टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

March 2014

image

(एमएस-डॉस वातावरण में अक्षर नामक सॉफ़्टवेयर के जरिए कंप्यूटरों हिंदी टाइपिंग की सुविधा एक बड़ी बात थी)

वैसे तो ब्लैक-इंटरनेट (यानी इंटरनेट की काली दुनिया) में यह बहुत पहले से तथाकथित रूप से उपलब्ध था, परंतु माइक्रोसॉफ़्ट द्वारा स्वयं, आधिकारिक रूप से डॉस संस्करण 1 तथा 2 और वर्ड के आरंभिक संस्करण के सोर्स कोड को सार्वजनिक उपयोग के लिए जारी कर दिया गया है. हालांकि ये सोर्स कोड निजी उपयोग / अवलोकन / शिक्षा के लिए ही हैं, और इनका व्यवसायिक उपयोग नहीं किया जा सकेगा.

हमारे जैसे लोगों के लिए, जिन्होंने डॉस और वर्डस्टार के जमाने से कंप्यूटिंग की दुनिया में कदम रखा है, यह एक बड़ी नॉस्टेल्जिक किस्म की खबर है. डॉस को 20/33 मेगा हर्त्ज गति के (आज के सामान्य मोबाइल में 1.2 गीगा हर्त्ज के ड्यूएल प्रोसेसर होते हैं!) 1 मेगाबाइट रैम वाले 286 कंप्यूटरों पर हमेशा खराब होने की आशंका वाली फ़्लॉपी में चलाना - - जिसमें किसी किसी में 20/40 मेगा बाइट की हार्डडिस्क (पुनः - आज के सामान्य मोबाइल में भी 512 मेगा बाइट का रैम होता है तथा 32 गीगाबाइट तक बढ़ा सकने वाली मेमोरी होती है) भी होती और ढेरों कमांड याद रख कर उन्हें चलाना एक अलग अनुभव होता था. और काम करने के दौरान कंप्यूटर के कभी भी फ़्रीज होने की आशंका व समस्या - जिसके कारण एमएस-डॉस और विंडोज के आरंभिक संस्करण खासे बदनाम भी रहे -  और रीबूट पर डेटा लास इत्यादि की समस्याओं के बावजूद कंप्यूटरों की उपयोगिता और क्रेज में कोई कमी नहीं रही थी.

यदि आप कंप्यूटर प्रेमी हैं, और आपके शौक और रुझान कंप्यूटर प्रोग्रामिंग को देखने समझने में है तो आप भी इन सोर्सकोड को डाउनलोड कर देखना चाहेंगे. ये सोर्सकोड आमतौर पर असेंबली लैंग्वेज में हैं. कंप्यूटर-आईटी के छात्रों - बीई-बीटेक, बीसीए-एमसीए के लिए तो यह एक जरूरी व उपयोगी सामग्री सिद्ध होगी ही.

इन स्रोत कोड को कंप्यूटरहिस्ट्री.ऑर्ग की साइट से डाउनलोड किया जा सकता है. वहाँ आपको इस कोड के उपयोग संबंधी एक एग्रीमेंट पर सहमत होना होगा, उसके पश्चात आपको स्रोत कोड डाउनलोड का लिंक मिलेगा.

एमएस-डॉस के स्रोत कोड को डाउनलोड करने के लिए यहाँ जाएँ-

http://www.computerhistory.org/_static/atchm/microsoft-ms-dos-early-source-code/agreement/

 

एमएस वर्ड के स्रोत कोड को डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें -

http://www.computerhistory.org/_static/atchm/microsoft-word-for-windows-1-1a-source-code/agreement/

 

कंप्यूटरहिस्ट्री.ऑर्ग में आपको कुछ और ऐसे ही अन्य लोकप्रिय प्रोग्रामों के स्रोतकोड देखने को मिल सकते हैं.

image

ये लीजिए. एक और. पहले फ़िलिप्स लेकर आया था, अब एलजी का बल्ब भी स्मार्ट हो गया. रोज ही नई नई खबरें आती हैं कि आज ये स्मार्ट हो गया, कल वो स्मार्ट हो गया. बुद्धू बक्सा – यानी टीवी से लेकर आपका दुपहिया-चौपहिया वाहन और आपका टूथब्रश सब तो स्मार्ट होते जा रहे हैं. यहाँ तक कि आपका आधुनिक कपड़े धोने का पाउडर भी स्मार्ट हो गया है क्योंकि उसमें भी एक्टिव स्मार्ट कण होते हैं जो धूल से प्यार करते हैं और उन्हें प्यार से खा कर धो डालते हैं.

ठीक है, दुनिया स्मार्ट होती जा रही है. यहाँ दुनिया का अर्थ दुनिया का आदमी न निकालें. कृपया. गॅजेट्स और उपकरण स्मार्ट होते जा रहे हैं, मगर लगता नहीं कि आदमी की स्मार्टनेस (यदि कोई उपलब्ध हो) खोती जा रही है? उसका स्मार्टनेस डाउन होता जा रहा है.

मेरी बात से इत्तेफ़ाक नहीं हो तो जरा अपने हाथ के मोबाइल फ़ोन पर निगाह मार लें. आपके पास भी मोबाइल फ़ोन है. स्मार्ट वाला. ठीक है. अब बिना संपर्क सूची देखे, अपने किसी मित्र को सीधे कोई नंबर डायल कर दिखा दें जरा? हो गई न आपकी स्मार्टनेस हवा? लैंडलाइन के जमाने में या जब इनमें मेमोरी नहीं होती थी तो आपको अपने दस पंद्रह मित्रों रिश्तेदारों के फ़ोन नंबर जुबानी याद रहते थे. नहीं? और अब? अब अपनी बीवी या अपने पति का मोबाइल नंबर भी आपको शायद याद न हो, क्योंकि आपने अपने स्मार्टफ़ोन में उसका प्रोफ़ाइल बना कर उसमें उसका बढ़िया सा फ़ोटो डाला हुआ है, और नंबर डायल करने के लिए हर बार उस पर प्यार भरी उँगली फिराते हैं. है न नंबर याद रखने का सबसे ईडियाटिक तरीका? और, भले ही आप अपने हाथों में पचास-हजारी स्मार्टफ़ोन की झलक दिखा कर अपने स्मार्टनेस को दिखाने की लाख कोशिश करें, उसे तो तब हवा होनी ही है, जब आपसे कोई उसमें बाई डिफ़ॉल्ट इंस्टाल किसी ऐप्प की फंक्शनलिटी बारे में पूछ लेगा, जिसके बारे में आपको हवा ही नहीं होती है!

धर्म और संप्रदाय का मामला तो और भी गज़ब का है. आदमी अपने तथा-कथित बेहद स्मार्ट आई-मोबाइल या आई-कंप्यूटर (इंटरनेट इनेबल्ड ईडियट,) पर बैठ कर पाँच-दस हजार साल पुरानी कही गई अर्थ-अनर्थ की बातों में उलझा बैठा रहता है और इंटरनेट के फ़ेसबुकी पन्नों पर घोर मारकाट मचाता रहता है. आज का आधुनिक युद्ध का मैदान बन गया है यह. की-बोर्ड से युद्ध. असली युद्ध से कई गुना मजा देने वाला और कभी खत्म न होने वाला. और मजे की बात यह कि यहाँ हर कोई अपना ज्ञान बघारता है, और उसके चक्कर में उसे यह पता नहीं होता कि दरअसल वो अपनी स्मार्टनेस की बखिया खुद उधेड़ रहा होता है.

नए नए स्मार्ट उपकरण नित्य बन रहे हैं, फिर भी, मेरे विचार में दुनिया में ऐसी कोई खोज नहीं हो सकेगी, कोई ऐसा मददगार उपकरण या गॅजेट इस ब्रह्मांड के समयकाल में सर्वकालिक रूप से कभी भी नहीं बनाया जा सकेगा जो किसी स्त्री को –

* किसी पार्टी के लिए गारंटीड आधे घंटे से भी कम समय में तैयार करवा दे,

* किसी खास रंग के परिधान की खरीदी पंद्रह मिनट के भीतर करवा दे,

जिन स्त्रीवादियों को यह लग रहा होगा कि यह तो सरासर स्त्री जगत पर हमला है और इन बातों से पुरुषत्व अहंकार झलक रहा है तो, जरा सब्र करें. अगली पंक्ति पढ़ें - काश ऐसी कोई खोज हो जाए जिसके जरिए पुरुष सचमुच का स्मार्ट हो जाए! स्त्री थोड़ी बहुत स्मार्ट तो खैर, होती है, एंड मैन, बेसिकली इज़ ए पिग इन डिस्गाइज़!

(पिछले भाग 6 से जारी)

11. स्थानीयकरण का ईंधनफ़्यूल (FUEL)

लगातार सॉफ़्टवेयर लोकलाइज़ेशन के लिए काम करते हुए जो ज़रूरत सबसे ज़्यादा महसूस की गई वो यह कि अंग्रेज़ी की तुलना में हमारे कामों में जो सबसे ज़्यादा भिन्नता जहाँ है वह है मानकीकरण व एकरूपता की. जहाँ अंग्रेज़ी में कमोबेस सारे तकनीकी शब्द फिक्स हो गए हैं वहीं हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में एक अराजकता की स्थिति है. इसका एक कारण है कि सभी अपने-अपने स्तर पर काम कर रहे हैं और उनके काम के बीच तालमेल व बातचीत का अभाव है. फ़्यूल की शुरुआत इसी उद्देश्य से की गई. चूँकि मुक्त स्रोत के अंतर्गत अनुवाद अलग अलग जगहों से आते हैं अलग अलग भाषा रूपों को अपने में रखते हुए इसलिए यहाँ यह और जरूरी हो जाता है कि उनके कामों के बीच कम से कम एक न्यूनतम मानक रहे जो उनके लिए दिशानिर्देश का काम करे.

clip_image002

इसी क्रम में ऐसा ख्याल आया कि क्यों न सबसे पहले उन शब्दों व प्रविष्टियों को लिया जाए जो सबसे पहले व प्रयोग में बार-बार सामने आते हैं. जैसे उन सारे अनुप्रयोगों के मेन्यू व सबमेन्यू आदि. इस प्रकार का काम न केवल प्रारंभिक स्तर पर विसंगतियों की सारी स्थितियों को दूर करता है बल्कि नया आरंभ करने वाले लोगों के लिए एक निर्देशिका की तरह भी प्रयोग किया जा सकता है ताकि समुदाय उन शब्दों पर गौर कर सकें जो उनके अनुप्रयोगों के अनुवादों के लिए बहुत जरूरी थे. इन्हीं स्थानीयकरण के लिए बारंबार प्रयुक्त प्रविष्टियों को FUEL (Frequently Used Entries For Localization) का नाम दिया क्योंकि यही वे शब्द हैं जो लोकलाइज़ेशन की सफलता के लिए बतौर ईंधन का काम कर सकते हैं. इसके लिए गनोम मेन्यू, नॉटिलस, पिज़िन, फ़ायरफ़ॉक्स, गनोम टर्मिनल, इवोल्यूशन, ओपनऑफ़िस को शामिल किया गया. करीब छह सौ शब्द चुने गए. ज़ाहिर है कि यह एक छोटी-सी शब्दावली है और सभी समुदाय इसको अपने अनुवाद के दौरान अपने ध्यान में आसानी से रख सकती हैं.

बहुत कम भाषाओं में कंप्यूटिंग शब्दावली अभी बन पाई है और इसलिए फ्यूल से तैयार की गई शब्दावली पहली कंप्यूटिंग शब्दावली साबित हो पा रही है. मैथिली के फ़्यूल मूल्यांकन कार्यशाला से यह बात काफ़ी महत्वपूर्ण रूप से सामने आई है. छत्तीसगढ़ी में भी यह पहली ही कोशिश है. सबसे ख़ास बात फ़्यूल की यह है कि इसने सभी वैसे शब्दों को समाहित करने की कोशिश की है जो कि किसी भी कंप्यूटर के ग्राफिकल यूजर इंटरफेस, यानी जीयूआई के पहले तीन-चार स्तर

clip_image004

फ़्यूल मैथिली सम्मेलन, ए. एन. सिन्हा इंस्टीट्यूट, पटना.

के मेन्यू के दरम्यान पाए जाते हैं यानी ऐसी प्रविष्टियाँ यहाँ दिखेंगी जो कि एक सामान्य उपयोक्ता बार बार उपयोग करता है. तो यह एक प्रकार से मौलिक शब्दावली का भी कार्य करती है. सुविधा के लिए फ़्यूल की हिंदी शब्दावली परिशिष्ट III में मौजूद है जहाँ से संदर्भ लिया जा सकता है. अभी करीब दस भाषाओं पर फ़्यूल के अंतर्गत कार्य चल रहा है.

जरूरी कड़ियाँ:

https://fedorahosted.org/fuel/

https://fedorahosted.org/fuel/wiki/FuelLanguages

डाक सूची:

https://fedorahosted.org/mailman/listinfo/fuel-discuss

संपर्क:

irc.freenode.net: #fuel-discuss

https://fedorahosted.org/fuel/wiki/team-contacts

12. इंडलिनक्स सराय-सीएसडीएस

इंडलिनक्स

clip_image006

भारत में लोकलाइज़ेशन की शुरुआत का श्रेय काफ़ी हद तक इंडलिनक्स को जाता है. इंडलिनक्स की शुरुआत वर्ष 1999 के दिसंबर में हुई थी, जिसकी शुरुआत करने वालों में प्रकाश आडवाणी और वेंकटेश हरिहरण का नाम आता है. प्रकाश आडवाणी freeOS.com पोर्टल चलाते थे और हरिहरण तकनीकी पत्रकार थे. जून 2000 में इससे करुणाकर पूर्णकालिक सदस्य के रूप में जुड़े. इसके कोर टीम में अपूर्व साह, प्रकाश आडवाणी, वेंकटेश हरिहरण, हर्ष कुमार, और राहुल पाल्कर थे. कुछ ही समय बाद www.indlinux.org सेटअप किया गया. इसी समय शुषा के आधार पर स्थानीयकृत अनुप्रयोग पहली बार तैयार किए गए. गनोम हिंदी का अनुवाद 2002 में शुरू हुआ और भोपाल की टीम ने इसमें काम किया. इसी के तहत हिंदी गनोम का पहला सार्वजनिक डेमो लिनक्स बंगलोर 2002 मीट में हुआ.

clip_image008

चित्रः इंडलिनक्स के द्वारा आयोजित कार्यशाला के कुछ सहभागी

2003 में हिंदी की पहली समीक्षा कार्यशाला सराय-सीएसडीएस के सौजन्य से हुई और उसके बाद सराय-सीएसडीएस भी भारतीय भाषाओं में लोकलाइज़ेशन को कई रूपों में समर्थन करने लगी.

clip_image010

सिर्फ़ हिंदी ही नहीं इंडलिनक्स ने कई भाषा समूहों को जो लिनक्स को अपनी भाषाओं में देखना चाहते थे काम शुरू करने में मदद की. इंडलिनक्स अभी भी समुदाय आधारित चर्चाओं के लिए प्रमुख समूह के रूप में गिना जाता है. इसलिए आप यहाँ की डाक सूची पर लिख कर स्थानीयकरण से संबंधित अपनी सारी शंकाओं और सहायता के लिए लिख सकते हैं.

