्चुअल रीयलिटी किट की भरमार दुनिया भर के बाजारों में हो चुकी है, और चूंकि ये किट वास्तव में कार्डबोर्ड और दो छोटे कांच के लैंस से बने होते हैं, इसलिए बेहद, बेहद सस्ते होते हैं.

परंतु इनका मजा लेने के लिए, एक शर्त है - वो ये कि आपके पास 5 इंच या इससे बड़ा नया, आधुनिक किस्म का एंड्रायड या आईफ़ोन वाला स्मार्टफ़ोन होना जरूरी है, और यदि उसमें जायरोस्कोप हो तो क्या कहने! इस वर्चुअल रीयलिटी किट में आप अपने मोबाइल फ़ोन को वर्चुअल रीयलिटी फ़िल्म, 3डी फ़िल्म या वर्चुअल रीयलिटी गेम चालू कर उसमें फिट कर फिर इसमें दिए गए लैंस से कुछ सेटिंग आदि तय कर आभासी दुनिया का आनंद ले सकते हैं. दरअसल ये कार्डबोर्ड कम्पेटिबल किट आपके स्मार्टफ़ोन की स्क्रीन में चल रहे वीडियो या गेम को विशेष  प्रोग्राम के जरिए आभासी दुनिया का परिदृष्य रचते हैं जिसे आप इस किट को आँखों के सामने पहन कर देखते हैं, और उस आभासी दुनिया में खो जाते हैं. किट बहुत ही सादा, सरल सा है, परंतु इसका आनंद प्रदान करने वाली तकनॉलाज़ी बेहद जटिल, परंतु वास्तव में मनोरंजक.

वर्चुअल रीयलिटी के सैकड़ों ऐप्प हैं, हजारों फ़िल्में और गेम्स जिनमें बहुत सारे मुफ़्त हैं. एकाध बार  आभासी संसार का आनंद लेने के लिए 180 रुपल्ली तो खर्च कर ही सकते हैं? वैसे भी, भविष्य आभासी संसार का ही होगा!

रास्पबेरी पाई जानते हैं? अच्छा, रास्पबेरी पाई ज़ीरो याद है आपको? दुनिया का सबसे सस्ता, सबसे छोटा कंप्यूटर?

तब से अब तक तो टेक्नोलॉज़ी की गंगा में बहुत सारा पानी बह चुका है.

अब आपके पास नैनो पाई का विकल्प है. रास्पबेरी पाई जीरो की कीमत से थोड़ी ज्यादा जरूर है, मगर है अधिक क्षमता वान और अधिक सुविधायुक्त.

यह है नए क्वॉडकोर प्रोसेसर युक्त नैनो पाई की तकनीकी विशेषताएँ –

प्रोसेसर - Allwinner H3 (4x कॉर्टेक्स-ए 7 @ 1.2GHz); एआरएम माली -400 MP2 GPU @ 600MHz; 256KB एल 1, 1 एमबी L2 कैश

मेमोरी - 512MB DDR3 SDRAM

भंडारण - माइक्रोएसडी स्लॉट (64GB तक)

नेटवर्किंग - 10/100 एमबीपीएस ईथरनेट पोर्ट

मल्टीमीडिया: HDMI 1.4a आउटपुट

3.5 मिमी CVBS एवी और स्टीरियो ऑडियो के साथ कंपोजिट आउटपुट

DVP कैमरा इंटरफेस

अन्य इनपुट आउटपुट:

3x यूएसबी 2.0 होस्ट पोर्ट

माइक्रो यूएसबी 2.0 OTG पोर्ट (पॉवर इनपुट के साथ)

डिबग सीरियल पोर्ट हैडर

40-पिन, UART, SPI, I2C, PWM आदि के लिए रास्पबेरी पाई संगत GPIO कनेक्टर

अन्य विशेषताएं - आईआर रिसीवर; पावर और स्टेटस एल ई डी; वैकल्पिक केस (3 डी मुद्रण योग्य डिजाइन)

पावर - डीसी बैरल जैक; 5 वो. @ 2एम्पी. (अधिकतम।); माइक्रो यूएसबी इनपुट का समर्थन करता है

आयाम - 69 × 48mm

ऑपरेटिंग सिस्टम - उबंटू मेट, कोर; यह डेबियन लिनक्स और Android का भी समर्थन करता है

है न इंप्रेसिव?

इसे चीन की कंपनी फ्रेंडली आर्म ने बनाया है.

यह ऐसा दिखता है –

 

 

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यह है तकनीकी डायग्राम -

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तूलिका नामक एक नई साइट पर कुछ ऑनलाइन हिंदी औजारों को संजोया गया है जिसमें शामिल है ऑनलाइन फ़ॉन्ट कन्वर्टर और बोलकर हिंदी टाइप करने की सुविधा. मैंने फ़ॉन्ट कन्वर्टर चाणक्य से यूनिकोड को आजमाया तो पाया कि यह बढ़िया है और त्वरित परिणाम देता है. अलबत्ता इसके ऑनलाइन टाइपिंग टूल और वर्चुअल हिंदी कीबोर्ड थोड़े अजीब किस्म के हैं और कम ही काम आएंगे. यदि आप हिंदी इनस्क्रिप्ट सीखना चाहते हैं तो इसका ऑनलाइन इनस्क्रिप्ट हिंदी टाइपिंग ट्यूटर भी है जो कि ठीक-ठाक है. इसका एंड्रायड ऐप्प भी है, मगर इन पंक्तियों के लिखे जाने तक यह ऐप्प इस त्रुटि संदेश के साथ काम नहीं कर रहा था - sorry, we are under maintenence, please login soon.

