June 2015

यह पोस्ट मैं बड़ी ही दुखद मनःस्थिति में लिख रहा हूँ.

पिछले कोई चार छः महीने पहले रीलायंस सीडीएमए नेटकनेक्ट + वायरलेस ब्रॉडबैंड में एक बेहतरीन ऑफर आया था - तीन हजार रुपए जमा करो, और लाइफ़टाइम वेलिडिटी पाओ, हर महीने 1 जीबी डाटा मुफ़्त.

हालांकि फ़ाइन प्रिंट में लिखा था - अनयूज्ड 1 जीबी डाटा एकत्रित नहीं होगा, बल्कि महीने के अंत में खतम हो जाएगा, और खाते में फिर से 1 जीबी डाटा जमा हो जाएगा.

फ़ाइन प्रिंट के बावजूद, आफर ठीक ही था, जो कि एक बैकअप इंटरनेट कनेक्शन के लिहाज से ठीक ही था.

तो न केवल मैंने इसे ले लिया बल्कि अन्य फ़ोरमों में भी इसकी वकालत की और शायद कुछ लोगों ने इसे ले भी लिया.

परंतु मैं गलत था. रिलायंस (के तथाकथित मैनेजरों) की लालची प्रवृत्ति और उपयोगकर्ताओं को उल्लू बनाने की प्रवृत्ति ने इस योजना को पूरा फ्रॉड बना दिया है.

जानें कैसे-

मेरे रिलायंस के ब्रॉडबैंड का यह खाता हर महीने के 27 तारीख को रीसेट होता है. यानी कि अनयूज्ड डाटा जीरो हो जाता है और उस दिन 1 जीबी डाटा खाते में जमा हो जाता है.

परंतु यदि मैं 27 तारीख को अपने खाते में 1 जीबी डाटा जमा होने के तुरंत बाद भी इस कनेक्शन को चालू करता हूँ तो यह निम्न सूचना स्क्रीन पर दिखाता रहता है  -


यह अलर्ट कर बताता है कि आपके खाते में 1 एमबी से भी कम बैलेंस है! कभी कभी तो यह शून्य बैलेंस बताता है. जाहिर है कि यह संदेश उपयोग कर्ता को भ्रमित कर उससे नाहक ही रीचार्ज करवाने को प्रेरित कर लूटने की कोशिश की जाती है.

अब, जबकि उपयोगकर्ता के पास उसका डाटा बैलेंस जानने का कोई सीधा उपाय नहीं है, आपका कनेक्शन कभी भी इनऑपरेटिव हो जाता है - यानी डाटा बैलेंस जीरो बताता है - भले ही आपने 10 -20 प्रतिशत डाटा उपयोग किया हो. कोढ़ में खाज यह कि इसका डायलर जब भी कनेक्ट होता है, हर बार रिलायंस की भारी भरकम साइट खोलता है जिसमें फ्लैश आधारित विज्ञापनों की भरमार रहती है- यानी आपका कीमती डाटा फोकट में बेकार जाता है.

साथ ही, इस सुविधा के लिए ऑनलाइन बैलेंस चेक करने या डायलर के द्वारा बैलेंस चेक करने का कोई विकल्प ही नहीं है. जो विकल्प था, उसे समाप्त कर दिया गया है. रजिस्टर्ड उपयोगकर्ता के खाते में भी बैलेंस चेक करने का विकल्प नहीं है!

जब आप कस्टमर केयर फोन करते हैं तो वो चार्जेबल होता है, और अपना बैलेंस का स्टेटमेंट मांगने पर 25 रुपए जमा करवाने की बात की जाती है. वह भी एक बार के लिए!

और, एक समय तो रिलायंस सीडीएमए की कनेक्टिविटी बेहतरीन होती थी, मैंने तो चलती ट्रेन से भी पोस्टें लिखी हैं, मगर आजकल भोपाल जैसे शहर में भी सीडीएमए ब्रॉडबैंड ढंग से नहीं चलता और बाहरी स्थानों में तो कई जगह कनेक्शन भी नहीं मिलता.

मजबूरन मुझे इस लाइफटाइम कनेक्शन को कचरे के डब्बे में डालना पड़ रहा है और इसके विकल्प के तौर पर दूसरा कनेक्शन लेना पड़ रहा है.

मैं कोई पिछले पंद्रह-बीस वर्षों से इंटरनेट का उपयोग करता आ रहा हूँ, और कई कंपनियों के कनेक्शन इस बीच उपयोग कर देखे हैं, और छोटी मोटी शिकायतें हुई हैं, मगर यह इस तरह का पहला फ्रॉड है.

इस कनेक्शन और इस इंटरनेट सेवा प्रदाता  की घटिया सेवाओं के संबंध में आप भी अपने अनुभव साझा करें और जनता को आगाह करें.



• यदि कहीं अनुलोम है तो वहाँ विलोम भी होगा (भावार्थ अथवा गूढ़ार्थ - जहाँ रामदेव है, वहाँ ओवैसी भी होगा, इसी तरह अन्य नियम भी भावार्थ अथवा गूढ़ार्थ निकाल कर पढ़े जाएं, :)).

• यदि कहीं कुछ गलत योग-मुद्रा हो सकने की संभावना होती है तो अंततः ऐसा होता ही है.

• यदि बहुत सी गलत योग-मुद्रा के हो सकने की संभावनाएँ होती हैं, तो वही एक गलती होती है जिससे कि सर्वाधिक समस्या होती है.