जरूरी कड़ियाँ:

http://indlinux.org/

http://indlinux.org/wiki/index.php/IndLinux:Community_Portal

डाक सूची:

indlinux-group

http://lists.sourceforge.net/mailman/listinfo/indlinux-group

indlinux-hindi

http://lists.sourceforge.net/mailman/listinfo/indlinux-hindi

सराय

clip_image012

इंडलिनक्स के साथ किसी संस्था ने कंधे से कंधा मिलाकर लगातार साथ दिया तो वह सराय-सीएसडीएस है. 2003 से सराय-सीएसडीएस ने इस क्षेत्र में क़दम रखा तबसे न केवल इंडलिनक्स को कई रूपों में सहयोग दिया है बल्कि दूसरी भाषाओं के लिए भी फेलोशिप आदि के माध्यम से लोकलाइज़ेशन के क्षेत्र में कई कार्य किए हैं. सराय-सीएसडीएस ने हिंदी के लिए लगातार समीक्षा कार्यशाला आयोजित की है और भारतीय परिदृश्य में मुक्त स्रोत के लिए ऐसे कार्य करने वाली ये अकेली संस्था है. ये फेलोशिप सामान्यतया समुदाय के लोगों को विभिन्न मुक्त स्रोत आधारित अनुप्रयोगों के निर्माण में मदद करती है. ये ऐसे कार्यों को बढ़ावा देने की कोशिश करती है जो औपचारिक, सांस्थानिक या बाज़ार से चालित ताक़तों के आधार पर संभव नहीं है. तो यह भी एक जगह है जहाँ सराय-सीएसडीएस के विभिन्न कार्यक्रमों के तहत मदद के लिए कोई भी समुदाय आवेदन दे सकती हैं.

जरूरी कड़ियाँ:

http://www.sarai.net/

http://www.sarai.net/practices/indic-localization

http://www.sarai.net/fellowships/floss

13. मुक्त स्रोत स्थानीयकरण: भारतीय माहौल जुड़े समूह

भारत के प्रसिद्ध कन्नड़ लेखक यू.आर.अनंतमूर्ति ने एक साक्षात्कार में बताया था कि भाषाएँ तहजीब की खजाना होती हैं. भाषाओं की इस तहजीब को योग्य व समर्थ बनाने की अहमियत न केवल इसे जीवित रखने में बल्कि इसे पल्लवित पुष्पित करने के लिए आज की डिजिटल दुनिया के लिए भी कम जरूरी नहीं रह गया है. यदि कोई भाषा डिजिटल जमाने का हिस्सा नहीं होती है, तो वह भाषा पुरानी हो जाएगी, अपना वजूद खो देगी, उसका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और कुछ मायनों में वह गुजरे जमाने की वस्तु बन जायेगी. भाषा के अन्त का मतलब है सभ्यता की मौत. धन्यवाद है फ़्री सॉफ़्टवेयर विचारधारा और समकालीन ओपन सोर्स विकास प्रक्रिया का, जिसने कई विभिन्न भाषाओं को नवजीवन दिया. हम कितने छोटे हैं, हमारी तादाद कितनी है, वहाँ यह कोई अर्थ नहीं रखता है. फ़्री व ओपेन सॉफ़्टवेयर अन्य ब्यूरोक्रेटिक प्रक्रिया से भिन्न आप सहित प्रत्येक व्यक्ति को, स्थानीय भाषा कंप्यूटिंग को योग्य बनाने के लिए योगदान और इस कारण ग्रामीण भारत में कंप्यूटर द्वारा तकनीक को अपनाने की प्रक्रिया को गतिशील करने के लिए सक्षम बनाता है. हम सभी महात्मा गांधी के उद्धरण की प्रशंसा किये बिना नहीं रह सकते कि ''आप जो कुछ भी करते है, वह महत्वपूर्ण नहीं भी हो सकता है, लेकिन यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप इसे करते हैं.'' यह एक सच्चाई है कि मालिकाना समूह उन आम लोगों की आवश्यकता को पूरा करने को तत्पर नहीं होती, ख़ासकर क्रय शक्ति की अर्थव्यवस्था में, लेकिन हम ओपेन सोर्स कंप्यूटिंग में आमजनों के सरोकार से सम्बन्धित अवसर पैदा कर सकते हैं.

भारत में, कई समूह कंप्यूटर पर भाषा सम्बन्धी कार्य कर रहे है. “लोकलाइजिंग फ़्री सॉफ़्टवेयर फॉर ए फ़्री कंट्री” के नारे के साथ इंडलिनक्स (www.indlinux.org) एक व्यापक और लोकप्रिय ग्रुप है जिन्हें इस कार्य में काफ़ी सफलता मिली है. इंडलिनक्स ऐसे लोगों का समूह है जो बिना किसी हैरानी के विश्वास जताते हैं कि सूचना तकनीक के फायदे आम भारतीयों को व्यापक तौर पर मुफ्त उपलब्ध होना चाहिए. इस संगठन ने कई नये समूहों को आगे आकर साथ-साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया है. पनलिनक्स (http://punlinux.sourceforge.net) बेहद कामयाब मिसाल है. दो वर्षों के दरमियान इस समूह ने भारत की स्पदंन पूर्ण भाषा एवं संस्कृति पंजाबी में भारी मात्रा में तकनीक को स्थानीयकृत किया है. हर चीज चाहे वह फ़ेडोरा हो, या गनोम, या केडीई या फिर ओपनऑफ़िस और सब कुछ! ग्रामीण भारत में फली-फूली एक संगठन की बड़ी सफल कहानी! पनलिनक्स के किसी भी सदस्य का कोई शहरी आधार नहीं. भाषा एवं ओपेन सोर्स के लिए स्नेह के मिश्रण इस उदाहरण ने अविश्सनीय परिणामों को जन्म दिया है.

लिनक्स के भारतीयकरण के लिए कई प्रयास किये जा रहे हैं. एक बड़ी कोशिश, अंकुर (www.bengalinux.org), पहला सामूहिक क़दम है बंगाली को फ़्लॉस डेस्कटॉप पर लाने का. अंकुर का मुख्य लक्ष्य है जीएनयू/लिनक्स ओएस को पूरी तरह स्थानीयकृत कर उपलब्ध कराना है तथा इन्हें इस क्षेत्र में अच्छी सफलता मिली है. गुजराती भाषा समुदाय को कंप्यूटर की ताक़त देने में उत्कर्ष (www.utkarsh.org) का योगदान काफ़ी बड़ा है. यह सबसे व्यवस्थित- व्यावसायिक संगठनों में से एक है. इंडियनओएसएस (www.indianoss.org) गुजराती कंप्यूटिंग के लिए प्रतिबद्ध दूसरा बड़ा नाम है. तमिल के कई सक्रिय समुदाय है- http://sourceforge.net/projects/zha बड़े प्रयासों में से एक है. तमिल लिनक्स (http://groups.yahoo.com/group/tamilinix) लिनक्स/यूनिक्स पर विकसित दूसरा महत्वपूर्ण समूह है. भारत में भारतीय भाषाओं में ओपनऑफ़िस लाने के लिए आईसीटी रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेन्टर द्वारा भारतीयओओ परियोजना (http://trinetra.ncb.ernet.in/bharateeyaoo) पहला क़दम है. यह काम डेवलेपमेंट गेटवे फाउंडेशन के क्रियाकलाप के रूप में किया जा रहा है.

हिन्दी भाषा के लिए कई संगठन काम करते हैं. इंडलिनक्स ने भी अपना काम हिन्दी से ही शुरू किया. हिन्दी के लिए विभिन्न परियोजनाओं को एक सूत्र में बांधने के इरादे से सोर्सफोर्ज पर हिन्दी प्रोजेक्ट (http://hindi.sourceforge.net ) भी शुरू हुई है. यह मूलतः फ़ेडोरा, गनोम, केडीई, मोज़िला, और ओपनऑफ़िस पर केंद्रित किए हुए है. मलयालम परियोजना (http://malayalam.sarovar.org) मलयालम पैकेज के लिए टाईप सेटिंग के वास्ते माक्रोस और फोन्टस का एक सेट ऑफर करता है, जो दक्षिण भारतीय राज्य केरल के अनुमानित सवा तीन करोड़ लोगों की प्राथमिक भाषा है. सरोवर परियोजना (http://sarovar.org/projects/oriya/) ओड़िया में लिनक्स को उपलब्ध कराने का पहला चरण है. जीएनयू/लिनक्स तेलुगु लोकलाइज़ेशन एफर्ट (http://telugu.sarovar.org) सामान्य अनुप्रयोगों को जीएनयू/लिनक्स गनोम, केडीई, मोज़िला और ओपेन आफिस सहित सबको स्थानीयकृत बनाने का लक्ष्य रखता है. स्वतंत्र मलयालम कंप्यूटिंग (http://sarovar.org/projects/smc) मौजूदा समय में जीएनयू/लिनक्स आलेखीय अंतरफलक को मलयालम में अनूदित/स्थानीयकृत करने हेतु रोशनी प्रदान करता है. स्वतंत्र मलयालम फोंट्‌स (http://sarovar.org/projects/smf) स्वतंत्र मलयालम कंप्यूटिंग की एक सहायक परियोजना है. इसका मकसद मलयालम फोंटस को पर्याप्त आज़ादी देना है. इंडिक ट्रांस (www.indictrans.org) भारतीय भाषाओं में लिनक्स स्थानीयकरण के लिए कार्य करता है. इंडिक-कंप्यूटिंग प्रोजेक्ट (http://indic-computing.sourceforge.net) भारतीय भाषा कंप्यूटिंग सवालों के लिए तकनीकी दस्तावेज मुहैया कराता है. और कई नाम हैं: कन्नड़ लोकलाईजेशन इनीशियेटिव (http://kannada.sourceforge.net) कन्नड़ की भाषा के लिए कार्य करता है और तमिज लिनक्स (http://www.thamizhlinux.org) तमिल भाषा में एक दूसरा प्रयास है. फ़्री सॉफ़्टवेयर लोकलाइज़ेशन इन असामीज (http://sourceforge.net/projects/luit) असमिया भाषा के लिए कार्य करता है. मराठा ओपेन सोर्स (http://groups.yahoo.com/group/MarathiOpenSource) मराठी भाषा के लिए. स्वेच्छा (www.swecha.org) तेलुगु भाषा के वास्ते प्रयास करता है. मैथिली जो भारत के बिहार राज्य के खास क्षेत्र में बोली जाती है और जिसे कुछ वर्ष पहले भारतीय संविधान की अनूसूची में शामिल किया गया है, के लिए भी एक परियोजना मैथिली कंप्यूटिंग रिसर्च सेंटर (http://maithili.sourceforge.net) नाम से शुरू हुई है. बिहार में ही मूल रूप से ज़्यादा बोली जाने वाली परंतु व्यापक रूप से लोकप्रिय भोजपुरी भाषा के लिए भी काम शुरू हो चुका है. भोजपुरी कंप्यूटिंग सेंटर (http://bhojpuri.sourceforge.net) नाम से यह कोशिश पटना में रहने वाले एक समूह की कोशिशों का नतीजा है. इन सबसे समझा जा सकता है कि मुक्त स्रोत कंप्यूटिंग का कितना फैलाव हो चुका है. उदाहरणों से पता चलता है कि पारदर्शी एवं सामूहिक ओपेन सोर्स लोकलाइजेशन और इसकी प्रणाली बड़ी सतर्क एवं जवाबदेह है. फिर भी कई भाषाओं पर काम होना अभी बचा है. भारत जैसे भाषाई वैविध्य रखने वाले देश में और प्रयास की ज़रूरत है.