 

तूलिका की विस्तृत जानकारी - तूलिका वेबसाइट से :

सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सूचना सम्प्रेषण में हिन्दी भाषा के अनुप्रयोग में आने वाली समस्याओं को ध्यान में रखते हुए हमारे द्वारा “तूलिका” नामक परियोजना का विकास किया गया। “तूलिका” के निर्माण में मूल रूप से सूचना प्रौद्योगिकी के उन उपयोगकर्ताओं का ध्यान रखा गया, जो किसी न किसी तरह से सूचना प्रौद्योगिकी से तो जुडे ही हुए हैं, परन्तु साथ ही साथ हिन्दी भाषा लिपि के अनुप्रयोग से भी संबंध हैं। “तूलिका” सभी उपयोगकर्ताओं (जो चाहे हिन्दी लिपि टंकण में निपुण हों या जिन्होंने हिन्दी टंकण कार्य कभी किया ही नहीं हो) के हिन्दी भाषा लिपि संबंधी समस्याओं के निराकरण को लक्ष्य कर बनाया गया है।
इस तरह “तूलिका” में हमारे द्वारा निम्नानुसार टूल्स का समावेश किया गया है –


1 - ऑनलाईन हिन्दी वर्ड प्रोसेसर


2 - ऑनलाईन फॉन्ट्स कन्वर्टर्स
o कृति देव से मंगल या मंगल से कृति देव
o देवलिस से मंगल या मंगल से देवलिस
o चाणक्य से मंगल या मंगल से चाणक्य
o सुशा से मंगल या मंगल से सुशा


3 - वर्चुअल हिन्दी की-बोर्ड
4 - हिन्दी ट्रान्सलिट्रेशन टूल
5 - हिन्दी फान्ट्स डाउनलोड्स


6 - ऑनलाईन फान्ट्स टाईप कन्वर्टर टूल
o ट्र्यू टाईप - TrueType (.ttf)
o ऑपन टाईप - OpenType (.otf)
o पोस्ट स्क्रिप्ट टाईप - PostScript Type 1 (.pfb)


7 - हिन्दी ट्रान्सलेशन टूल आदि....

तूलिका का उद्देश्य

· सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हिन्दी भाषा लिपि को अधिक से अधिक बढावा देने का प्रयास करना।

· उन उपयोगकर्ताओं जिनको हिन्दी टंकण का ज्ञान न हो को भी अपनी बात को हिन्दी में प्रस्तुत करने हेतु विभिन्न टूल्स का निर्माण एवं उसका प्रचार प्रसार

· उन उपयोगकर्ताओं जिनको हिन्दी टंकण का ज्ञान तो है परन्तु किसी विशिष्ट कार्य में किसी विशिष्ट फोन्ट या लैआउट के प्रयोग के कारण आने वाले समस्या को दूर करने हेतु फान्ट कन्वर्टर्स का निर्माण।

· विभिन्न फॉन्ट्स का एक ही पोर्टल पर संकलन।

· अंग्रेजी के मैटर को आसानी से ट्रांसलैट करने संबंधी टूल्स का निर्माण।

· अंग्रेजी में टाईप किये गये मैटर का ट्रांसलिट्रेशन टूल का तैयार करना।

· उपयोगकर्ताओं द्वारा विभिन्न फान्ट्स टाईप के कन्वर्शन में आने वाले समस्याओं को दूर करने हेतु फान्ट टाईप कन्वर्टर टूल्स का निर्माण।

· उन उपयोगकर्ताओं जिनको हिन्दी या अंग्रेजी टंकण का भी ज्ञान न हो के लिए वर्चुअल हिन्दी की – बोर्ड का निर्माण करना।

· अंत में सभी उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखते हुए एक ऐसे ऑनलाईन हिन्दी वर्ड प्रोसेसर का निर्माण करना जिसमें वर्ड प्रोसेसिंग की अन्य सुविधाओं के साथ साथ विभिन्न फोर्मैट्स में फाइल सेविंग की भी सुविधा हो।

उपयोगकर्ता

· ऑफीसर्स

· ऑफिस क्लर्क्स

· हिन्दी ब्लोगर्स

· डॉटा एन्ट्री ऑपरेटर्स

· डेस्क टोप पब्लिशर्स

· प्रिंटर्स

· मीडिया प्रोवेशनल्स

· स्टूडेन्ट्स

· टीचर्स / प्रोफेसर्स

· एवं हर वो कम्प्यूटर उपयोगकर्ता जो सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हिन्दी भाषा से किसी भी प्रकार से संबंध हो।

