टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

केले किसिम किसिम के...

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उत्तर भारत में आमतौर पर चितरी केले ही बहुतायत में मिलते हैं, जो अत्यधिक मीठे होते हैं, और आमतौर पर उन्हें कैल्शियम कार्बाइड में पकाया गया होता है.

दक्षिण भारत में कई तरह के केले मिलते हैं. कुछ खट-मीठे तो कुछ बेहद मीठे. ऊपर जो हरे रंग के केले दिख रहे हैं, वे सर्वाधिक मीठे होते हैं.

ऊपर के चित्र में कोई छः किस्म के केले दिखाई दे रहे हैं.

मजे की बात यह है कि केले वहां पान के ठेलों आदि में भी मिलते हैं. यह चाय-पान की दुकान ही है. फलों के नाम पर केवल केले!

मुझे खासतौर पर लाल दिख रहे केले अधिक पसंद हैं. यह थोड़े महंगे मिलते हैं. यहाँ भोपाल में लाल केले के ऊपर टंगे छोटे केले किसी किसी  मॉल में तथा दक्षिणभारतीय-स्टोर में मिल जाते हैं. परंतु लाल केले आमतौर पर नहीं मिलते. एक बार मैं दक्षिण भारत की यात्रा से इन लाल केलों की पूरी शाखा ही ले आया था. शाखा में लगे रहने पर ये जल्द खराब नहीं होते. मैंने इन लाल केलों का पौधा उगाने की कोशिश भी की थी, परंतु बात नहीं बनी. शायद जलवायु की समस्या हो. छोटे केले यहाँ एक मित्र ने लगाए हुए हैं. अम्बिकापुर के जंगली इलाकों में इसी किस्म के जंगली छोटे केले पाए जाते हैं, जिनका रंग भीतर भी पीला होता है, और वे अधिक खट्टे होते हैं.

क्या आपने इन केलों के अतिरिक्त भी केले देखे या खाए हैं? यदि हाँ, तो हमें भी बताएँ!

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