यदि भारतीय उपमहाद्वीप के वर्णन के लिए यदि कोई बीजशब्द का इस्तेमाल किया जाय तो वह निश्चित रूप से होगी विविधता. भारत में तकरीबन 500 भाषाएँ हैं जिसमें 22 भाषाएँ संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल है. स्थिति की कल्पना इससे की जा सकती है कि सिर्फ़ एक छोटा सा मुल्क नेपाल जहाँ 50 से अधिक भाषाएँ हैं. देर सबेर ये सभी छोटी भाषाएँ सूचना प्रौद्योगिकी के साथ कंधे से कंधे मिला कर चलने की उम्मीद तो कर सकती है, लेकिन सिर्फ़ फ़्री सॉफ़्टवेयर के दर्शन के ही सहारे. भारत के पड़ोसी देशों में भी लोकलाइज़ेशन आंदोलन की शुरुआत हो चुकी है. पर्वतीय भाषा- गोरखाली यानी नेपाली बोलने वालों की संख्या फकत 16 लाख है. गत वर्ष नेपाली भाषा में लोकलाईजेशन के क्षेत्र में मदन पुरस्कार पुस्तकालय (www.mpp.org.np) के साथ कार्य करने वाले एक समूह ने सार्थक पहल कर महत्वपूर्ण गति प्रदान की है. इस समूह ने गनोम डेस्कटॉप को पूरी तरह स्थानीयकृत किया है. भूटानी जो भूटानी राजतंत्र की राष्ट्रभाषा है, को पूर्णत: लोकलाइज्ड किया है. Dzongkha लोकलाइज़ेशन प्रोजेक्ट (http://dzongkha.sourceforge.net) का उद्देश्य Dzongkha स्क्रिप्ट को लिनक्स साथ जोड़कर इसे मजबूत करना है ताकि भूटान के आम नागरिकों को सूचना एवं संचार तकनीक का लाभ मिल सके. यह परियोजना भूटान की राजकीय सरकार द्वारा लागू की गई है और यह इन्टरनेशनल डेवलपमेंट रिसर्च सेंटर (IDRC) कनाडा के पैन एशिया नेटवर्किंग (PAN) द्वारा

वित्त प्रदत्त है. सिंहाला लिनक्स प्रोजेक्ट (http://sinhala.linux.lk ) एक दूसरी परियोजना है सिंहाला में लिनक्स के स्थानीयकरण का. यह लंका लिनक्स यूजर ग्रुप (LKLUG) द्वारा प्रारंभ किया गया. पैन लोकलाइज़ेशन प्रोजेक्ट (www.panl10n.net) का व्यापक परिसर है. एशिया में स्थानीय भाषा क्षमता विकसित करने का यह एक क्षेत्रीय प्रयास है. यह संगठन निम्नलिखित भाषाओं के लिए कार्य करता है: बांग्ला, भूटानी, ख्मेर, लाओ, नेपाली, पश्तो, सिंहाला और उर्दू!

प्राय: सबल भाषा अल्पसंख्यक भाषा को दबाती है. लेकिन पाकिस्तान में पंजाबी भाषा के साथ इस तरह की बात नहीं है. पाकिस्तान में पंजाबी भाषा बहुसंख्यकों की भाषा है. लेकिन वहाँ की सरकार इस भाषा को मदद करती नहीं मालूम पड़ती है. इसीलिए पनलिनक्स ने शामुखी स्क्रिप्ट में पंजाबी भाषा के स्थानीयकरण के वास्ते शुरू करने की योजना बनायी है. और इसे अलग लोकेल देने हेतु आग्रह पहले ही किया जा चुका है. यह सिर्फ़ आपेन सोर्स की दुनिया में संभव हो सकता है. लोकतंत्र की तरह ही जहाँ हर आदमी बराबर है, प्रत्येक भाषा को कंप्यूटर की तकनीक में एक जैसा दर्जा दिया जा सकता है.

मुक्त स्रोत सॉफ़्टवेयर का स्थानीयकरण पारदर्शी और समुदाय चालित प्रक्रिया है. यही वजह है कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सॉफ़्टवेयर को पसंदीदा करना आसान है. कभी-कभी सांस्कृतिक विभिन्नताओं के चलते लोग पश्चिमी उपयोक्ता अंतरफलक के साथ सुविधा महसूस नहीं करते. लेकिन कठिनाई यहीं समाप्त नहीं हो जाती. फोल्डर्स और रिसाइकिल बींस को समझने के लिए होने वाले विशिष्ट ग्रामीण भारतीय संघर्ष की कल्पना करें! ख़ासकर व्यापक भाषा हिन्दी के मामले में और बंगाली व पंजाबी के मामले में जो दो भिन्न देशों में बोली जाती है. एक सच्चाई है कि पूरी भाषा बुनियादी तौर पर दो पड़ोसी देशों में विभिन्न क्षेत्रों में विभक्त है. भारत की आधी से अधिक आबादी में हिन्दी बोली और समझी जाती है और इसकी अनगिनत बोलियाँ है. ओपन सोर्स के माहोल में लाभ-हानि के सिद्धांत को ध्यान दिये बग़ैर विशिष्ट जरूरतों के मुताबिक़ वस्तुओं को ढालना ज़्यादा आसान है. ओपन सोर्स मॉडेल न सिर्फ़ स्थानीय आवश्यकताओं को पाने में मदद करता है, बल्कि स्थानीय भावनाओं के आदर का भी ख्याल रखता है. यहाँ अगर समुदाय की इच्छा हो तो वह भाषा की सांस्कृतिक अंतरों के आधार पर भाषा के लिए अलग अलग लोकेल की मांग भी कर सकती है और ऐसा कोई मुक्त स्रोत की दुनिया में अनजाना नहीं है. मुख्य रूप से ओपेन सोर्स के लोकलाइज़ेशन में ही भविष्य में भाषाई कंप्यूटिग के सच को सभी भाषाओं में करने की ताक़त है.

स्थानीयकरण हेतु प्रयास को सफलीभूत व रोचक बनाने में रेड हैट का योगदान बेमिसाल है. पाँच भारतीय भाषाओं (हिन्दी, बंगाली, तमिल पंजाबी एवं गुजराती) का चयन 2004 में ही कर रेड हैट ने भारतीय आवश्यकताओं से संबंधित लोकलाइज़ेशन (l10n) और अंतरराष्ट्रीयकरण (i18n) कार्यों को अपने उत्पाद में बड़ी व्यापकता से सम्मलित किया था. स्थानीय भाषाओं में कंप्यूटर पर कार्य करना कभी भी इतना आसान नहीं था. आज रेड हैट एन्टरप्राइज़ लिनक्स ग्यारह भारतीय भाषाओं में काम कर रही है और उसे न केवल अनुप्रयोगों के स्तर बल्कि ऑपरेटिंग सिस्टम के स्तर पर भी स्थानीयकृत किया गया. भारत एवं इसकी स्थानीय भाषा कंप्यूटिंग उद्योग के प्रति रेड हैट की संवेदना एवं वचनवद्धता को दर्शाने के लिए यह काफ़ी है.

भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने एक बार कहा- ''भारत में ओपेन सोर्स कोड सॉफ़्टवेयर को हमारे करोड़ों लोगों के हित के लिए आना और स्थायी रूप से ठहरना होगा''. भारत जैसे ग़रीब मुल्क में जहाँ प्रति व्यक्ति आय औसत से बहुत कम है, जनाब कलाम साहब के लफ़्ज़ इस देश के लिए महत्वपूर्ण आधार वाक्य होना चाहिए. ये सभी स्थानीयकृत कंप्यूटर ग्रामीण कंप्यूटिंग के क्षेत्र में बड़े लाभदायक होंगे. देहाती भारत के लोग सिर्फ़ अपनी देसी ज़बान बोलते हैं. उनके लिए अंग्रेज़ी ब्रिटानिया प्रभाव तथा शोषण की भाषा एवं संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है. भारत में, ख़ासकर देहाती क्षेत्रों में रेडियो एवं टीवी के गहरे प्रभाव के कारण का विश्लेषण करने से हम समझ सकते हैं कि इसका मुख्य कारण स्थानीय भाषाओं में टी.वी. कार्यक्रमों के प्रस्तुति की उपलब्धता है. भारत में स्थानीयकरण आन्दोलन ने विदेशी कंप्यूटर को देशी में बदल दिया है - हमारा कंप्यूटर, आपका कंप्यूटर. स्थानीय भाषा आईटी बाज़ार विकासशील अवस्था में है और यह लगातार बढ़ रहा है. ई-गर्वर्‌नेंस एक बृहत क्षेत्र हैं जहाँ लोकलाइज़ेशन सॉफ़्टवेयर की नितांत आवश्यकता है. हार्डवेयर की कीमत बड़ी तेजी से गिरती जा रही है और इस संदर्भ में स्थानीयकृत ओपेन सोर्स सॉफ़्टवेयर श्रेष्ठ व भरोसेमंद है.

बीते वर्षों में सरकार ने सभी 22 राजकीय भाषाओं में सीडी जारी करने का व्यापक कार्यक्रम शुरू किया है और लगभग सभी भाषाओं में सीडी पहले ही लॉन्च कर चुकी है. सीडी पर उपलब्ध ज़्यादातर अनुप्रयोग जनरल पब्लिक लाइसेंस के तहत जारी किये गये. यह भारत में स्थानीयकरण आन्दोलन की कामयाबी की बड़ी कहानी है. यह भारत सरकार द्वारा वित्त प्रदत्त है. इसके तहत करोड़ों सीडी आम लोगों के बीच भेजे जा रहे हैं. कोई भी व्यक्ति मुफ्त की भाषा सीडी के लिए आवेदन कर सकता है. इंडिक्स (www.cdacmumbai.in/projects/indix ) भारतीय भाषाओं के लिए प्रौद्योगिकी विकास (http://tdil.mit.gov.in ) द्वारा वित्त पोषित एक और परियोजना है जो लिनक्स की सहायता के लिए भारतीय भाषा में कार्य करता है. सरकारी संगठन सीडैक (http://www.cdac.in) ने भी ओपेन सोर्स सॉफ़्टवेयर के स्थानीयकरण के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया है और इन सरकारी प्रयासों से मूलभूत रूप से जुड़ा है.

भारत में अनेक लोग एवं कई संगठन हैं जो ओपेन सोर्स विचारधारा के पक्षधर रहे हैं. इसका एक प्रभावशाली व अनोखा उदाहरण है - महात्मा गांधी अर्न्तराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा जिसकी 1997 ई. में स्थापना हिन्दी का वैश्विक स्तर पर प्रचार प्रसार के लिए की गई थी. प्रख्यात हिन्दी कवि एवं भारत सरकार में संस्कृति मंत्रालय में सचिव रह चुके अशोक वाजपेयी इस विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति थे और उन्होंने विश्वविद्यालय को पूर्ण रूपेण ओपेन सोर्स के जरिये चलाने का निर्णय लिया था. अपने कार्यकाल के दौरान वाजपेयी ने दो किताबें (हिन्दी में) और एक द्विभाषिक पत्रिका लीला (हिन्दी और अंग्रेज़ी) पूर्ण रूप से ओपेन सोर्स टेक्नालोजी के आधार पर प्रकाशित करवाए थे. स्थानीय भाषा में कार्य करने वाले सॉफ़्टवेयर ख़ासकर हिन्दी में ओपन सोर्स कंप्यूटर आधारित तकनीक को अपने परिसर में स्थान देना यही विश्वविद्यालय का मुख्य लक्ष्य था. इसे ओपन स्रोत का दुर्भाग्य कहेंगे कि उनके कार्यावधि के बाद स्थिति उतनी सकारात्मक नहीं रही.

दिल्ली स्थित ग़ैर लाभकारी संस्था सराय-सीएसडीएस (www.sarai.net) मुक्त सॉफ़्टवेयर का उपयोग, प्रचार एवं विकास के प्रति पूर्ण रूपेण वचनबद्ध है. मैथिली, हिन्दी, छत्तीसगढ़ी सहित कुछ भारतीय भाषाओं के स्थानीयकरण में सराय-सीएसडीएस ने मुख्य भूमिका अदा की है. सराय-सीएसडीएस ने अनेक लोगों को संग-साथ देकर एवं कई कार्यशाला आयोजित कर इस क्षेत्र में भाग लेने तथा इसे परिवर्द्धित करने के लिए प्रोत्साहित किया है और लगातार कर रहा है.

वस्तुतः मुक्त स्रोत के प्रयास बचे हुए बैबल की मीनार को पूरा करने के काम जैसा है. बाइबिल में वर्णित एक कथा के मुताबिक़ पहले इतनी भाषाएँ नहीं थीं. सिर्फ़ एक भाषा थी जिसमें लोग अपनी भावना, पीड़ा, दुख-सुख, मौज-मस्ती बाँटते थे. वही एक भाषा ज्ञान की भाषा थी, वही विज्ञान की भाषा थी. भाषा एक - मानवता एक. समग्र मानवता ने एकबार सोचा कि क्यों न ऐसी मीनार बनाई जाए जो स्वर्ग तक जा सके ताकि स्वर्ग की हकीकत सामने आ सके. ताकि अंतिम सत्य पाया जा सके. लेकिन ईश्वर को यह कहाँ मंजूर था. यह तो ईश्वर की सत्ता को खुली चुनौती थी. उन्होंने सोचा कि सबसे बढ़िया तरीक़ा है कि सबों की भाषाएँ अलग-अलग कर दी जाए...और फिर सबों की भाषाएँ अलग-अलग हो गईं. एक ऐसी दुनिया रच दी ईश्वर ने जिसमें कोई किसी की भाषा नहीं समझता था...मीनार वहीं रूक गई. स्वर्ग तक न पहुँचा जा सका. जिह्वा-भ्रम की वह स्थिति आज भी ज्ञान के विकेंद्रीकरण के बीच बड़ी दीवार बनकर खड़ी है. ख़ासकर कंप्यूटर व आईटी जैसे क्षेत्रों में यह बड़ी रूकावट है. शासन व शोषण की भाषा अंग्रेज़ी में कंप्यूटर आम आदमी की समझ से बाहर है...वैसे में ओपन सोर्स एक रास्ता दिखाती है जिसपर हर कोई आ-जा सकता है. वहाँ हर भाषा समान है चाहे वह करोड़ों के द्वारा बोली जाती हो या कुछ चंद लोगों के द्वारा. गौरतलब है मुक्त स्रोत सर्वोत्तम की उत्तरजीविता के बजाय सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय का काम करती है. तभी तो इनके द्वारा पंजीकृत भाषाओं की सूची में पाँच-दस रणनीतिक रूप से सबल भाषाएँ नहीं दिखती बल्कि करीब सौ भाषाएँ दिखाई देती हैं, जिसपर काम करने के लिए कोई स्वामित्ववादी कंपनियाँ सोच भी नहीं सकती हैं.