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    इस रचना को रचने के लिए मैं पिछले कई दिनों से सृजन-रत था. नहाया-धोया भी नहीं. खाया-पीया तो दूर की बात है. वो रचनाकार ही क्या जो अपनी रचना की रचनाशीलता, उसकी सृजनशीलता में पूरी तरह से डूब न जाए. सो मैं भी डूबा हुआ था. ऊपर से, बहुतों ने अपने पोस्टों, स्टेटस आदि से इस रचना को रचने के लिए मुझे लगातार प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से प्रेरित किया.  रचना के एक-एक शब्द, वाक्य को मैंने मोतियों जैसे चुना है. न एक अक्षर अधिक न एक शब्द कम. वाक्य भी परिपूर्ण. कॉमा, फुलस्टॉप भी सही जगह पर. वर्तनी भी पूरी तरह जाँची हुई- भले हींदी के लिए वर्तनि जाँचने वाला सही प्रोग्रमा अब तक ठीक ढंग से बन न पाया हो, मगर अपने होशो-हवास से मैं घोषित कर सकता हूँ कि यह त्रुटिरहित, परिपूर्ण रचना है.

    यह रचना कुछेक के लिए हास्य-व्यंग्य से ओतप्रोत होगी तो बहुतों के लिए प्रतीत होगी विडंबना का बायस. कई विशिष्ट किस्म के जन्मजात चश्माधारियों के लिए यह रचना मानवीय संवेदनाओं से, मानवीय गुणों से परिपूर्ण  होगी. इस रचना में क्रांति, इंकलाब पैदा करने की पर्याप्त संभावना है. कई इसे जेहाद या जिहाद का प्रारंभिक चरण भी कह सकते हैं. इससे जियादा और क्या कहूँ? चलिए, कह ही देता हूँ - इस रचना में बूकर से लेकर ज्ञानपीठ और नोबल तक के पुरस्कार खैंचने की पर्याप्त संभावना है. यकीन नहीं होता? अरे, पहले यह रचना तो पढ़ें. केवल पढ़ें ही नहीं, बल्कि पाठ करें. नियमित पारायण करें, आत्मसात करें. यदि समझ में न आए, तो जिस तरह रामचरित मानस का पाठ करते हैं, उसी तरह इसका नित्य पारायण करें. तभी समझ में आएगी यह रचना. या फिर समझने के लिए कुछ इंतजार करें. इस रचना की टीकाएं आएंगी, समीक्षाएँ आएंगी, मोटे मोटे ग्रंथ इसे समझाने के लिए लिखे जाएंगे. और जब यह रचना समझ में आएगी तब निर्वाण होगा, ज्ञान मिलेगा, ज्ञान चक्षु खुलेंगे. फिर आपका कल्याण होगा, जिससे अंततः भारत का और फिर, दुनिया का कल्याण होगा.

    तो, प्रस्तुत है वह रचना -

     

    कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया

    कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया

     

    कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया

    कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया

     

    कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया

    कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया

     

    कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया

    कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया

     

    कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया

    कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया

     

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    (चित्र - साभार गूगल चित्र खोज)

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    श्रीमती फ़नीबोन्स (ट्विंकल खन्ना)

    (संडे टाइम्स में छपा ट्विंकल खन्ना का यह व्यंग्य बेहद मजेदार है. हमारे जैसे गॅजेट प्रेमियों के लिए खासतौर पर. इसका भावानुवाद साभार -  संडे टाइम्स व ट्विंकल खन्ना - पेश है)

    दैव की तरह इस साल भी महिला दिवस आया और अपनी चाल चलकर चला गया. इस बीच महिलाओं से लेकर पुरुषों और दुनिया के दीगर तमाम चिंतकों ने स्त्रियों की दशा दिशा पर हर तरह के चिंतन किए, चहुँ ओर प्रकाश डाले, और, स्त्रियों के समान-अधिकार जैसे मसलों-मामलों को अगले साल के चिंतन के लिए फिर से, जहाँ का तहाँ छोड़ दिया. अब चूंकि चहुँ ओर तमाम मुद्दों पर विचार-विमर्श का दौर समारोह पूर्वक सम्पन्न हो गया है, मैं कुछ छुद्र चीजों की चाहत तो कर ही सकती हूँ. नीचे मेरी इच्छा-सूची है, जिसमें दुनिया के तमाम एलन मस्क को चुनौतियाँ है कि भाई, तुमने अपने आमोद-प्रमोद से लेकर उपयोग-दुरूपयोग के तमाम गॅजेट तो बना लिए, और रोज नई चीजें बनाए जा रहे हो, जरा हम औरतों की जरूरतों का भी तो खयाल रखो, और कुछ ये गॅजेट हमारे लिए भी तो बनाओ -

