टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

November 2014

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नया गूगल हिंदी इनपुट जिसे एंड्रायड स्मार्टफ़ोनों तथा टैबलेट के लिए गूगल प्लेस्टोर पर जारी किया गया है, उसमें अब हिंदी हस्तलेखन / हस्तलिपि पहचान की सुविधा आ गई है.

इसके माने क्या हैं?

इसका अर्थ है कि अब आप अपनी उंगली से या स्टायलस या नोट-2 जैसे उपकरणों में उपलब्ध डिजिटल पेन की सहायता से टचस्क्रीन पर हिंदी में लिख सकते हैं और वह डिजिटल फ़ॉर्म में अपने आप टाइप होता जाएगा. कुछ समय पहले इसमें बोलकर लिखने की सुविधा मिली थी. एक तरह से अब यह एक परिपूर्ण हिंदी इनपुट औजार हो गया है. यानी, पारंपरिक कीबोर्ड की छुट्टी.

 

मैंने थोड़ा सा त्वरित उपयोग किया तो पाया कि यह वाकई आपके टेढ़ेमेढ़े हस्तलेख को भी पहचानने की क्षमता रखता है. हाँ, यदि शब्द लिखने से पहले शिरोरेखा खींच लें तो परिणाम बढ़िया मिलता है. साथ ही, जैसा कि स्क्रीनशॉट में दर्शित है, आपको पूरा शब्द लिखने की भी जरूरत नहीं. प्रेडिक्टिव टैक्स्ट भी बढ़िया काम करता है.

 

इस नए संस्करण में और भी सुविधाएँ हैं -

 

- नया इंटरफ़ेस

- हिन्दी हस्तलिपि

- वॉइस इनपुट

- हिंग्लिश शब्दकोश, जो उपयोगकर्ता द्वारा अंग्रेज़ी / हिंग्लिश में लिखते समय हिंग्लिश शब्दों के सुझाव देता है

- व्यंजन / स्वर के मिश्रित स्वरूपों का गतिशील परिवर्तन: हिन्दी कीबोर्ड में जब उपयोगकर्ता कोई व्यंजन लिखता है, तो शीर्ष पंक्ति में स्वर, व्यंजन/स्वर के मिश्रित स्वरूपों में परिवर्तित हो जाते हैं

- इमोजी कीबोर्ड

- टैबलेट पर नया हिन्दी कीबोर्ड

- अधिक सटीक लिप्यंतरण और योग्य हिन्दी सुझाव

 

इंस्टाल करने के बाद इसकी सेटिंग कैसे करें :

- Android 5.x और इसके बाद के संस्करणों में:
सेटिंग -> भाषा और इनपुट खोलें, “कीबोर्ड और इनपुट विधियां” अनुभाग के अंतर्गत, वर्तमान कीबोर्ड पर जाएं-> कीबोर्ड चुनें -> Google हिन्दी इनपुट चुनें इनपुट -> भाषा और इनपुट पर वापस आएं -> वर्तमान कीबोर्ड पर जाएं -> हिंग्लिश और हिन्दी Google हिन्दी इनपुट चुनें
इनपुट बॉक्स में टाइप करते समय आप स्क्रीन के निचले दाएं कोने पर कीबोर्ड आइकन पर क्लिक करके डिफ़ॉल्ट इनपुट विधि भी बदल सकते हैं.

- Android 4.x में:
सेटिंग -> भाषा और इनपुट खोलें, “कीबोर्ड और इनपुट विधियां” अनुभाग के अंतर्गत, Google हिन्दी इनपुट चेक करें, फिर डिफ़ॉल्ट क्लिक करें और “इनपुट विधि चुनें” डायलॉग. में “हिन्दी” चुनें
इनपुट बॉक्स में टाइप करते समय आप सूचना क्षेत्र में “इनपुट विधि चुनें” का चयन करके भी डिफ़ॉल्ट इनपुट विधि बदल सकते हैं.

