टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

April 2014

गूगल नक्शे हिंदी में ! पूरा का पूरा. आपके मोहल्ले का नाम भी हिंदी में! बस, कहीं कहीं वर्तनी की गड़बड़ी है, जिसे आप भी सुधार सकते हैं. प्रवीण जैन बता रहे हैं कि कैसे -

 

दोस्तों 

पिछली बार हमने आपको बताया था कि 'गूगल महाराज' ने जनता की माँग पर अपना लोकप्रिय अनुप्रयोग (एप्लीकेशन) "गूगल नक्शे / गूगल मानचित्र" अथवा "गूगल मैप्स" https://www.google.co.in/maps/preview?hl=hi राष्ट्रभाषा हिन्दी में उपलब्ध करवा दिया है पर समस्या यह है कि अपरिचित स्थानों के नाम की वर्तनी में भारी गड़बड़ी हुई है – वह इसलिए कि अंग्रेज़ी रोमन में उपलब्ध स्थानों के नामों के डेटा को स्वचालित फ़ोनेटिक तरीके से हिंदी में प्रस्तुत कर दिया गया है. और इसे सुधारने की जरूरत है.

इसलिए आप और हम मिलकर इस काम को पूरा कर दें तो इससे हमारी इस बात को बल मिलेगा कि हिंदी वाले भी इंटरनेट पर किसी से पीछे नहीं और वे इंटरनेट पर हिंदी के प्रसार में आगे हैं.

फ़िलहाल, "हिंदी" वेब पर प्रयुक्त विश्व की शीर्ष २० भाषाओं में भी अपना स्थान नहीं बना पायी है, जबकि एक करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषाएँ इस सूची में हैं, जो शायद चुनौती है. ५६ करोड़ हिन्दीभाषी और इंटरनेट पर यह दशा.

हम सब अपने मित्रों/परिजनों/सहकर्मियों को सामाजिक मीडिया पर हिंदी के प्रयोग के लिए प्रेरित करें और उन्हें हिंदी में टाइप करना सिखाएँ, इंटरनेट पर/गूगल पर उपलब्ध हिंदी सेवाओं का इस्तेमाल करें. हिंदी टाइपिंग के लिए गूगल हिंदी इनपुट ['Google Hindi Input'] डाउनलोड करें http://www.google.com/intl/hi/inputtools/windows/

अब बात 'गूगल मानचित्र' की  :

गूगल मानचित्र /'गूगल मैप्स' पर अपने शहर/गाँव/क्षेत्र के नामों की वर्तनी कैसे सुधारें?

१. सबसे पहले सभी गूगल सेवाओं के लिए हिंदी को चुनें.

२. हिंदी को चुनते ही आपकी सभी गूगल सेवाएँ और एप्लीकेशन 'हिंदी में हो जाएँगी.

३. गूगल मैप्स खोलें, क्या आपको भारत में सभी स्थानों के नाम 'हिन्दी-अंग्रेजी' दोनों भाषाओं में दिखाई दे रहे हैं?

४. यदि हाँ तो अपने  शहर/गाँव/क्षेत्र को तलाशें.

५. क्या उस नक़्शे में आपके जाने पहचाने क्षेत्र के नाम, सड़क का नाम, मोड़ आदि के नाम की वर्तनी (स्पैलिंग) गलत है?

६. यदि हाँ तो जहाँ नाम लिखा हुआ है वहाँ कर्ज़र ले जाकर 'क्लिक' करें'.

७. बाएँ कोने में एक खोज बॉक्स खुल जाएगा 'जहाँ स्थान का नाम हिंदी में दिखेगा, अब मैप विंडो के नीचे दाहिने कोने में आपको 'समस्या की रिपोर्ट करें' पर क्लिक करें, तब एक विंडो बाएँ कोने में खुलेगी.

८. वहां सारे विकल्प हैं, वर्तनी की त्रुटि  के लिए 'नोट जोड़ें' पर क्लिक करें और लिखें " इस स्थान/मार्ग के नाम की सही वर्तनी "......" है, आपने गलत "........." लिखा है.

९. इतना लिखने के बाद 'सबमिट करें' पर क्लिक करें, बस हो गया.

१०. आपको ईमेल पर रिपोर्ट आएगी और साथ ही 'सुधार' स्वीकार हो जाने के बाद भी ईमेल आएगा.

क्या आप थोड़ा समय निकाल कर सहयोग करेंगे, मुझे विश्वास है आप निराश नहीं करेंगे.

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एंड्राइड उपकरणों के लिए लैंगुएज सेटिंग्स में जाकर भाषा 'हिंदी' चुनेंगे तो ही यह हिंदी में दिखाई देगा, यदि आपके फोन में हिन्दी भाषा नहीं है तो  प्ले स्टोर से 'लोकेल सिलेक्ट(' Locale select) डाउनलोड करें. और फिर भाषा बदलें.       


