मंगलवार, 12 जुलाई 2016

अफ़सरी का असली मज़ा तो महंगे टेंडर निकालने में ही है …

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बाकी तो… अब आपको क्या कहें.. आप खुदै समझदार हैं!

2 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. इस थेटे के दिन कब फिरेंगे? मैं 15 साल से एम.पी. से बाहर हूं फिर भी यदाकदा इसका नाम पढ़ने-सुनने को मिल जाता है.

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    1. न्यायालय के आदेश पर बहाल तो हो गए हैं, परंतु सवाल तो मलाईदार पोस्ट का है!

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