 हिंग्लिश, हिन्दी या हस्तलिपि कीबोर्ड को कैसे सक्षम/अक्षम करें?
सेटिंग->भाषा और इनपुट->Google हिन्दी इनपुट->कीबोर्ड पर जाएं, कीबोर्ड प्रकार चुनें अनुभाग के अंतर्गत, अपना इच्छित कीबोर्ड चुनें.

कीबोर्ड थीम कैसे बदलें?
सेटिंग->भाषा और इनपुट->Google हिन्दी इनपुट->कीबोर्ड->कीबोर्ड थीम में अपनी इच्छित थीम चुनें.

--.

इस प्रोग्राम का उपयोग कैसे करें?

हिन्दी लिप्यंतरण (ट्रांसलिट्रेशन)
- लिप्यंतरण मोड चालू/बंद करने के लिए अंग्रेज़ी कीबोर्ड पर बटन “a->अ” को टॉगल करें.
- लिप्यंतरण मोड में आप अंग्रेज़ी वर्णों में हिन्दी शब्द लिख सकते हैं और एप्लिकेशन उन्हें हिन्दी में रूपांतरित कर देगा
- उदाहरण के लिए “hindi” लिखें और फिर आपको सूची से शब्द हिंदी प्राप्त होगा.

अंग्रेज़ी
- अंग्रेज़ी कीबोर्ड पर लिप्यंतरण मोड बंद करके (“a->अ” बटन दोबारा दबाकर), आप अंग्रेज़ी में लिख सकते हैं

हिन्दी कीबोर्ड
- अंग्रेज़ी से हिन्दी कीबोर्ड के बीच स्विच करने के लिए ग्लोब बटन को टॉगल करें
- व्यंजन लिखने के बाद स्वर स्वचालित रूप से मात्रा में परिवर्तित हो जाते हैं.
- वर्णों के परिवर्तित रूप (स्वर और व्यंजन) लिखने के लिए वर्णों को लंबे समय तक दबाएं. उदाहरण के लिए, “ई” को लंबे समय तक दबाए रखकर आप “ई” या “ी” लिख सकते हैं, “क”को लंबे समय तक दबाए रखकर आप क, कं, क्र या र्क लिख सकते हैं.

इसे अपने एंड्रायड मोबाइल / टैबलेट पर डाउनलोड करने के लिए प्ले स्टोर पर Google Hindi Input सर्च करें या फिर निम्न कड़ी पर जाएं -

https://play.google.com/store/apps/details?id=com.google.android.apps.inputmethod.hindi

विंडोज़ विस्टा की याद होगी आपको. एक असफल ऑपरेटिंग सिस्टम अपग्रेड.

एंड्रॉयड लॉलीपॉप भी विस्टा का भाई निकला. शुरुआत में इसके अपग्रेड रिलीज को किन्हीं ज्ञात वाईफाई बग के कारण आगे खिसकाया गया और अंततः जब अपग्रेड आया है तो कई क्षेत्रों से समस्याओं की रिपोर्टें आ रही हैं.

मेरे स्वयं के, नेक्सस ५ में एयर ऑडियो और स्ट्रीएम्बल्स जैसे महत्वपूर्ण ऐप्प या तो नहीं चल रहे या समस्या पैदा कर रहे हैं.

भारत में जोर शोर से एंड्रॉयड वन नाम से लॉलीपॉप युक्त जो स्मार्टफोन जारी किया गया था उनमें भी तमाम समस्याएं थीं और जिन्होंने इसे खरीदा है वे बुरी तरह से पछता रहे हैं.

बहरहाल, संतोष इस बात का है कि सारी समस्याएं सॉफ़्टवेयर की हैं जिन्हें दूर किया जा सकता है.