इस पर अपने अनुभव समूह पर, फेसबुक पर, ट्विटर पर भी साझा करें.

सीएस प्रवीण जैन CS Praveen Jain

 

‘‘किसी भी सभ्य देश में विदेशी भाषा के माध्यम से शिक्षा प्रदान नहीं की जाती। विदेशी भाषा के माध्यम से शिक्षा देने से छात्रों का मन विकारग्रस्त हो जाता है और वे अपने ही देश में स्वयं को विदेशी सिद्ध करते जान पड़ते हैं।’’ - रवीन्द्रनाथ ठाकुर

Foreign language is not a medium of teaching in any civilized nation. Teaching through foreign language makes students’ minds perverse and they start feeling themselves as foreigners in their own country: Rabindranath Thakur

समीक्षक – अरविंद कुमार

पंदरह अप्रैल 2014 को मैं ने एक किताब की पाँच प्रतियां ख़रीदीं. एक अपने लिए, चार बाँटने के लिए. यह किताब थी बालेंदु शर्मा दाधीच की तकनीकी सुलझनें.

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किताब के प्रकाशक हैं –
ईप्रकाशक.कॉंम, 504, पार्क रॉयल, जीएच-80, सैक्टर-56, गुड़गाँव 122011
क़ीमत है रु. 235.00.
ईमेल-
reach@eprakashak.com


हम सब कंप्यूटर इस्तेमाल करते हैं. कई बार उस की समस्याओँ से, उलझनोँ से जूझते हैं, पर उन्हेँ सुलझाना नहीँ जानते. यहां काम आती है यह किताब. ऐसे ऐसे सुझाव ऐसी आसान भाषा में बालेंदु ने दिए हैं कि मुझ जैसा अतकनीकी बंदा भी आत्मनिर्भर हो सकता है.
(बीस से साल से - 1993 से –कंप्यूटर पर अपना कोशों को द्विभाषी डाटा बनाते रहने के बावजूद, मैं किसी भी तकनीकी उलझन की सुलझन से अनजान हूं. अगर बेटा सुमीत आसपास हो तो समस्या सुलझाता ही देता है, और दूर हो तो मैँ उसे फ़ोन करता हूं और वहीं दूर से वह मेरे कंप्यूटर को अपने क़ब्ज़े में ले लेता है और मेरी मुश्किल रफ़ा कर देता है. - इस के भी कई प्रोग्राम मिलते हैं, जो उसे यह क्षमता प्रदान करते हैं. एक प्रोग्राम जो हम आजकल काम में लाते हैं, उस का नाम है – teamviewer.)
अब बालेंदु की किताब मेरे पास है. इस की मदद से मैं काफ़ी कुछ अपने आप कर पाऊंगा.
मैं उन्हें लगभग दस साल से जानता हूं. नई से नई तकनीक का ईजाद करते आ रहे हैं और उन की सहायता से देश विदेश में हिंदी के विकास में लगे हैं.
यही कारण है कि अमेरिका में हिंदी सिखाने वाले प्रोफ़ेसर डाक्टर सुरेंद्र गंभीर उन्हें विकास पुरुष कहते हैं. जब कि बालेंदु अपने आप को भाषायी पृष्ठभूमि जन्य प्रौद्योगिकीय वंचितता (technology deprivation due to linguistic background) और आंकिक विभाजन (digital divide) जैसी अन्यायपूर्ण स्थितियों के विरुद्ध अभियान के स्वयंसेवक के रूप में देखते हैं.
बालेंदु के बारे में बहुत कुछ लिखा जा सकता है. उन के बारे काफ़ी कुछ जानकारी इस पोस्ट में आप बाद मेँ पढ़ पाएँगे. उन्हें स्वयं देखने और जानने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए--
https://www.youtube.com/watch?v=zKZZtLiRh8M <https://www.facebook.com/l.php?u=https%3A%2F%2Fwww.youtube.com%2Fwatch%3Fv%3DzKZZtLiRh8M&h=2AQFH6kgf&enc=AZOqi_-DlMxLOcCSW58W9gELRgWiJcnbjBxkFDIgGLGut4dJPjg-FVNc6-6pa1XHK0h-C1TW7PNUzdwsx7_lWWgGuOiasZ-jAwTpOKi65r2dx6O5XwyIZas1p89Oj4lTlpVvJGoVFlDVF6E_cjbBoQzy&s=1>
बालेंदु का आपना वैब पोर्टल है प्रभासाक्षी डाट काम. उन्हों ने न केवल समाचार पत्र पत्रिकाओं में तकनीकी विषयों पर लिख कर सभी का ज्ञान बढ़ाया है, बल्कि साफ्टवेयर कंपनियों के एप्लीकेशंस के हिंदीकरण अभियानों (लोकलाइजेशन) में सक्रिय योगदान और केंद्र तथा राज्य सरकारों के तकनीकी विभागों और संस्थानों की योजनाओं-परियोजनाओं में भूमिका निभाई है.