    1 अंतर्निर्मित लेज़र युक्त आतशी शीशा – यह गॅजेट स्त्रियों के लिए, सदियों से, सदा सर्वदा जरूरी रहा है, परंतु खेद है कि अब तक इसका आविष्कार नहीं किया गया है. पुतिन के अत्याधुनिक एस-400 मिसाइल टेक्नोलॉज़ी का प्रयोग भले ही करना पड़े, यह गॅजेट कुछ ऐसा बने कि देखते ही देखते आपके चेहरे या ऊपरी होठों में एक रात में उग आए बाल के एक महीन अंकुरण को भी पल भर में सदा सर्वदा के लिए मिटा डालने में सक्षम हो. वो भी दर्द और किसी परेशानी के बिना. शीशा हाथ में लिया, चेहरे को, बाहों को या सिर, भौंह और पलकों को छोड़कर जहाँ कहीं भी शरीर में बाल होने की संभावना हो, स्कैन किया और काम खतम. फिर रेजर क्या, और थ्रेडिंग क्या!

    2 सेनिटरी नैपकिनों में वाइब्रेटिंग अलार्म – ठीक है, ठीक है, वाइब्रेटिंग भले ही न हो जो कि हमें किसी और दुनिया में ले जाने वाली चाल मान लिया जाए, परंतु एक ऐसा अलार्म तो हो जो आपके स्मार्टफ़ोन या स्मार्टवाच से सिंक हो जाए और ये चेतावनी संदेश नोटिफ़िकेशन में बताए कि मोहतरमा, आपका सेनिटरी नैपकिन आने वाले दस मिनट के भीतर ओवरफ्लो होने वाला है, इसलिए होशियार! इससे हमें उन खास दिनों में, ‘सब ठीक-ठाक तो है कि नहीं’ यह जाँचने के लिए, हर घंटे आधे घंटे बाथरूम की ओर दौड़ लगाने से मुक्ति तो मिलेगी.

    3 इम्प्लान्ट होने वाला विचार-शून्यक माइक्रोचिप – जब, जहाँ जरूरत हो, यह आपके मस्तिष्क को विचार-शून्य बना दे, जिससे यह हम एक्स-वाई क्रोमोज़ोम युक्त विशिष्ट हस्तियों को अति विशिष्ट बना दे जिसमें हमें देख-भाल कर भी कुछ भी न सोचने देने की सुविधा मिल जाए. इससे स्त्री जगत की बहुत सी समस्याओं का समाधान चुटकी में मिल जाएगा. उदाहरण के लिए पार्टी में लाल ठीक रहेगा कि पीला कि नीला कि नीरा के गिफ़्ट किए ड्रेस के साथ सैंडल की हरी जोड़ी ठीक रहेगी कि चप्पल, और ये जमा तो बैग या क्लच कौन सा ठीक रहेगा? फिर, भोजन में आईसक्रीम खाएँ न खाएँ कि रबड़ी मलाई में कितनी कैलोरी होगी... उफ्फ! इतनी समस्याएँ? यदि ऐसे समय हम विचार शून्य हो जाएं तो जो सामने आ जाए वही पहन लें, जो सामने आए वही खा पी लें तो न केवल सबके लिए नया फैशन स्टेटमेंट होगा, बल्कि फैशन भी हर दूसरे तीसरे दिन बदलने लगेगा. चेंज का चेंज और सुविधा की सुविधा.

    4 टॉगल बटन युक्त हाई हील – ताकि जब जी चाहे, फ्लैट चप्पल-सैंडल बन जाए, और जब जरूरत हो, हाई हील बन जाए. भई, जब खूब सारी सीढ़ियाँ चढ़नी हो, आस-पास इंप्रेशन मारने को कोई मौजूद न हो, जरा दूर पैदल चलना हो तो अपनी एड़ी सुजाने और पिंडलियों में दर्द पैदा करने की क्या तुक? ऐसे में एक बटन दबाओ, अपने सैंडल को फ्लैट, सपाट बना लो. और जब पार्टी हाल में पहुँच जाओ तो हाल में घुसने से पहले बटन दबा लो और अपनी ऊँचाई में पाँच इंच की बढ़ोत्तरी कर लो ताकि पुरुषों से कंधे से कंधा मिला सको. हे! भगवान, अब तक किसी आविष्कारक ने ये सोचा क्यों नहीं?

    5 झूठ बोलने वाली वज़न मशीन – यह तो आसान होगा? फिर अब तक मार्केट में आया क्यों नहीं? वैसे भी कोई बड़ा झूठ बोलने की जरूरत नहीं है, नहीं तो मामला गड़बड़ा सकता है कि क्या चाँद पर पहुंच गए हैं जो कि उसकी ग्रेविटी के हिसाब से वज़न बता रहा है. बस, गाहे बगाहे किलो दो किलो कम बता दे तो हम स्त्रियों का काम हो जाए, और अपना दिन बन जाए, और शायद चार दहीभल्ले अतिरिक्त खाने की इच्छा-पूर्ति शांति और आनंद के साथ कर लें!

