June 2014

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  सृष्टि (ब्रह्मांड) के प्रारंभ होने के बारे में विविध सिद्धांत प्रतिपादित किए गए हैं. तो सृष्टि के अंत के बारे में भी विभिन्न मान्यताएँ हैं. वैसे तो हम पृथ्वीवासियों के लिए दुनिया का अंत तो तब ही हो जाएगा जब सूर्य अपने तमाम हाइड्रोजन को नाभिकीय संलयन से एक दिन पूरा हजम कर लेगा और विशाल लाल दानव के रूप में बदल जाएगा और पृथ्वी को लील लेगा. मगर, अधिकांशतः सृष्टि तब भी बची रहेगी, और संभवतः कुछ पृथ्वीवासी भी जो कि उस समय तक विज्ञान में इतनी अधिक उन्नत खोजें कर चुके होंगे और अंतरिक्ष में अन्यत्र कॉलोनी बना कर निवास कर रहे होंगे.

मगर, यहाँ सवाल यह है कि सृष्टि – यानी संपूर्ण ब्रह्मांड का अंत कैसे होगा?

वैज्ञानिकों के अनुसार, सृष्टि का अंत इन 5 भिन्न तरीकों से हो सकता है –

1 द बिग क्रंच (महासंकुचन)

बिग बैंग का ठीक उलटा है बिग क्रंच. बिग बैंग नामक लोकप्रिय सिद्धांत के अनुसार, सृष्टि का प्रारंभ एक महाविस्फ़ोट से हुआ है. प्रारंभ में सृष्टि का आकार एक बिंदु – जिसे सिंगुलैरिटी भी कहते हैं, में समाहित था और महाविस्फ़ोट के बाद यह अनंत विस्तार लेकर फैलता गया और अभी भी लगातार अनंत में फैल रहा है. परंतु अंततः गुरुत्व बलों के कारण एक दिन इसके फैलाव में ठहराव आएगा और यह वापस सिकुड़ना प्रारंभ कर देगा. और अंततः सिकुड़ते सिकुड़ते वापस एक बिंदु में समाहित हो जाएगा. और इस तरह से सृष्टि बिग बैंग से पूर्व की स्थिति में वापस आ जाएगी जहाँ से इसका निर्माण हुआ था.

2 शीत मृत्यु (महाशीतन)

इसे आप बिग क्रंच का ठीक विपरीत अंत मान सकते हैं. सृष्ट अनंत काल तक अनंत विस्तार तक फैलती ही जाएगी फैलती ही जाएगी और अंततः इसकी तमाम ऊष्मा समाप्त हो जाएगी. सृष्टि के तमाम सूर्यों की ऊर्जा चुक जाएगी, वे भी ठंडे हो जाएंगे, नए सूर्यों को पैदा करने की अवस्था भी समाप्त हो जाएगी और इस तरह से पूरी सृष्टि ठंडे, घुप्प अंधेरे धुंध के रूप में परिवर्तित हो जाएगी.

3 श्यामविवर में समर्पण (महासमर्पण)

एक लोकप्रिय सिद्धांत के मुताबिक, सृष्टि का अधिकांश हिस्सा – गैलेक्सियाँ – आकाशगंगाएं आदि दानवाकार श्यामविवरों (ब्लैकहोल) का चक्कर लगा रही हैं, और धीरे धीरे उनमें समा रही हैं. इसमें गति आ रही है और अंततः एक दिन ऐसा आएगा कि ये श्यामविवर आपस में एक दूसरे को लीलने लगेंगे, और फिर अंत में एक ही श्यामविवर बच रहेगा. यह श्यामविवर भी हाकिंग रेडिएशन फैलाकर कालांतर में अपना द्रव्यमान खो देगा और चहुँओर सबएटॉमिक हाकिंग रेडिएशन पार्टिकल वितरित रहेंगे.

4 द बिग बाउंस (महाउछाल)

