टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

मुक्त स्रोत सॉफ़्टवेयरों के अच्छे दिन तो समझो आ ही गए!

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भारत सरकार ने सरकारी कार्यालयों में मुक्त स्रोत (ओपन सोर्स) सॉफ़्टवेयरों का उपयोग अनिवार्य कर दिया है. 

कोई तेरह वर्ष पहले, मुक्त स्रोत का लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम तथा ऐप्लिकेशन सूट हमने इंडलिनक्स परियोजना के तहत हिंदी भाषा (तथा अन्य भारतीय भाषाओं में) जारी किया था. भागीरथी प्रयास किए थे, जुनून की हद तक जाकर कार्य किये थे, परंतु कोई लेवाल नहीं था - मुफ़्त में भी!

कम से कम अब उस ओर लोगों की निगाहें तो पड़ेंगी ही.

भारत की केंद्रीय सरकार को साधुवाद, जिसने यह बहु प्रतीक्षित, कड़ा, विवेकपूर्ण निर्णय लिया - आप समझ सकते हैं - प्रोप्राइटरी सॉफ़्टवेयर विक्रेताओं की दशकों पुरानी पैठ व लॉबीइंग को धता बता कर यह निर्णय लिया गया है, जो निश्चय ही स्वागत योग्य है. आप समझ सकते हैं कि प्रोप्राइटरी सॉफ़्टवेयर विक्रेताओं के लिए केंद्र सरकार कितनी असहिष्णु हो गई है!

केंद्र सरकार को एक और काम तुरंत करना चाहिए. सीडैक जिस्ट के तमाम उत्पादों को मुक्त स्रोत में तत्काल जारी करना चाहिए. जनता के पैसे से बने उत्पादों का विक्रय किया जाता है जो किसी सूरत उचित नहीं है. सीडैक के उत्पादों के डाउनलोड के लिए बाबूगिरी किस्म की व्यवस्था है जिसमें लॉगिन करना होता है, तमाम एग्रीमेंट करने होते हैं आदि आदि इन्हें भी तत्काल खत्म किया जाए.

मुक्त स्रोत जिंदाबाद!

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