अर्द्धपारदर्शी परिधानों और रत्नजटित-प्लेटिनम-आभूषणों से सुसज्जित परियों का नृत्य चल रहा था और नेपथ्य में घंटियों की सुमधुर स्वर लहरियां बज रही थीं. धीरे-धीरे घंटियों की सुमधुर स्वर लहरियां तेज होती गईं और अंततः कर्कश स्वर में बदल गईं और, साथ ही, इधर जब मादक परियां भी धुंधलके में गुम हो गईं तब थोड़ा सा होश आया. घंटियों का कर्कश स्वर मेरे स्मार्टवॉच से निकल रहा था जिसमें मैंने सुबह साढ़े पाँच बजे का अलार्म सेट किया हुआ था. धत् तेरे की! यह भी कोई वक्त होता है सुबह जागने का? सर्वांगसुंदरी परियों का सान्निध्य जाने अब फिर कब हासिल हो!

बहरहाल, मैंने अपने स्मार्टवॉच के उस कर्कश (हाँ, सुबह सुबह जागते समय सुमधुर घंटियों की आवाजें भी कर्कश ही लगती हैं!) अलार्म को दूर से ही, जेस्चर कंट्रोल से बंद किया. मुझे आज अपनी यात्रा शुरू करनी थी, जिसके लिए मेरे स्मार्टफ़ोन का उतना ही स्मार्ट कैलेंडर पिछले पंद्रह दिनों से मुझे स्मार्ट बनाए दे रहा था, यह बता-बता कर कि भइए, इस तारीख को तुम्हारी एक यात्रा है और उसके लिए न केवल तुम्हें तैयार रहना है, बल्कि तैयारी भी करनी है. तो, मैंने तैयारी पहले ही कर ली थी – टिकट स्मार्टफ़ोन में स्मार्ट तरीके से ईमेल व पीडीएफ़ में क्यूआर कोड के साथ पहले से ही सहेजे जा चुके थे. प्रिंटेड टिकट को हमने स्मार्ट तरीके से अलविदा जो कर दिया था.

तय समय पर जीपीएस तथा ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम सहित एक स्मार्ट टैक्सी घर के दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई. इसके लिए मेरे स्मार्टफ़ोन के उतने ही स्मार्ट ऐप्प ने पहले ही चेता दिया था कि यदि आपने पहले से टैक्सी बुक नहीं की तो समय पर अपनी उड़ान पकड़ने के लिए आपको समस्या आ सकती है – और कोई आधा दर्जन टैक्सी सेवा प्रदाताओं में से खोज-खंगाल कर सबसे सस्ती और सबसे अच्छी सेवा का विकल्प पेश किया था, जिसे नजरअंदाज करना कोई स्मार्ट बात नहीं होती. और, बताने की जरूरत नहीं कि टैक्सी का किराया नेटबैंकिंग से बुकिंग करते समय ही अदा करने की स्मार्टनेस भी दिखानी ही थी, क्योंकि इसमें कोई बीस प्रतिशत छूट जो मिलनी थी. स्मार्ट सोच, स्मार्ट गेन!

घटना-रहित उड़ान पूरी कर समय पर होटल पहुंच गए क्योंकि रनवे पर न तो भैंस मिली, न कुत्ते व पक्षियां. होटल का स्मार्ट सिस्टम अपने स्वागत के लिए पहले ही तैयार था, क्योंकि कमरे की बुकिंग पहले से ही कर रखने की स्मार्टनेस हमने जो दिखाई थी. कमरे की पारंपरिक चाबी के बजाय हमें स्मार्ट कार्ड थमाया गया, जिसका उपयोग करने के लिए, जाहिर है, अतिरिक्त स्मार्टनेस की आवश्यकता होती थी. कमरे का दरवाजा खोलने के लिए उसमें लगे स्मार्ट-लॉक में इस स्मार्ट कार्ड को स्वाइप करने पर दरवाजा खुलता था. कमरे की बिजली अबाधित चले, उसके लिए स्मार्ट कार्ड को एक निश्चित खांचे में सदैव रखे रहना होता था. नाश्ते, भोजनादि के लिए होटल के रेस्त्रां में यह स्मार्टकार्ड स्वाइप होते ही आपके होटल बिल में राशि जोड़ देता था, जो चेकआउट के समय उतने ही स्मार्ट तरीके से आपके खाते से अपने-आप ही राशि जमा कर लेने वाला था.

