टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

May 2015

क्रोमकास्ट हिंदी में




हिंदी वालों को गूगल क्रोमकास्ट का उपयोग करने का एक बहाना और मिल गया है. क्रोमकास्ट हिंदी मय हो गया है.

इसकी सेटिंग में जाकर भाषा हिंदी सेट करें. आप देखेंगे कि महज कुछ ही महत्वपूर्ण भाषाओं के बीच हिंदी भी यहाँ शान से बैठी हुई है.

इसके बाद क्रोमकास्ट में आमतौर पर तमाम संवाद, सेटिंग व हेल्प आदि हिंदी में उपलब्ध होते हैं.
क्रोमकास्ट क्या क्या कर सकता है?

यह आपका भरपूर मनोरंजन कर सकता है. इसके अपने ऐप्प भी हैं जो आपका चौबीसों घंटे मनोरंजन करने को तैयार बैठे रहते हैं.

हाँ, इसके लिए एक अदद स्मार्टफ़ोन (एंड्रायड 4.4 या अधिक हो तो बढ़िया) और एक एचडीएमआई इनपुट वाला टीवी आवश्यक होता है. यदि आपके पास दोनों हैं (यदि स्मार्टटीवी है तब भी, ) तो इस डिवाइस पर खर्च किया जा सकता है. इसकी उपयोगिता अनंत है, जो आप पर निर्भर है कि आप इससे क्या क्या कर सकते हैं. हाँ, इसी तरह के सस्ते ईजैडकास्ट जैसे उपकरणों से बचकर रहें. वे आमतौर पर ज्यादा काम नहीं आते.

यहाँ, डिनर के साथ लिए जाने वाले जाम की बात नहीं हो रही है. 

दुनिया में भोपाल ही एकमात्र ऐसा शहर है जहाँ रात में, ऑफ पीक अवर में, जब जनता सो रही होती है, तब वाहनों का जाम होता है. 

दरअसल यहां बीआरटीएस कॉरिडोर बनाया गया है जिसमें बसें दिन में चलती हैं. अन्य वाहनों का इस लेन में प्रवेश वर्जित है . 

और रात में चूंकि बसें नहीं चलतीं, लिहाजा लेन खाली रहती थीं तो कुछ भाई लोग इस लेन में रेसिंग करने लगे. जाहिर है कुछ लोगों की मौत हो गई. 

अब, भोपाल की मूर्ख नौकरशाही ने नया, नायाब तरीका निकाला. बीआरटीएस लेन को रात ११ बजे के बाद चैनल गेट लगा कर बंद करना चालू कर दिया. 

है ना गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होने लायक कारनामा?
और हाँ, दुनिया में भोपाल ही एकमात्र ऐसा शहर होगा, जहाँ की सड़कों को सुरक्षा के लिहाज से रात में तालाबंद कर दिया जाता है! इस नायाब खोज के लिए तो यहाँ की नौकरशाही/अफसरशाही नोबुल पुरस्कार से सम्मान करने लायक है!

टेक्नोलॉजी की जय हो.
और, मैं बाल बाल बचा. ४के लेने ही वाला था, अब जब ५के आ गया है तो फिर इस पुराने ऑब्सलीट टेक्नोलॉजी को कौन पूछता है भला!

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यह तो ख़ैर एक अलग सा मसला है कि इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स और अंततः इंटरनेट ऑफ़ एवरीथिंग के जमाने में जब इंटरनेट के फ़ेसबुक पर तलाक होने लगे हैं, तो शादी ब्याह का मामला आमंत्रण-निमंत्रण से लेकर फेरे तक व्हॉट्सएप्प वेब स्ट्रीमिंग पर लाइव होगा, पार्टियाँ, पिज्जा हट और डोमिनोज़ के ‘30 मिनिट्स ऑर फ़्री’ के ऑनलाइन ऑर्डर से, अपने-अपने घरों के कम्फ़र्ट में होंगे, और शायद हनीमून भी लोकल लोकेशन में, खूबसूरत सेज के बाजू में 56 इंची टीवी सेट पर आ रहे वेनिस/स्विटज़रलैंड की खूबसूरत वादियों के यूट्यूब स्ट्रीमिंग के बीच ही होंगे. मगर अपने दुकालू के साथ मसला जरा दूसरे किस्म का रहा. 

