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व्यंग्य जुगलबंदी : मेरी तेरी उसकी दीवाली

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मेरी तेरी उसकी दीवालीऔरों की तरह इस बार मैं भी, स्वतःस्फूर्त, भरा बैठा था. जम के दीपावली मनाऊँगा. पर, पूरी तरह देसी, राष्ट्रीय किस्म की, पर्यावरण-प्रिय दीपावली. महीने भर पहले से ही तमाम सोशल-प्रिंट-दृश्य-श्रव्य मीडिया में मैंने विविध रूप रंग धर कर चीनी माल, खासकर चीनी दियों, चीनी लड़ियों, और चीनी पटाखों का बहिष्कार कर शानदार देसी दीवाली मनाने का आग्रह-पूर्वग्रह, अनुरोध-चेतावनी सबकुछ देता रहा था. चहुँ ओर से आ रहे ऐसे संदेशों को आगे रह कर फारवर्ड पे फारवर्ड मार कर, और जरूरत पड़ने पर नया रंग रोगन लगा कर फिर से फारवर्ड मार कर यह सुनिश्चित करता रहा कि कोई ऐसा कोई संदेश व्यर्थ, अपठित, अफारवर्डित न जाए. मेरे आग्रह-पूर्वग्रह, अनुरोध-चेतावनी में पर्यावरण-प्रेम भी सम्मिलित था, जिसमें आतिशबाज़ी, पटाखों से दूर रहने और अनावश्यक रौशनी करने, बिजली की लड़ियां लगा कर बिजली की कमी से जूझ रहे देश के सामने संकट को और बढ़ाने के कार्य से दूर रहने का आग्रह भी सम्मिलित था. यही नहीं, मैंने तो अपने मुहल्ले में और अपनी सोसाइटी में भी पूरा दम लगा दिया था कि इस बार की दीपावली पूरी तरह देसी, राष्ट्रीय और पर्याव…

ब्रिटिश लाइब्रेरी अंततः हिंदीमय हुआ...

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भोपाल की ब्रिटिश लाइब्रेरी - वर्तमान नाम विवेकानंद लाइब्रेरी में अंग्रेज़ी और पश्चिमी (जर्मन, फ्रेंच) आदि भाषाओं की किताबें ही मिलती थीं.जनता की बेहद मांग पर हिंदी की किताबें इस वर्ष के हिंदी पखवाड़े से नसीब होने लगी हैं और क्या खूब होने लगी हैं. दूसरी खेप आई है जिसकी ये झलकी है -नए संग्रह में शामिल 20 किताबों की सूची इस प्रकार है ।  मुसाफिर कैफ़े (दिव्य प्रकाश दुबे) बनारस टॉकीज (सत्या व्यास) आज़ादी मेरा ब्रांड (अनुराधा बेनीवाल) मम्मा की डायरी (अनु सिंह चौधरी)  जादू भरी लड़की (किशोर चौधरी) टर्म्स एंड कंडिशन्स एप्लाई (दिव्यप्रकाश दुबे ) ज़िंदगी आइस पाइस (निखिल सचान ) नमक स्वादानुसार (निखिल सचान ) नीला स्कार्फ (अनु सिंह चौधरी ) वो अजीब लड़की (प्रियंका ओम) कुल्फी एंड कैपूचिनो (आशीष चौधरी ) नॉन रेजीडेंट बिहारी (शशिकांत मिश्रा ) लूजर कहीं का (पंकज दुबे) कोस कोस शब्दकोश (राकेश कायस्थ ) इश्कियापा (पंकज दुबे) इश्क़ कोई न्यूज़ नहीं (विनीत कुमार ) चौराहे पर सीढ़ियाँ (किशोर चौधरी ) मसाला चाय (दिव्य प्रकाश दुबे ) बकर पुराण (अजीत भारती ) ठीक तुम्हारे पीछे (मानव कौल )ज्ञातव्य है कि इन कित…

क्या क्या जांच कर के लें?

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पेट्रोल जांच कर लो, डीजल, गैस जांच कर लो, आटा दाल जांच कर लो। नोट भी जांच कर लो। गोया आदमी नहीं जांच मशीन हो!

ट्विटर, फ़ेसबुक पर आप किस तरह से खांसते छींकते हैं?