• उपप्रमेय: यदि किसी योग-मुद्रा के गलत के हो सकने का सबसे खराब समय होता है, तो उसी सबसे खराब समय में होता है.

• यदि किसी के लिए, कहीं, कभी, कोई गलत योग-मुद्रा हो ही नहीं सकती हो तो फिर वहाँ अंततः गलत योग-मुद्रा होती ही है.

• यदि आप यह महसूस करते हैं कि चार संभावित तरीकों से गलत योग-मुद्रा हो सकती है, और आप इन सभी तरीकों से बच निकलते हैं, तभी, गलत योग-मुद्रा हो सकने का एक पाँचवाँ अप्रत्याशित तरीका तत्परता से पैदा हो जाता है.

• यदि योग-मुद्राओं को अपने हाल पर छोड़ दिया जाए, तो वे बद से बदहाल होने की कोशिशें करती हैं.

• यदि आपकी योग-मुद्राओं में सब कुछ अच्छा चलता प्रतीत हो रहा है, तो यकीन मानिए, आपने कुछ अनदेखा किया ही है.

• प्रकृति हमेशा योग-मुद्रा के गुप्त दोषों के पक्ष में होती है.

• मुस्कराओ... योग-मुद्रा में कल तो और बुरा होगा.

• योग-मुद्रा में कुछ गलत होता है तो सारा कुछ एक साथ होता है.

• योग-मुद्रा में ज्यादा अनुसंधान आपके सिद्धान्त का समर्थन करने के लिए अग्रसर होते हैं

• योग-मुद्रा में सब कुछ कभी भी सही नहीं होता. अतः यदि सब कुछ सही हो रहा हो... तो कहीं कुछ गलत है.

• योग-मुद्रा में कुछ भी जो गलत हो सकता है, उसे अंततः गलत होना ही है.

• किसी योग-मुद्रा को करते समय, यदि आपको इसके फायदे का पहले से पता होता है तो इस बात से हमेशा ही मदद मिलती है.

• कोई भी योग-मुद्रा उतनी आसान नहीं होती जितनी वह दिखाई देती है.

• हर योग-मुद्रा के लिए उससे ज्यादा समय लगता है जितना आप समझते हैं.

• यदि कोई योग-मुद्रा कभी गलत हो ही नहीं सकती तो अंततः उसे गलत होना ही है.

• जब आप कोई योग-मुद्रा करने के लिए निकल पड़ते हैं तो पता चलता है कि कोई अन्य योग-मुद्रा पहले करना जरूरी है.

• हर योग-मुद्रा एक नई, आवश्यक योग-मुद्राओं के साथ आता है.

• किसी योग-मुद्रा की आसानी उसके महत्व के उलटे अनुपात में होती है.

• किसी योग-मुद्रा के सीखने की संभावना उसके लाभ के सीधे अनुपात में होता है.

• आखिरी असंभावित योग-मुद्रा का सरल विकल्प कुछ न कुछ मिल ही जाता है.

• आप चाहे जितनी भी मशक्कत कर सबसे आसान योग-मुद्रा सीख लेते हैं तो इसके तुरंत बाद पता चलता है कि इसका और सरल विकल्प कुछ और था.

• सामूहिक योग में, हर समय, आपके इस बाजू वाला आपसे ज्यादा अच्छा योग-मुद्रा कर रहा होता है, और जब आप करवट बदल कर देखते हैं तो उस बाजू वाला भी ज्यादा अच्छा योग-मुद्रा कर रहा होता है.

• योग-मुद्रा नहीं करने के लिए आपको यह साबित करना होता है कि आप तो पहले से ही योगी हैं और आपको तो योग की कतई आवश्यकता ही नहीं है.

• किसी भी योग-मुद्रा को अगर आप अपने मुताबिक सुधार कर सरल बनाना चाहते हैं तो जितना सोचा गया होता है उससे कहीं ज्यादा कठिन योग-मुद्रा की जरूरत होती है.

• यदि कोई आसन हो नहीं रहा है, तो कोई दूसरा आसन आजमाएँ. दूसरा न हो तो तीसरा, चूंकि अंततः दूसरा आसन भी कोई पहले से आसान नहीं होता.

• यदि कोई असंभव योग-मुद्रा को प्रशिक्षक के सामने किया जाता है तो वह योग-मुद्रा अचानक भली भांति होने लग जाता है.

• यदि कोई ऐसा आसान योग-मुद्रा बना लिया जाता है जिसका इस्तेमाल कोई बेवक़ूफ़ भी कर सकता हो तो फिर उसका इस्तेमाल सिर्फ बेवक़ूफ़ ही करेंगे.

• हर एक के पास योगी बनने की योजनाएँ होती हैं जो काम नहीं करतीं.

• किसी भी योग-मुद्रा में प्रत्येक व्यक्ति अपने स्वयं के अयोग्यता स्तर के चरम पर पहुँच जाता है और फिर वह वहीं बना रहता है.

• किसी भी योग-मुद्रा को सबसे बढ़िया करने के लिए कोई समय नहीं होता, परंतु उस योग-मुद्रा को निपटा लेने के लिए समय हमेशा होता है.

• जीवन में कोई भी योग-मुद्रा या तो असंभव, या गैरजरूरी होती है.

• संशय के समय योग-मुद्रा में ज्यादा विश्वसनीयता लाएँ.

• योग-मुद्रा के सबसे महत्वपूर्ण, कठिन आसन पर ही आपके मोबाइल पर एक बेहद जरूरी, वाट्सएप्प संदेश अपडेट होता है.