हिंदी से जुड़े उनके प्रमुख अनुप्रयोग/तकनीकी कार्य इस तरह हैं:


हिंदी समाचार पोर्टल 'प्रभासाक्षी डॉट कॉम'
यूनिकोड हिंदी वर्ड प्रोसेसर 'माध्यम यूनिकोड प्रो'
हिंदी वर्ड प्रोसेसर 'माध्यम' (ड्युअल फॉरमैट) TTF-UNICODE
हिंदी वर्ड प्रोसेसर 'माध्यम' (अयूनिकोडित) Classic
मानक इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड आधारित यूनिकोड हिंदी टाइपिंग ट्यूटर 'स्पर्श'
हिंदी इंटरफ़ेस युक्त फाइल संपीड़न (ज़िप) साफ्टवेयर- 'हिंदीज़िप'
हिंदी यूनिकोड इनपुट युक्त चित्र संपादन साफ्टवेयर- 'छाया'
दोतरफा हिंदी फॉन्ट परिवर्तक 'सटीक'
विकृत यूनिकोड पाठ संशोधक (ऑनलाइन)
यूनिकोड पर जागरूकता के प्रसार हेतु वेबसाइट लोकलाइजेशनलैब्स.कॉम
हिंदी ईबुक प्रोत्साहन परियोजना 'ई-प्रकाशक.कॉम' की मेन्टरिंग
विंडोज एक्सपी लोकलाइजेशन तथा हेल्प परियोजना में योगदान.
माइक्रोसाफ्ट विज़ुअल स्टूडियो 2008 लोकलाइजेशन (क्लिप) में योगदान आदि

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गोल-मटोल, सुंदर, एक ही आकार के, और एक ही तापक्रम में परिपूर्ण तरीके से सिंकी – यानी न अधपकी न अधजली रोटियाँ जब आपको बिना किसी प्रयास किए खाने को मिले तो आप उसे क्या कहेंगे? आपकी अर्द्धांगिनी का आशीर्वाद या आपके नए-2 खरीदे गए स्वचालित रोटी बनाने वाली मशीन चपातीमेटिक का प्रताप? आपकी अर्द्धांगिनी तो गुस्से में यदा कदा अधपकी-अधजली रोटियाँ भी खिला देती होंगी, मगर आपके नए चपातीमेटिक पर साल भर की वारंटी मिलती है – सभी रोटियाँ एकदम दुरुस्त!

जब मुझे इस तरह के जादुई मशीन रोटीमेटिक के बारे में जानकारी मिली तो मैंने सोचा कि चलो एक खरीद ही लिया जाए. वैसे भी बहुत दिनों से – बल्कि कई वर्षों से मोबाइल-कंप्यूटर-टैबलेट और उससे संबंधित गॅजेट के अलावा और किसी किस्म की खरीदी की ही नहीं थी – क्या करें, जब हर छः महीने में इनके नए, एकदम उम्दा किस्म के संस्करण आ रहे हों और सामने वाला हर दूसरा बंदा इन नए उपकरणों को आपके ऐन नाक के सामने गर्व से लहराता फिरे तो आपको भी तो उसे या उससे भी बढ़िया वाला खरीदना ही होता है. साथ ही, यह अपने उत्तमार्द्ध के लिए भी बढ़िया खरीद इसलिए साबित होगा कि एक तो यह पुरुष के मन तो तुष्ट करने वाली एक इलेक्ट्रॉनिक गॅजेट की खरीदी है – असंख्य साड़ियों की भीड़ में एक और साड़ी खरीदकर आलमारी में रखने जैसी नहीं है.

बहरहाल, चतुर आदमी वही होता है जो किसी भी चीज को ठोंक बजाकर खरीदे. और, आजकल इसके लिए वरदान स्वरूप गूगल बाबा है ना! कीमत की तो बाद में देखेंगे, पहले इसके फ़ीचर, इसकी फ़ंक्शनलिटी और इसके उपयोगकर्ताओं की समीक्षाओं का पठन-मनन तो कर लिया जाए, फिर आगे की सोचते हैं.