    6 सासु माँ की जासूसी करने वाला ड्रोन – कुछ लोगों के लिए यह थोड़ा अतिरेकी आविष्कार हो सकता है, परंतु जब आपको यह वाक्यांश “हाँ, आप सही कह रही हैं मम्मी जी” बारंबार, दिनभर, अंतहीन बोलना पड़े तो इससे मुक्ति पाने के लिए आप दुनिया जहान का कोई भी काम करने को न तैयार हो जाएँ? ऊपर से आपको ये भी डर लगा रहता है कि आपके किस अगले कदम पर अगला क्या नुक्स निकालने वाला है. ऐसे में यह मशीन आपको आगाह कर सकता है कि सावधान! आपकी सासू माँ आ रही हैं, उनके आने से पहले कोई काम निकाल कर सीन से फटाफट निकल्लो!

    7 दो साईबॉर्ग – रोबॉटिक - हाथ – दुनिया की हर स्त्री के लिए बेहद जरूरी. खासतौर पर शाम के उन तीन घंटों के लिए जब आपके बच्चे स्कूल से घर आते हैं तो उन्हें नाश्ता कराना होता है, उनके होमवर्क चेक करने होते हैं, साथ ही शाम को पतिदेव के आने पर नाश्ता देना होता है, ऐसी चाय बनकर देना होता है जो कभी भी उनके स्वयं के कोई एक दशक पूर्व अपने स्वयं के हाथों बनी चाय जितनी सुस्वादु कभी नहीं होती, और रात्रि के लिए खाना बनाना होता है. ऊपर से अपने चेहरे पर मुलतानी मिट्टी में मिलाया हुआ विशेष हर्बल फेस पैक भी 10 मिनट के लिए लगाना होता है ताकि उम्र की पड़ रही लकीरें जरा 10 वर्ष की कम दिखें. ये सब पढ़कर आपको भी हैरत हुई होगी न कि हम स्त्रियाँ इतना सारा काम हाड़-मांस के केवल दो हाथों से अब तक कैसे कर लेती रही हैं?

    8 अपनी आँखों की रेटिना में अंतर्निर्मित प्रोजेक्टर युक्त डिजिटल वीडियो रेकॉर्डर – पुरुषों को उनकी औकात दिखाने, उनकी इच्छित तौर पर भूली हुई याददाश्त वापस लाने के लिए यह बेहद जरूरी गॅजेट है. जब वो ये कहें कि आप कबकी, किस दिन की, कैसी बात कर रही हैं, मुझे तो बिल्कुल याद नहीं तो उसके चेहरे पर अपनी रेटिना के प्रोजैक्टर से उस समय के वीडियो रीप्ले फेंक मारें. और बताएँ कि उस फलां दिन आपने मुझे वेजिना मोनोलॉगस दिखाने के लिए थियेटर ले जाने का वादा किया था, कुत्ते को डॉक्टर के पास टीका लगवाने ले जाने का कहा था, सप्ताहांत चाचू के घर जाने का प्लान बनाया था, आदि आदि और इनमें से एक भी नहीं किया और कहते हो कि ये कब कहा था, कब प्रॉमिस किया था. देखो – देखो – ये कब कब कहा था, कब प्रॉमिस किया था!

    9 अंतर्निर्मित सुई युक्त पेन – सदा साथ रखने योग्य इस पेन की खासियत यह होगी कि जब कोई पुरुष आपके सम्मान को चोट पहुँचाने की कोशिश करे, आपकी बात नहीं सुने, अपनी कहे, और अपनी वाली पे उतर आए, तो इस पेन से उस पुरुष पर निशाना लगाएं, और बटन दबाएँ. ट्रंक्विलाइज़र से डूबी एक सुई उसके गले में चुभेगी और तुरंत ही दवा के रिएक्शन से उसे खुजली मचेगी और फिर आप विजयी मुस्कान फेंक कर कह सकेंगी – देखो, तुम्हारे अपने सड़ियल विचार से तुम्हें खुद खुजली होने लगी!

    10 दिमाग को ठंडी करने वाली गोली – अब जबकि यह लेख लिखा जा रहा था तो मन सदैव की तरह अपराध-बोध से ग्रस्त था. दिमाग में तमाम तरह के दीगर विचार दौड़ रहे थे – यह समय तो मेरे पढ़ने का था, मुझे बच्चे को कहानी पढ़कर सुनानी थी, बेटे को होमवर्क करवाना था, रात्रि भोजन के लिए तैयारी करनी थी, और ये सब पहले करने के बाद, सब लोगों के सो जाने के बाद मुझे यह काम करना था!

    तो, ऊपर दिए गए तमाम आविष्कार और गॅजेट यदि बन भी जाएँ, और हमारा जीवन आसान हो जाए, तब भी इस अपराध-बोध के कारण चैन हासिल नहीं होगा. तो, सबसे पहले हमें अपने अपराध-बोध से बाहर निकलना होगा. उस अपराध-बोध से जिससे हर स्त्री ग्रस्त होती है – जन्म लेते ही. इसी अपराध-बोध के चलते हम स्त्रियाँ मां होती हैं, बहन होती हैं, पत्नी होती हैं, बेटियाँ होती हैं, मगर हम ‘हम’ कभी नहीं हो पाती.