• जहाँ सहनशक्ति और धैर्य असफल हो जाता है, योग-मुद्रा की जीत होती है.

• यदि आप कुछ सरल योग-मुद्रा चाहते हैं, अधिक संभावना है कि आपको वह न करना पड़े.

• यदि आप समझते हैं कि आप सही और बढ़िया योग-मुद्रा कर रहे हैं, तो इसके आपके सामने ही गलत ठहराए जाने की पूरी संभावना है.

• बूमरेंग प्रभाव याद कीजिए; आपकी योग-मुद्राएँ आपके पास लौट कर वापस आती हैं.

• जब आप अकेले योग कर रहे होते हैं तभी आपके आसन स्वाभाविक, नियमानुसार, शत-प्रतिशत शुद्ध होते हैं.

• आपका सबसे बुरा योगासन तभी बनता है जब आप औरों के सामने प्रदर्शित करते होते हैं जिन्हें आपको प्रभावित करना होता है.

• आप चाहे जितनी भी कोशिश कर लें, आप ठीक से एक भी योग-मुद्रा नहीं कर सकते.
(उदाहरण के लिए, परिवार के सभी लोगों को योग सिखाने की कोशिश करना)

• मित्रों को योग सिखाने की कीमत बीयर की कीमत के सीधे अनुपात में होती है.

• ग्रेट योग-मुद्राएँ कभी भी याद नहीं किए जाते और सरल योग-मुद्राएँ कभी भूले नहीं जाते.

• योग-मुद्राओं में से हमेशा वही भूला जाता है जो कठिन, असंभव किस्म का होता है.

• जो योग-मुद्रा आप आसानी से कर सकते हैं, प्रशिक्षक आपके लिए गैरजरूरी बताता है और जो आपको करने को कहा जाता है उसे आप हरगिज करना नहीं चाहते.

• योग-मुद्रा का सर्वकालिक नियम – जो योग-मुद्रा आप करना चाहते हैं वह संभव नहीं है, जो आप कर सकते हैं उसे आप करना नहीं चाहते.

• दैनिंदनी योग का समय आप कितने लेट हो चुके हैं या होने वाले हैं उसके सीधे अनुपात में होती है.

• किसी योग-मुद्रा की पेचीदगी का गुणांक, उस योग-मुद्रा को सीखने में कितना समय लगता है तथा वह कितना महत्वपूर्ण होता है उसके उलटे अनुपात में होता है.

• लोगों के द्वारा किसी व्यक्ति के योग-मुद्रा का अवलोकन किए जाने की संभाव्यता उसके द्वारा किए जा रहे ऊटपटांग योग-मुद्रा के सीधे अनुपात में होती है.

• यदि आप धूल-धूसरित होकर उठते हैं तो यकीनन आपकी योग की चटाई में धूल है.

• योग के नियमों की जानकारी होने मात्र से किसी भी परिस्थिति में कोई मदद नहीं मिलती है.

• यदि आप अपना प्रभाव जमाने के लिए कोई योग करते हैं तो यकीन मानिए, आपका प्रभाव खतम हो जाता है.

अब तमाम अन्य कंपनियाँ भी स्थानीयकरण पर जोर देने लगी हैं.

मेरे कंप्यूटर पर चलने वाला एप्सन कंपनी के प्रिंटर का सॉफ़्टवेयर अपडेटर अब हिंदी में वार्तालाप करने में सक्षम हो गया है. नीचे स्क्रीनशॉट देखें -

 

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और हाँ, जब आप इंस्टाल के लिए क्लिक करते हैं तो लाइसेंस अनुबंध भी हिंदी में नमूदार होता है. अब ये दीगर बात है कि हाँ करने से पहले, आप इसे पूरा पढ़ते हैं या नहीं!

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एक सुखद अहसास!

 

पर, अनुवाद एकदम मशीनी, और खड़ा डायरेक्ट टाइप है. अनुवादकों, जोरदार अनुशंसा की जाती है कि कृपया सीधे अनुवाद मत करो, बल्कि वाक्यांशों को हिंदी में पुनर्लेखन (भावानुवाद किस्म का) करो!!!

पर, अनुवादक बेचारा क्या करे, वो कुछ एक्सपेरीमेंट करता है, तो उसके ऊपर बैठा समीक्षक काड़ी कर देता है कि ये क्या किया? (माने, भुक्तभोगी हैं, सो बता रहे हैं!) यानी वही, ढाक के तीन पात! सीधा खड़ा अनुवाद, जो हिंदी कम अंग्रेज़ी ज्यादा लगता है, और समझ में भी थोड़ा कम आता है.

फिर भी, शुरूआत हो रही है तो धीरे से स्थिति ठीक भी हो सकती है.

