रविवार, 1 मई 2016

जाने क्यों रो पड़ा

हंसते बोलते जाने क्यों रो पड़ा
चोट खाई नहीं फिर भी रो पड़ा

लोग सब अपनों को ही देखते हैं
वो तो दूसरों के हाल पर रो पड़ा

ऐसी कौन-सी चूक हो गई हमसे
लोग समझे खुशी के मारे रो पड़ा

शायद जीवन का डिफ़ॉल्ट है ये
आदमी यहाँ आया और रो पड़ा

ये तो महज समझ का फेर है रवि
जिस पर ठहाके लगे वो रो पड़ा

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