चूंकि शहर बड़ा था, और यहाँ उतने ही बड़े मॉल थे, अतः कुछ खरीदारी करने का सोचा गया. एक बड़े मॉल पर पहुँचे तो वो स्मार्ट का बाप निकला. प्रवेश द्वार पर अनावश्यक रूप से (हमें पहले से पता है, हम भी स्मार्ट हैं!) यह बताया गया कि यदि आपके स्मार्टफ़ोन में एनएफसी है तो उसे चालू कर लें, आपको बड़ा स्मार्ट अनुभव मिलेगा. ग़नीमत यह थी कि यह नहीं कहा गया कि बिना एनएफसी स्मार्टफ़ोन वाले ग्राहक, जो स्मार्ट नहीं हैं, कृपया बाहर ही रहें. तो, एनएफसी की कृपा से उस मॉल में जब, जिधर से गुजरे, उपभोक्ता सामानों की नई-नई रेंज, उसमें आकर्षक छूट आदि आदि के बारे में दनादन संदेश अपने स्मार्टफ़ोन में आने लगे. अब जब नए सामान दिखें, उनमें आकर्षक छूट मिले, तो भले ही आवश्यकता हो न हो, आदमी को इन्हें खरीद लेने की स्मार्टनेस तो दिखानी ही होती है. लिहाजा, जब मैं भी मॉल से बाहर निकला तो थोड़ा और स्मार्ट होकर निकला – यानी मेरे हाथ में तीन-तीन बड़े बैग थे – सामानों से भरे हुए! और, आपको बताता चलूं कि इन सामानों को अपने बैग में रखते-रखते ही मैंने अपने स्मार्टफ़ोन को टैप कर तुरंत भुगतान भी करते रहने की शानदार स्मार्टनेस दिखाई थी, इस वजह से बिल काउंटर पर लंबी लाइन में लगना ही नहीं पड़ा. वैसे, वस्तुतः बिल काउंटर पर कोई लाइन ही नहीं थी, हर कोई अपने स्मार्टफ़ोन को टैप करने में लगा था – बिल देना हो या न देना हो!

घर वापसी की यात्रा भी कोई कम स्मार्ट नहीं थी, जिसकी चर्चा फिर कभी. अभी तो आप यह बताएं कि मेरे इस संस्मरण को पढ़कर आप थोड़े बहुत स्मार्ट हुए भी या नहीं?

कोई छः वर्ष पूर्व, स्थानीयकरण में गुणवत्ता और मानकीकरण के उद्देश्य से हिंदी भाषा में प्रारंभ किया गया फ़्यूल नामक यह छोटा सा प्रयास अब तक 60 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं और विभिन्न मॉड्यूलों में विस्तृत हो चुका है, जिसकी तो कल्पना नहीं ही थी. और इसका विस्तार जारी है. इन पंक्तियों के लिखते समय जर्मनी भाषा के भी इस आयोजन में जुड़ने की खबरें आ रही हैं.

स्थानीयकरण में गुणवत्ता और मानकीकरण कितना आवश्यक है, यह आप नीचे दिए गए स्क्रीनशॉट से स्वयं समझ सकते हैं. ये स्क्रीनशॉट नवीनतम एंड्रायड फ़ोन के आधिकारिक हिंदी (नेक्सस 5 पर हिंदी इंटरफ़ेस) से लिए गए हैं. साथ ही, यदि आप गूगल मैप्स का उपयोग हिंदी में करते आ रहे हों तो शायद आपको पता हो कि पूर्व में यह हिंदी में गूगल मानचित्र कहलाता था, फिर इसे बीच में गूगल नक्शे कहा जाने लगा और अभी अभी इसे फिर से गूगल मानचित्र कहा जाने लगा है. यदि मानकीकरण हो, तो ऐसी समस्याओं से दूर रहा जा सकता है.

