टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

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अविष्कार के बाप का कुछ पता चले तो बतइयो! :)

आज तो यह पोस्‍ट ही समझ नहीं आई.

अरे, क्या काजल भाई, आप भी...
दरअसल आविष्कार यहां पर ट्रे है. जब बहुत सारे रिमोट हो गए, और कमरे में खोजने पर भी नहीं मिलते थे, इधर उधर पड़े रहते थे तो इनको व्यवस्थित रखने के लिए, ताकि वक्त जरूरत तुरंत मिल जाएं, एक ट्रे का आविष्कार करना पड़ा :)

और हाँ, जो ट्रांसपरेंट ट्रे के नीचे लाल रंग की जो चीज दिख रही है वो मेरी कुर्सी की हवादार सीट है, जिस पर अभी ट्रे रखा हुआ है. :)

वैसे, यह कुर्सी भी आवश्यकतानुरूप आविष्कृत ही है :) इसकी कथा फिर कभी.

हा हा हा. यही तो मूल तत्‍व है जाे मैं समझ ही नहीं पाया था :)

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