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कुछ अरसा पहले मेरे एक मित्र के घर में चोरी हो गई थी जब वे सप्ताहांत की छुट्टियाँ मनाने बाहर गए थे. और सबसे बड़ी बात, चोरों ने ऐसा हाथ मारा कि अड़ोस-पड़ोस में किसी को भी कानोंकान खबर नहीं हुई. चोरी का पता तब चला जब मित्र अपनी छुट्टियाँ मना कर वापस घर आए, और घर के भीतर का हाल जाना. और, जाहिर है, तमाम प्रयासों के बावजूद, न चोर पकड़ में आए और न उनका चोरी गया सामान मिला. यदि वे मेरी तरह, सुरक्षा के लिहाज से अपने घर में भी वाईफ़ाई सर्विलांस कैमरा लगाए हुए होते तो संभवतः यह नौबत नहीं आती. जैसे ही चोर उनके घर में घुसते, उनके स्मार्टमोबाइल में अलर्ट आ जाता, चोरों के वीडियो/फोटो खिंच जाते, और वे तुरंत अपने घर में अलार्म बजा देते, अपने पड़ोसियों को अलर्ट कर देते कि उनके घर में अनधिकृत लोग घुस आए हैं और बहुत संभव है कि यह हादसा टल जाता. और यदि चोरी होती भी तो चोरों के वीडियो व फ़ोटो की वजह से चोर पकड़ में आ जाते.

अकसर हमारा परिवार भी यात्रा पर रहता है और मकान सूना हो जाता है. यद्यपि आज के जमाने में जब बैंक लॉकर्स और एटीएम जैसी सुविधाएँ हैं, तो चोरों को हमारे घरों से नकदी व सोना-चाँदी जैसी चीजें अब जरा कम मिलती हैं, मगर चोर तो फिर चोर होते हैं – वे हमारे महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर भी हाथ साफ कर सकते हैं – हमारा लैपटॉप और पीसी उड़ा कर ले जा सकते हैं – जिसमें हमारा बहुमूल्य डेटा होता है. इसलिए अपने घर को सुरक्षित रखना और भी जरूरी है. आज के हाई-टैक, स्मार्ट-टेक्नोलॉजी के जमाने में अपने घरों को सुरक्षित रखने के लिए हर तरह के, सस्ते सुंदर और टिकाऊ किस्म के विकल्प उपलब्ध हैं. जब आप शॉपिंग को जाते हैं तो अकसर आपने दुकानों में कई स्थानों पर सर्विलांस कैमरे और एक सेंट्रल डिस्प्ले/रेकॉर्डर उपकरण लगे देखे होंगे जिसके जरिए दुकान के कोने-कोने पर सुरक्षा कर्मी अपनी नजर रखते हैं. इसी तरह के उपकरणों को यदि वाई-फ़ाई / राउटर के जरिए इंटरनेट से जुड़ने की क्षमता प्रदान कर दी जाए, तो दुनिया में कहीं भी रह कर उस स्थान पर नजर रखी जा सकती है. मैंने भी अपने घर को सुरक्षित बनाने के लिए ठीक यही किया है.

वाई-फ़ाई सर्विलांस कैमरा – अपने घर की सुरक्षा को दें एक अतिरिक्त घेरा

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भले ही आप अपने घर को पेंटागन के ओवल ऑफ़िस की तरह सुरक्षित, अभेद्य न बना पाएँ, और उसकी जरूरत भी नहीं है, अपने घर को सुरक्षा का अतिरिक्त घेरा तो आप दे ही सकते हैं. आजकल वैसे भी पति-पत्नी दोनों ही नौकरी/व्यवसाय के सिलसिले में घर से बाहर रहते हैं और घर या तो सूना रहता है या फिर घर में बुजुर्ग या बच्चे ही रहते हैं. ऐसे में खतरा हमेशा बना रहता है, और घर की चिंता बनी रहती है. वाई-फ़ाई सर्विलांस कैमरा महज कुछ हजार रुपयों में ही आता है और इसे लगाकर आप मन में निश्चिंतता ला सकते हैं. एक साधारण वाई-फ़ाई सर्विलांस कैमरे से आपको निम्न सुविधाएँ मिल सकती हैं –

· इसमें सेंसर लगा होता है जो कमरे में किसी तरह की आवाज या किसी तरह की चहलकदमी को पहचान लेता है और आपको कई तरह से – जैसे कि ईमेल से अलर्ट भेज सकता है.

· इसमें नाइट विजन की भी सुविधा होती है जिससे घुप्प अंधेरे में भी यह काम करता है और इसके इन्फ़्रारेड कैमरे से आपको चित्र / वीडियो मिल सकते हैं.

· यह कैमरा आपको इंटरनेट के जरिए आपके आईफ़ोन/आईपैड/एंड्रायड/ब्लैकबेरी मोबाइल तथा कंप्यूटर/लैपटॉप पर दुनिया के किसी भी कोने में अलर्ट भेज सकता है, और आप दुनिया के किसी भी कोने से, किसी भी समय अपने घर को इन उपकरणों पर लाइव देख सकते हैं.

· इनका सेटअप बेहद आसान है और एक बार स्थापित कर लेने के बाद, इंटरनेट पैक के अलावा कोई अतिरिक्त नियमित खर्च नहीं है.

· कुछ खास किस्म के वाई-फ़ाई सर्विलांस कैमरों में विशिष्ट किस्म की सुविधाएँ भी होती हैं – जैसे कि रिमोट टिल्ट और ज़ूम जिससे दूर स्थान से भी आप कैमरे को कंट्रोल कर सकते हैं. यदि आपके छोटे बच्चे हैं तो विशिष्ट बेबी सर्विलांस वाई-फ़ाई कैमरा कैमरा लगा सकते हैं जो सुरक्षा के अतिरिक्त बेबी-केयर का भी काम करता है. इसके अंतर्निर्मित माइक्रोफ़ोन और स्पीकर की सहायता से आप अपने स्मार्टफ़ोन या कंप्यूटर से दूर रहकर भी बच्चे से दो-तरफा वार्तालाप कर सकते हैं, यह आपके बच्चों के रोने, कमरे के तापक्रम आदि को सेंस कर आपको अलर्ट कर सकता है, मौका पड़ने पर यह आपके बच्चे को लोरी भी सुना सकता है.