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यूँ, सोशल मीडिया में लोग मुखौटे लगाए मिलते हैं, परंतु इन मुखौटों में थोड़ा और पॉलिश करने की जरूरत अब आ ही गई समझो!

व्यंग्य जुगलबंदी - पुनर्धर्मभीरूभव:

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पुनर्धर्मभीरूभव:बहुत पुरानी बात है. धरती पर एक बार एक इंसान गलती से बिना धर्म का, नास्तिक पैदा हो गया. उसका कोई धर्म नहीं था. उसका कोई ईश्वर नहीं था. वो नास्तिक था. चहुँ ओर हल्ला मच गया. आश्चर्य! घोर आश्चर्य!¡ एक इंसान बिना धर्म के, नास्तिक कैसे पैदा हो सकता है. वो बिना हाथ-पैर के, जन्मजात विकृतियों समेत भले ही पैदा हो सकता है, और अब तो विज्ञान की सहायता से बिना मां-बाप के भी पैदा हो सकता है, मगर बिना धर्म के? लाहौलविलाकूवत! ये कैसी बात कह दी आपने! पैदा होना तो दूर की बात, बिना धर्म के कोई इंसान, इंसान हो भी सकता है भला? ताबड़तोड़ उस इंसान को अपने-अपने धर्मों में खींचने की, उसे आस्तिक बनाने की जंग शुरू हो गई. “उद्धरेदात्मनात्मानम् ... वसुधैव कुटुंबकम्...” सहिष्णुता और विश्वबंधुत्व केवल हिंदुओं में है... इसका धर्म हिंदू होना चाहिए. हिंदुओं ने कहा. “बिस्मिल्लाहिर्रहमानेहिर्रहीम...” ईश्वर केवल एक है और उसके सबसे निकट, शांति और सहिष्णुता का धर्म इस्लाम है, वही स्वर्ग जाने का एकमात्र रास्ता है. इसका धर्म इस्लाम होना चाहिए. मुस्लिमों ने अधिकार जताया. “ईश्वर दयालु है- ईश्वर इन्हें माफ करना, …

पाओ जवाब आसानी से!

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हिंदी उपयोगकर्ताओं (को सिखाने) के लिए गूगल ने जोरदार विज्ञापन अभियान निकाला है -कि, अब आप सर्च आदि बहुत सारे काम हिंदी में बोल कर भी कर सकते हैं, और बहुत बेहतर तरीके से कर सकते हैं.  हिंदी (और तमाम अन्य भारतीय भाषाओं की) की ध्वन्यात्मक खूबी के कारण परिणाम बेहद शुद्ध आते हैं.आप भी आजमाएँ. यदि अब तक नहीं आजमाएँ हैं तो!

क्या कभी आप भी गाय की सवारी करना चाहेंगे...?

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कूल काऊ ट्रैकिंग - एक विज्ञापन की तस्वीर. असली. कोई फ़ोटोशॉप्ड नहीं, कोई नकली नहीं.सवार के मुख पर प्रसन्नता की लकीरें बताती हैं कि यह कितना आह्लादकारी होगा! तो चलें, अपन भी ऐसी सवारी करने?नहीं?वैसे, अपने यहाँ भी लोग-बाग अक्सर गाय की सवारी अपने राजनीतिक लाभ के लिए करते रहे हैं. पर, वो आपको भी पता है कि अलग किस्म की अलहदा सवारी होती है, और उसका विजुअल इफ़ेक्ट नहीं, कुछ और इफ़ेक्ट होता है. हाँ, आह्लादकारी तो अवश्य होता होगा - राजनीतिक लाभ की तरह.गऊ भक्तों से अग्रिम क्षमा याचना सहित. स्ट्रिक्टली नो ऑफ़ेंस टू एनीबडी!

क्लाउड कंप्यूटिंग, फॉग कंप्यूटिंग, रेन कंप्यूटिंग, विंड, स्टार्म...

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कंप्यूटिंग की दुनिया आखिर कहां जा कर रुकेगी?