इंटरनेट ऑफ़ एवरीथिंग के जमाने में, जब दुनिया की अधिकांश आबादी ने अपने आप को एक अदद स्मार्टफ़ोन और एक अदद इंटरनेट डेटा पैक से लैस कर लिया तो दुकालू ने सोचा कि वो भी क्यों पीछे रहे. नतीजतन उसने भी अपने इधर-उधर के बजट में कटौती की और अपने हिसाब से, इंटरनेट डेटा पैक युक्त एक बढ़िया स्मार्टफ़ोन ले ही लिया. अब बढ़िया स्मार्टफ़ोन खरीदने-बेचने का भी एक अलग मसला है. कंपनियाँ 100 का माल पाँच सौ, हजार, पचास हजार तक में बेचने का अपना-अपना स्मार्टनेस दिखाती हैं, और ग्राहक अपने हिसाब से इनके ट्रैप में फंसने-न-फंसने और एक-दूसरे-को-बताने-दिखाने का स्मार्टनेस दिखाते हैं. और, डेटापैक की तो पूछिए मत. जो जिस भाव से मिल रहा है ले लो – नहीं तो नेटन्यूट्रैलिटी के चक्कर में पता चलेगा कि आप तो बस फ़ेसबुक और ट्विटर में ही उलझ कर रह गए हैं – शायद रह ही गए हैं, है ना?

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चलिए, तो एक शानदार, खुशनुमा दिन, दुकालू, इंटरनेट वाला स्मार्टफ़ोन ले आया. यानी वह भी दुनिया के स्मार्ट लोगों में शामिल हो गया. दन्न से उसने फ़ेसबुक एकाउंट बनाया, दसबीस लाइक किए पचीस पचास फ्रेंड रीक्वेस्ट भेज दिए, और इंतजार खत्म हो इससे पहले ही किसी ने उसे पहले-पहल पसंद भी कर दिया और नेट पर वायरल हो रहे चुटकुले के एक पोस्ट को दुकालू को टैग भी कर दिया. दुकालू खुश हुआ और उसने पोस्ट को पढ़ना चालू किया – एक था हाथी और एक थी चींटी...

दुकालू ने अपना सिर खुजाया. इ का है साला. इ चुटकुला तो हमने अपने प्रायमरी क्लास में सुन रखा था. इ साला इंटरनेट पर, फ़ेसबुक पर भी आ गया. तो इहां भी यही चुटकुले बाजी चलती है का. चलो कोई बात नहीं. उसने ट्विटर की ओर रूख किया. ट्विटर ट्रैंड पर हैश टैग ट्रैंड कर रहा था हाथी. उसने क्लिक किया कि अब ये कौन सा हाथी है. एक दो लिंक खड़काने के बाद वही चुटकुला फिर नमूदार हो गया – एक था हाथी....

दुकालू ने किसी से व्हाट्सएप्प का सुन रखा था कि यह बहुत बढ़िया होता है. अपने स्मार्टफ़ोन में व्हाट्सएप्प इंस्टाल किया. सोचा इधर की दुनिया हाथियों से अलग होगी. पर जैसे ही व्हाट्सएप्प इंस्टाल हुआ, दनादन्न मैसेज अपडेट होने लगे. दुकालू का हर कॉन्टैक्ट, हर संपर्क, हर ग्रुप, मार्केट में नया आया, वही चुटकुला फारवर्ड मारने में लगा था – एक था हाथी...

दुकालू बोला – इ साला एही है इंटरनेट ऑफ़ एवरीथिंग. इंटरनेट के एवरीथिंग, एवरीवेयर में एक ही चुटकुला चलता है साला – एक था हाथी...

गुस्से में उसने अपना स्मार्टफ़ोन दीवार पर दे मारा. स्मार्टफ़ोन का नॉनडिस्ट्रक्टिव बॉडी और स्क्रैचप्रूफ़ ग्लास का तो कुछ बिगड़ा नहीं, अलबत्ता स्मार्टफ़ोन के जाने किस हिस्से पर टैप हो गया, और ताबड़तोड़ एक वीडियो डाउनलोड हो गया जिसमें एंकर एक नवीनतम चुटकुला सुना रहा था – एक था हाथी....

अब आपको हिंदी ओसीआर की सुविधा ऑनलाइन मिल गई है. वह भी बहुत ही उम्दा. गूगल डिस्क के सौजन्य से. यदि आपकी हिंदी की इमेज फ़ाइल या पीडीएफ़ फ़ाइल की गुणवत्ता अच्छी है तो आपको लगभग 99% शुद्धता का ओसीआर किया यूनिकोड (जैसे कि मंगल फ़ॉन्ट में ) टैक्स्ट मिल सकता है जिसका उपयोग आप अन्यत्र कर सकते हैं.

 

कैसे करें?

गूगल डिस्क (अंग्रेज़ी में गूगल ड्राइव) पर जाएं. आपका जीमेल खाता होना चाहिए. वहाँ नया पर क्लिक करें.

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अपनी हिंदी की इमेज फ़ाइल या पीडीएफ फ़ाइल अपलोड करें.

अपलोड होने के बाद उस इमेज पर दायाँ क्लिक करें, इसमें खोलें > गूगल दस्तावेज़  चुनें.

