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हमारी सृष्टि का अंत आखिर किस विधि से होगा?

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  सृष्टि (ब्रह्मांड) के प्रारंभ होने के बारे में विविध सिद्धांत प्रतिपादित किए गए हैं. तो सृष्टि के अंत के बारे में भी विभिन्न मान्यताएँ हैं. वैसे तो हम पृथ्वीवासियों के लिए दुनिया का अंत तो तब ही हो जाएगा जब सूर्य अपने तमाम हाइड्रोजन को नाभिकीय संलयन से एक दिन पूरा हजम कर लेगा और विशाल लाल दानव के रूप में बदल जाएगा और पृथ्वी को लील लेगा. मगर, अधिकांशतः सृष्टि तब भी बची रहेगी, और संभवतः कुछ पृथ्वीवासी भी जो कि उस समय तक विज्ञान में इतनी अधिक उन्नत खोजें कर चुके होंगे और अंतरिक्ष में अन्यत्र कॉलोनी बना कर निवास कर रहे होंगे.

मगर, यहाँ सवाल यह है कि सृष्टि – यानी संपूर्ण ब्रह्मांड का अंत कैसे होगा?

वैज्ञानिकों के अनुसार, सृष्टि का अंत इन 5 भिन्न तरीकों से हो सकता है –

1 द बिग क्रंच (महासंकुचन)

बिग बैंग का ठीक उलटा है बिग क्रंच. बिग बैंग नामक लोकप्रिय सिद्धांत के अनुसार, सृष्टि का प्रारंभ एक महाविस्फ़ोट से हुआ है. प्रारंभ में सृष्टि का आकार एक बिंदु – जिसे सिंगुलैरिटी भी कहते हैं, में समाहित था और महाविस्फ़ोट के बाद यह अनंत विस्तार लेकर फैलता गया और अभी भी लगातार अनंत में फैल रहा है. परंतु अंततः गुरुत्व बलों के कारण एक दिन इसके फैलाव में ठहराव आएगा और यह वापस सिकुड़ना प्रारंभ कर देगा. और अंततः सिकुड़ते सिकुड़ते वापस एक बिंदु में समाहित हो जाएगा. और इस तरह से सृष्टि बिग बैंग से पूर्व की स्थिति में वापस आ जाएगी जहाँ से इसका निर्माण हुआ था.

2 शीत मृत्यु (महाशीतन)

इसे आप बिग क्रंच का ठीक विपरीत अंत मान सकते हैं. सृष्ट अनंत काल तक अनंत विस्तार तक फैलती ही जाएगी फैलती ही जाएगी और अंततः इसकी तमाम ऊष्मा समाप्त हो जाएगी. सृष्टि के तमाम सूर्यों की ऊर्जा चुक जाएगी, वे भी ठंडे हो जाएंगे, नए सूर्यों को पैदा करने की अवस्था भी समाप्त हो जाएगी और इस तरह से पूरी सृष्टि ठंडे, घुप्प अंधेरे धुंध के रूप में परिवर्तित हो जाएगी.

3 श्यामविवर में समर्पण (महासमर्पण)

एक लोकप्रिय सिद्धांत के मुताबिक, सृष्टि का अधिकांश हिस्सा – गैलेक्सियाँ – आकाशगंगाएं आदि दानवाकार श्यामविवरों (ब्लैकहोल) का चक्कर लगा रही हैं, और धीरे धीरे उनमें समा रही हैं. इसमें गति आ रही है और अंततः एक दिन ऐसा आएगा कि ये श्यामविवर आपस में एक दूसरे को लीलने लगेंगे, और फिर अंत में एक ही श्यामविवर बच रहेगा. यह श्यामविवर भी हाकिंग रेडिएशन फैलाकर कालांतर में अपना द्रव्यमान खो देगा और चहुँओर सबएटॉमिक हाकिंग रेडिएशन पार्टिकल वितरित रहेंगे.

4 द बिग बाउंस (महाउछाल)

सृष्टि के अंत का यह सिद्धांत द बिग क्रंच के सिद्धांत जैसा ही है, परंतु थोड़ा आशावादी सिद्धांत है. इस सिद्धांत के मुताबिक सृष्टि का वर्तमान फैलाव एक बिंदु तक पहुँचने के बाद रुक जाएगा और सृष्टि वापस सिकुड़ने लगेगी. परंतु सिकुड़ते सिकुड़ते सिंगुलैरिटी (जैसा कि बिग क्रंच सिद्धांत में होता है) की स्थिति में पहुँचने से पहले ही सिकुड़न के त्वरण के फलस्वरूप महाविस्फ़ोट जैसा ही कुछ होगा और सृष्टि फिर से फैलने लगेगी. इस तरह सृष्टि नष्ट नहीं होगी, उसका अंत नहीं होगा, बल्कि उसका “पुनर्चक्रण” हो जाएगा. यानी एक नई सृष्टि का निर्माण हो जाएगा. इस सिद्धांत को दोलक सृष्टि का सिद्धांत भी कहते हैं जिसमें हर बार एक नई सृष्टि का जन्म होता है. हो सकता है कि हम अभी जिस सृष्टि में रह रहे हों, वो 400 वीं सृष्टि हो? पर इस बारे में पक्के से कभी कोई कुछ नहीं कह सकेगा.

5 द बिग रिप (महाफाड़)

इस सिद्धांत के मुताबिक “डार्क इनर्जी” नामक अज्ञात बल सृष्टि को अनंत में विस्तृत कर रहा है. सृष्टि के फैलने की गति में लगातार इजाफा हो रहा है और अंततः एक दिन यह गति इतनी अधिक हो जाएगी कि सबकुछ अनंत शून्य में विगलित हो जाएगा, और कहीं पर कुछ भी बचा नहीं रहेगा. इसमें अच्छी बात यह होगी कि तब तक सृष्टि के तमाम सूर्यों की ऊर्जा वैसे भी चुक चुकी होगी और सृष्टि में वैसे भी अब कहने को कुछ बचा नहीं रहेगा. बिग रिप से सृष्टि के अंत होने की संभावना आज से 16 बिलियन वर्ष बाद की लगाई गई है.

सृष्टि को जानने समझने के क्रम में मनुष्य के अपने स्वयं के ज्ञान में वृद्धि हुई है. पर क्या वो कभी इतना भी ज्ञानी हो पाएगा कि सृष्टि के प्रारंभ के बारे में सही सही बता सके व इसके अंत की सटीक भविष्यवाणी कर सके? यह बात तो आने वाला समय ही बता पाएगा. तब तक यह अद्भुत ब्रह्मांड, यह अनंत सृष्टि मनुष्य के जिज्ञासु मन को अपनी और आकर्षित किए रहेगी.

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विस्तृत जानकारी के लिए मूल आलेख देखें - http://www.cosmosup.com/5-ways-in-which-the-universe-could-end/

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जब तक अंत नहीं हो जाता ,यह रहस्य ही रहेगा

आपकी इस पोस्ट को ब्लॉग बुलेटिन की आज कि बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन - 75वाँ जन्मदिवस दिवंगत राहुल देव बर्मन ( पंचम दा ) में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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