February 2016

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यह तो तयशुदा (डिफ़ॉल्ट) बात थी. पुरस्कार वापसी के चेक नियम नहीं होने का हवाला देते हुए भुनाए नहीं जा रहे और कालातीत हो रहे हैं. सांप भी मार ली और लाठी भी अपने कब्जे में ले ली और मरे सांप के चमड़े का जूता सिलवा लिया, जिसपे लोग वाह वाह भी कर रहे हैं.

कमाल है. नहीं है? फिर क्या है?

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गूगल एडसेंस टीम की ओर से इंदौर, लखनऊ और गुड़गांव में ऑनलाइन कमाई के बारे में सेमिनार आयोजित किया जा रहा है. जिसमें हिंदी सामग्री सृजन से आय अर्जित करने के बारे में नुस्खों के बारे में अपडेट किया जाएगा. टीम से प्राप्त ईमेल में विवरण दर्ज है और अधिक जानकारी के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें. भागीदारी केवल आमंत्रितों के लिए है. अतः जल्द से जल्द ही आमंत्रण के लिए निवेदन करें.

आमंत्रण पाने के लिए इस लिंक पर जाएँ - https://docs.google.com/forms/d/1DRbKF6eP33N7QA2Fc190y5joTNg-hhn8odxhJdH8Gy4/viewform 

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एडसेंस टीम का संदेश -

Dear Publisher,
We value your association with Google and we’d like to invite you to a seminar focussed on monetization industry trends, building a strong digital strategy and operational best practices. Your kind presence shall help us understand your feedback and views on our products and services.
The seminar shall be hosted on 24th Feb 2016 at Indore, 9th March at Lucknow and 15th March at Gurgaon from 9:15 AM
To know more, click here- https://docs.google.com/document/d/1T4HTL0xVYrkVgJEv4f-Iciaevlq2Yb8LAHZR0nhJOTc/pub
To request invitation, click here- https://docs.google.com/forms/d/1DRbKF6eP33N7QA2Fc190y5joTNg-hhn8odxhJdH8Gy4/viewform
See you soon,
The Google AdSense team

251 रुपल्ली के फोन की बुकिंग तो बंद हो गई। अब हमारा क्या होगा।

हम भी एक अदद खरीदने वाले थे। काम करता तो ठीक नहीं तो गले में टांगने के काम तो आता ही आता। सदी का सबसे बड़ा चुटकुला समझ लोग देखते ही बेतहाशा हंसते तो। खै़र।

शायद नहीं!

नीचे स्क्रीन शॉट पर निगाह मारें.

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कुछ समझ आया?

चलिए थोड़ा विस्तार से समझते हैं.

मेरे पास एक हिंदी पाठ आया जो कि कृतिदेव 010 में है. इसे मैंने कन्वर्ट किया यूनिकोड में, ताकि रचनाकार पर प्रकाशित किया जा सके.

जब इस पाठ को हिंदी  वर्तनी जांच की सुविधा युक्त माइक्रोसॉफ़्ट वर्ड / ओपन लाइव राइटर में चिपकाया तो पाया कि यह बहुत सी सही वर्तनी वाले शब्दों के नीचे भी लाल रंग की लकीर खींच रहा है.

ऐसा तब होता है जब -

वर्तनी गलत हो,

या फिर वर्तनी जांचक के शब्द भंडार में यह शब्द उपलब्ध नहीं हो.

पहले सोचा कि शायद पुरस्कृत शब्द इसके शब्द भंडार में नहीं होगा, तो दायाँ क्लिक कर उसे शब्द भंडार में जोड़ने की कोशिश की.

परंतु यह क्या?

पुरस्कृत तो पहले ही इसके शब्द भंडार में है, और यह पुरस्कृत को गलत बता कर उसका सही रूप पुरस्कृत ही बता रहा है!

यह तो बड़ी अजीब समस्या है! फिर वर्तनी जाँच का मतलब ही क्या!

समस्या की जड़ खोदी गई तो निकला - कन्वर्टर व इनपुट (रेमिंगटन लेआउट में धड़ल्ले से उपयोग होने वाले अक्षर ज्वाइनर और नॉन ज्वाइनरों का उपयोग.

 

अब बताइए, कौन सा पुरस्कृत सही है. क्या आप बता सकते हैं? लाल लकीर वाला या जो विकल्प के रूप में दिखाया जा रहा है वह?

बहुत कन्फ़्यूज़न है! बहुते कन्फ़्यूजन है!!!