सृष्टि के अंत का यह सिद्धांत द बिग क्रंच के सिद्धांत जैसा ही है, परंतु थोड़ा आशावादी सिद्धांत है. इस सिद्धांत के मुताबिक सृष्टि का वर्तमान फैलाव एक बिंदु तक पहुँचने के बाद रुक जाएगा और सृष्टि वापस सिकुड़ने लगेगी. परंतु सिकुड़ते सिकुड़ते सिंगुलैरिटी (जैसा कि बिग क्रंच सिद्धांत में होता है) की स्थिति में पहुँचने से पहले ही सिकुड़न के त्वरण के फलस्वरूप महाविस्फ़ोट जैसा ही कुछ होगा और सृष्टि फिर से फैलने लगेगी. इस तरह सृष्टि नष्ट नहीं होगी, उसका अंत नहीं होगा, बल्कि उसका “पुनर्चक्रण” हो जाएगा. यानी एक नई सृष्टि का निर्माण हो जाएगा. इस सिद्धांत को दोलक सृष्टि का सिद्धांत भी कहते हैं जिसमें हर बार एक नई सृष्टि का जन्म होता है. हो सकता है कि हम अभी जिस सृष्टि में रह रहे हों, वो 400 वीं सृष्टि हो? पर इस बारे में पक्के से कभी कोई कुछ नहीं कह सकेगा.

5 द बिग रिप (महाफाड़)

इस सिद्धांत के मुताबिक “डार्क इनर्जी” नामक अज्ञात बल सृष्टि को अनंत में विस्तृत कर रहा है. सृष्टि के फैलने की गति में लगातार इजाफा हो रहा है और अंततः एक दिन यह गति इतनी अधिक हो जाएगी कि सबकुछ अनंत शून्य में विगलित हो जाएगा, और कहीं पर कुछ भी बचा नहीं रहेगा. इसमें अच्छी बात यह होगी कि तब तक सृष्टि के तमाम सूर्यों की ऊर्जा वैसे भी चुक चुकी होगी और सृष्टि में वैसे भी अब कहने को कुछ बचा नहीं रहेगा. बिग रिप से सृष्टि के अंत होने की संभावना आज से 16 बिलियन वर्ष बाद की लगाई गई है.

सृष्टि को जानने समझने के क्रम में मनुष्य के अपने स्वयं के ज्ञान में वृद्धि हुई है. पर क्या वो कभी इतना भी ज्ञानी हो पाएगा कि सृष्टि के प्रारंभ के बारे में सही सही बता सके व इसके अंत की सटीक भविष्यवाणी कर सके? यह बात तो आने वाला समय ही बता पाएगा. तब तक यह अद्भुत ब्रह्मांड, यह अनंत सृष्टि मनुष्य के जिज्ञासु मन को अपनी और आकर्षित किए रहेगी.

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विस्तृत जानकारी के लिए मूल आलेख देखें - http://www.cosmosup.com/5-ways-in-which-the-universe-could-end/

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भारत सरकार के बताए रास्ते, कायदे कानूनों पर चलना हर नागरिक का परम कर्तव्य है. मैं अपने स्वयं के ज्ञान के आधार पर एक सभ्य किस्म का, परम कर्तव्यपारायण नागरिक हूं, अतः मैं भी इसी का अनुसरण करते हुए अपने घर को आईएसओ 9001 सर्टिफ़ाइड बनाने की तैयारी में हूँ. आखिर मेरे देश की सरकार पहली आईएसओ 9001 सर्टिफ़ाइड सरकार हो बनने जा रही है – भले ही ये दीगर बात है कि किसी भी सरकारी दफ़्तर में चले जाओ, तो मामला ठीक इसके उलट नजर आता है और हर दफ़्तर ओएसआई 1009 सर्टिफ़ाइड प्रतीत होता है. अब आप ये न पूछिए कि भाई, ये ओएसआई 1009 सर्टिफ़िकेशन क्या होता है? तो आपके लिए पहला जवाब यही होना चाहिए – अरे! आप ओएसआई 1009 सर्टिफ़िकेशन नहीं जानते?

चलिए, हम आपके हालात पर तरस खाकर बता देते हैं कि आईएसओ 9001 सर्टिफ़िकेशन का ठीक उलट, भारतीय ईजाद है ओएसआई 1009 सर्टिफ़िकेशन. अब आप अंदाजा लगाने के लिए स्वतंत्र हैं.