स्थानीयकरण में गुणवत्ता और मानकीकरण को बढ़ावा देने और उसे चहुंओर विस्तार देने के उद्देश्य से फ़्यूल गिल्ट (FUEL - Frequently Used Entries in Localization तथा GILT - Globalization, Internationalization, Localization and Translation) संगोष्ठी का आयोजन पिछले दिनों यशदा (यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन प्रबोधिनी), पुणे में हुआ. आयोजन की शुरुआत डॉ विजय भाटकर के दिलचस्प उद्बोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने भारत के प्रथम सुपर कंप्यूटर के निर्माण के समय के अपने अनुभवों को साझा किया. स्थानीयकरण से जुड़े व इतर क्षेत्र के कई पंडितों ने भी इस द्विदिवसीय आयोजन में अपने विचार रखे. समानांतर सत्र में कई वर्कशॉप भी चले.

इस आयोजन की उपलब्धि रही – फेलिक्स द्वारा फ़्यूल एग्रीकल्चर मॉड्यूल का आरंभिक संस्करण जारी करना तथा रविकांत द्वारा प्रस्तावित फ़्यूल फ़िल्म मॉड्यूल की सशक्त भूमिका पेश करना.

इस बेहद सफल आयोजन के पीछे राजेश रंजन, चंद्रकांत धूतामल, अंकित कुमार पटेल, मनोज गिरी, प्रवीण सातपुते समेत तमाम अन्य लोगों का सक्रिय, समर्पित भाव से सहयोग रहा.

उम्मीद करते हैं कि फ़्यूल अपने मकसद में कामयाब होगा, और आशा करें कि हमें नीचे दिए गए स्क्रीनशॉट जैसे अनुभव भविष्य में न हों!

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आपके एंड्रायड (साथ ही एपल के भी, विंडोज पर तो पहले से था) उपकरणों – यानी स्मार्टफ़ोनों व टैबलेटों के लिए माइक्रोसॉफ़्ट ने अपने ऑफ़िस सूट का ऐप्प निशुल्क उपयोग के लिए जारी कर दिया है.

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आइए, देखें कि इसमें हम हिंदी वालों के लिए क्या सुविधा है.

 

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ठीक है, हम क्लाउड के जरिए अपने कंप्यूटर, टैबलेट और स्मार्टफ़ोन सभी में अपना दस्तावेज़ काम में ले सकते हैं. परंतु केवल docx फ़ार्मेट में सहेजे गए. doc फ़ाइल को यह ऐप्प काम में नहीं ले सकता! चलिए, फिर भी कोई बात नहीं, आगे बढ़ते हैं -

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आपके पास विंडोज लाइव का खाता होना चाहिए. नहीं है तो एक निशुल्क बना सकते हैं.

 

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वाह, यह सेवा शर्तें पृष्ठ तो हिंदी में बढ़िया दिख रहा है. चलिए आगे देखें -

 

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ठीक है, एक नया दस्तावेज बनाते हैं.

 

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अरे! यह क्या? संपादन खिड़की में तो अर्धाक्षर सही नहीं दिख रहे. धत्तेरे की!

 

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फ़ॉन्टों में रंग रोगन तो बढ़िया कर सकते हैं.

 

 

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चलिए इस माइक्रोसॉफ़्ट में लिखे माल को दूसरे ऐप्प में खोलते हैं.

 

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गूगल डॉक में बढ़िया दिख रहा है.

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क्विक ऑफ़िस में भी बढ़िया दिख रहा है.

 

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अरे! कहीं अन्यत्र बनाए गए हिंदी सामग्री को भी माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस एंड्रायह ठीक से प्रदर्शित नहीं कर पाता.

 

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एक्सेल में भी यही हाल है.

 

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इस फ़ाइल को सहेजने का संवाद तो ठीक है. माने सिस्टम में समस्या नहीं है, बल्कि माइक्रोसॉफ़्ट के फ़ॉन्ट रेंडरिंग में समस्या है.

यानी जब तक इस बग को ठीक नहीं कर लिया जाता, ये मुफ़्त का माल भी हमारे किसी काम का नहीं!