स्मार्टफ़ोनों में अब नई अद्भुत टेक्नॉलजी कम ही देखने को मिल रही हैं।
इसके उलट अब स्मार्टफ़ोन एसेसरीज में नवाचार देखने को मिल रहे हैं।
आने वाले दिन स्मार्टफ़ोन एसेसरीज का ही होगा।
अभी कुछ शानदार स्मार्टफ़ोन एसेसरीज हैं -

स्मार्टवॉच

वायरलेस इयरबड

बैटरी केस

बैटरी बैंक

माड्यूलर फोन

फोन गार्ड

फोन केस

बंपर केस

स्क्रीन गार्ड

ओटीजी केबल

डॉक

स्मार्टडॉक

स्टायलस

.. आदि

दुनिया वालों उठो जागो चेत जाओ।
भारतीय भूमि शीघ्र ही चुटकुला रहित होने जा रही है।
अब हमें चुटकुले सुनने सुनाने के लिए थाईलैंड बैंकाक की यात्रा करनी होगी।
हुर्रे!
आइए, हम अपने भीतर के सेंस आफ ह्यूमर को सदा सर्वदा के लिए मार दें।
आमीन।

एक पाठक का पत्र मिला. हिंदी कंप्यूटिंग संबंधी कुछ सवाल पूछे हैं. अन्य पाठकों की सुविधा के लिए प्रश्नोत्तरी नीचे है-

Aapka blog very nice increase my knowledge day by day. hindi me type karne ke liye koi suvidha h kya jisme hum bolkar typing kar sake

बोलकर टाइप करने की सुविधा बहुत समय से है. इस ब्लॉग पर उसके बारे में जानकारी बहुत पहले से दी गई है. गूगल सर्च में ‘बोल कर टाइप करें’ सर्च करें तो आपको कड़ियाँ मिल जाएंगी. सुविधा के लिए ऐसी एक कड़ी है -

http://raviratlami.blogspot.in/2014/09/blog-post.html

ya kisi page ko scan kar k typing ho jaye

 

यह सुविधा तो कई साल से है. हिंदी ओसीआर इंडसैंज का बढ़िया काम करता है. रचनाकार.ऑर्ग की बहुत सी सामग्री इसी विधि से तैयार होती है.

http://raviratlami.blogspot.in/2013/07/krutidev-font-hindi-ocr.html


Or word me Hindi font ki ashudhi ko correction k liye joi software h kya plz tell me.

वर्ड में भी है और अब तो ओपन लाइव राइटर में यह सुविधा है.

http://raviratlami.blogspot.in/2016/02/blog-post_96.html

 

Thanks

विंडोज़ लाइव राइटर का ओपन सोर्स नुमा संस्करण ओपन लाइव राइटर  - http://openlivewriter.org अब और दमदार हो गया है.

इसमें अब अंतर्निर्मित हिंदी स्पेल चेकर – यानी हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा उपलब्ध और क्या खूब उपलब्ध!

स्क्रीनशॉट पर निगाह मारें, और सीधे ही open live writer के डाउनलोड लिंक पर जाएँ और अपनी पोस्टों में शुद्धता भरें.

और हाँ, क्या आपको बताने की जरूरत है कि इस औजार को आप हिंदी टैक्स्ट एडीटर (हिंदी शब्द संशोधक) या वर्ड प्रोसेसर के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं और इसमें टाइप की गई सामग्री को शुद्ध कर अपनी हिंदी फ़ेसबुकिया पोस्टों को भी ठीक कर सकते हैं.

सोने में सुहागा यह कि इसका वर्ड प्रेडिक्शन और शब्द सुझाव मूल हिंदी माइक्रोसॉफ्ट वर्ड से बेहतर है!

open writer 1

open writer 2

आपका स्मार्टफ़ोन आपके मनोरंजन में एक और नया आयाम जोड़ सकता है।
यदि आप टाटा स्काई के ग्राहक हैं तो आपके लिए खुशखबरी है। टाटा स्काई मोबाइल ऐप्प इंस्टाल करें और अपने मनोरंजन में नया आयाम जोड़ें।
आप बहुत कुछ कर सकते हैं।
आप अपने मोबाइल को उन्नत किस्म का रिमोट कंट्रोल बना सकते हैं।
आप एवरीवेयर टीवी से कहीं भी कभी भी अपना मनपसंद टीवी चैनल देख सकते हैं।
रेकॉर्ड कर सकते हैं और ट्रांसफर सुविधा के जरिए रेकॉर्ड की गई शो अपने मोबाइल में भर कर कहीं भी इसका आनंद ले सकते हैं।
और क्या बताऊँ। खुद इंस्टाल कर देखें।

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विंडोज़ 1 और 3 को छोड़ दें, तो एक तरह से विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम की लोकप्रियता विंडोज़ 95 से ही आकाश छूने लगी. आप में से बहुत से लोगों ने जिन्होंने अपेक्षाकृत बाद में कंप्यूटिंग उपकरणों का इस्तेमाल करना प्रारंभ किया, वो ये नहीं जानते होंगे कि पुराने विंडोज़ संस्करण कैसे काम करते थे, कैसे दिखते थे, आदि आदि.