यह आंदोलन खुला है...इसका आप भी हिस्सा हो सकते हैं, आप भी शिरकत कर सकते हैं. बड़े स्तर पर भाषा के लिए की जा रही इस कार सेवा में आप भी योगदान दे सकते हैं. यह समुदाय समर्थित दुनिया है, जो मुक्त स्रोत सॉफ़्टवेयर की दुनिया है. एक ऐसी बड़ी, व्यापक और ज़्यादा भरोसेमंद दुनिया जो पूरा का पूरा दरवाजा खोलकर आपको गले से लगाती है और कहती है कि आइए और हमारे साथ, जहाँ तकनीक एक खास किस्म की बपौती न हो...यानी जहाँ ज्ञान दीवार विहीन हो...ज्ञान मुक्त हो. स्वामित्ववादी कंपनियाँ अपने केंद्र में लाभ को रखती है और ज़ाहिर है अगर आप उनकी पूंजी में इजाफा नहीं कर सकते हैं... तो आप बेकार हैं, आपकी भाषा फालतू है. यही नहीं भारत जैसे औपनिवेशिक स्वरूप वाले देश में जहाँ अंग्रेज़ी आम भारतीय के लिए अनिवार्य सर दर्द बनकर साथ चल रहा है वहाँ वे कंपनियां यह भी सोचती हैं कि आख़िर भारत में ज़रूरत क्या है अपने सामानों को भाषाओं में रखने की. ज़्यादा से ज़्यादा हम हिन्दी में दे देंगे वह भी किसी एजेंसी से अनुवाद करवाकर. उन्हें खाना पूर्ति के लिए भाषा चाहिए पर आपके और हमारे लिए भाषा हमारी साँसें हैं हमारी ज़िंदगी है. इसलिए अगर कोई कंप्यूटर उत्पाद का निर्माता स्थानीय भाषा में करने की मशक़्क़त भी करता है तो हिन्दी और दो-एक महत्वपूर्ण भाषाओं में. शेष भाषाएँ तकनीक की भागम-भाग में पीछे छूटती जा रही है. पन्नों के स्थान वेब पेज ले रहें हैं. किताबों का स्थान ई-पुस्तकें ले रही हैं. कहीं तकनीक सबल भाषाएँ कमजोर भाषाओं को लील न ले. चिंता और चिंतन दोनों जरूरी है कि कैसे इससे बचा जाए. हम बचा सकते हैं अपनी भाषा को इस आभासी मायावी दुनिया में खोने से. और निश्चित रूप से तरीक़ा हमें ओपन सोर्स सुझाता है... समुदाय के जनपथ पर बढ़ें और हासिल करें वह सब जिसे आप कल तक सपना समझते थे.

स्थानीयकरण का कार्य काफ़ी पहले शुरू हुआ और अब यह आन्दोलन का रूप ले चुका है. इन्टरनेट की उपलब्धता, संसाधनों का अभाव और निरक्षरता स्थानीय भाषा कंप्यूटिंग के रास्ते में कुछ बाधाएँ है. सबसे बड़ी बाधा अंग्रेज़ी बोलने वालों की मानसिकता है जो स्थानीय भाषा में कंप्यूटिंग की कोशिशों का मज़ाक उड़ाती है. ऐसे लोगो के पास ज़मीनी अनुभव नहीं हैं, लेकिन अभी भी वे लोग प्रशासन एवं वित्त में बड़ी पहुँच क़ायम किए हुए हैं लेकिन अन्तत: उन्हें स्थानीय भाषा कंप्यूटिंग बाज़ार के सामने झुकना होगा. दो दशक पूर्व, दूरदर्शन उद्योग की स्थिति भारत में वर्तमान कंप्यूटर उद्योग के तरह ही थी. सकारात्मक बदलाव अवश्यम्भावी है और कंप्यूटर के क्षेत्र में भी यह बहुत दूर नहीं है. कवि अशोक वाजपेयी ने एक मर्तबा लिखा था कि ज्ञान के नि:स्वार्थ प्रसार की भारतीय परंपरा बहुत पुरानी और वैश्विक है. हम लोग कह सकते हैं कि फ़्री सॉफ्टवयेर आन्दोलन पुरानी भारतीय परंपरा का ही पाश्चात्य संस्करण है. श्री वाजपेयी की बात बहुत ठीक है और इसीलिए भविष्य में लंबी अवधि में भारतीय मिट्टी ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर के वास्ते ख़ुद को उर्वर साबित करेगी. 'जहाँ ज्ञान हो मुक्त' नोबेल पुरस्कार प्राप्त कवि रवीन्द्र नाथ टैगोर का अपने राष्ट्र के लिए सपना था. समय अब उस स्वप्नलोक की ओर आगे बढ़ रहा है.

 

(समाप्त. आलेख श्रृंखला के पिछले भाग क्रमशः यहाँ देखें - भाग 1, भाग 2, भाग 3, भाग 4, भाग 5, भाग 6)

clip_image002[4]

राजेश रंजन का आलेख - अपना कंप्यूटर अपनी भाषा में - भाग 1

राजेश रंजन विगत कई वर्षों से हिन्दी कंप्यूटरीकरण
के कार्य से जुड़े हुए हैं. वे अभी एक बहुदेशीय
सॉफ्टवेयर कंपनी रेड हैट में बतौर लैंग्वेज मेंटेनर हिन्दी
के रूप में कार्यरत हैं. वे कंप्यूटर स्थानीयकरण की कई
परियोजनाओं जैसे फेडोरा, गनोम, केडीई, ओपनऑफिस,
मोज़िला आदि से जुड़े हैं. साथ ही कंप्यूटर अनुवाद में
मानकीकरण के लिए चलाए गए एक महत्वाकांक्षी सामुदायिक
परियोजना फ़्यूल के समन्वयक भी हैं. इसके अलावे उन्होंने
मैथिली कंप्यूटिंग के कार्यों को भी अपनी देख-रेख में
मैथिली समुदाय के साथ पूरा किया है. वे प्रतिष्ठित मीडिया
समूह इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के जनसत्ता और लिटरेट
वर्ल्ड के साथ काम कर चुके हैं.

हिन्दी पत्रकारिता में भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली
से स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाने के पहले इन्होंने नेतरहाट विद्यालय,
साइंस कॉलेज, पटना और किरोड़ीमल कॉलेज, दिल्ली जैसे
जाने-माने संस्थानों में अध्ययन किया है. भाषाई तकनीक, इंटरनेट,
कंप्यूटर पर इनके लेखादि लगातार प्रकाशित होते रहते हैं.

 

 

कॉपीराइट © राजेश रंजन, सर्वाधिकार सुरक्षित.

क्रियेटिव कॉमन्स एट्रीब्यूशन शेयर एलाइक लाइसेंस के अंतर्गत.

(पिछले भाग 5 से जारी...)

8.ऑफ़िस सूइटओपनऑफ़िस

ओपनऑफ़िस कार्यालय में उपयोग में आने वाले अनुप्रयोगों का समूह है जिसका स्रोत कोड भी स्वतंत्र रूप से उपलब्ध है. ओपनऑफ़िस को OpenOffice.org या OOo के रूप में भी जाना जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ओपनडाक्यूमेंट मानक को आँकड़ा विनिमय के लिए प्रयोग करने के साथ ही साथ यह माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस के कई संस्करणों के साथ बहुतेरे दूसरे प्लेटफ़ॉर्म पर उपयोग किया जाता है. यह मुख्यतया माइक्रोसॉफ़्ट विंडोज, लिनक्स, सोलारिस, बीएसडी, ओपनवीएमएस, OS/2, और IRIX पर समर्थित है.

clip_image002[1]_thumb[1]

ओपनऑफ़िस स्टारऑफिस (http://www.sun.com/software/star/staroffice/index.jsp) पर आधारित है जिसे बाद में सन माइक्रोसिस्टम (http://sun.com) के द्वारा अगस्त 1999 में अधिगृहीत कर लिया गया. ओपनऑफ़िस एक मुक्त सॉफ़्टवेयर है जो जीएनयू लेसर जनरल पब्लिक लाइसेंस के अधीन उपलब्ध कराया गया है. हालांकि इसे ओपनऑफ़िस के रूप में ज़्यादा लोकप्रिय रूप से जाना जाता है लेकिन यह ट्रेडमार्क किसी दूसरे के नाम से पंजीकृत है इसलिए इसका औपचारिक नाम Openoffice.Org रखना वैधानिक ज़रूरत हो गई है. इसका वेब साइट विधिवत तौर पर अक्टूबर 2000 में शुरू हुआ था. माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस सूट के बनिस्बत एक समस्या यहाँ है कि इस ऑफ़िस सूट में प्रोसेसिंग समय व स्मृति की अधिक खपत होती है.

ओपनऑफ़िस के कई घटक हैं. राइटर (Writer) माइक्रोसॉफ़्ट वर्ड के तरह का वर्ड प्रोसेसर है जिसमें PDF प्रारूप में पृष्ठ को प्राप्त करने की सुविधा बिना किसी अतिरिक्त सॉफ़्टवेयर को लगाने से प्राप्त हो जाती है. साथ ही वेब पेज संपादन की सुविधा यहाँ है. कैल्क (Calc) माइक्रोसॉफ़्ट एक्सेल के समान गुणों वाला है. इसे भी PDF फ़ाइल में सीधे पाया जा सकता है. इम्प्रेस (Impress) प्रस्तुतिकरण प्रोग्राम है जो माइक्रोसॉफ़्ट पावर प्वाइंट के समान है. अपने अन्य साथी की तरह यहाँ भी सीधे PDF प्राप्त किया जा सकता है. बेस (Base) डाटाबेस प्रोग्राम है जो माइक्रोसॉफ़्ट एक्सेस के समान है. बेस को विभिन्न डाटाबेस के लिए फ्रंटएंड के रूप में प्रयोग किया जा सकता है. ड्रॉ (Draw) वेक्टर ग्राफिक्स एडीटर है जो कोरलड्रॉ के शुरूआती संस्करण के तरह काम करता है. यह माइक्रोसॉफ़्ट पब्लिशर की तरह है. माइक्रोसॉफ़्ट इक्वेशन एडीटर की तरह गणितीय सूत्रों के निर्माण व संपादन का काम मैथ (Math) करता है.

clip_image004[1]_thumb[1]

ओपनऑफ़िस का विकास सीवीएस के प्रयोग से होता है. सीवीएस फ़ाइल को ट्री संरचना में संगठित करता है. इसके अनुवाद की प्रक्रिया हालांकि गनोम से भिन्न है परंतु आसान है जिसे सीखा जा सकता है. अनुवाद किसी भी संपादक पर किया जा सकता है लेकिन यह जरूरी है कि आरंभ करने के सबसे पहले यह जानना होता है कि किस संस्करण का अनुवाद किया जाना है. इसके लिए सबसे पहले dev@l10n.openoffice.org डाक सूची पर निश्चित कर लें कि कौन सा संस्करण चल रहा है. लेकिन यदि कोई बड़ा रिलीज़ हाल में होने जा रहा हो तो सबसे अच्छा हो कि आप इसी संस्करण पर काम करें. फिर ज़रूरत होती है फ़ाइलों की जिसे आपको अनूदित करना है. इसे इस लिंक से लीजिए:

ftp://ftp.linux.cz/pub/localization/OpenOffice.org/devel/

clip_image006[1]_thumb[1]

यहाँ आप ओपनऑफ़िस की हर सक्रिय शाखाओं के लिए फ़ोल्डर पाएँगे. किसी भी डायरेक्ट्री में आप दो तरह की फ़ाइलें पाएँगे एक तो POT फ़ाइल और दूसरी en-US.sdf फ़ाइल. जिस शाखा के लिए आप काम करना चाहते हैं उस शाखा की आप दोनों फ़ाइलें डाउनलोड कर लें जिसमें en-US.sdf फ़ाइल की ज़रूरत आपको अनुवाद का काम ख़त्म करने के बाद ओपनऑफ़िस प्रारूप में फ़ाइलों को बदलने में होगी.

फिर क्या है! केबैबेल (KBabel) या पीओएडिट (POedit) पर अनुवाद के काम में जुट जाइए. चूँकि मदद फ़ाइलों को छोड़कर भी फ़ाइलें काफ़ी बड़ी हैं इसलिए लंबा समय लगता है. यह काम चूँकि महत्वपूर्ण व बड़ा है इसलिए पहले से ही शब्दावली तय कर ली जाए तो अच्छा हो.

फिर ट्रांसेलेशन टूलकिट (Translate Toolkit) को अपने कंप्यूटर में स्थापित करें जिसका उपयोग अनूदित फ़ाइलों को ओपनऑफ़िस प्रारूप में बदलने में होगा. इस सबसे पहले फ़ाइल की बैकअप कॉपी ले लें. फ़ाइल को जाँच लें कि फ़ाइल हर तरह से सही है कि नहीं यानी उसमें टैग आदि सही ढ़ंग से हैं या नहीं. फिर फ़ाइल को ओपनऑफ़िस प्रारूप में बदलने के लिए ट्रांशलेशन टूलकिट की मदद लें और po2oo औज़ार की मदद से अपनी फ़ाइल को ओपनऑफ़िस प्रारूप में बदलें. यहाँ आपको en-US.sdf फ़ाइल की ज़रूरत पड़ेगी जिसके पाथ को आपको इसमें बदलने के दौरान देना पड़ेगा. आपको कमांड के साथ लोकेल नाम भी देना होगा. उदाहरण लीजिए...

clip_image008[1]_thumb[1]

po2oo -i <folder-with-po-files> -t en-US.sdf -o <name-of-GSI-format-file> -l <Locale-name>

हिन्दी के लिए यह कमांड oo-2.0-hi-GSI.sdf आउटपुट फ़ाइल देगी. फिर उसके बाद अपनी भाषा के लिए लोकलाइज़ेशन प्रोजेक्ट (L10n) के अंदर एक इस्यू बनाकर फ़ाइल सुपुर्द करें. एक इश्यू का उदाहरण देखें:

http://www.openoffice.org/issues/show_bug.cgi?id=68062

डाक सूची:

पहले आप openoffice.org पर अपना खाता बनाएँ और फिर नीचे की सूची से डाक सूची चुनें:

http://native-lang.openoffice.org/servlets/ProjectMailingListList

http://l10n.openoffice.org/servlets/ProjectMailingListList

ऊपर के दोनों प्रोजेक्ट देशीय भाषाओं में ओपन ऑफ़िस को लाने के काम से जुड़ी है. हिन्दी में पहले से काम चल रहा है और फिलहाल http://hi.openoffice.org टीम ने इस काम का जिम्मा लिया हुआ है. इससे जुड़े पिछले काम के लिए इस इस्यू को देखिए, यहाँ से आप अनुवाद की हुई फ़ाइलें भी ले सकते हैं:

http://www.openoffice.org/issues/show_bug.cgi?id=68062

हाल में पूटल सर्वर भी अनुवाद की समस्या को यहाँ पर सरल बनाने के लिए लाया गया है. इसमें शामिल भाषाओं को दो जगह पर पाया जा सकता है:

http://www.sunvirtuallab.com:32300/languages/

http://pootle2.sunvirtuallab.com/languages/

यहाँ से सीधे उन भाषाओं में अनुवाद किए जा सकते हैं परंतु यहाँ एक प्रशासक रहता है जिसकी अनुमति अनुवाद के उस अंश को कमिट किए जाने के लिए होती है. आप यूजर गाइड यहाँ से पा सकते हैं:

http://wiki.services.openoffice.org/wiki/Pootle_User_Guide

हालाँकि यह बेहतर उपाय हैं क्योंकि यहाँ से ऑनलाइन अनुवाद या फाइलें अनुवाद कर डाली जा सकती हैं लेकिन पूटल सर्वर में अभी भी थोड़ी बहुत समस्या है जिसे दूर कर लिया जाता है.