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बोस साउंडटच वाई-फ़ाई म्यूज़िक सिस्टम

जब मैंने विनीत कुमार के फ़ेसबुक स्टेटस पर यह पढ़ा -

“...लेकिन कभी तो विचार कीजिये कि जिस रेडियो को टीवी और इन्टरनेट के प्रभाव के तहत कबाड़ घोषित कर दिया गया, जो माध्यम rj की झौ-झौ करने के कारण बदनाम हो गया, रिश्तेदारों की जो भाषा विस्थापन के कारण विलुप्त सी होने लगी, उसे इस शख्स ने कैसे गली की दूकान की तरह फैला दिया..आप उस भाषा में कब बात करेंगे जिससे धंधे के चमकते रहने के बावजूद आत्मीय होने,जुड़ने का एहसास पैदा हो,लतियन जोन में रहकर भी कस्बे की बोली निकाल सकें...”

तो बरबस ही मेरा ध्यान मेरे नए नवेले वाई-फ़ाई (कृपया ध्यान दें, हाई-फ़ाई – यानी हाई डेफ़िनिशन नहीं) रेडियो पर ‘प्लेनेट रेडियो सिटी फ़न का एंटीना’ से स्ट्रीम हो रहे (माने कि, इंटरनेट से बज रहे) हनी सिंह के वाहियात, बेसुरे और शोर भरे रैप पर गया और मैंने तुरंत ही वह चैनल बदल दिया और इंटरनेट पर मौजूद हजारों-हजार (जी, हाँ!) रेडियो चैनलों में से एक, अपना पसंदीदा – ‘इंस्ट्रूमेंटल हिट्स’ लगा लिया, जहाँ फ्रैंक सिनात्रा का एक शानदार संयोजन बज रहा था.

वैसे, पारंपरिक रेडियो (माने एएम और एफएम) की बातें करें तो विनीत कुमार का कहना एक हद तक सही है कि टीवी और इंटरनेट के प्रभाव से वह कबाड़ हो गया है, और आरजे के झौं-झौं से बदनाम हो गया है. परंतु रेडियो का एक दूसरा अवतार भी आ चुका है, और क्या ख़ूब आया है. दरअसल एक तरह से रेडियो का कायाकल्प हुआ है और अब यह नए अवतार, नए रूप में आपके घर में, और आपके पॉकेट में (स्मार्टफ़ोन के जरिए) आकर आपका चौबीसों घंटे मनोरंजन करने को तैयार है. जहाँ सुनने के लिए आपके पास महज दर्जन भर नहीं, बल्कि हजारों हजार चैनल हैं जिनमें से सदैव स्ट्रीम हो रहे संगीत का मजा हर कहीं ले सकते हैं – जी, हाँ, बाथरूम में भी. बस, शर्त यह है कि आपके वाई-फ़ाई रेडियो को इंटरनेट की गति जरा ठीक ठाक मिले.

भूमिका जरा ज्यादा ही सौंदर्यात्मक हो गई? तो चलिए, वापस तकनीकी भाषा में लौट आते हैं. वैसे तो इंटरनेट रेडियो को आपके कंप्यूटर और इंटरनेट से जुड़े किसी भी उपकरण – जैसे कि आपके स्मार्टफ़ोनों / टैबलेटों पर अवतरित हुए एक अरसा हो गया, मगर सैकड़ों हजारों चैनलों के उपलब्ध होने के बावजूद इसे लोकप्रियता इस लिए नहीं मिली कि एक तो आपको इन्हें चलाने के लिए कंप्यूटिंग उपकरणों की आवश्यकता होती थी, दूसरे, इसके लिए अच्छी गुणवत्ता का ब्रॉडबैंड इंटरनेट भी चाहिए, और वह भी अनलिमिटेड किस्म का – क्योंकि इंटरनेटी रेडियो में अच्छी गुणवत्ता का संगीत सुनने के लिए न्यूनतम 128 केबीपीएस गति की स्ट्रीमिंग चाहिए. अब जब ब्रॉडबैंड इंटरनेट की पहुँच हर जगह हो रही है तो स्ट्रीमिंग रेडियो के साथ वाई-फ़ाई रेडियो सेटों का जमाना भी अब निकट ही है समझिए, जहाँ न तो पसंदीदा संगीत का टोटा होगा और न ही किसी आरजे की घटिया चुटकुलों की झौंझौ बरसात होगी.