कंप्यूटरों में मेरी रुचि  हमेशा से ही रही और मैं अपने आप को भाग्य शाली मानता हूँ कि मैंने कंप्यूटरों के आरंभिक विकास अनुक्रम को उपयोग कर अनुभव किया है. डॉस, यूनिक्स और विंडोज़ से लेकर लिनक्स, सन, बीईओएस आदि आदि का प्रयोग समय समय पर किया है. और जिन्होंने डॉस कमांड लाइन पर काम किया है, और उनके सामने जब चित्र मय ग्राफ़िकल यूजर इंटरफ़ेस का पहला पहला विकल्प आया था, तब के अकल्पनीय अनुभव को बयां कर पाना अवर्णनीय ही रहा है. अब तो टच स्क्रीन और वाइस, जेस्चर इनपुट का जमाना है, और भविष्य में इमोशन व थॉट इनपुट काम करेंगे.

बहरहाल, यदि आप पुराने जमाने के ऑपरेटिंग सिस्टम के रंग रूप को देखना परखना चाहते हैं तो आपके लिए बहुत से लोगों ने बहुत तरह से हैक कर ऑनलाइन विकल्प दे दिए हैं. मैंने उनमें से कुछ विकल्पों को यहाँ पिरोने की कोशिश की है. यदि आपको इनके अलावा भी ऐसे प्रकल्प पता हैं तो कृपया हमारे साथ साझा करें.

 

विंडोज़ ही विंडोज़ - हर तरह के विंडोज :

वर्चुअल डेस्कटॉप डॉट ऑर्ग (http://www.virtualdesktop.org/complete/index.html) पर विंडोज़ 95 के बाद के तमाम विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम को उनके मूल रूप में ब्राउज़र विंडो में चलाने योग्य  प्रस्तुत किया गया है. यहाँ आपको विंडोज़ 95 से लेकर 98, me, 2000, एनटी, एक्स पी, एक्स पी प्रो तो मिलेंगे ही, मैक ओएस के भी कुछ संस्करण देखने को मिलेंगे.

 

पीसी एमुलेटर -

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यहां - ( https://jamesfriend.com.au/pce-js/pce-js-apps/)   आपको विंडोज से भी पहले का पीसी एमुलेटर मिलेगा. ब्लैक एंड व्हाइट मॉनीटर पर काम करता हुआ, ब्राउजर आधारित वास्तविक कंप्यूटर का आभास कराता इंटरफ़ेस. पुराने कंप्यूटर कैसे काम करते थे यह देखने के लिए यहाँ अवश्य जाएँ.

 

वर्चुअल आईबीएम पीसी

इस साइट (http://www.pcjs.org/devices/pc/machine/5160/cga/256kb/win101/)    पर वर्चुअल आईबीएम पीसी रखा है. तब पीसी का कॉन्फ़िगुरेशन होता था - 4.77 मेगा हर्त्ज (ध्यान दें, गीगा हर्त्ज नहीं,) प्रोसेसर स्पीड और 256 केबी (ध्यान दें, मेगा बाइट नहीं, गीगा बाइट भी नहीं, बल्कि किलो बाइट) रैम.

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है न अचरज भरा?

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This blog post is inspired by the blogging marathon hosted on IndiBlogger for the launch of the #Fantastico Zica from Tata Motors. You can apply for a test drive of the hatchback Zica today.

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देश में किसी के दलित होने न होने के प्रश्न पर तूफ़ान उठा पड़ा है. पर हमें क्या. क्या आपने कभी सोचा है? हमें तो बेचारे अपने कंप्यूटिंग उपकरण के बारे में सोचना चाहिए, कि क्या वह दलित है? या नहीं है? और क्या आप उसे उसका अधिकार, उचित ट्रीटमेंट दे रहे हैं या नहीं?