जरूरी कड़ी संदर्भ:

http://en.wikipedia.org/wiki/OpenOffice.org

ftp://ftp.linux.cz/pub/localization/OpenOffice.org/devel/POT/
http://oootranslation.services.openoffice.org/pub/OpenOffice.org/
http://l10n.openoffice.org/
http://www.khmeros.info/tools/localization_tips.html
http://www.khmeros.info/tools/oo2.0_program_translaltion.html
http://qa.openoffice.org/localized/index.html
http://qatrack.services.openoffice.org/view.php
http://wiki.services.openoffice.org/wiki/OOoRelease30
http://wiki.services.openoffice.org/wiki/NLC:ReleaseChecklist
http://l10n.openoffice.org/L10N_Framework/ooo20/localization_of_openoffice_2.0.html
http://www.microsoft.com/globaldev/reference/lcid-all.mspx

http://www.openoffice.org/issues/show_bug.cgi?id=68062

ऑफ़िस सूइट – लिब्रेऑफिस

लिब्रेऑफिस कार्यालय में उपयोग में आने वाले अनुप्रयोगों का समूह है जिसका स्रोत कोड भी स्वतंत्र रूप से उपलब्ध है. पहले जिसपर समुदाय ओपनऑफ़िस के रूप काम करती है वही अब कुछ वैधानिक कारणों से लिब्रेऑफिस हो गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ओपनडाक्यूमेंट मानक को आँकड़ा विनिमय के लिए प्रयोग करने के साथ ही साथ यह माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस के कई संस्करणों के साथ बहुतेरे दूसरे प्लेटफ़ॉर्म पर उपयोग किया जाता है. यह मुख्यतया माइक्रोसॉफ़्ट विंडोज, लिनक्स, सोलारिस, बीएसडी, ओपनवीएमएस, OS/2, और IRIX पर समर्थित है.

clip_image010[1]_thumb[1]

लिब्रेऑफ़िस एक मुक्त सॉफ़्टवेयर है जो जीएनयू लेसर जनरल पब्लिक लाइसेंस के अधीन उपलब्ध कराया गया है. माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस सूट के बनिस्बत एक समस्या यहाँ है कि इस ऑफ़िस सूट में प्रोसेसिंग समय व स्मृति की तुलनात्मक अधिक खपत होती है.

लिब्रेऑफ़िस के कई घटक हैं. राइटर (Writer) माइक्रोसॉफ़्ट वर्ड के तरह का वर्ड प्रोसेसर है जिसमें PDF प्रारूप में पृष्ठ को प्राप्त करने की सुविधा बिना किसी अतिरिक्त सॉफ़्टवेयर को लगाने से प्राप्त हो जाती है. साथ ही वेब पेज संपादन की सुविधा यहाँ है. कैल्क (Calc) माइक्रोसॉफ़्ट एक्सेल के समान गुणों वाला है. इसे भी PDF फ़ाइल में सीधे पाया जा सकता है. इम्प्रेस (Impress) प्रस्तुतिकरण प्रोग्राम है जो माइक्रोसॉफ़्ट पावर प्वाइंट के समान है. अपने अन्य साथी की तरह यहाँ भी सीधे PDF प्राप्त किया जा सकता है. बेस (Base) डाटाबेस प्रोग्राम है जो माइक्रोसॉफ़्ट एक्सेस के समान है. बेस को विभिन्न डाटाबेस के लिए फ्रंटएंड के रूप में प्रयोग किया जा सकता है. ड्रॉ (Draw) वेक्टर ग्राफिक्स एडीटर है जो कोरलड्रॉ के शुरूआती संस्करण के तरह काम करता है. यह माइक्रोसॉफ़्ट पब्लिशर की तरह है. माइक्रोसॉफ़्ट इक्वेशन एडीटर की तरह गणितीय सूत्रों के निर्माण व संपादन का काम मैथ (Math) करता है.

clip_image012[1]_thumb[1]

लिब्रेऑफ़िस का अनुवाद कार्य पूटल सर्वर द्वारा संचालित है. यह एक ऑनलाइन औजार है जिसकी फाइलों को डाउनलोड कर लोकलाइज, पीओएडिट जैसी टूल के साथ अनुवाद कर फिर साइट पर अपलोड किया जा सकता है. आप यहाँ http://wiki.documentfoundation.org/Language_Teams भाषा सूची देख सकते हैं जहाँ टीम के कॉर्डनिटेर के नाम और संपर्क भी दिए है. मेलिंग लिस्ट यानी डाक सूची है - l10n@global.libreoffice.org. यहाँ पर सभी भाषाओं द्वारा किया जाने वाला अनुवाद कार्य आप देख सकते हैं - https://translations.documentfoundation.org .

जरूरी कड़ी संदर्भ:

http://wiki.documentfoundation.org/Language

https://translations.documentfoundation.org/

http://wiki.documentfoundation.org/Language_Teams

http://wiki.documentfoundation.org/Translating_LibreOffice

http://wiki.documentfoundation.org/LibreOffice_Localization_Guide

http://www.libreoffice.org/get-involved/localizers/

9. ब्रॉउज़र ईमेल क्लाइंटफ़ायरफ़ॉक्स थंडरबर्ड

वेब ब्रॉउज़र एक ऐसा सॉफ़्टवेयर अनुप्रयोग होता है जो उपयोक्ताओं को वेब पृष्ठों पर स्थित पाठ, चित्र, वीडियो, संगीत आदि को दिखाने और उसके साथ अंतःक्रिया करने में समर्थ बनाता है. वेब ब्रॉउज़र वेब सर्वर के साथ संचार करता है जो HTTP का प्रयोग वेब पृष्ठों को लाने के लिए करता है. इंटरनेट एक्सप्लोरर, फ़ायरफ़ॉक्स, सफारी, ओपेरा, नेटस्केप कुछ लोकप्रिय ब्रॉउज़र हैं. फ़ायरफ़ॉक्स ओपनसोर्स में उपलब्ध काफ़ी लोकप्रिय ब्रॉउज़र है जिससे पिछले कुछ बर्षों में इंटरनेट एक्सप्लोरर के बाज़ार हिस्सा का बड़ा भाग हड़प लिया है और आज करीब 25% उपयोक्ता हैं. यहाँ हम फ़ायरफ़ॉक्स की ही मुख्यतः चर्चा करेंगे क्योंकि यह मुक्त स्रोत में उपलब्ध है और साथ ही कई महत्वपूर्ण सुरक्षा संबंधी खासियत से लैस है.

मोज़िला का फ़ायरफ़ॉक्स काफ़ी लोकप्रिय ब्रॉउज़र में से है. पिछले कुछ सालों में इसकी लोकप्रियता में इजाफा ने तो इंटरनेट एक्सप्लोलर को भी अपनी परंपरागत सुविधाओं से अलग काफ़ी कुछ जोड़ने पर विवश किया है. यह ब्रॉउज़र ओपन सोर्स का ब्रॉउज़र है और इसमें कई सारे ऐसे अतिरिक्त सुविधाओं को जोड़ा जा सकता है जो उपयोक्ताओं के कामों को काफ़ी आसान बना देता है.

मोज़िला का फ़ायरफ़ॉक्स ब्राउज़र हिंदी में स्थानीयकृत है और यह बेहद लोकप्रिय ब्राउज़र है. यह हिंदी में पूरी तरह से स्थानीयकृत है और इसकी समीक्षा कार्यशाला भी सराय-सीएसडीएस के सौजन्य से की गई थी. फ़ायरफ़ॉक्स के उन पन्ने को हिंदी स्थानीयकृत फ़ायरफ़ॉक्स के अंदर देखिए जो आपको फ़ायरफ़ॉक्स हिंदी के डाउनलोड के लिए आमंत्रित कर रहा है.

clip_image014[1]_thumb[1]

जो पिछली दिक्कतों को जानते होंगे वे समझ सकते हैं कि किसी भी वेबसाइट के हिंदी पाठ को पढ़ना कितनी टेढ़ी खीर हुआ करती थी. लेकिन अब वक़्त बदल गया है और ब्राउज़र अब हमारी भाषाओं के पाठ को पहचानने से इन्कार नहीं करती है.

clip_image016_thumb[1]

फ़ायरफ़ॉक्स ब्राउज़र में खोला गया बीबीसी हिंदी का पहला पन्ना.

यदि आप फ़ायरफ़ॉक्स को अपनी भाषा में स्थानीयकृत करना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि आप जाँच लें कि पहले से स्थानीयकरण का यह काम पूरा हो चुका है अथवा कोई दूसरी टीम इस काम में लगी तो नहीं है. फ़ायरफ़ॉक्स के लिए काम कर रही टीमों की सूची आप यहाँ से मोज़िला के विकि पेज से हासिल कर सकते हैं http://wiki.mozilla.org/L10n:Localization_Teams. आप इस पृष्ठ पर जाकर देख सकते हैं कि कौन सी टीम आपकी भाषा के लिए काम कर रही है या कि अबतक कोई काम शुरू नहीं हो पाया है. कुछ ग़ैर आधिकारिक दल यानी वे जो फ़ायरफ़ॉक्स के स्थानीयकरण के लिए अपना पंजीयन दर्ज नहीं किया है, भी फ़ायरफ़ॉक्स लोकलाइज़ेशन पर काम करती है. यदि अनुवाद के लिए टीम पहले से मौजूद है तो आप भी स्वयं को उस टीम के साथ जोड़े जाने का आग्रह उस टीम के कोऑर्डिनेटर से कर सकते हैं.

यदि फ़ायरफ़ॉक्स अनुवाद के लिए टीम मौजूद नहीं है तो आप एक नयी टीम उस भाषा के लिए शुरू कर सकते हैं. आप टीम का सेटअप mlp-staff@mozilla.org पर मेल भेजकर कर सकते हैं. उस मेल में आपकी टीम के कोऑर्डिनेटर का नाम व ईमेल पता होना चाहिए. एक बार मोज़िला ट्रांसलेशन टीम से स्वीकृत होने पर आपकी टीम को आधिकारिक फ़ायरफ़ॉक्स टीम के साथ जोड़ दिया जायेगा. फ़ायरफ़ॉक्स व थंडरबर्ड पर काम करने के लिए यदि आप कमिट करने का अधिकार चाहते हैं तो http://www.mozilla.org/hacking/committer/ पर जाकर खाते के लिए आवेदन दे सकते हैं. हर टीम से प्रायः सिर्फ़ एक या दो ही व्यक्ति को यह अधिकार मिलता है.

फ़ायरफ़ॉक्स पहले सीवीएस सर्वर पर चलता था लेकिन अब मरक्यूरियल पर चला गया है. कोई भी फ़ाइल को डाउनलोड कर सकता है मगर कुछ ही व्यक्ति जिनको कमिट का अधिकार मिला हुआ है फ़ाइल को अनुवाद कर उसे कमिट कर सकता है. इसी कारण से ज़ाहिर है कोऑर्डिनेटर का मरक्यूरियल (hg) से परिचित होना निहायत ही जरूरी है. एचजी से फ़ाइलें लेकर और फिर अनुवाद करने के बाद उसे वापस सौंपकर हम फ़ायरफ़ॉक्स को अपनी भाषा में करने का काम कर सकते हैं. फ़ाइलें पीओ प्रारूप में नहीं उपलब्ध रहती हैं इसलिए हम उसे किसी भी पाठ संपादक पर अनुवाद का काम कर सकते हैं.इस कार्य में ट्रंक व शाखाओं का ध्यान रखना जरूरी है. संभवतः हर मुक्त स्रोत के विकास का कार्य इस तरह की प्रक्रिया से जुड़ा रहता है. यदि आपने xpi डाउनलोड किया है तो आप इन फ़ाइलों को पीओ फ़ाइल में बदलकर अनुवाद कर सकते हैं लेकिन यहाँ पुनः आपको इस पीओ फ़ाइल को dtd या properties फ़ाइल में बदलना होगा. अनुवाद की शुद्धता की जाँच अनुवाद को एचजी को सौंपे जाने के पहले कर लेना चाहिए. यहाँ dtd या properties फ़ाइलों में पीओ फ़ाइल की बनिस्पत ज़्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत होती है. अनुवाद करने के बाद विधिवत जाँच करके फ़ाइल को फ़ायरफ़ॉक्स समुदाय में सौंपने की ज़रूरत है.

clip_image017_thumb[2]

स्थानीयकरण की प्रक्रिया:

मरक्यूरियल को अपने ऑपरेटिंग तंत्र पर संस्थापित करने के बाद संबंधित विन्यास और उपयोक्तानाम का सेटिंग इन चरणों में कर सकते हैं:

यदि आपको L10n को डाउनलोड करना हो तो

clip_image018_thumb[3]

यदि फ़ाइल मरक्यूरियल से ली गई है तो फ़ाइल को मरक्यूरियल में सौंपना होता है. प्रायः हर भाषा समुदाय से एक व्यक्ति को मरक्यूरियल में पहुँच दिया जाता है और इसके लिए सीवीएस की जानकारी जरूरी होती है. तो आपको अपने अनुवाद को मरक्यूरियल में सौंपना होता है. फिर उसके बाद प्रोडक्टाइज़ेशन की प्रक्रिया (सर्च, RSS रीडर्स, फ़ीड) एक बग के माध्यम से शुरू होती है. फिर अपनी भाषा के नाइटली बिल्ड को टिंडरबॉक्स (http://ftp.mozilla.org/pub/mozilla.org/firefox/tinderbox/) पर पाने के लिए एक बग फ़ाइल करनी चाहिए. फिर आख़िर में अपनी भाषा को mozilla.com/firefox/all.html page पर लाने के लिए एक अलग बग https://bugzilla.mozilla.org/ पर फ़ाइल करें.