    इसलिए, मेरे विचार में हमें खुद अपने दिमाग में एक ऐसी गोली बनानी चाहिए जो हमारे उस अपराध-बोध को खत्म कर सके, मार सके और हम पुरुष प्रधान समाज में सदियों से की जा रही स्त्रियों की कंडीशनिंग से बाहर निकल सकें. हम स्त्रियों में दैवीय क्षमता है नजरों को पहचानने की, मगर शायद अब समय यह है कि हम अपने अपराध-बोध को पहचानें और उससे बाहर आएँ.

    देश में राजनीतिक-सामाजिक सहिष्णुता-असहिष्णुता पर गर्मागर्म बहस चल रही है, राजनीति हो रही है. समाजनीति हो रही है. मगर इधर टेक्नोंलॉज़ी की असहिष्णुता पर किसी का ध्यान ही नहीं है. भाइयों, समय रहते चेत जाओ नहीं तो आपको भी लेने के देने न पड़ जाएं.

    क्या कहा? टेक्नोलॉज़ी ने तो आपके जीवन को सहज, सरल, आसान और बढ़िया बनाया है! बनाया होगा, मगर अब ये आपके प्रति उतना ही असहिष्णु भी होता जा रहा है. कृपया नोटिस लें, और, जरा बच के रहें, नहीं तो टेक्नोलॉज़ी की असहिष्णुता से आपको बड़ी समस्याएं हो सकती हैं – राजनीतिक और सामाजिक असहिष्णुता तो केवल लफ़्फ़ाजी है और अपने-अपने वोट बैंक की खातिर है, पर टेक्नोलॉज़ी असहिष्णुता असली है और मारक है.

    आप कहेंगे कि मैं क्या अनाप-शनाप लिख रहा हूँ. जरा ठंड रखिए. जमाना बिग डेटा का है. डेटा-माइनिंग से आपकी ऐसी ऐसी जानकारियाँ जुटाई जा रही हैं, और न केवल जुटाई जा रही हैं, बल्कि वे कानून के रखवालों, टेक्स वसूलने वालों आदि आदि सरकारी महकमों के पास भी एक कमांड में उपलब्ध होती जा रही हैं जिसके जरिए आपकी वाजिब गैर वाजिब वित्तीय गतिविधियों से लेकर सड़क पर दाएं बाएं, धीमे तेज चलने, लाल बत्ती क्रास करने से लेकर सार्वजनिक जगह पर थूकने जैसी गतिविधियों को भी रेकार्ड किया जा रहा है और आपके विरूद्ध एवीडेंस के रूप में प्रयोग किया जाने लगा है. हो गई न टेक्नोलॉज़ी असहिष्णुता?

    चलिए, दो उदाहरण देकर आपको और तरीके से समझाता हूँ.

    पिछले दिनों मेरे एक मित्र के पास आयकर विभाग से एक नोटिस आया. नोटिस का मजमून कुछ ये था कि उन्होंने दस हजार का एक एफडी करवाया था उसका ब्याज उन्होंने अपने पिछले रिटर्न में दर्शाया नहीं था, लिहाजा इसे वे ठीक करें और बकाया टैक्स मय दंड के भरें. आज से चार छः साल पहले जब टेक्नोलॉज़ी इतनी परिष्कृत नहीं थी, तो ऐसे छोटे मोटे क्या बड़े भारी मोटे मोटे इनवेस्टमेंट भी आयकर विभाग की नजरों में नहीं आ पाते थे, क्योंकि मैनुअल स्क्रीनिंग की सुविधा की एक सीमा है. अब सारा डेटा सार्वजनिक है, बैंक और आयकर विभाग के कंप्यूटर में उपलब्ध है, और महज कुछ ही कमांड पर उपलब्ध है. इसी का फल है कि मित्र को उनके दस हजार के एफ डी पर आयकर विभाग का नोटिस मिल गया. है न घोर टेक्नोलॉज़ी असहिष्णुता? इसमें आप सरकारी एंगल कृपया न देखें.