मैं कई दिनों तक गूगल के खोज पृष्ठों में उलझा रहा. चपातीमेटिक के बारे में प्रायोजित समीक्षाओं से लेकर वास्तविक अनुभवों और हैंड्स-ऑन एक्सपीरियंस के अनगिनत पन्नों को आत्मसात कर डाले और अंततः इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि भले ही चपातीमेटिक आदमी के दाम्पत्य जीवन पर आसन्न खतरा जैसा हो, वो इस खतरे से जानबूझ कर जरूर दो-चार होना चाहेगा. यानी – उसे जब मौका मिलेगा, फट से जाकर उसे खरीद लेगा. कम से कम उसे ताजा, एक जैसी रूप-रंग में बेली और सेंकी गई रोटी खाने के लिए मिलने की गारंटी तो होगी.

अब आप पूछेंगे कि इस मशीन के दाम्पत्य पर आसन्न खतरे क्या हैं – तो जान कर करेंगे क्या, क्योंकि आपने तो वैसे भी ये मशीन लेनी ही है. ये क्या, आप तो दुनिया की हर नई मशीन लेने को तत्पर होते हैं – उनमें ऐप्पल, सेमसुंग का लोगो होना चाहिए. फिर भी आपके लिए इनमें से कुछ महत्वपूर्ण पेश हैं –

  • · ध्यान रखें, चपातीमेटिक कोई साधारण पटा-बेलन का सेट नहीं है. यह जटिल इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जिसको चलाना सीखने के लिए उतनी ही जटिल मार्गदर्शिका है और दिखने में सरल, किंतु जटिल इंस्ट्रूमेंटल पैनल है. और, जाहिरा तौर पर अर्द्धांगिनियाँ इन जटिल मशीनों को जाने-अनजाने छूने-चलाने से बचती हैं, जाने-अनजाने गड़बड़ करती हैं या जाने-अनजाने चला नहीं पाती हैं – लिहाजा या तो इसे आपको ही चलाना होगा या फिर ये किसी कोने में चला जाएगा जो दोनों ही स्थितियों में आपके दाम्प्त्य जीवन के लिए लाभकारी नहीं होगा.
  • · इस बात की अधिक संभावना है कि आपकी अर्द्धांगिनी चपातीमेटिक का स्वागत करने के बजाए उसे एक प्रतिद्वंद्वी के तौर पर ले. आपके लिए भी यह नुकसानदेह साबित हो सकता है – अब आपको ये भी सुनाई नहीं पड़ेगा कि – एक चपाती और ले लो न जी, गर्मागर्म एकदम पतला सा तो बनाया है. इतने प्यार से बना रही हूँ और तुम मना कर रहे हो. ये बात जुदा है कि तब वो यह बात भूल जाती हैं कि अभी दो दिन पहले ही आपने अपने तमाम पैंटों को एक इंच चौड़ा करवाया था.
  • · हालांकि इस मशीन में तीन-चार तरह की छोटी-बड़ी आकार की और चार-पाँच तरह की मोटी-पतली और कम-ज्यादा सिंकी रोटियों के लिए तमाम सेटिंग हैं, मगर आप जल्द ही एक जैसी बनी-सिंकी रोटियों को खाकर बोर हो जाएंगे – क्योंकि आप अपनी प्रत्येक रोटी के लिए अलग सेटिंग तो करेंगे नहीं. अलबत्ता कभी मशीन गड़बड़ा जाए, और रेंडम मोड में चला जाए तो बात अलग है. और वैसे भी, कोई इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि जब उत्तमार्द्ध का पारा चढ़ा हो तो उनके हाथों की बनी, जली हुई रोटियाँ खाने का मजा कुछ और ही होता है, जो इस मशीन में संभव ही नहीं है – यह रोटियों को किसी सूरत में जला नहीं पाएगा – इसका सेंसर एक खास तापमान होने पर इसके हीटर को खुद-ब-खुद बंद जो कर देता है. यानी किसी दिन आपका कड़क सिंकी हुई रोटी खाने का मन करे तो उसे मन में ही रखिए – चपातीमेटिक इसे अनसुना कर देगा, और पत्नी को बोलेंगे तो वो भड़क उठेगी और कहेगी – हजारों रुपए का ये नकारा डब्बा उठा लाए अब इसी से मांगो अपनी मनपसंद रोटी!

हिंदी कंप्यूटिंग के क्षेत्र में बालेंदु दाधीच एक जाना-पहचाना नाम है.

बालेंदु ने एक नई पेशकश की है. वे एक साइबर शो लेकर आए हैं जिसमें वे विज्ञान व तकनीक के बारे में इसी नाम के यू-ट्यूब चैनल पर ऑडियो-वीडियो की नियमित प्रस्तुति देंगे.

पहला एपिसोड नीचे प्ले बटन पर क्लिक कर देखें.

आप चाहें तो इस चैनल की ग्राहकी ले सकते हैं, ताकि जब भी नया वीडियो जारी हो आपको सूचना मिल जाए और आप नवीनतम टेक्नोलॉजी से अद्यतन बने रहें.

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