गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

दुनिया में कहीं नहीं मिलती फोकट की दारू, क्या सही में फ्री है फ़ेसबुक फ्रीबेसिक्स?

फ़ेसबुक का फ्रीबेसिक्स का भ्रामक गोयबल्सिया अभियान जारी है.  आज भी अखबारों में पूरे दो पन्नों का विज्ञापन है. फ़ेसबुक के पास इफरात पैसा होने का यह दो पेजिया विज्ञापन सबूत है, और इस पैसे के दम पर लोगों को गुमराह करने की नाकाम कोशिश है. बड़ी ही सफाई से कॉपी राइटरों ने नैटन्यूट्रैलिटी का तोड़ डिजिटल इक्वैलिटी निकाला है. मगर फ़ोकट में फ़ेसबुक (और बंडल में एक दो और साइटें दे ) दे देने मात्र से क्या डिजिटल इक्वैलिटी मिल जाएगी? वॉट्स्एप्प में पिली पड़ी भारतीय जनता क्या इतनी बेवकूफ़ है?

शायद नहीं!

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व्यंज़ल

इंटरनेट के मैदान पर एक और सिक्स
लगाने की चाल है फ़ेसबुक फ्रीबेसिक्स

नैटन्यूट्रैलिटी का हमें क्या करना है
जब मुफ़्त में है फ़ेसबुक फ्रीबेसिक्स

दुनिया अब जल्द भूल जाएगी गूगल
इंटरनेट का मतलब फ़ेसबुक फ्रीबेसिक्स

दुनिया में नहीं मिलती फोकट की दारू
क्या सही में फ्री है फेसबुक फ्रीबेसिक्स

याहू से चला था रवि गूगल पे आया
खत्म करेगा सफर फेसबुक फ्रीबेसिक्स

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