यदि आपने अनुवाद का स्वयं ही पैकेज तैयार कर लिया है तो आप इसे mlp-staff@mozilla.org को भेज सकते हैं जो अपनी साइट पर इसे रखते हैं ताकि दूसरे लोग इसका फायदा उठा सकें. भाषा पैक तैयार करने का तरीक़ा यहाँ दिया गया है:

http://developer.mozilla.org/en/docs/Creating_en-X-dude#Create_a_language_pack

अन्य जरूरी लिंक:

http://wiki.mozilla.org/L10n:Teams

http://wiki.mozilla.org/L10n:Home_Page
http://wiki.mozilla.org/L10n:Localization_Process
http://developer.mozilla.org/en/docs/Creating_en-X-dude
http://developer.mozilla.org/en/docs/Create_a_new_localization
http://tinderbox.mozilla.org/showbuilds.cgi
http://ftp.mozilla.org/pub/mozilla.org/firefox/tinderbox/
http://ftp.mozilla.org/pub/mozilla.org/firefox/nightly/
http://people.mozilla.com/~axel/status-1.8/
http://www.mozilla.org/hacking/form.html
http://wiki.mozilla.org/Firefox3/Schedule
http://www.mozilla.com/en-US/firefox/all.html
http://www.mozilla.com/en-US/thunderbird/all.html

http://hg.mozilla.org/

http://hg.mozilla.org/l10n-central/

http://developer.mozilla.org/En/L10n_on_Mercurial

http://hgbook.red-bean.com/

irc.mozilla.org पर IRC चैनल: #l10n , #mozilla.in (भारतीय भाषाओं के लिए)

डाक सूची:

dev-l10n@lists.mozilla.org

यह डाक सूची मोज़िला लोकलाइज़ेशन के लिए काम करती है. भारतीय भाषाओं के लिए हालांकि दूसरी अलग सूची भी है परंतु इससे भी जुड़े रहें क्योंकि यही सबसे प्रमुख डाक सूची है. इससे जुड़ने के लिए इस वेब पृष्ठ को खोलें: https://lists.mozilla.org/listinfo/dev-l10n

dev-l10n-in@lists.mozilla.org

भारतीय भाषाओं के लिए उपरोक्त सूची में https://lists.mozilla.org/listinfo/dev-l10n-in पर जाकर शामिल हों.

समाचार समूह: ( सर्वर - news.mozilla.org ) mozilla.dev.l10n और mozilla.dev.l10n.in (भारतीय भाषाओं के लिए ).

10. ऑनलाइन मैसेंजरपिज़िन

आजकल सामान्य पाठ आधारित बात-चीत के लिए ऑनलाइन मैसेंजर काफ़ी लोकप्रिय है. हालांकि याहू मेल व जीमेल अपने मेल के साथ अंतःस्थापित रूप से इस सुविधा को देता है . लेकिन इससे अलग पिज़िन एक मल्टी प्रोटोकॉल इस्टैंट मैसेजिंग क्लाइंट है जो आपको अपने सारे इस्टैंट मैसेंजर को एक साथ एक ही समय में प्रयोग करने में सक्षम बनाता है. इसी पिज़िन को गैम नाम से भी जाना जाता रहा है परंतु कुछ कानूनी कारणों से उस नाम का उपयोग बंद हो गया है और अब उस पुराने गैम को पिज़िन के नाम से जाना जाता है.

clip_image020_thumb clip_image022_thumb

clip_image024_thumb[1]

पिज़िन निम्नलिखित के लिए काम करता है:

· AIM

· Bonjour

· Gadu-Gadu

· Google Talk

· Groupwise

· ICQ

· IRC

· MSN

· MySpaceIM

· QQ

· SILC

· SIMPLE

· Sametime

· XMPP

· Yahoo!

· Zephyr

इस पिज़िन को लोकलाइज करने के लिए पिज़िन के डेवलेपर अनुवाद इच्छुक समुदाय का समर्थन करती है. यदि आप अपने लोकेल में इसे अनुवाद करना चाहते हैं तो सबसे पहले इस कड़ी पर देखिए इसपर पहले से तो काम नहीं हो रहा है जैसा आप किसी भी दूसरे ओपन सोर्स प्रोजेक्ट के लिए किया जाता है - http://developer.pidgin.im/l10n. फिर यदि सक्रिय रूप से काम हो रहा है या नहीं हो रहा है दोनों स्थितियों में आप पिज़िन के अनुवादक की सूची पर मेल कर सकते हैं. सूची का आईडी है translators@pidgin.im और सदस्यता आप यहाँ से ले सकते हैं http://pidgin.im/cgi-bin/mailman/listinfo/translators.

यदि आपकी भाषा के लिए अबतक काम चालू नहीं हुआ है तो फिर भी आपको इसी सूची पर लिखना है कि किसी ने अबतक कोई काम शुरू तो नहीं किया है तो भी आपको इसी सूची पर मेल भेजना है. फिर अनुवाद सौंपने के लिए http://developer.pidgin.im/simpleticket पर एक इस्यू बनाइए और अनुवाद सुपुर्द कीजिए.

जरूरी कड़ियां व संदर्भ :

http://www.pidgin.im/

http://developer.pidgin.im/

http://developer.pidgin.im/wiki/TipsForTranslators

http://pidgin.im/cgi-bin/mailman/listinfo/translators

http://developer.pidgin.im/simpleticket

 

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

 

clip_image0024_thumb_thumb

राजेश रंजन

राजेश रंजन विगत कई वर्षों से हिन्दी कंप्यूटरीकरण
के कार्य से जुड़े हुए हैं. वे अभी एक बहुदेशीय
सॉफ्टवेयर कंपनी रेड हैट में बतौर लैंग्वेज मेंटेनर हिन्दी
के रूप में कार्यरत हैं. वे कंप्यूटर स्थानीयकरण की कई
परियोजनाओं जैसे फेडोरा, गनोम, केडीई, ओपनऑफिस,
मोज़िला आदि से जुड़े हैं. साथ ही कंप्यूटर अनुवाद में
मानकीकरण के लिए चलाए गए एक महत्वाकांक्षी सामुदायिक
परियोजना फ़्यूल के समन्वयक भी हैं. इसके अलावे उन्होंने
मैथिली कंप्यूटिंग के कार्यों को भी अपनी देख-रेख में
मैथिली समुदाय के साथ पूरा किया है. वे प्रतिष्ठित मीडिया
समूह इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के जनसत्ता और लिटरेट
वर्ल्ड के साथ काम कर चुके हैं.

हिन्दी पत्रकारिता में भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली
से स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाने के पहले इन्होंने नेतरहाट विद्यालय,
साइंस कॉलेज, पटना और किरोड़ीमल कॉलेज, दिल्ली जैसे
जाने-माने संस्थानों में अध्ययन किया है. भाषाई तकनीक, इंटरनेट,
कंप्यूटर पर इनके लेखादि लगातार प्रकाशित होते रहते हैं.


कॉपीराइट © राजेश रंजन, सर्वाधिकार सुरक्षित.

क्रियेटिव कॉमन्स एट्रीब्यूशन शेयर एलाइक लाइसेंस के अंतर्गत.

(पिछले भाग 4 से जारी...)

6. फ़ेडोरा

सामान्य रूप से हर ओपन सोर्स प्रोजेक्ट में काम करने का बुनियादी तरीका सामान्य रहता है। मेलिंग लिस्ट, चैट आदि के जरिए जानकारी ली जाती है और जहाँ इच्छा हो वहाँ आप अपना योगदान कर सकते हैं। फ़ेडोरा एक ऑपरेटिंग सिस्टम है। इस पर काम करके आप अपनी भाषा में एक संपूर्ण ऑपरेटिंग सिस्टम पाते हैं. फ़ेडोरा का स्थानीयकरण भी ओपनसोर्स के दूसरे प्रोजेक्ट के समान शुरू करना होता है. सबसे पहले यह जानकारी ले लीजिए कि कौन सी भाषाओं पर काम हो रहा है. इसके लिए https://fedora.transifex.com/projects/p/fedora/ पर देखें. यदि आप जिस भाषा में काम करने को रूचि रखते हैं और उस पर पहले से ही काम हो रहा है तो फिर आप टीम कोऑर्डिनेटर से https://fedoraproject.org/wiki/L10N_Teams पर संपर्क कीजिए और उन्हें अपनी रूचि को बताकर निर्देश अनुसार काम शुरू कीजिए।.

clip_image002

यदि यदि आपकी भाषा इस सूची में नहीं है तो फिर http://fedoraproject.org/wiki/L10N/Maintainer पृष्ठ आपके काम की है. इस पृष्ठ पर बताए निर्देश के मुताबिक़ आप अपनी नई भाषा में काम शुरू कर सकते हैं.

http://fedoraproject.org/wiki/L10N/Join पृष्ठ पर बताए सभी निर्देशों को पढ़कर पूरा करें. स्थानीयकरण के काम को करने के लिए थोड़ी लंबी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है. सबसे पहला है - डाक सूची फ़ेडोरा ट्रांस लिस्ट में शामिल होना: https://admin.fedoraproject.org/mailman/listinfo/trans

इस सूची में शामिल होने के बाद आपको फ़ेडोरा में अपना खाता के लिए आवेदन करना होता है. फेडोरा का अनुवाद मुख्यतः अभी ट्रांसिफिक्स पर होता है तो कुछेक प्रोजेक्ट का जनाटा पर भी। ये दोनों ऑनलाइन अनुवाद औज़ार है.

clip_image004

http://fedoraproject.org/wiki/L10N/Join पृष्ठ पर बताए सभी निर्देशों को पढ़कर पूरा करें. स्थानीयकरण के काम को करने के लिए थोड़ी लंबी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है. सबसे पहला है - डाक सूची फ़ेडोरा ट्रांस लिस्ट में शामिल होना: https://www.redhat.com/mailman/listinfo/fedora-trans-list

इस सूची में शामिल होने के बाद आपको फ़ेडोरा में अपना खाता के लिए आवेदन करना होता है. कमांड लाइन में किसी लिनक्स मशीन पर ssh-keygen -t dsa कमांड चलाकर आप SSH कुंजी बना सकते हैं. इसके विस्तार के लिए SSH/SVN से संबंधित अध्याय की मदद ले सकते हैं. फिर आपको GPG कुंजी बनानी होगी. कमांड लाइन पर gpg --gen-key कमांड से आप GPG कुंजी हासिल कर सकते हैं.

ज़ाहिर है कि फ़ेडोरा पर काम करने के लिए भाषा संयोजक को फ़ेडोरा से जुड़े औज़ारों व संसाधनों की बेहतर जानकारी रहनी चाहिए. अनुवाद की उक्त सूची पर घोषणा करें कि आप अमुक भाषा में काम करने को इच्छुक हैं. और काम आरंभ कर दें। अनुवाद आरंभ करने के लिए abrt, anaconda, chkconfig, desktop-backgrounds , redhat-menus , shotwell, system-config-keyboard, system-config-services, system-config-users जैसे कुछ महत्वपूर्ण पैकेज हैं। इनका अनुवाद पहले कर लिया जाए तो अच्छा रहता है.

Fedora-trans-list पर घोषणा करें कि आप अमुक भाषा में काम करने को इच्छुक हैं.

IRC:

#fedora-l10n Freenode पर

मेलिंग सूची

fedora-trans-list@redhat.com

जरूरी कड़ियाँ:

http://fedoraproject.org/wiki/L10N/Maintainer

http://fedoraproject.org/wiki/L10N/Join

http://fedoraproject.org/wiki/L10N

http://translate.fedoraproject.org

http://fedoraproject.org/wiki/L10N/Tools/Website

7. डेस्कटॉप वातावरण

चुनाव के विकल्पों का किसी समाज में होना उसकी जनतांत्रिक सफलता का सूचक है. मुक्त स्रोत की दुनिया विभिन्न प्रकार की फ़रमाइशों को उपलब्ध कराने की दुनिया है और डेस्कटॉप वातावरण भी इससे अछूता नहीं है. यहाँ व्यापक स्तर पर लोकप्रिय दो डेस्कटॉप वातावरण हैं - गनोम व केडीई. इसलिए गनोम व केडीई दोनों के बारे में पर्याप्त जानकारी के साथ-साथ दोनों डेस्कटॉप वातावरण को अपनी भाषा में लाने की विधि का ज्ञान बहुत ज़रूरी है.