स्मार्टफ़ोन की सुरक्षा, स्मार्ट तरीके से –

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आपने अपने घर की सुरक्षा चाक-चौबंद तरीके से कर ली है. आप अपने स्मार्टफ़ोन से हर-हमेशा अपने घर पर नजर रख सकते हैं और इस तरह आप अपने घर की सुरक्षा के प्रति निश्चिंत हैं. ठीक है. परंतु यदि आपका स्मार्टफ़ोन ही गुम गया, चोरी हो गया तो?

एक अदद स्मार्टफ़ोन को आजकल की मूलभूत आवश्यकताओं में शामिल किया जा सकता है. फ़ीचरफोन बनना बंद हो गए हैं और जमाना अब स्मार्टफ़ोनों का ही है. हम अकसर ही मित्रों रिश्तेदारों से सुनते रहते हैं कि उनका स्मार्टफ़ोन कहीं गुम हो गया या चोरी हो गया. महंगे स्मार्टफ़ोनों पर चोरों-पॉकेटमारों की खास निगाह रहती है. स्मार्टफ़ोन खो जाने पर संपर्क जानकारी तथा अन्य निजी डेटा गुम हो जाने का गम भले ही उतना न हो पर सबसे बड़ा खतरा उसमें निहित जानकारी व डेटा के गलत हाथों में पड़ जाने और उनका गलत उपयोग होने का होता है. सवाल यह है कि स्मार्टफ़ोन की सुरक्षा आखिर कैसे की जाए?

आप अपने स्मार्टफ़ोन के गुमने या चोरी हो जाने को भले ही शत-प्रतिशत न रोक पाएँ, परंतु कुछ उपाय अपना कर उसे अतिरिक्त सुरक्षा कवच प्रदान कर सकते हैं, तथा उसमें मौजूद जानकारियों व डेटा को परिपूर्ण तरीके से सुरक्षित रख सकते हैं. आजकल के स्मार्टफ़ोनों/टैबलेटों का उपयोग सरकारी व कार्पोरेट सेक्टरों में भी कार्यालयीन व व्यवसाय संबंधी कार्यों के लिए धड़ल्ले से हो रहा है जिसमें गोपनीय जानकारियाँ भी होती हैं, अतः इन जानकारियों की पुख्ता सुरक्षा के इंतजाम इन स्मार्टफ़ोनों में भी होने लगे हैं. निम्न तरीके अपना कर आप अपने स्मार्टफ़ोन को कुछ आधारभूत किस्म की सुरक्षा तो दे ही सकते हैं. और उन्नत सुरक्षा के लिए विशिष्ट ऐप्प अथवा सुरक्षा वेबसाइटों की सहायता भी ले सकते हैं.

· अपने स्मार्टफ़ोन की स्क्रीन हमेशा लॉक कर रखें – अच्छा हो यदि डिफ़ॉल्ट स्वचालित लॉक का विकल्प एनेबल रहने दिया जाए, हाँ लॉक करने के लिए कंपनी की डिफ़ॉल्ट लॉक सुविधा का उपयोग न करें, बल्कि कस्टमाइज़ कर उसमें दिए गए उन्नत सुविधाओं का उपयोग करें. उदाहरण के लिए, यदि आपके स्मार्टफ़ोन में लॉक पैटर्न अथवा विशिष्ट टैप की सुविधा है, तो पिन नंबर या पासवर्ड के बजाए, उसका उपयोग करें और जटिल पैटर्न बनाकर उपयोग करें. इससे भले ही आपको नित्य के प्रयोग में थोड़ी असुविधा महसूस होगी, मगर सुरक्षा अधिक मिलेगी. नवीन, उन्नत स्मार्टफ़ोनों में सुरक्षा के लिए उपलब्ध फिंगरप्रिंट स्कैनर की सुविधा का उपयोग करें जो कि और भी अधिक प्रभावी होती है.

· अपने स्मार्टफ़ोन के डेटा व संपर्क जानकारी का बैकअप नियमित लें और अपने खाते से सिंक करते रहें. आमतौर पर आजकल हर स्मार्टफ़ोन के साथ आपको पर्याप्त क्लाउड स्टोरेज उपलब्ध होता है जिसका उपयोग आप कर सकते हैं.

· अपने स्मार्टफ़ोन को नियमित रूप से अपडेट करते रहें. अच्छा हो यदि अपडेट को स्वचालित होने दें. इससे आपके स्मार्टफ़ोन का सॉफ़्टवेयर हमेशा ताजा बना रहेगा और बग तथा सुरक्षा खामियाँ नियमित तौर पर दूर की जाती रहेंगी.

· जब उपयोग में नहीं हों तो ब्लूटूथ और वाईफ़ाई बंद कर रखें. इससे सुरक्षा तो मिलेगी ही, बैटरी भी अधिक चलेगी. असुरक्षित सार्वजनिक वाईफ़ाई का उपयोग यथासंभव न करें.

