टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

इंटरनेट मतलब फ्री-बेसिक्स!

फ़ेसबुक का और अधिक कमाई करने का महा विज्ञापन अभियान जारी है. आज तो मामला हाईप्रोफ़ाइल एनबीए (नर्मदा-बचाओ-आंदोलन) की तरह नजर आ रहा है.
फ़ेसबुक का भारतीय जनता को बेवकूफ़ बनाने (समझने?) और  नेटन्यूट्रैलिटी कार्यकर्ताओं का छीछालेदर करने का नया अभियान है ये -

फ़ेसबुक के मुफ़्त इंटरनेट के झांसे में न आएँ, कृपया!

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