मेरे विचार में आपका कंप्यूटिंग उपकरण पक्का दलित है. कहीं कोई शक की गुंजाइश नहीं है. नहीं, बल्कि वह तो डबल दलित है. नहीं-नहीं, वो दलित स्क्वेयर दलित है. अनंत घात वाले एक्सपोनेंशियल वाला दलित है. उस के जैसे अनंत दलित से और दलित कुछ हो ही नहीं सकता.

बेचारा आपका कंप्यूटिंग डिवाइस. जरा उस दलित पे रहम करो.

आप नहीं मानते कि आपका कंप्यूटिंग उपकरण किसी सूरत दलित नहीं है? न मानें. पर कुछ तर्क भी तो दें. डाक्यूमेंटेशन दिखाएँ. एफ़िडेविट तो दे ही सकते हैं?

हम, आपके कंप्यूटिंग उपकरण (पीसी, लैपटॉप, टैबलेट, स्मार्टफ़ोन, किंडल आदि-आदि) के दलित होने संबधी कुछ तर्क आपके सामने रखते हैं. आप चाहेंगे तो हम डाक्यूमेंटेशन भी उपलब्ध करवा देंगे. सर्टिफ़ाईड भी और एफ़िडेविट वाले भी.

तो, ये रहे हमारे तर्क -

  • · आपका कंप्यूटिंग उपकरण आपकी सेवा में दिन रात, चौबीसों घंटे, सातों दिन, बारहों मास, सालों साल लगा रहता है और कभी चूं चपड़ नहीं करता. वो कोई आंदोलन तो कतई, कभी भी नहीं करता, और न ही किसी किस्म की अपनी कोई विचारधारा रखता है.
  • · आप अपने बैटरी पावर्ड कंप्यूटिंग उपकरण को दिन भर चलाते हैं, और चाहते हैं कि वो शाम तक भी फुल चार्ज रहे, फुल ऊर्जा से आपको आपका हालिया डाउनलोड किया, ताज़ा जारी, पायरेटेड पिक्चर दिखाए.
  • · आप अपने पांच साल पुराने कंप्यूटिंग उपकरण से यही कामना करते हैं कि वो नए, लेटेस्ट ऑक्टाकोर प्रोसेसर वाले कंप्यूटिंग उपकरणों से भी तेज, तेज चले.
  • · आप अपने पुराने कंप्यूटिंग उपकरण को न तो अपडेट करना चाहते हैं न अपग्रेड फिर भी चाहते हैं कि वो नए जमाने का, हर तरह का पूरा काम आपको कर के दे.
  • किसी भी दिए गए त्रिआयामी त्रिकाल समय अंतराल में, आपके हाथों का आपका कंप्यूटिंग उपकरण पुराना और बेकार किस्म का होता है क्योंकि मार्केट में उससे नया कब का लांच हो चुका होता है.
  • आप चाहते हैं कि आपका कंप्यूटिंग उपकरण आपसे इनपुट मांगे बगैर भी आपका मनवांछित काम समय-समय पर पूरा करता रहे. यहाँ तक कि यदा कदा कॉफ़ी भी बना दे, और कभी जरूरत पड़ने पर सिर या टांग भी दबा दे.
  • · आप अपने कंप्यूटिंग उपकरण को तब भी चालू कर रखते हैं जब आप उससे कोई काम नहीं ले रहे होते हैं, और आप चाहते हैं कि वो कोई बैटरी बिजली न खाए.
  • · आपके अपने पॉकेट का कंप्यूटिंग उपकरण अगले के कंप्यूटिंग उपकरण के समक्ष या तो हमेशा आला दर्जे का होता है या फिर इसके उलट. समानता, इक्वैलिटी तो खैर, कहीं कभी भी दो दिए गए एक जैसे कंप्यूटिंग उपकरण में भी नहीं होती. कहीं न कहीं ग्लास, कीबोर्ड या मॉनीटर में स्क्रैच तो लगा ही होता है - या कोई वर्जन पुराना वाला होता है.
  • आपका कंप्यूटिंग उपकरण बाबा आदम के जमाने का है, परंतु आप अब भी उसकी कीमत ओलेक्स पर फुल वसूलना चाहते हैं.
  • आपके ऑब्सलीट, अप्रचलित हो चुके कंप्यूटिंग उपकरणों के लिए भी आप चाहते हैं कि ईबे पर ग्राहक मिलें.

 

अब आपकी बारी है. क्या आपका कंप्यूटिंग डिवाइस (या, शुद्धतावादियों के लिए, गरमी न खाएँ, कृपया - डिवाइज़) दलित नहीं है? बताएं, कैसे? किस विधि?

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