तो, यदि आपके पास बढ़िया अनलिमिटेड ब्रॉडबैंड है (वाई-फ़ाई हो तो क्या कहने!, यूं 3 जी भी चलेगा, और 4जी तो दौड़ेगा) और यदि आप रेडियो सुनने और खासकर तमाम तरह के संगीत सुनने वाले मेरे जैसे दीवाने हैं तो आपके लिए कुछ विकल्प पेश हैं –

आपके पीसी – यानी कंप्यूटर/लैपटॉप/टैबलेट आदि के लिए:

आप इंटरनेट रेडियो को यहाँ दर्जनों तरीकों से चला सकते हैं, जैसे कि विविध भारती को यहाँ (ऐसे और भी लिंक हैं जिससे विविध भारती को इंटरनेट से सुना जा सकता है) क्लिक कर अपने ब्राउज़र से सुन सकते हैं, परंतु सबसे आसान है – वी-ट्यूनर की साइट पर यहाँ जाएं और पसंदीदा रेडियो पर क्लिक करें और उसके प्लेलिस्ट को अपने विनएम्प / विंडोज मीडिया प्लेयर / क्लासिक प्लेयर या एआईएमपी3 प्लेयर से चलाएं.

आपके स्मार्ट टीवी / स्मार्टफ़ोन आदि के लिए:

ऐप्प/प्ले स्टोर में रेडियो (radio) से खोजें और अपना पसंदीदा ऐप्प चुनें. जैसे कि वीट्यूनर या ट्यूनइन रेडियो. ट्यूनइन रेडियो में वर्तमान में 50 हजार से अधिक रेडियो चैनल उपलब्ध हैं जिन्हें आप सुन सकते हैं. दर्जनों भारतीय रेडियो भी इसमें हैं. कुछेक स्मार्टफ़ोनों में क्रोम या ओपरा ब्राउज़र से भी सीधे सुन सकते हैं – जैसे कि प्लेनेट रेडियो सिटी के चैनल. वैसे, प्लेनेट रेडियो सिटी जैसे चैनलों के ऐप्प भी हैं जिनसे आप अपने स्मार्टफ़ोनों में ये रेडियो बखूबी चला सकते हैं.

और, अब अंत में असली वाई-फ़ाई रेडियो:

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प्योर कंपनी का मार्शल वाई-फ़ाई रेडियो – 50,000 से अधिक इंटरनेट रेडियो चैनल – सुनो जी भर के!

 

यदि आप वाकई रेडियो प्रेमी हैं, और यदि आप अपने एएम या एफएम रेडियो की गुणवत्ता से तंग आ चुके हैं या उसे भूल चुके हैं तो आप अपना पुराना रेडियो अभी ही ओएलएक्स पर बेच दें, और ले आएं नई टेक्नोलॉजी का, नया वाई-फ़ाई रेडियो (वस्तुतः स्ट्रीमिंग प्लेयर). आपके पास कुछ विकल्प हैं – प्योर / सोनोस या बोस में से कोई एक चुनें और वाई-फाई रेडियो सुनने का आनंद लें. इनमें न केवल इंटरनेट रेडियो सुन सकते हैं, बल्कि अन्यत्र कहीं भी संग्रहित किए गए आपके संगीत भंडार से होम नेटवर्क के जरिए अपना मनपसंद संगीत भी सुन सकते हैं. आजकल मरांज/यामाहा/ओंकयो/डेनन के कुछ उन्नत एवी रिसीवरों में भी इस तरह की सुविधा (एयरप्ले या डीएलएनए से चिह्नित) मिलने लगी है.

नोटपैड++ के नवीनतम संस्करण में आप हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा लगा सकते हैं, परंतु जो सुविधा इसमें मिलती है व हंस्पैल के पुराने संस्करण के साथ मिलती है जिसमें बहुत ही कम शब्द संख्या (केवल पंद्रह हजार) शामिल है जिससे वर्तनी जांच का सही सही काम नहीं हो पाता है.