    एक और उदाहरण. मेरे एक अन्य मित्र को पुलिस थाना से एक लिफ़ाफ़ा मिला. उसमें एक नोटिस था कि उन्होंने कोई दो माह पहले किसी चौराहे को पार करते समय ट्रैफ़िक नियमों का उल्लंघन किया था, जिसके एवज में उन्हें फ़ाइन भरना होगा, अन्यथा उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जाएगी. उस पत्र में बाकायदा उनके वाहन समेत स्क्रीन शॉट संलग्न थे. आजकल हर चौराहों पर ट्रैफ़िक सिग्नल के साथ साथ हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगाए जा रहे हैं और उनकी रेकॉर्डिंग संबंधित यातायात थाने में उपलब्ध होती है. वहाँ चंद बंदों को बिठा कर ट्रैफ़िक नियमों का उल्लंघन करने वालों के वीडियो क्लिप निकाले जाते हैं और उनके वाहन क्रमांक को ट्रैस कर उन्हें समन भेजे जा रहे हैं. यह टेक्नोलॉज़ी का नया कमाल है. अमरीकी और पश्चिमी देशों में इस असहिष्णु टेक्नोलॉज़ी का उपयोग भले ही दशकों पूर्व प्रारंभ हो गया हो, मगर भारत की पावन धरती पर यह नया नया आया है.  कोढ़ में खाज यह कि चूंकि सारा मजमा डिजिटल है (यदि डिजिटल इंडिया का ख्वाब ऐसा ही है, तो भगवान बचाए!) इसलिए पुलिसिए को 50 रुपल्ली टिका कर या चेकिंग पाइंट पर यू-टर्न मार कर इस तरह के आफत से बचने का कोई उपाय भी नहीं! और, अभी तो आगाज़ है, अंजाम तो और बुरा हो सकता है. वो तो भला हो कुछ स्वप्नदर्शियों को जिनकी कृपा से आधार कार्ड नंबर और अपना बैंक खाता नंबर अनिवार्य रूप से जुड़ा नहीं है, नहीं तो टेक्नोलॉज़ी पूरी तरह से असहिष्णु हो जाती. यानी, इधर आपने कोई कानून तोड़ा नहीं, उधर आपके ऊपर जुर्माना हुआ नहीं, और आपके खाते से पैसा कटा नहीं! हा!

    अब आप बताएँ, टेक्नोलॉज़ी की इस असहिष्णुता से आप कैसे, कब तक बचेंगे?

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    शायद यह मेरी पहली फ़िल्म समीक्षा है.

    आमतौर पर मैं फ़िल्में नहीं ही देखता. देखता हूँ तो थोड़ा छांट कर, थोड़ा खोजबीन कर, और वह भी आधी अधूरी - पूरे ढाई तीन घंटे फ़िल्म झेलने का सब्र मुझमें शायद नहीं है. जब फ़िल्म शोले लगी थी, कोई छः माह चली थी, और शहर के तमाम बंदों ने तब उस फ़िल्म को कोई दो-दो, तीन-तीन बार देखा था, तब भी मैंने शोले नहीं देखी थी.

    यह भूमिका बतानी इसलिए भी जरूरी थी क्योंकि हाल ही में मैंने एक फ़िल्म देखी - ज़ूटोपिया.

    डिज़्नी की एनीमेटेड फ़िल्म 3डी में है. एनीमेशन भले ही अवतार, फ़ाइंडिंग नेमो,  रियो या टिनटिन जैसा कमाल का न हो, परंतु फिर भी है बहुत धमाल. दृश्य खूबसूरत हैं, चरित्र-चित्रण बेहद लाजवाब और एक से बढ़कर एक मनोरंजक. जो कमाल की चीज है वो है स्टोरी लाइन और कसी हुई स्क्रिप्ट, साथ में हर दृश्य में हास्य-व्यंग्य का जोरदार तड़का. त्रिआयामी कल्पना और चित्रण भी यदि बहुत अच्छे (माने अवतार के स्तर के) नहीं हैं, तो, फिर भी अच्छे तो हैं ही.

    कोई डेढ़ घंटे की यह फ़िल्म अपने पहले दृश्य से आपको बांध लेती है और फिर जब अंत में टाइटल के साथ फ़िल्म का क्लोजिंग गीत आता है तो पता चलता है कि अरे, फ़िल्म तो खत्म हो गई! फ़िल्म जूडी हॉप्स नामक खरगोश जो कि पुलिस ऑफ़ीसर हैं और निक वाइल्ड नामक लोमड़ी जो कि एक ठग है के इर्द-गिर्द घूमती है और ड्रामा, इमोशन और एक्शन के कई दौरों के बाद फ़िल्म सुखांत होती है.

     

    फ़िल्म को यदि आईमैक्स 3डी में देखें तो आनंद और अधिक आएगा. यदि आप इसे सामान्य थियेटर या टीवी या सीडी में देखेंगे तो हो सकता है कि उतना मजा नहीं आए.

     

    तो, इससे पहले कि यह थियेटर से उतरे, देख डालिए. बल्कि अपने परिवार के सभी सदस्यों को दिखाइए. क्या कहा? यह मूवी बच्चों की है? जी नहीं! यह पूरे परिवार के लिए है. शर्तिया पैसा वसूल. बच्चे तो मजे करेंगे ही, बड़ों को भी उतना ही आनंद आएगा. भई, मुझे तो बहुत मजा आया. बहुत दिनों बाद ऐसी फ़िल्म देखी.

    अब, चोर-पुलिस गेम खेलने में वो मजा नहीं रहा. मार्केट में नया गेम आया है - पुलिस-पुलिस. इसमें है असली मजा! चाहें तो गुड़गांव पुलिस - नोएडा पुलिस खेल सकते हैं या फिर सीबीआई पुलिस - आईबी पुलिस खेल सकते हैं या फिर एसआईटी पुलिस - गुजरात पुलिस भी खेल सकते हैं! स्थानीय पुलिस-पुलिस खेल भी उपलब्ध है. हनुमानगंज पुलिस - कमलापार्क पुलिस खेल भी उतना ही अच्छा है!

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    इनसिंक चैनल नहीं सुना-देखा?