· अपने स्मार्टफ़ोन को एक और अतिरिक्त सुरक्षा घेरा प्रदान करने के लिए इंटरनेट से फाइंड माई फ़ोन (आईओएस- एप्पल) डिवाइस प्रबंधक (एंड्रायड) / एंटी-थैफ़्ट जैसी सुविधा का उपयोग करें. विंडोज, आईफ़ोन ब्लैकबेरी तथा एंड्रायड – सभी अच्छे प्रचलित प्लैटफ़ॉर्म के स्मार्टफ़ोनों में यह सुविधा आजकल मूलभूत रूप में उपलब्ध होती है. जिसे एनेबल करना होता है. उदाहरण के लिए, अपने एंड्रायड स्मार्टफ़ोन की सुरक्षा सेटिंग में जाकर डिवाइस प्रबंधक के जरिए इन सेटिंग को एनेबल करें – 1 – इस डिवाइस का दूरस्थ रूप में पता लगाएँ, 2 – दूरस्थ रूप से लॉक करने और मिटाने दें. इन सेटिंग को एनेबल करने के बाद यदि आपका स्मार्टफ़ोन कहीं गुम हो जाता है या खो जाता है तो आप अपने कंप्यूटर से गूगल मैप्स जैसी सुविधा की मदद से अपने स्मार्टफ़ोन का सटीक लोकेशन ट्रैस कर सकते हैं. हाँ, इस सुविधा के लिए अपने स्मार्टफ़ोन में लोकेशन सुविधा – जीपीएस - को भी एनेबल कर रखना होगा. साथ ही, यदि आपको ऐसा लगता है कि आप अपने स्मार्टफ़ोन को खो चुके हैं और उसके वापस मिलने की संभावना न के बराबर है तो आप उसे अपने कंप्यूटर से डिवाइस प्रबंधक के जरिए, रिमोट से ही लॉक कर सकते हैं और साथ ही उसके भीतर का पूरा डेटा डिलीट भी कर सकते हैं, और इस तरह आप अपने डेटा को गलत हाथों में जाने से बचा सकते हैं. बहुत सी मोबाइल सुरक्षा सॉफ़्टवेयरों में भी इस तरह की तथा और भी तमाम सुविधाएं मिलती हैं, जिन्हें अतिरिक्त सुरक्षा के लिए ऐप्प स्टोर से खरीद कर इंस्टाल किया जा सकता है.

· आजकल के सभी स्मार्टफ़ोनों में तमाम तरह की सुविधाओं का भंडार होता है. ये सुविधाएँ हमें ऐप्प के जरिए मिलती हैं. स्मार्टफ़ोन ऐप्प का संसार कुछ ऐसा हो चुका है कि आभासी तौर पर हर क्रिया और कर्म के लिए बाजार में कोई न कोई ऐप्प जरूर मौजूद है, और यदि नहीं है तो थोड़े समय बाद कोई न कोई ऐसा ऐप्प आ ही जाएगा. विंडोज, आईओएस, एंड्रायड, ब्लैकबेरी - हर प्लेटफ़ॉर्म पर लाखों की संख्या में ऐप्प मौजूद हैं, और दिनों दिन इनमें वृद्धि भी होती जा रही है. बहुत से ऐप्प आपके स्मार्टफ़ोन की सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकते हैं. अतः देख समझ कर जरूरी ऐप्प ही इंस्टाल करें और, कंपनी के भरोसेमंद ऐप्प स्टोर / साइट से ही ऐप्प इंस्टाल करें. यदि आपने अपने स्मार्टफ़ोन में गैर जरूरी ऐप्प भर रखे हैं तो उन्हें अनइंस्टाल कर लें.

· उच्च स्तर की सुरक्षा पाने के लिए नवीन, उन्नत स्मार्टफ़ोनों में मौजूद डेटा इन्क्रिप्शन की सुविधा का भी प्रयोग कर सकते हैं. इस विधि से आपके स्मार्टफ़ोन में जो भी डेटा संग्रहित होगा, वो एनक्रिप्टेड होगा और जब तक उसकी कुंजी तृतीय पक्ष के पास नहीं होगी, वह उसे देख भी नहीं पाएगा.

· स्मार्टफ़ोन की चोरी या उसे गुमने से रोकने के लिए क्या आप उसे अपने गले के पट्टे में टाँग कर घूमते हैं? यदि हाँ, तो आप कुछ दूसरे, कम हास्यास्पद उपाय भी आजमा सकते हैं. आपका मोबाइल फ़ोन सदैव आपके पास रहे और आपसे थोड़ा दूर होती ही अलार्म बजा दे तो कितना अच्छा हो? हाँ, यह संभव है. कीरिंग के आकार के वाईफ़ाई प्रॉक्सिमिटी फ़ॉब और टैग के जरिए यह संभव है. जब आप बार जाएं तो इन्हें चालू कर लें, और निश्चिंत हो जाएं. जब भी आपका स्मार्टफ़ोन आपसे एक फुट से अधिक दूर होने लगेगा, आपके कीरिंग में लगा फॉब अलार्म बजा देगा.

(कादम्बिनी जून 2015 अंक में पूर्व प्रकाशित)

आपने अपने फ़ोन पर कभी न कभी ऑनलाइन विज्ञापन देखे होंगे कि आपके फोन की मेमोरी कम हो गई है, फोन स्लो हो गया है - ठीक करें? पर वे सारे के सारे नकली होते हैं और आपको पेड ऐप्प पर ले जाकर छोड़ देते हैं जहाँ आपका कोई भला नहीं होता.

परंतु, अभी हाल ही में, लो एंड डिवाइस पर बेहद लोकप्रिय ब्राउजर "यूसी ब्राउजर" वाले आपके एंड्रायड फ़ोन के लिए एक नया, काम का ऐप्प लेकर आए हैं - यूसी क्लीनर.