अब जब मैंने अपने घर को आईएसओ 9001 सर्टिफ़ाइड करने का मन बना ही लिया तो सबसे पहले अपने घर के महामहिम की स्वीकृति की दरकार थी. मैंने बड़े संकोच से, स्वीकृति के लिए मामला अपने उत्तमार्द्ध के सम्मुख रखा. आव देखा न ताव, उन्होंने प्रस्ताव तत्क्षण खारिज ही कर दिया. उन्हें लगा कि मैं अपने इलेक्ट्रॉनिक गॅजेट से अटे पड़े घर में कोई और नया, एकदम नवीनतम से भी नवीनतम उन्नत किस्म का एकदम बेहद जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जिसके बगैर मैं अपनी सोशल जिंदगी जीने की कल्पना नहीं कर सकता, जोड़ने की स्वीकृति चाहता हूँ, जिसके लिए घर में एक अदद कोने की और जरूरत होगी और उसमें एक अदद और रिमोट साथ में आता होगा जिसे सहेजने की और वक्त पर हासिल करने की एक और व्यवस्था करनी होगी. मैंने अपना सिर पीटा और समझाया भागवान – मैं कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं ला रहा हूँ, और न ही कोई 10 वर्ष के जीवन वाला एलईडी लाइट ला रहा हूँ, जिसे अनावश्यक रूप से बदलने की भी आवश्यकता कभी नहीं होती है, मैं तो बस यह कह रहा हूं कि जब हमारे देश की सरकार आईएसओ 9001 सर्टिफ़ाइड हो रही है तो देश के हर नागरिक का कर्तव्य है कि वो भी अपने घर को आईएसओ 9001 सर्टिफ़ाइड करे, लिहाजा मैं भी यही चाहता हूँ.

दरअसल, सरकार तो यह भी चाहती है कि जो साड़ी तुम पहनती हो वो भी आईएसओ 9001 सर्टिफ़ाइड हो. साड़ी का नाम सुनकर उसके कान कुछ खड़े जरूर हुए, मगर उतने भी नहीं कि किसी कान को आईएसओ 9001 सर्टिफ़ाइड हासिल हो जाए.

तमाम जोर आजमाइश के बावजूद, जाहिर है यह बात उनके दिमाग में नहीं आनी थी सो नहीं आई – ठीक उसी तरह जैसे कि मेरे दिमाग में ये बात नहीं आती कि श्रीमती जी के पास पच्चीस जोड़ी सैंडल, इनसे दुगने चप्पल और इन दोनों की संख्या मिलाकर जो संख्या बनती है उसके भी तीन गुने के बराबर तो उनके (या कि संसार की किसी भी अन्य स्त्री के पास – क्योंकि कपड़े जूते चप्पलों के मामले में मामला यहाँ उन्नीसा-बीसा ही रहता है) पास जूते पहले से हैं, मगर फिर भी, जब भी वो बाजार जाती हैं तो दो-तीन चप्पल-सैंडल उन्हें लेना ही लेना होता है और एकाध तो न चाहते हुए भी स्वयंमेव खरीद कर आ ही जाता है. और, खुदा कसम, दुनिया में स्त्री के चप्पल जूते सज्जित पैर पता नहीं कौन देखता होगा, किसके पास इन्हें देखने की फुरसत होती होगी, किन्हें इन्हें देखने में दिलचस्पी होती होगी, फिर भी, जाने क्यों ये स्त्रियाँ इतने किसम किसम के रंगीन, गोटेदार, जरीदार चप्पल सैंडल खरीदती हैं.

खैर, बात अपने घर को आईएसओ 9001 सर्टिफ़ाइड बनाने की हो रही थी. तो हमें शुरूआत तो कहीं से करनी थी. सबसे पहले सोचा गया कि घर में कुछ साफ सफाई कर ली जाए. मैं पत्नी-श्री के अप्रयुक्त, अप्रचलित, कालातीत आदि आदि किस्म के सैंडल चप्पलों के संग्रह से शुरूआत करना चाहता था, और वे मेरी अप्रयुक्त, अप्रचलित, कालातीत आदि आदि किस्म के एमपी-3 संग्रह की सीडी-डीवीडी, बूम-बॉक्स, ब्लूटूथ प्लेयर इत्यादि से शुरूआत करना चाह रही थीं. साफ है कि – मामला साफ सफाई पर अटका हुआ है. मगर हमें उम्मीद है कि हम यथाशीघ्र इस विवाद को सुलझा लेंगे और आगे बढ़ेंगे – क्योंकि हमें अपने घर को भारत का पहला आईएसओ 9001 सर्टिफ़ाइड घर जो बनाना है! मित्रों, हमें आपके दुआओं की जरूरत है!

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पुनश्च :

20 जून 2014 को इस ब्लॉग के पूरे हुए दस साल. पहली पोस्ट यहाँ परीक्षण के तौर पर लिखी गई, और तब से पूरे दशक से यह ब्लॉग-यात्रा निरंतर जारी है, जिसकी गति को बनाए रखने में आप सब सुधी पाठकों का महती योगदान रहा है. आप सभी का बहुत-2 धन्यवाद.

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भगवान इनका भला करें, इन्हें सद्बुद्धि आ गई… वरना वे कल को सड़कों पर, दीवारों पर थूकने पर जुर्माना लगाने की बात करते!

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