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आपकी इमेज फ़ाइल गूगल दस्तावेज़ के साथ खुलेगी. इमेज / पीडीएफ फ़ाइल के नीचे हिंदी टैक्स्ट यूनिकोड में आपको मिलेगा. इंस्टैंट. जैसा चाहें उपयोग करें.

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ऊपर इमेज फ़ाइल है, नीचे यूनिकोड में टैक्स्ट.

 

रचनाकार पर यहाँ - http://www.rachanakar.org/2015/05/lav-par-diskaunt.html प्रकाशित आलोक पुराणिक का व्यंग्य - लव पर डिस्कांउट इसी विधि से डिजिटाइज कर प्रकाशित की गई है.

 

बेस्ट, हिंदी ओसीआर!

यह तो, निश्चित तौर पर अच्छे दिनों के संकेत हैं. अब भले ही कर्म किसी का हो,  तकदीर किसी की!

जिस देश में अंडरफ्रिक्वेंसी लोडशेडिंग होती थी,  और ओवरलोड से नेशनल ग्रिड फेल होने की घटनाएं आम थीं, वहाँ यह हो रहा है तो वाकई ईश्वर का चमत्कार है! 

टेक्नोलॉजी की जय हो!
बीस साल पहले का मेरा कंप्यूटर ४० हजार रुपये से अधिक का था जिसे मैंने अपने जीपीएफ खाते से ऋण लेकर खरीदा था. उसमें उस समय के हिसाब से टॉप स्पेसिफिकेशन था ३३ किलोहर्त्ज का प्रोसेसर और १६ मेगा हर्ट्ज का रैम. और हार्ड डिस्क? १ जीबी.

और अब ये. धन्य धन्य.

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गीत संगीत के दीवानों के लिए एक नया चैनल - इनसिंक.

 

अगर आप मेरी तरह गीत-संगीत के दीवाने हैं, तो अब तक इनसिंक के बारे में जान ही चुके होंगे, और शायद सप्रयास यह चैनल लगवा भी चुके होंगे. यदि नहीं, तो आइए, इसके बारे में कुछ जानकारी लें कि क्यों यह नया चैनल आपकी गीत-संगीत की दीवानगी में एक नया आयाम जोड़ने की क्षमता रखता है.

पहली बात - भारत में जितने भी गीत-संगीत के चैनल हैं, वे सभी अपने दर्शकों को मूर्ख समझते हैं. वे ज्यादातर तो प्रोमो गाने ही बजाते-दिखाते हैं, और उनका संग्रह बेहद सीमित होता है, जिसमें वे बारंबार एक ही किस्म के कंटेंट दिखा-दिखा कर दर्शकों को सड़ा डालते हैं. एक संगीत के चैनल में हर दूसरे घंटे चिकनी चमेली दिखता है. ऊपर से इन चैनलों में ध्वनि की क्वालिटी मोनो / 18-20 केबीपीएस होती है, क्योंकि सेटेलाइट चैनल अधिकाधिक न्यूज़ चैनल भरने के चक्कर में आवाज की गुणवत्ता को मार ही डालते हैं. ऐसे में, शास्त्रीय संगीत आधारित, भारत का यह पहला (और शायद अब तक का अकेला?) चैनल है, जिसमें इस किस्म की समस्या अभी नहीं दिखती है. इसकी सलाहकार समिति में पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, उस्ताद राशिद खान, नीलाद्री कुमार, पंडित विजय घाटे और पंडित राजन साजन मिश्र जैसे लोग हैं तो लगता है कि यह अन्य चैनलों से भिन्न ही बना रहेगा.

दूसरी बात - इसमें शास्त्रीय गीत-संगीत-नृत्य की चुनिंदा प्रस्तुतियाँ न केवल भारतीय, बल्कि पूरे विश्व से संकलित होती हैं जो लाजवाब, मनोरंजक तो होती ही हैं, शिक्षाप्रद भी होती हैं.

तीसरी बात - मैं इसे कोई महीने भर से सुन-देख रहा हूँ और इसके गीत संगीत की प्रस्तुति में रिपीटीशन भी कम है, और चूंकि चैनल नया है तो विज्ञापन भी नहीं के बराबर.

और, सामग्री ऐसी कि आप चौबीसों घंटे सुनते रह सकते हैं.

कुछ झलक पाने के लिए इसका यू-ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCLb7GBAWxARQDKAiflF9OVw देख सकते हैं

 

इसमें किस तरह के प्रोग्राम आते हैं इसकी झलक आप इसके कार्यक्रम शेड्यूल से देख सकते हैं - http://www.insyncmusic.tv/schedule

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इनसिंक - शानदार, लाजवाब, मनोरंजक, शिक्षाप्रद - चौबीसों घंटे बेहतरीन संगीत.

धन्यवाद इनसिंक! हमारी संगीतमय दुनिया में और सरगम भरने हेतु!

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