रविवार, 23 अगस्त 2015

एक नर्ड (कंप्यूटर गुरू) से लिए गए साक्षात्कार से कुछ उद्धरण:

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प्र.: वास्तविक आनंद क्या है?

उ.: डिबगिंग.

 

प्र.: आपके स्वप्न क्या हैं?

उ.: एक खूबसूरत दिन जब आपकी अपनी शारीरिक आवश्यकताएँ भी बेमानी हो जाएँ और आप प्रोग्रामिंग के अलावा कुछ नहीं करें.

 

प्र.: जब आप प्रोग्रामिंग नहीं करते हैं तो क्या करते हैं?

उ.: उन चीज़ों को करता हूं जो मुझे यथासंभव प्रोग्रामिंग में वापस ले जाते हैं.

 

प्र.: यदि दुनिया में कम्प्यूटर नहीं होते?

उ.: काल्पनिक प्रश्नों के उत्तर नहीं होते – काल्पनिक उत्तर भी नहीं.

 

प्र.: आपने किस उम्र में प्रोग्रामिंग प्रारंभ किया?

उ.: काश मैं और पहले प्रोग्रामिंग प्रारंभ कर सकता.

 

प्र.: अपने एक सम्पूर्ण दिन की व्याख्या करेंगे?

उ.: प्रोग्रामिंग खाना, प्रोग्रामिंग पीना और हां, प्रोग्रामिंग सोना!.

 

प्र.: एक अच्छे प्रोग्रामर के क्या सीक्रेट हैं?

उ.: हमेशा दिल लगाकर प्रोग्राम करो!

 

प्र.: क्या आपको किसी से प्यार हुआ है?

उ.: हाँ, और मैं भी अपने कम्प्यूटर से बेहद प्यार करता हूँ.

 

प्र.: यदि आप कम्प्यूटरों की दुनिया में नहीं होते तो किस क्षेत्र में होते?

उ.: ओह! यह प्रश्न हमेशा से मुझे सताता रहा है. मैं इसका उत्तर नहीं दे सकूंगा. (आंखें डबडबा जाती हैं)

 

प्र.: आपके जीवन का दर्शन क्या है?

उ.: मैं प्रोग्रामिंग में यकीन करता हूं… हमेशा.

 

प्र.: अपने खाली समय में आप क्या करते हैं ?

उ.: प्रोग्राम लिखता हूँ. दूसरों के प्रोग्राम पढ़ता हूं.

 

प्र.: आपकी प्रेरणा कौन है?

उ.: बग्स. और वे हमेशा मुझे और ज्यादा संजीदगी से प्रोग्राम लिखने को प्रेरित करते हैं.

 

प्र.: प्रोग्रामिंग की परिभाषा देंगे?

उ.: प्रोग्रामिंग तो आपके दिल की आंतरिक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है जिसे आप सिंटेक्स, बूलिए, लूप, पाइंटर और ऐसे ही अन्यों के द्वारा समस्त विश्व को प्रस्तुत करते हैं.

 

प्र.: आपके कार्य की विशेषताएँ क्या हैं?

उ.: मैं बग मुक्त प्रोग्राम लिखना चाहता हूं. वास्तविक मनुष्यों के लिए वास्तविक प्रोग्राम.

 

प्र.: आप किसे पसंद करेंगे – बुद्धि या धन?

उ.: किसी को भी नहीं. मैं कम्प्यूटरों को पसंद करता हूँ. यदि फिर भी आप जोर देंगे तो मैं धनी होना पसंद करूंगा चूंकि फिर मैं बड़े पॉवरफुल और ताजातरीन कम्प्यूटर खरीद सकूंगा. और प्रोग्रामरों को हायर कर सकूंगा.

 

प्र.: आपके विचार में प्यार का बोध क्या हो सकता है?

उ.: प्यार तो मन की एक अवस्था है जिसमें हर वस्तु – अच्छी हो या बुरी अत्यंत प्रिय लगती है. उदाहरण के लिए, जब आप प्रोग्राम लिखते हैं तो प्रोग्राम के प्रथम कुछ पंक्तियों में ही जो बग निकल आता है – आपको वह अच्छा लगता है. मुझे तो लगता है कि हर किसी को अपने कम्प्यूटर से प्यार करना चाहिए.

 

प्र.: छींटे और बौछारें के बारे में आपके विचार?

उ.: शानदार. जब प्रोग्रामिंग के बीच कभी कोई ब्रेक मैं ले लेता हूँ तो यहाँ चुटकुले पढ़ता हूँ.

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