गनोम डेस्कटॉप

गनोम एक फ़्री सॉफ़्टवेयर है और जीएनयू प्रोजेक्ट का वास्तव में एक हिस्सा है. जीएनयू लिनक्स के एक सबसे परिपक्व डेस्कटॉप वातावरण के रूप में गिना जाता है. गनोम जीएनयू नेटवर्क ऑब्जेक्ट मॉडल इनवायरांमेंट का संक्षिप्ताक्षर है.

clip_image006

गनोम डेस्कटॉप वातावरण में डेवलेपर लाइब्रेरी व कुछ जरूरी अनुप्रयोग शामिल हैं. हालांकि

गनोम एक भारी भरकम डेस्कटॉप वातावरण है जिसमें कई अनुप्रयोग समाहित हैं परंतु कुछ बहुत महत्वपूर्ण हैं जिसको स्थानीयकृत करते वक्त बहुत ध्यान देना चाहिए. जरूरी अनुप्रयोगों में हैं - gdm (लॉगिन विंडो), gedit (पाठ संपादक), gnome-terminal (टर्मिनल एमुलेटर विंडो), evolution (मेल क्लाइंट), epiphany (ब्रॉउज़र), metacity (विंडो मैनेजर), nautilus (फ़ाइल एक्सप्लोरर) और gnome-menu (डेस्कटॉप मेन्यू) आदि. इसके अलावे कई ऑडियो व वीडियो फ़ाइल देखने वाले अनुप्रयोग, सीडी/डीवीडी राइट करने के लिए

अनुप्रयोग तथा प्रिंटिंग औज़ार के साथ कई एप्लेट शामिल हैं.

clip_image008

ज़ाहिर है कि आरंभ में किसी भी भाषा के लिए कुछ खास अनुप्रयोग हैं जिन्हें अगर पहले कर लिया जाए तो अपनी भाषा में आप काम-चलाऊ स्तर पा सकते हैं. ये हैं - gdm, gnome-menu, gedit, gnome-terminal, evolution, gpdf, gnome-panel, और nautilus. लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि अनुवाद के लिए डेवलेपर लाइब्रेरी को पूरा किया जाना सबसे पहले जरूरी है क्योंकि इससे कई स्ट्रिंग भिन्न-भिन्न जगह पर लिए जाते हैं.

अगर आप ओपनऑफ़िस राइटर जैसे वर्ड प्रोसेसर को अभी शुरू नहीं करना चाहते हैं तो Abiword कर लें और ब्रॉउज़र के लिए epiphany का प्रयोग करें. एवोल्यूशन एक बढ़िया मेल क्लाइंट है पर आप इसके बजाए थंडरबर्ड को भी चुन सकते हैं. इसी तरह एपीफेनी के बजाय फ़ायरफ़ॉक्स या किसी अन्य ब्रॉउज़र को चुनना बेहतर निर्णय माना जायेगा. वर्ड प्रोसेसर एबीवर्ड के बजाय एक समग्र ऑफ़िस सूट ओपनऑफ़िस.ऑर्ग को अपनी भाषा में लाने का निर्णय ज़्यादेतर भाषा-भाषी लेते हैं.

गनोम डेस्कटॉप वातावरण के स्थानीयकरण का काम कई चरणों में होता है. हम अगर अपनी भाषा में गनोम का स्थानीयकरण करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको सुनिश्चित करना होगा कि आपकी भाषा में कहीं काम पहले तो शुरू नहीं हो चुका है यानी कोई टीम पहले से तो आपकी भाषा के लिए काम शुरू तो नहीं कर चुकी है. गौरतलब है कि गनोम डेस्कटॉप का काम करीब एक सौ पैंतीस भाषाओं में किया जा रहा है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी भाषाओं की टीम काफ़ी बढ़िया काम कर रही है. कई भाषाओं में काम हालांकि काफ़ी जोर शोर से शुरू होता है परंतु वह कई कारणों से बाद में रूक जाता है. फिर भी पहले देखना जरूरी है कि कौन कौन सी टीमें काम कर रही हैं. आप ऐसे काम कर रही टीमों को यहाँ देख सकते हैं: http://l10n.gnome.org/languages/

अगर आपकी भाषा के लिए पहले से टीम काम कर रही है तो फिर इससे ज़्यादा खुशी की बात क्या हो सकती है. बस टीम कोऑर्डिनेटर को संपर्क कीजिए और अगर उन्हें आपकी मदद की ज़रूरत है तो जरूर कीजिए. हाँ, अगर आपकी भाषा के लिए कोई लोकलाइज़ेशन टीम नहीं है तो आपको आगे आना होगा. गनोम के अनुवाद से जुड़ने के लिए आपको सारी सूचना इस पन्ने पर मिल जायेगी - http://live.gnome.org/TranslationProject/JoiningTranslation

आपको gnome-i18n@gnome.org पर एक मेल भेजना होगा और मेल भेजने के पहले mail.gnome.org पर इसकी सदस्यता लेनी होगी. आपको मेल में यह बताना होगा कि आप किस भाषा में काम करना शुरू करना चाहते हैं. भाषा के बारे में संक्षेप में बता दें या विकि पर कोई लिंक हो तो जोड़ दें मेल के साथ. आप या आपकी टीम का कोई सदस्य कोऑर्डिनेटर हो सकता है. गनोम ट्रांसलेशन टीम से आपको स्वीकृति मिलने के बाद भाषा से जुड़े पन्नों पर आपकी भाषा का नाम भी जुड़ जायेगा. तो इस प्रकार आप एक चरण पूरा करते हैं, जिसमें आप अपनी भाषा को गनोम में शामिल किए जाने के लिए पंजीकृत करवाते हैं. ज़ाहिर है अपनी भाषा को वहाँ देखकर आपको बेहद खुशी होगी.

गनोम का अपना स्वयं का git रिपॉजिटरी वर्सन कंट्रोल के लिए है. ज्ञातव्य है कि अनुवाद के लिए फ़ाइलें तो ऑनलाइन पड़ी रहती हैं और इसे कोई भी वहाँ से डाउनलोड कर सकता है परंतु उसे वापस रिपॉजिटरी में कुछ खास अधिकार से लैस व्यक्ति डाल सकते हैं. वह प्रायः भाषा संयोजक होता है या संयोजक द्वारा स्वीकृत कोई अन्य जिसे कि उस रिपॉजिटरी में फ़ाइलें रखने का अधिकार यानी पहँच अनुमति रहती है. किसी भी योगदान करने वाले व्यक्ति को फ़ाइलें अनूदित कर उसे सौंपनी होती है, जिसके पास जीआईटी एक्सेस होता है जो फ़ाइलें मिलने पर उसे रिपॉजिटरी में कमिट करता है. ज़ाहिर है सुरक्षा जैसे कई कारणों से ऐसा एक्सेस बहुत कम लोगों को ही प्राप्त होता है.

clip_image010

गनोम पर फ़ाइलें PO प्रारूप में रहती हैं जिसे किसी भाषा से जुड़े लोगों को अनुवाद कर वापस रिपॉजिटरी में सौंपना होता है. पीओ पोर्टेबल ऑब्जेक्ट का संक्षिप्ताक्षर है. फ़ाइलें लेने का सबसे आसान व सुगम तरीक़ा गनोम वेबसाइट से फ़ाइलें ले लेना है. पीओ फ़ाइलें मौजूदा चल रहे गनोम संस्करणों के लिए तो रहती ही है, कई पिछले संस्करणों के लिए भी मौजूद रहती है. एक जरूरी बात और, यदि आपकी भाषा में काम पहले से शुरू नहीं हो पाया है या कोई खास फ़ाइल पर अब तक काम नहीं हुआ है तो आपको POT फ़ाइल डाउनलोड करनी होगी जिसे पोर्टेबल ऑब्जेक्ट टेंपलेट फ़ाइल कहते हैं. जहाँ डेस्कटॉप खंड में गनोम में मौजूद विभिन्न अनुप्रयोग हैं, वहीं डेवलेपर लिब्स से सामान्य व साझे बटन व संवाद बटन आते हैं. डेवलेपर लिब्स का किया जाना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसमें मौजूद स्ट्रिंग का प्रयोग कई जगहों पर किया जाता है और कई अनुप्रयोग यहाँ से ही सीधे जरूरी मदों को ले लेते हैं. तो फिर अब देर करने की ज़रूरत नहीं है. पहले बताए गए केबैवल या पीओएडिट जैसे औज़ारों की मदद से अनुवाद का काम शुरू कर दीजिए. अनुवाद करने के बाद यदि अनुवाद को रिपॉजिटरी में वापस सौंपने के पहले अनुप्रयोग पर जाँच लिया जाए तो इसे एक अच्छी आदत मानी जायेगी. हालांकि बहुतेरे अनुवादक ऐसा करने के लिए जो मेहनत करनी पड़ती है उससे बचते हैं. मशीन को आपके अनुवाद को उससे संबंधित अनुप्रयोग से जोड़ने के लिए MO फ़ाइल की ज़रूरत होती है जिसे *.po फ़ाइल पर msgfmt -cv कमांड चलाकर पाया जा सकता है. बस, यह messages.mo फ़ाइल दे देता है, जिसका नाम अनुप्रयोग फ़ाइल के मूल नाम से बदलना जरूरी होता है. इस *.mo फ़ाइल को /usr/share/locale/LL/LC_MESSAGES/ में रख दीजिए. इस सबको अंजाम देने के लिए आपके पास रूट अधिकार यानी वह अधिकार जिससे आप अपने तंत्र से जुड़ी प्रशासनिक कार्यों को अंजाम दे सकते हैं.

केडीई

केडीई (KDE) यानी के डेस्कटॉप इनवायरामेंट एक मुक्त स्रोत सॉफ़्टवेयर प्रोजेक्ट है जो एक बेहद सुगम डेस्कटॉप वातावरण उपलब्ध कराता है. केडीई से कई छोटे बड़े प्रोजेक्ट भी जुड़े हैं. इसकी शुरुआत 1996 में हुई थी और तबसे इसके कई रिलीज़ हो चुके हैं, यानी संस्करण निकल चुके हैं.

clip_image012

हर ओपन सोर्स प्रोजेक्ट की तरह केडीई के स्थानीयकरण का काम भी डाक सूची में शामिल होने से शुरू होता है.

kde-i18n-doc (https://mail.kde.org/mailman/listinfo/kde-i18n-doc) और kde-announce (http://mail.kde.org/mailman/listinfo/kde-announce) दो महत्वपूर्ण डाक सूचियाँ हैं जिनसे हर व्यक्ति जो केडीई से जुड़ना चाहता है, को शामिल होना चाहिए. अगर आप किसी भाषा में स्थानीयकरण से जुड़ना चाहते हैं तो आपको पहले http://l10n.kde.org/teams-list.php पर उपलब्ध सूची को देख लेना चाहिए कि कहीं पहले से तो आपकी भाषा के लिए काम शुरू नहीं हो चुका है. यदि आपकी भाषा के लिए पहले से काम हो रहा है तो फिर कोऑर्डिनेटर को लिख भेजिए कि आप भी इस प्रोजेक्ट के लिए काम करना चाहते हैं. अगर कोई टीम काम नहीं कर रही है तो kde-i18n-doc लिस्ट पर लिख भेजिए कि आप अमुक भाषा के लिए काम करने को इच्छुक हैं, अपने और अपनी भाषा से जुड़ी विवरणों के साथ.

clip_image014

अनुवाद के लिए यहाँ केडीई पर भी फ़ाइलें पीओ प्रारूप में मौजूद होती हैं और सीवीएस के माध्यम से फ़ाइलें सर्वर से ली और फिर वापस सौंपी जाती हैं. इसलिए एक कोऑर्डिनेटर को सीवीएस की जानकारी रहनी जरूरी है. साथ ही उसे तकनीक के स्थानीय भाषा के प्रयोग से भी परिचित रहना चाहिए क्योंकि तभी वह सही अनुवाद करने में सक्षम हो पायेगा. अनुवाद के केबैबल का प्रयोग सबसे बेहतर होगा, हालांकि इस संबंध में लोगों की अलग अलग राय हो सकती है. यदि आप विंडोज मशीन पर अनुवाद कर रहे हैं तो ज़ाहिर है आपको पीओएडिट औज़ार का प्रयोग करना होगा. सामान्यतः एक टीम के लिए एक ही खाते का प्रावधान है परंतु ज़रूरत पड़ने पर एक से ज़्यादा भी रखा जा सकता है.

सभी स्थानीयकरण के काम की तरह यहाँ भी सबसे पहले जीयूआई (ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस) के अनुवाद पर पहले ध्यान दें. हम यहाँ भी अपनी सलाह दुहराना चाहेंगे कि यदि लिनक्स प्लेटफ़ॉर्म पर काम कर रहे हैं तो जरूर केबैबल का प्रयोग करें. आपको kdelibs.pot फ़ाइल से अनुवाद के काम शुरू करने चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद स्ट्रिंग मेनू के रूप में पूरे केडीई में फैले व बिखरे पड़े हैं. इसके अनुवाद के बिना बहुतेरे जरूरी जगहों पर के स्ट्रिंग बिना अनूदित ही दिखेंगे. इसके बाद desktop_kdelibs.pot तथा desktop_kde-i18n.pot और फिर kdebase के अनुप्रयोगों के अनुवाद से आगे जा सकते हैं. रिलीज़ के लिए प्रायः 80 से 90 प्रतिशत तक अनूदित रहना जरूरी माना जाता है परंतु यह कोऑर्डिनेटर पर भी निर्भर करता है कि वह रिलीज़ किस स्थिति में चाहता है.

यदि अनुवाद का काम आपकी भाषा में पहले नहीं हुआ है तो आप POT फ़ाइल पहले लें और उसे किसी संपादक में खोलकर PO के रूप में सहेजें. फिर अनुवाद करें. यदि काम पहले से हो रहा है तो कोऑर्डिनेटर से पहले पूछ लें कि किस फ़ाइल पर काम उसे करना है. इससे काम के दुहराव से बचा जा सकता है. चूँकि जीयूआई में बहुत तेजी से बदलाव होता है इसलिए पीओ फ़ाइल को बार-बार अद्यतन करते रहना चाहिए. यदि अनुवाद से संबंधित कोई बग है तो उसे भी केडीई बग ट्रैकिंग सिस्टम में ही रिपोर्ट करनी चाहिए. बग रिपोर्ट को submit@bugs.kde.org पर भेजना चाहिए. बग रिपोर्ट किया जाना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उत्पाद लगातार सुधार की प्रक्रिया में बढ़ता है.