हास्य व्यंग्य की जुगलबंदी - बदलता मौसम

इस सप्ताह व्यंग्य की जुगलबंदी का विषय था -
बदलता मौसम

मालवा क्षेत्र में मौसम के बदलाव का पूर्वानुमान या फिर यूं कहिए कि बदलते मौसम की भविष्यवाणी हवा का रूख देख कर किया जाता रहा है। कुरावन नाम की हवा की दशा-दिशा और गति को भांप कर बुजुर्ग आज भी सटीक भविष्यवाणियां करते हैं कि पानी कब, कितना गिरेगा और ठंडी गर्मी कितनी पडे़गी। मगर आज के जमाने का आदमी अपनी इंद्रियों की अपेक्षा वेदर डॉट कॉम पर ज्यादा भरोसा करने लगा है। वो घर से निकलने से पहले लोटा भर पानी पी कर, हाथ में छतरी लेकर या रैनकोट डाटकर निकलने के बजाए गूगल नाओ पर मौसम चेक कर निकलता है। क्योंकि वैसे भी उसे अब कहीं पानी की किल्लत कहीं नहीं होती। धन्य हो बोतलबंद पानी बनाने वाली कंपनियों का। बीस रुपल्ली निकालो और एक बोतल पानी हाजिर। कभी भी कहीं भी। हां, अगर कहीं बिन बुलाए बरसात हो गई, आंधी-तूफान आ गया और पास में छतरी या रेनकोट न हो तो उसका प्रोग्राम बरबाद हो सकता है। इसलिए बदलते मौसम के पूर्वानुमान पर अपडेट, एक अदद पानी के लोटे से ज्यादा जरूरी है।


साथ ही, अचानक कहीं चटख धूप के बीच पानी की बौछारें होने लगे तो एक अदद छतरी का जुगाड़ होन…

साढ़े तीन सौ रुपए में कंप्यूटर!

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पाई जीरो। 5 डॉलर का कंप्यूटर।

वो भी क्रेडिट कार्ड साइज का आधा।
पर, शक्ति में भरपूर।
मल्टीमीडिया, एचडीएमआई युक्त!
एक ले ही लें?

खाने के साथ चम्मच, कटोरी भी खाओ!

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क्या ऐसा नहीं हो सकता कि खाने की जरूरत ही न रहे, देख कर ही स्वाद आ जाए और पेट भर जाए?

आपने कितने प्रकार के कद्दू खाए हैं?

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मैंने तो, खैर इतने देखे भी नहीं थे!

अपनी यादों को बचाने, दोस्तों संग खाओ पिओ!

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तो, हो जाए आज पार्टी?

स्वच्छता अभियान के मरफ़ी के नियम

स्वच्छता अभियान के मरफ़ी के नियम

किसी भी दिए गए इलाके में, स्वच्छता अभियान के पहले और बाद में गंदगी की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

यदि किसी राजनीतिक व्यक्ति ने कहीं स्वच्छता अभियान में हिस्सा लिया है तो यकीनन, अभियान के बाद गंदगी की मात्रा में और बढ़ोतरी हो जाती है।

दिया गया कोई भी स्वच्छता अभियान, विरोधी दल की नजरों में सदैव असफल रहता है। बल्कि घोर असफल रहता है।

स्वच्छता अभियान अक्सर दूसरों के क्षेत्र में चलाए जाते हैं, ताकि यह बताया जा सके कि उनका गली मोहल्ला साफ सुथरा है और सफाई वफाई की जरूरत नहीं है, जबकि सफाई की ज्यादा जरूरत वहीं होती है।

स्वच्छता अभियान में तामझाम उसमें भाग ले रहे नेता अफसर के समानुपाती होती है और वास्तविक सफाई व्युत्क्रमानुपाती।

स्वच्छता अभियान में जितना ज्यादा जोर शोर होगा, उतनी ही कम साफ-सफाई होगी।

दिए गए किसी भी स्वच्छता अभियान में, इधर के कूड़े को उधर और उधर के कूड़े को इधर किया जाता है। यानी कूड़े की मात्रा में कहीं कोई कमी नहीं होती।

ऊपर दिए गए नियम का उपनियम - दिए गए किसी भी स्वच्छता अभियान में कूड़े की मात्रा में अंतिम रूप से बढोतरी ही …

जब सब स्मार्ट हो रहे हैं तो फिर ये क्यों पीछे रहें?

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स्मार्टनेस की जय हो!