यूसी क्लीनर हाई-एंड मोबाइल उपकरणों के लिए भले ही उतने काम का न हो, मगर लो-एंड मोबाइल उपकरणों को यह अच्छा खासा तेज और साफ-सुथरा बना सकता है.

एक बार जरूर ट्राई करें, और काम का हो तो रखें नहीं तो अनइंस्टाल कर लें.

एंड्रायड प्लेस्टोर पर जाएं और uc cleaner सर्च करें. कुछ ऐसा दिखेगा -

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यूसी क्लीनर क्लीन मेमोरी पर क्लिक कर इंस्टाल विकल्प चुनें. जल्द ही यह आपके मोबाइल उपकरण में इंस्टाल हो जाएगा.

आइए, देखते हैं कि यह क्या क्या कर सकता है -

यह आपके फ़ोन में टेम्प्रेरी बिना काम की फ़ाइलों को खोज कर उन्हें साफ कर सकता है -

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यह आपके फ़ोन की बैटरी के बारे में अतिरिक्त जानकारी दे सकता है -

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यह आपके फ़ोन के स्टोरेज के बारे में बता सकता है कि आपके एसडी कार्ड या फोन की सारी मेमोरी कौन सा ऐप्प खा रहा है -

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इससे आप फोन के अनावश्यक ऐप्प को अनइंस्टाल भी कर सकते हैं -

 

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यूसी क्लीनर की अतिरिक्त, काम की सेटिंग -

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यह आपके फ़ोन के डेटा के उपयोग के विवरण को भी बताता है -

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यह नित्य, सदैव काम पर रहता है. जब पहले से ही साफ सुथरा है, तो आज साफ करने को कुछ मिला ही नहीं!

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विंडोज़ कंप्यूटर - एक एचडीएमआई डांगल में. क्या इसे हम विंडोकास्ट नहीं कह सकते?

 

आपकी डिजिटल लाइफ स्टाइल में प्रगति की एक और रेखा खींच सकता है यह डिवाइस.

क्रोमकास्ट जैसे प्रकल्पों के आने और उनके हर तरफ धूम मचाने के बाद, तथा अरसे से लिनक्स जैसे अवतरणों के यूएसबी स्टिक में धड़ल्ले से चलने के बाद, और कोई हजार रुपल्ली (20 डॉलर) के एंड्रायड टीवी स्टिक के आने के बाद, आखिर विंडोज के कर्णधारों को इसकी सुध, आ ही गई. कुछ अरसा पहले ऐसा ही आधिकारिक विंडोज डांगल जारी किया जा चुका है और, यदि बाजार की गर्म खबरों पर भरोसा करें, तो इसे जल्द ही भारतीय बाजारों में यह पीसी-ऑन-स्टिक लांच हो सकता है.

 

क्या है इंटेल कंप्यूट स्टिक ( विंडोज पीसी स्टिक या डांगल) ?

क्रोमकास्ट के उलट, जो कि स्मार्टफ़ोन से जुड़कर नेट से केवल मीडिया स्ट्रीमिंग ही करता है, विंडोज पीसी स्टिक, एक पूरा का पूरा कंप्यूटर होता है जिसमें आपके टीवी को न केवल स्मार्ट बनाने की ताकत होती है, बल्कि इसमें एक अदद वायरलेस कीबोर्ड और माउस से जुड़कर आपके टीवी को पूरा का पूरा डेस्कटॉप कंप्यूटर बनाने की क्षमता होती है. कंप्यूटर चिप निर्माता इंटेल के सहयोग से इस स्टिक को बनाया गया है और अभी यह पूरे विंडोज 8.1 के साथ आता है.

 

अधिकांश भारतीय घरों में पीसी नहीं होता, जबकि टीवी जरूर होता है और अब तो अधिकांश घरों में एलसीडी और एलईडी टीवी अपना स्थान बनाने लगे हैं जिसमें एक अदद अतिरिक्त एचडीएमआई पोर्ट फालतू पड़ा होता है. विंडोज इसी फालतू एचडीएमआई पोर्ट पर निगाहें जमाए है. और हर टीवी युक्त घरों में विंडोज कंप्यूटरों की पैठ बनाने के प्रयास हैं. कीमत कोई 10,000 रुपए के आसपास होगी. हालांकि भारतीय खरीदारों के लिहाज से यह कीमत थोड़ी सी ज्यादा है. यदि इसे 5000 की सीमा से कम (4999 रुपए) कर दिया जाए, तो यह वाकई हिट हो सकता है.  शायद नए टीवी सेटों पर आपको ये कुछ आकर्षक ऑफर में भी मिले!

 

इंटेल कंप्यूट स्टिक के हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर

आकार में यह क्रोमकास्ट से थोड़ा सा बड़ा है, और यह भी चलने के लिए माइक्रो यूएसबी पोर्ट से पावर लेता है. हाँ, इसमें एक अतिरिक्त खूबी यह भी है कि इसमें माइक्रो एसडी कार्ड स्लॉट है जिसमें आप 128 जीबी तक की क्षमता का कार्ड लगा कर इसका भरपूर उपयोग कर सकते हैं. इसमें क्वॉड कोर इंटेल एटम प्रोसेसर है तथा 2 जीबी रैम है. और आंतरिक मेमोरी 32 जीबी है. इसमें वाईफ़ाई के अतिरिक्त ब्लूटूथ 4 कनेक्टिविटी भी है. इसमें अभी विंडोज 8.1 है, जो कि जाहिर है, विंडोज 10 पर मुफ़्त अपग्रेड हो जाएगा.

