टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

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वाह, चलो एक और कठिन काम मशीन के हवाले।

जो झटकी ज़ुल्फ़ उसने तो लगा यूं,
इशारा वो मुझे ही कर रही है,
निकट जाकर कहा "हेल्लो' तो पाया,
तमांचा वो मुझी को जड़ रही है !

काश ! गूगल की ये एप्लिकेशन पहले आ गयी होती।
http://mansooralihashmi.blogspot.in

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इशारा वो मुझे ही कर रही है,
निकट जाकर कहा "हेल्लो' तो पाया,
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