व्यंग्य के बहाने - 4 / अनूप शुक्ल

व्यंग्यकार, वृत्तांतकार अनूप शुक्ल व्यंग्य के बहाने सम-सामयिक व्यंग्य और व्यंग्यकारों पर अपनी ही शैली में ग़ज़ब की समीक्षा कर रहे हैं, और जीवंत विमर्श को न्यौता दे रहे हैं. आलेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें - http://www.rachanakar.org/2016/10/4.html

हां, मैं भी विंडोज़ 10 अनइंस्टाल करने की सोच रहा हूँ!

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कल मैंने विंडोज़ 10 अपडेट के फटने - माने काम करते प्रोग्रामों के खराब हो जाने के बारे में अपनी व्यथा लिखी थी। और आज ये खबर भी आ गई!

क्या आप भी विंडोज़ 10 अनइंस्टाल करने की सोच रहे हैं?

विंडोज़ 10 अपडेट - तेरा सत्यानाश हो!

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माना, कि अपडेट अच्छे भले के लिए किए जाते हैं, परंतु यहाँ तो मामला उल्टा हो रहा है भाई!हिंदी कंप्यूटिंग उपयोगकर्ता विंडोज 10 पर अपडेट होने वाले अपने रेमिंगटन कीबोर्ड के नहीं चलने के चलते अच्छे खासे परेशान हो ही रहे थे कि इस नए अपडेट ने और सत्यानाश कर दिया.मेरे दो जरूरी प्रोग्राम, जिनके चलते मैं अब तक विंडोज़ पर चिपका हुआ था, अब नए अपडेट के बाद ठीक से चल ही नहीं रहे!नीचे का स्क्रीनशॉट देखें -ऊपर स्क्रीनशॉट में नीचे के विंडो में जो डब्बे दिख रहे हैं वो यूनिकोड हिंदी है. आज से कोई पंद्रह साल पहले, विंडोज 95 के जमाने में ऐसा विविध प्रोग्रामों में दिखता था. अब जब विंडोज 10 का नया अपडेट आया है, उसमें कई प्रोग्रामों में यह फिर से दिखने लगा है. यानी हिंदी का सत्यानाश! डब्बों से आप काम कैसे करेंगे भला?समस्या एक नहीं है. और भी है. अच्छा खासा ओपन लाइव राइटर चल रहा था, उसमें हिंदी स्पेल चेकर भी बढ़िया चल रहा था. जाने क्या हुआ कि इसका हिंदी स्पेलचेकर भी इस अपडेट के बाद गायब हो गया. विंडोज पर अब इसकी उपयोगिता शून्य जैसी ही हो गई है.वैसे, अब विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम में कुछ खास रह नहीं गया है. आधी से …

आइए, अगांधीगिरी की सर्जिकल स्ट्राइक मारें

वो मारा! बुद्ध और गांधी का देश बदले की हिंसक आग में सुलग रहा था. जल रहा था. कुछ इस तरह कि उस आग में स्वयं जला जा रहा था. इससे पहले इतनी आग कभी भी, कहीं भी नहीं लगी थी. सर्जिकल स्ट्राइक ने दिल में थोड़ा सा ही सही, सुकून का ठंडा पानी तो डाला. मामला 40 के बजाए 400 होता तो और ज्यादा सुकून मिलता, और ज्यादा ठंडक मिलती. चहुं और खुशी व्याप्त है. सुकून, चैन और दिल में ठंडक व्याप्त है. चैनलों में, सोशल मीडिया में प्रकटतः और ज्यादा. कुछ ही समय पहले कुछ इसी तरह की, बदले की आग देश के दक्षिण में लगी थी. पानी ने आग लगाई थी. देश में प्यासे को पानी पिला कर पुण्य बटोरने की प्रथा है, रिवाज है. मेहमान घर में आता है तो सबसे पहले पानी का लोटा दिया जाता है. उसी देश में, कावेरी का पानी तू पिए कि मैं, इस पर दो पड़ोसी भाइयों में आग लगी थी. मामला दो पड़ोसी मुल्कों की बात होती तो फिर भी सिंधु की तरह बात अलग होती. और, यह आग भी भयावह थी. राजनीति प्रेरित जनता के एक वर्ग ने खुद ही, अपने ही अड़ोसी-पड़ोसी के लिए, अपने ही स्टाइल में सर्जिकल स्ट्राइकें मारीं, और सुकून-पे-सुकून हासिल किया. लोगों ने माथे पर क्षेत्र-प्रां…

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