इसके लिए श्रीदेवी कुमार जी ने एक नए संशोधित affix फ़ाइल और वृहद शब्दकोश के साथ एक नया संस्करण बनाया है जो प्रयोग में अधिक उत्तम है. मैंने वृहद शब्दकोश में परिवर्तन कर मेरे पास उपलब्ध शब्दकोश (कोई पौने दो लाख शब्द) को मिला कर उसमें कुछ सुधार किया है, जिसका उपयोग आप थोड़े से प्रयास से अपने नौटपैड ++ (या ओपन ऑफ़िस / लिब्रे ऑफ़िस में भी यह विधि अपना कर) में कर सकते हैं.

यदि आपके नोटपैड++ में हिंदी वर्तनी जांच सुविधा पहले से इंस्टाल नहीं है तो इसे प्लगइन > DSpellCheck > Change Current Language > Download More Languages विकल्प से हिंदी वर्तनी जाँच फ़ाइल डाउनलोड कर इंस्टाल कर सकते हैं.

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इसके बाद हिंदी शब्दकोश व नए हिंदी affix फ़ाइल को निम्न डाउनलोड लिंक – गूगल डिस्क से डाउनलोड करें :

https://drive.google.com/open?id=0B3QLKzA0EHYWdzBkN0NJQWhFYTA&authuser=0

 

फिर नोटपैड++ के प्लगइन इंस्टाल फ़ोल्डर (या ऐप्पडेटा फ़ोल्डर) में जाएं. यह कुछ इस तरह हो सकता है (नोटपैड ++ के नवीनतम संस्करण में)

:\Program Files\Notepad++\plugins\Config\Hunspell

या फिर -

:\Users\YOUR USER NAME\AppData\Roaming\Notepad++\plugins\config\Hunspell

 

वहाँ मौजूद hi_IN.aff तथा hi_IN.dic फ़ाइलों को ऊपर दिए गए डाउनलोड लिंक (यह ज़िप फ़ाइल है जिसे आपको पहले अनज़िप करना होगा) से डाउनलोड की गई नई फ़ाइलों से बदलना होगा.

आपका काम हो गया. नीचे स्क्रीनशॉट देखें. नोटपैड ++, नवीन हिंदी वर्तनी जाँच की सुविधा से संपन्न!

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यदि आपने भूतकाल में कभी भी, भूले से भी, अटारी और निंटेंडो गेम खेला हो, तो अपने उन दिनों के सुनहरी यादों को न केवल ताज़ा करने के लिए, बल्कि गेम में दो-दो हाथ करने के लिए मौका अब आपके पास उपलब्ध है, बिना किसी प्रयास के और सब कुछ निःशुल्क.

 

अपने फायरफाक्स (अभी इसके लिए ऑप्टीमाइज़्ड है, हालांकि अन्य ब्राउज़रों में भी खेला जा सकता है) ब्राउजर में इस कड़ी पर जाएं -

https://archive.org/details/internetarcade

आपको सैकड़ों आर्केड गेम के आइकन दिखेंगे. कुछ इस तरह :

 

image

 

अपने पसंदीदा आर्केड गेम के आइकन पर क्लिक करें. एक नया विंडो खुलेगा जिसमें दाएं कोने पर गेम का एक स्क्रीनशॉट दिखेगा और नीचे Run का लिंक दिखेगा, जैसे कि नीचे दिए गए चित्र में स्पष्ट है.

image

 

Run लिंक को क्लिक करें. एक नए विंडो में गेम लोड होता दिखेगा -

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दो पल इंतजार करें, और वाह! – ये रहा आपका बैगमेन आर्केड गेम – अब इंटरनेट आर्केड गेम के रूप में!

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मजे लें, और पुराने दिनों में लौट आएं. कुछ नहीं तो, नई पीढ़ी के लोगों को अपने जमाने के गेम दिखाएं!

अटारी गेम लाइब्रेरी भी यहाँ है - https://archive.org/details/atari_2600_library

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