 

चलिए, इस स्टिक को पकड़कर एक बेहतर, चहुँओर कंप्यूटिंग और डिजिटल लाइफ की दुनिया में एक और कदम आगे बढ़ाएँ!

changing light bulbs no more

और, इसके साथ ही हो गया चेंजिंग लाइट बल्ब वाले चुटकुलों का अवसान!

भगवान इन चुटकुलों की आत्मा को शांति प्रदान करें.

या, शायद ये चुटकुले नए रूप में पुनर्जन्म लें?

आपको अपने विंडोज 7-8 कंप्यूटर के टास्कबार के दाएं कोने में गेट विंडोज 10 पॉप अप टैक्स्ट वाला विंडोज का चौखाना चिह्न दिखने लगा होगा. या यदि नहीं दीख रहा होगा, तो कुछेक दिनों में दिखने लगेगा. कुछ कुछ ऐसा -

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अमीर हो या ग़रीब, लीगल हो या इल्लीगल, यह विंडोज़ 10 अपग्रेड सभी के लिए मुफ़्त रिलीज किया जा रहा है. अलबत्ता, आपके विंडोज की लीगैलिटी जिस स्थिति में 7 -8 में है, वो उसी स्थिति में विंडोज 10 में भी रहेगा, मगर पूरा अपडेट और अपग्रेड होकर.

यदि आपके पास ऐसा कुछ संदेश प्रकट होता है, तो आप विकल्प चुन सकते हैं, अपग्रेड लेने या नहीं लेने का. यदि आपके पास बहुत पुराने एप्लिकेशन या हार्डवेयर नहीं हैं, तो आप आसानी से अपग्रेड लेने का विकल्प चुन सकते हैं. आरंभिक कुछ छोटी-मोटी परेशानियों, जो कि हर मेजर अपग्रेड में होता ही है, उम्मीद है कि यह अपग्रेड भी बेहतर अनुभव वाला होगा और आमतौर पर सभी प्रयोगकर्ताओं के लिए जरूरी और फायदेमंद होगा.

यदि आप हामी भरते हैं तो आपका विंडोज रिजर्व हो जाएगा - और कुछ इस तरह से एडवेयर प्रकट होगा -

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विंडोज 10 को आधिकारिक रूप से जुलाई 29 को जारी करने की घोषणा माइक्रोसॉफ़्ट ने की है. अपने पूर्व के व्यावसायिक कदमों के विपरीत, इस बार माइक्रोसॉफ़्ट ने विश्व के तमाम विंडोज 7 -8 कंप्यूटरों को निःशुल्क अपग्रेड करने की चतुराई दिखाई है, ताकि डेस्कटॉप कंप्यूटरों में उसकी बढ़त बनी रहे.

दरअसल, मोबाइल कंप्यूटिंग और एंड्रायड के जमाने में विंडोज के सिंहासन को सीधा खतरा पैदा हो गया है.

अब मेरी ही बात लें. साल-दो-साल पहले, जब मैं यात्राओं पर जाता था तो भारी भरकम विंडोज लैपटॉप लेकर जाता था. कुछ समय पहले टैबलेट लेकर जाने लगा. और अब तो मैं नेक्सस स्मार्टफ़ोन लेकर जाता हूँ, और साथ के लिए एक ब्लूटूथ मिनिएचर कीबोर्ड, जिसमें तमाम दूसरी सुविधाएं हैं जैसे कि लेज़र पाइंटर. मेरे पास विंडोज कंप्यूटर जरूर है, मगर अब वह प्राचीन कालीन कुछ एप्लिकेशन और हार्डवेयर को चलाने के काम में ही आता है. बाकी और कुछ नहीं. मेरा 99 प्रतिशत कार्य ब्राउज़रों और क्लाउड से ही हो जाता है - यानी बैकएण्ड में विंडोज है, लिनक्स है, मैक है या एंड्रायड, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.

देखते रहिए, आगे-आगे. होता है क्या. वैसे भी विंडोज 8 मोबाइल के कुछ संस्करणों को माइक्रोसॉफ़्ट कुछ निर्माताओं को एक तरह से निशुल्क ही बांट रहा है. शायद हमें अपना अगला नया विंडोज़ निशुल्क ही मिले, अब ये दीगर बात हो कि लेवाल ही उत्साह न दिखाएं!


मेरी जानकारी में नीरज जाट  साहसिक यात्रा करने वाले एकमात्र हिंदी ब्लॉगर हैं जिनके खाते में कई साहसिक यात्राएँ जुड़ी हैं.

साहसिक यात्राओं में तन-मन-धन तीनों की आवश्यकता होती है. आमतौर पर अंग्रेज़ी भाषी साहसिक यात्रा ब्लॉगरों को कई कंपनियाँ उनकी यात्राओं को प्रायोजित करती हैं, परंतु हिंदी भाषी ब्लॉगर की साहसिक यात्राओं को कोई प्रायोजन नहीं मिलता.

इसी बात को कहते हुए नीरज ने अपनी मार्मिक अपील अपने एक ब्लॉग पोस्ट में लिखी है.

यदि आप साहसिक यात्रा पसंद करते हैं, या यात्राएँ करना पसंद करते हैं तो उनकी यह पोस्ट अवश्य पढ़ें और नीरज की हौसला आफजाई करें.

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