    अब ये टाटा स्काई पर उपलब्ध है.

    साथ ही इंटरनेट पर स्ट्रीमिंग का विकल्प भी दे रहे हैं. परंतु स्ट्रीमिंग की कड़ी तो मुझे इनसिंक की साइट पर ढूंढे नहीं मिली. शायद ये प्राइवेट लिंक है, क्योंकि विज्ञापन में कनेक्शन के लिए लिखा जा रहा है कि 500 रुपए में साल भर के लिए असीमित स्ट्रीमिंग का विकल्प है, और इसके लिए insyncresponse@gmail.com पर ईमेल भेजने के लिए कहा जा रहा है, जो कि बड़ा ही अजीब है. भई, इंटरनेट का तकाजा है, हर चीज इंटरनेट पर ही होनी चाहिए, और कम से कम 7 दिन का मुफ़्त ट्रायल भी देना ही चाहिए.

    खैर, टाटास्काई है ना!

    कोई दो साल पहले सिटी केबल आदि से इसकी शुरूआत हुई थी, तब इसमें सामग्री का थोड़ा अकाल था. अब इसमें प्रचुर सामग्री है, और विविधता भी. एक बार जरूर सुनें-देखें.

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    कोई भी राष्ट्र अपनी ‘मातृ-भाषा’ को पूर्णतः सार्वभौमिक बनाए बिना उन्नति नहीं कर सकता है। यदि तकनीकी को जन उपयोगी बनाना है तो उसे आम जन की भाषा में विकसित करना आवश्यक होगा....इसी दिशा में जगदीप डांगी लंबे समय से निरंतर प्रयास रत हैं.

    जगदीप डांगी के महत्वपूर्ण हिंदी सॉफ्टवेयर उपकरण के डेमो संस्करणों को डाउनलोड कर उपयोग कर जांचने परखने के लिए अब नए, सरल साइट पर जाएँ.

    साइट है - http://www.dangisoft.com/

    वहाँ आपको मिलेंगे  निम्न सॉफ़्टवेयर. इनमें से मैं प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक का नियमित उपयोग करता हूँ, और यह कोई 250+ हिंदी फ़ॉन्टों को यूनिकोड में शत प्रतिशत शुद्धता के साथ, फ़ॉर्मेटिंग बचाए रखते हुए परिवर्तित करता है. टेबल आदि भी सुरक्षित रहते हैं.

     

    § सक्षम – प्रथम हिंदी वर्तनी परीक्षक (लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स - 2015) -

    § वर्धा हिंदी शब्दकोश (हिंदी-हिंदी शब्दकोश) -

    § प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक - (अस्की/इस्की फ़ॉन्ट्स से यूनिकोड फ़ॉन्ट) -

    § यूनिदेव - (यूनिकोड फ़ॉन्ट से अस्की/इस्की फ़ॉन्ट्स में परिवर्तन हेतु) -

    § शब्दज्ञान - (हिंदी-अंग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोश) -

    § प्रखर देवनागरी लिपिक - (यूनिकोडित रेमिंगटन टंकण प्रणाली आधारित) -

    § प्रलेख देवनागरी लिपिक - (यूनिकोडित फ़ॉनेटिक इंग्लिश टंकण प्रणाली आधारित) -

    § आई-ब्राउजर++ - प्रथम हिंदी इंटरनेट एक्सप्लोरर (लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स - 2007) -

    § शब्दकोश (हिंदी-अंग्रेजी-हिंदी) -

    § अंग्रेजी-हिंदी शब्दानुवादक (ग्लोबल वर्ड ट्रांसलेटर) -

     

    विशेष - जगदीप डांगी को उनके हिंदी सूचना प्रौद्योगिकी कार्यों व उपयोगी हिंदी सॉफ़्टवेयर निर्माण के तहत कई पुरस्कार मिल चुके हैं. प्रमुख हैं -

    § लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स – 2015 में दर्ज सॉफ्टवेयर - सक्षम (प्रथम हिंदी वर्तनी परीक्षक)

    § प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक ‘बेस्ट आई॰टी॰ इम्प्लिमेन्टेशन्स ऑफ़ दी यीअर – 2010 पी॰सी॰ क़्वेस्ट अवॉर्ड’ के लिए नामांकित

    § लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स - 2007 में दर्ज सॉफ्टवेयर - आई-ब्राउजर++, शब्दकोश और शब्दानुवादक

    § प्रोजेक्ट भाषा सेतु (आई-ब्राउजर++, शब्दकोश और शब्दानुवादक) ‘बेस्ट आई॰टी॰ इम्प्लिमेन्टेशन्स ऑफ़ दी यीअर -2006 पी॰सी॰ क़्वेस्ट अवॉर्ड’ के लिए नामांकित

     

    संपर्क -

     

    इंजी॰ जगदीप सिंह दांगी

    एसोसिएट प्रोफ़ेसर, भाषा विद्यापीठ

    dangijs@gmail.com

    dangijs@yahoo.com

    मो॰+91-9921118136

    +91-9826343498

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