जरूरी कड़ी:

http://en.wikipedia.org/wiki/KDE

http://l10n.kde.org/docs/translation-howto/

http://techbase.kde.org/Schedules/Release_Schedules_Guide

https://mail.kde.org/mailman/listinfo/

http://l10n.kde.org/teams-list.php

 

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

 

clip_image0024_thumb

राजेश रंजन

राजेश रंजन विगत कई वर्षों से हिन्दी कंप्यूटरीकरण
के कार्य से जुड़े हुए हैं. वे अभी एक बहुदेशीय
सॉफ्टवेयर कंपनी रेड हैट में बतौर लैंग्वेज मेंटेनर हिन्दी
के रूप में कार्यरत हैं. वे कंप्यूटर स्थानीयकरण की कई
परियोजनाओं जैसे फेडोरा, गनोम, केडीई, ओपनऑफिस,
मोज़िला आदि से जुड़े हैं. साथ ही कंप्यूटर अनुवाद में
मानकीकरण के लिए चलाए गए एक महत्वाकांक्षी सामुदायिक
परियोजना फ़्यूल के समन्वयक भी हैं. इसके अलावे उन्होंने
मैथिली कंप्यूटिंग के कार्यों को भी अपनी देख-रेख में
मैथिली समुदाय के साथ पूरा किया है. वे प्रतिष्ठित मीडिया
समूह इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के जनसत्ता और लिटरेट
वर्ल्ड के साथ काम कर चुके हैं.

हिन्दी पत्रकारिता में भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली
से स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाने के पहले इन्होंने नेतरहाट विद्यालय,
साइंस कॉलेज, पटना और किरोड़ीमल कॉलेज, दिल्ली जैसे
जाने-माने संस्थानों में अध्ययन किया है. भाषाई तकनीक, इंटरनेट,
कंप्यूटर पर इनके लेखादि लगातार प्रकाशित होते रहते हैं.


कॉपीराइट © राजेश रंजन, सर्वाधिकार सुरक्षित.

क्रियेटिव कॉमन्स एट्रीब्यूशन शेयर एलाइक लाइसेंस के अंतर्गत.

(भाग 3 से जारी)

5.अनुवाद के औज़ार

अनुवाद का काम काफ़ी बड़ा काम होता है और इसे चुस्त-दुरूस्त तरीक़े और एकरूपता के साथ करने के लिए ऐसे औज़ारों की ज़रूरत होती है जो कंप्यूटर की मदद से इसके काम को काफ़ी सरल बना दे. कंप्यूटर की मदद से किए जाने वाले अनुवाद कंप्यूटर एसिस्टेड ट्रांसलेशन (CAT) कहे जाते हैं और इसके लिए तैयार किए गए औज़ार कैट टूल्स. ख़ासकर अनुवाद स्मृति डेटाबेस आदि के प्रयोग से बार-बार आनेवाली पंक्तियों को ख़ुद-ब-ख़ुद अनुवाद करके यह एक अनुवादक के काम को आसान बना देता है. इसके लिए मुक्त स्रोत की दुनिया में दो औज़ार काफ़ी लोकप्रिय हुए हैं. एक है केबैबेल एवं लोकलाइज़ और दूसरा है पीओएडिट.

केबैबल (kbabel) और लोकलाइज़ (Lokalize)

केबैबल (http://kbabel.kde.org) और लोकलाइज़ (http://userbase.kde.org/Lokalize) पीओ प्रारूप में दी गई फ़ाइल के अनुवाद का सबसे बेहतर औज़ार है. यह कई उपयोगी विशेषताओं से लैस है जो स्मृति के आधार पर अनुवाद करने से लेकर वाक्यरचना त्रुटि तथा कई अन्य तकनीकी अनुवाद संबंधी ग़लतियों को सुधारने में भी सहायक होता है.

clip_image002[3] clip_image004[3]

जब आप केबैबेल अपने कंप्यूटर में संस्थापित करने के बाद पहली दफ़ा चलाते हैं तो आपको कुछ इस तरह का संकेत मिलता है. यह संकेत कुछ भिन्न भी हो सकता है. 'OK' यानी ‘ठीक’ पर क्लिक करने पर आप विन्यास स्क्रीन पर ले जाए जाएँगे जहाँ आपको अपनी पहचान, किस पीओ फ़ाइल या फ़ोल्डर में काम कर रहे हैं उसका स्थान आदि देना होता है. इन मूलभूत सेटअप के बाद आप किसी पीओ फ़ाइल का अनुवाद इस औज़ार से करने में सक्षम होते हैं. तब इसकी मदद से किसी पीओ प्रारूप वाली फ़ाइल खोलकर आप अनुवाद का कार्य आरंभ कर सकते हैं.

clip_image006[4]

Original string (msgid): मूल स्ट्रिंग का यह क्षेत्र मूल अंग्रेज़ी के स्ट्रिंग को दिखाता है जिसे स्थानीय भाषा में अनुवाद किया जाना होता है. यह हिस्सा सिर्फ़ पढ़ने योग्य होता है और केबैबेल की मदद से हम इसमें फेरबदल नहीं कर सकते हैं.

clip_image008[3]

Translated string (msgstr): अनूदित स्ट्रिंग का यह क्षेत्र आपके द्वारा किये जानेवाले अनुवाद के लिए है. आप अनुवाद कर सकते हैं जैसा भी आप उपयुक्त समझें. इस क्षेत्र में तीन बाक्स हैं: फज़ी (fuzzy), ग़ैर अनूदित (untranslated), दोषयुक्त (faulty). ये मौजूदा स्ट्रिंग के अनुवाद की स्थिति को दर्शाता है.

l फज़ी का अर्थ है कि मूल स्ट्रिंग में परिवर्तन किया जा चुका है और आपको अपने अनुवाद को फिर से देखने की ज़रूरत है. ज़ाहिर है कि मूल स्ट्रिंग में इन बदलावों को आपको फिर पाठ को संपादित करके ठीक करना होगा. ज़्यादातर स्थितियों में बदलाव मामूली होता है लेकिन यह पूर्ण बदलाव के साथ भी हो सकता है.

l ग़ैर अनूदित पाठ का अर्थ है कि स्ट्रिंग अब तक अनूदित नहीं हुआ है.

l दोषयुक्त का अर्थ है कि अनुवाद में वाक्यरचना से जुड़ी कुछ त्रुटियां हैं.

केबैबल के स्थान पर अब लोकलाइज़ आ गया है. लोकलाइज़ देखने-सुनने में केबैबल की तरह है लेकिन स्मृति आदि से निपटने के मामले में केबैबल से बेहतर है. अब नए वितरणों में यही तयशुदा अनुवाद औज़ार के रूप में आ रहा है. फिर भी केबैबल की आदत के कारण कई अनुवादक अभी भी उसे ही पसंद करते हैं.

कैटालॉग मैनेजर

कैटालॉग मैनेजर एक पीओ फ़ाइल मैनेजर है जो आपको सभी पीओ फ़ाइल के अनुवाद व इससे जुड़े आंकड़ों की एकसाथ देख-रेख व प्रबंधन में मदद करता है. कैटालॉग मैनेजर को आरंभ करने के बाद पहला काम आपका यह होना चाहिए कि आप मूल निर्देशिका को विन्यस्त कर लें. अपनी सभी फ़ाइल के मूल फ़ोल्डर को दाखिल करने के बाद कैटालॉग मैनेजर फ़ाइल सूचना को लोड करना व दिखाना चालू कर देगा.

clip_image010[3]

पीओएडिट (Poedit)

केबैबल के अलावे भी कई ऐसे औज़ार हैं जिन्हें अनुवाद के कार्य में उपयोग किया जाता है. पीओएडिट (http://www.poedit.net) इनमें से एक है जो लिनक्स व विंडोज़ दोनों प्लेटफ़ॉर्म पर समान रूप से कार्य करता है और इसी अर्थ में केबैबल से बेहतर है. बड़े पैमाने पर लोग इसका भी उपयोग करते हैं. परंतु केबैबल और लोकलाइज़ काफ़ी बेहतर काम करता है ख़ासकर अनुवाद डेटाबेस का इससे काफ़ी बढ़िया प्रयोग किया जा सकता है यदि एक व्यक्ति के पास बेहतर डाटाबेस मौजूद है. लेकिन यदि आप किसी लिनक्सेतर ऑपरेटिंग सिस्टम यानी विंडोज़, मैक, या यूनिक्स जैसे किसी का प्रयोग करना चाहते हैं तो पीओएडिट का विकल्प नहीं है.

clip_image012[3]

इसके अलावे Yudit (http://www.yudit.org) भी एक अच्छा बहुभाषी यूनिकोड पाठ संपादक है जिसका प्रयोग पीओ फ़ाइल को अनुवाद करने में हो सकता है. जीट्रांसलेटर जैसे कई अन्य उपकरण भी उपलब्ध हैं.

ऑनलाइन औज़ार

अब धीरे-धीरे मुक्त स्रोत में कमांड लाइन से फ़ाइलें डाउनलोड करने और फिर कमिट करने आदि के स्थान पर ऑनलाइन अनुवाद को प्राथमिकता दी जाने लगी है. ऐसे में ऑनलाइन अनुवाद प्रबंधन औज़ारों की पूछ बढ़ने लगी है और इसलिए मुक्त स्रोत में भी इसके विकास पर जोर दिया जा रहा है. पूटल और फ़्लाइज़ ऐसे ही दो अनुवाद औज़ार हैं जिस पर ध्यान दिया जा सकता है.

clip_image014[3] clip_image016[3] clip_image018[3]

पूटल (pootle)

पूटल (pootle) भी एक बहुविध प्लेटफॉर्म औज़ार है जो काफ़ी सफल और लोकप्रिय रहा है.

फ़्लाइज़ (Flies)

फ़्लाइज़ (Flies) उसी तरह का एक औज़ार है जो जावा आधारित है और रेड हैट और सामुदायिक योगदानकर्ताओं के द्वारा तैयार किया जा रहा है.

विभिन्न कैट टूल्स की तुलना

औज़ार

समर्थित फ़ाइल प्रारूप

ऑपरेटिंग तंत्र

लाइसेंस

Anaphraseus

ODT, all OpenOffice Writer formats (DOC, TXT etc.)

Multiplatform (StarBasic macro)

GPL

Attesoro

Java properties

Multiplatform (Java)

GPL

gtranslator

PO

POSIX

GPL

Okapi Framework

PO, Windows RC, TMX, Wordfast, Trados, Java Properties, Regular-expression-based text, Illustrator, INX, ResX, Table-type files, XML

Windows (.NET)

LGPL

OmegaT

HTML, XHTML, DocBook, Plain Text, PO, JavaHelp, Java Resource Bundles, OpenDocument (ODF), OpenOffice, StarOffice, Office Open XML, HTML Help Compiler (HCC), INI files

Multiplatform (Java)

GPL

BEYTrans, Auhtor: Youcef BEY

HTML, XHTML, Plain Text, PO, PHP Array, Java Resource Bundles, HTML Help Compiler (HCC)

Multiplatform (Java)

Free open crowdsourcing translation; Online non-commercial translation

OmegaT+

HTML, XHTML, DocBook, Plain Text, PO, JavaHelp, Java Resource Bundles, OpenDocument (ODF), OpenOffice, StarOffice, Office Open XML, HTML Help Compiler (HCC), INI files

Cross-platform (Java)

GPL

openTMS

HTML, XHTML, DocBook, Plain Text, OpenOffice, Office Open XML

Multiplatform (Java)

EPL

Open Language Tools

HTML/XHTML, XML, DocBook SGML, ASCII, StarOffice/OpenOffice/ODF, .po (gettext), .properties, .java (ResourceBundle), .msg/.tmsg (catgets)

Multiplatform (Java)

CDDL

Poedit

Gettext PO

Multiplatform

MIT license

Pootle

Gettext PO, XLIFF, OpenOffice GSI files (.sdf), TMX, TBX, Java Properties, DTD, CSV, HTML, XHTML, Plain Text

Multiplatform (Python)

GPL

Transolution

HTML, StarOffice/OpenOffice,

XLIFF, DOCBOOK

Multiplatform (Python)

GPL

Virtaal

XLIFF, Gettext PO and MO, TMX, TBX, Wordfast TM, Qt .ts.

Many others via converters in the Translate Toolkit

Multiplatform (Python)

GPL

स्रोतः विकीपीडिया से साभार

जरूरी कड़ियाँ:

http://www.poedit.net/

https://translations.launchpad.net/

http://pootle.locamotion.org/

http://userbase.kde.org/Lokalize

https://fedorahosted.org/flies/

 

clip_image0024_thumb_thumb

(राजेश रंजन)

राजेश रंजन विगत कई वर्षों से हिन्दी कंप्यूटरीकरण
के कार्य से जुड़े हुए हैं. वे अभी एक बहुदेशीय
सॉफ्टवेयर कंपनी रेड हैट में बतौर लैंग्वेज मेंटेनर हिन्दी
के रूप में कार्यरत हैं. वे कंप्यूटर स्थानीयकरण की कई
परियोजनाओं जैसे फेडोरा, गनोम, केडीई, ओपनऑफिस,
मोज़िला आदि से जुड़े हैं. साथ ही कंप्यूटर अनुवाद में
मानकीकरण के लिए चलाए गए एक महत्वाकांक्षी सामुदायिक
परियोजना फ़्यूल के समन्वयक भी हैं. इसके अलावे उन्होंने
मैथिली कंप्यूटिंग के कार्यों को भी अपनी देख-रेख में
मैथिली समुदाय के साथ पूरा किया है. वे प्रतिष्ठित मीडिया
समूह इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के जनसत्ता और लिटरेट
वर्ल्ड के साथ काम कर चुके हैं.

हिन्दी पत्रकारिता में भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली
से स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाने के पहले इन्होंने नेतरहाट विद्यालय,
साइंस कॉलेज, पटना और किरोड़ीमल कॉलेज, दिल्ली जैसे
जाने-माने संस्थानों में अध्ययन किया है. भाषाई तकनीक, इंटरनेट,
कंप्यूटर पर इनके लेखादि लगातार प्रकाशित होते रहते हैं.

 

कॉपीराइट © राजेश रंजन, सर्वाधिकार सुरक्षित.

क्रियेटिव कॉमन्स एट्रीब्यूशन शेयर एलाइक लाइसेंस के अंतर्गत.

(अगले भाग 5 में जारी...)

अन्य रचनाएँ

[random][simplepost]

व्यंग्य

[व्यंग्य][random][column1]

विविध

[विविध][random][column1]

हिन्दी

[हिन्दी][random][column1]

तकनीकी

[तकनीकी][random][column1]

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

[random][column1]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget