टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

2014

डिजिट पत्रिका के हिंदी में ऑनलाइन उपलब्ध होने की सूचना कुछ यूं मिली -

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तो, जाहिर है, तुरंत ही दौड़ पड़े digit.in हिंदी साइट पर.

पर, अरे! यह क्या?

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नयी स्टोरिज (?? यह क्या होता है?) में 1 दिसम्बर को छापा गया माल है. और शायद 2 दिसंबर के बाद - यानी महीना होने को आया, और हिंदी साइट अपडेट नहीं हुई है. क्या यह मासिक डिजिट पत्रिका का हिंदी ऑनलाइन रूप है जो महीने में एक बार अपडेट होगा? तब तो यह चल चुका! इस साइट पर अब तक महज दर्जन भर आलेख ही हैं, वे भी सतही किस्म के.

खुदा खैर करे!!

 

हिंदी डिजिट वालों, जब आपने गूगल हिंदी वाइस सर्च को टेस्ट किया तो खुद ही बताया कि हिंदी में ऑनलाइन सामग्री कम होने के कारण हिंदी सर्च परिणाम सही नहीं आते, तो सामग्री तो नियमित भरो!!! और, हिंदी को हिंग्लिश भी मत बनाओ!!!

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कंप्यूटर उपयोग के अपने शुरूआती दिनों से लेकर आजतक, मेरे कुछ अत्यंत उपयोगी, नित्य उपयोग में लिए जाने वाले सॉफ़्टवेयरों में "इमेज रीसाइजर" शामिल रहा है, जिसमें कंप्यूटर पर इमेज के आकार (वास्तविक पिक्सेल आकार तथा साथ ही बाइट आकार) को छोटा बड़ा करने की सुविधा होती है.

अब आपके लिए, इस सुविधा को खास आपकी अपनी भाषा,  हिंदी में लेकर आए हैं हिंदी जगत के प्रसिद्ध विकासक श्री बालेंदु दाधीच. और वह भी पूरी तरह मुफ़्त.

इससे पहले कि आप इस सॉफ़्टवेयर को  http://balendu.com/labs/jhatphoto/  से डाउनलोड करें, सॉफ़्टवेयर के बारे में नीचे दिया गया विवरण पढ़ें. मैंने इसे प्रयोग किया तो पाया कि यह बहुत ही कमाल का है. खासकर, चीटकोड की सहायता से इसका चित्र की फ़ाइल को किसी भी आकार में बदलने की सुविधा.

इसके अगले संस्करण में मैं दो अति उपयोगी संशोधन देखना चाहूंगा -

 

1 - विंडोज़ कॉन्टैक्स्ट मेनू में इसका इंटीग्रेशन, तथा

2 - रीसाइज किए गए चित्र को क्लिपबोर्ड में (स्वचालित) कॉपी करने की सुविधा

 

तथा यदि संभव हो तो -

3 - बैच फ़ाइल (एक से अधिक फ़ाइलों का एक साथ) रीसाइज की सुविधा.

यदि ये सुविधाएं मिल जाएं तो यह एक परिपूर्ण इमेज रीसाइजर हो सकता है.

 

झटफ़ोटो के बारे में विस्तृत विवरण -

 

झटफ़ोटो (बीटा) सॉफ्टवेयर के विकास की ज़रूरत क्यों पड़ी

आजकल डिजिटल कैमरों या मोबाइल फ़ोन के कैमरों से लिए जाने वाले हाई-रिजोल्यूशन फ़ोटोग्राफ की लंबाई-चौड़ाई बहुत अधिक होती है। इनका फ़ाइल साइज भी बहुत अधिक होता है। बड़ी संख्या में ऐसे चित्रों को कंप्यूटर पर सहेजना मुश्किल होता है। फ़ेसबुक, ट्विटर, ईमेल, ब्लॉग, वेबसाइटों, व्हाट्सऐप आदि पर इस्तेमाल करने के लिए भी ऐसे फ़ोटो अनुकूल नहीं हैं। इन्हें इंटरनेट पर पोस्ट करने में बहुत अधिक इंटरनेट बैंडविड्थ खर्च होती है और उन्हें देखने वाले अन्य लोगों की भी भारी इंटरनेट बैंडविड्थ की खपत होती है। इसका अर्थ है अपलोड करने वाले व्यक्ति तथा देखने वाले व्यक्ति दोनों के लिए बेवजह का अतिरिक्त इंटरनेट बिल। अगर बड़े आकार के चित्रों को एक साथ फ़ेसबुक या अन्य साइटों पर पोस्ट करना हो तो वह बहुत अधिक समय भी लेगा। इन समस्याओं का एक ही समाधान है कि आप अपने चित्रों को पहले ही उचित आकार में बदल लें और उसके बाद इंटरनेट पर प्रयुक्त करें या फिर कंप्यूटर में सहेजें। झटफ़ोटो यही काम झटपट करने में माहिर है। यह आपके बहुत बड़े चित्रों को भी पलक झपकते ही, बेहद आसान तरीके से छोटे आकार में बदल सकता है और बहुत छोटे चित्रों को बड़े आकार में परिवर्तित करने में भी सक्षम है।
अन्य कंप्यूटर उपयोक्ताओं की तरह झटफ़ोटो के डेवलपर बालेन्दु शर्मा दाधीच भी बड़े चित्रों को कनवर्ट करने की समस्या से परेशान थे और इसके लिए फोटोशॉप या अन्य फोटो संपादन सॉफ्टवेयरों का इस्तेमाल करते थे। लेकिन ये सॉफ्टवेयर महंगे मिलते हैं और उनका प्रयोग भी उतना आसान नहीं है। यदि प्रयोक्ता की ज़रूरत बहुत सीमित हो (आकार परिवर्तन) तो उसे फ़ोटोशॉप जैसी जटिलताओं में उलझने की क्या आवश्यकता है, यह प्रश्न बालेन्दु के मन में निरंतर उठता था। क्यों नहीं एक ऐसा छोटा सा सॉफ्टवेयर विकसित किया जाए जो यह सीधा-सरल काम बिना किसी जटिलता के अंजाम दे सके? खासकर हिंदी उपभोक्ताओं के लिए, जिनके लिए ग्राफिक्स सॉफ्टवेयरों का जटिल इंटरफ़ेस भी एक समस्या हो सकता है। इसी उलझन ने बालेन्दु को यह सॉफ्टवेयर विकसित करने के लिए प्रेरित किया। यह अनुप्रयोग अपना काम बेहद सरलता और प्रवीणता से अंजाम देने में सक्षम है।
बालेन्दु की इच्छा थी कि यह सॉफ्टवेयर निःशुल्क हो क्योंकि श्री दाधीच फ़्री सॉफ्टवेयर आंदोलन में यक़ीन रखते हैं और पहले भी 'माध्यम', 'स्पर्श' 'संशोधक' और हिंदीज़िप' जैसे निःशुल्क हिंदी सॉफ्टवेयर उपलब्ध करा चुके हैं।

 

झटफ़ोटो में क्या खास है?

झटफ़ोटो एक सरल, सुगम किंतु शक्तिशाली इमेज रिसाइजिंग सॉफ्टवेयर है। इसकी खास विशेषताएँ हैं-
- यह एक फ़्रीवेयर (निःशुल्क सॉफ्टवेयर है)
- यह अनेक आकारों में चित्रों को परिवर्तित करने में सक्षम है।
- यह आपके इंटरनेट का ख़र्च, चित्रों के अपलोड का समय और कंप्यूटर स्पेस बचाता है।
- चित्र को सहेजने से पहले उसे नए आकार में देखने-परखने की सुविधा मौजूद है।
- यह jpeg, png, gif, bmp आदि फॉरमैट्स का समर्थन करता है।
- इसमें रूपांतरित फ़ाइलें अन्य ग्राफ़िक्स सॉफ्टवेयरों के अनुकूल (Compatible) है।
- इसे खास तौर पर आम हिंदी उपयोक्ताओं के लिए बनाया गया है इसलिए इसका इंटरफ़ेस (चेहरा-मोहरा और संदेश आदि) हिंदी में हैं।
- सॉफ्टवेयर का आकार बेहद छोटा (500 केबी से भीकम) है इसलिए यह आपके कंप्यूटर में अधिक स्थान नहीं घेरता।
- यह पूरी तरह सुरक्षित (वायरस, स्पाईवेयर आदि से) है।

 

इसके नाम में 'हिंदी' क्यों है?

- झटफ़ोटो का इंटरफ़ेस हिंदी में है। इसमें अंग्रेज़ी का प्रयोग नहीं किया गया है।
- यह हिंदी के उपयोक्ताओं को विशेष रूप से लक्ष्य बनाकर विकसित किया गया है। हालाँकि ऐसे अन्य भाषा-भाषी भी इसका प्रयोग कर सकते हैं जिन्हें हिंदी इंटरफ़ेस के प्रयोग में कोई दिक्कत नहीं है

 

झटफ़ोटो का उपयोग कैसे करें?

झटफ़ोटो को http://balendu.com/labs/jhatphoto/ पर जाकर डाउनलोड करें. यह बहुत ही छोटी सी जिप फ़ाइल है जो कि एक मिनट से भी कम समय में डाउनलोड हो जाएगी. इसे अनजिप करें और इसका सेटअप चलाएं.

झटफ़ोटो (बीटा) इन्स्टालेशन

झटफ़ोटो इन्स्टालेशन से पहले आपके कंप्यूटर में माइक्रसॉफ्ट डॉट नेट फ्रेमवर्क 4 का मौज़ूद होना आवश्यक है। यदि कंप्यूटर विंडोज़ 7 या विंडोज़ 8 युक्त है तो संभवतः उसमें यह पहले  ही विद्यमान होगा।
इसका सेटअप डाउनलोड करने के बाद उसे डबल क्लिक करें। कुछ ही क्षण में झटफोटो इन्स्टाल हो जाएगा।

कैसे इस्तेमाल करें?

झटफ़ोटो को इस्तेमाल करना बेहद आसान है। यह एक छोटा सा सॉफ्टवेयर है। इसे खोलने के बाद यह प्रक्रिया अपनाएँ-
- जिस चित्र का आकार बदलना चाहते हैं उसे सॉफ्टवेयर में खोलें।
- इसके लिए फ़ाइल मेनू में जाकर 'फ़ोटो फ़ाइल चुनें' विकल्प पर क्लिक करें।
- फ़ाइल का चुनाव करें। इससे वह झटफोटो में खुल जाएगी।
- फ़ाइल खुल गई है, इसके प्रतीक के रूप में चित्र को छोटे आकार में झटफोटो में दिखाया जाएगा।
- अब नीचे दिए कई आकारों (100 से लेकर 1000 तक) में से कोई भी एक आकार चुनें। यह आपके चित्र की भावी चौड़ाई होगी।
- नई चौड़ाई में चित्र कैसा दिखेगा, यह जानने के लिए मेनू में 'नए आकार में दिखाएँ' विकल्प का प्रयोग करें या फिर इसी आशय के बटन को क्लिक करें।
- इससे एक छोटी विंडो खुलेगी, जिसमें इच्छित आकार में चित्र मौज़ूद होगा।
- यदि आकार ठीक नहीं लगता तो किसी अन्य आकार को चुनकर यही प्रक्रिया दोहराएँ। पहले चित्र दिखाने वाली विंडो को बंद कर लें।
- आपकी इच्छानुसार आकार बन गया है तो नई विंडो को बंद करके मेनू में 'नए आकार में सहेजें' विकल्प का प्रयोग करें या फिर इसी आशय का बटन दबाएँ।
- परिवर्तित आकार की फ़ाइल को कंप्यूटर में सहेज लें।
- इस चित्र को मनचाहे स्थान पर अपलोड कर लें।

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बालेन्दु शर्मा दाधीचः झटफ़ोटो के डेवलपर

झटफ़ोटो का विकास बालेन्दु शर्मा दाधीच ने किया है, जो हिंदी में कंप्यूटर और इंटरनेट आधारित कई सॉफ्टवेयरों, वेब सर्विसेज और वेबसाइटों के विकास के लिए जाने जाते हैं। सम्प्रति वे प्रभासाक्षी.कॉम नामक हिंदी समाचार-विचार पोर्टल के समूह संपादक हैं।

Balendu Sharma Dadhich

वे आंकिक विभाजन के विरुद्ध सक्रिय विश्वव्यापी तकनीकी समुदाय के सदस्य के रूप में दो दिशाओं में सॉफ्टवेयर सोल्यूशन्स के विकास में जुटे हैं-

1. हिंदी से जुड़ी सुविधाएँ, और

2. आम लोगों के लिए निःशुल्क सॉफ्टवेयर सोल्यूशन्स (फ़्री एंड ओपन सोर्स)। 
सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के साथ-साथ श्री दाधीच राष्ट्रीय समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से तकनीकी विषयों पर लिखते हैं। एक वरिष्ठ ब्लॉगर के रूप में भी उनकी पहचान है।  हिंदी में यूनिकोड एनकोडिंग के विविध पहलुओं पर वे सन् 2000 से ही महत्वपूर्ण मौलिक लेखन करते रहे हैं। 
बालेन्दु शर्मा दाधीच की ओर से उपलब्ध कराए गए चुनिंदा हिंदी सॉफ्टवेयर और वेब परियोजनाएँ हैं-
माध्यमः हिंदी वर्ड प्रोसेसर
स्पर्शः हिंदी टाइपिंग ट्यूटर
संशोधकः वेब आधारित यूनिकोड विकृति संशोधक
सटीकः दोतरफा (यूनिकोड -> टीटीएफ, टीटीएफ->यूनिकोड) हिंदी फॉन्ट कनवर्टर
छायाः हिंदी यूनिकोड आधारित इमेज प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर
हिंदीज़िपः हिंदी मुखावरण युक्त फ़ाइल संपीड़न युक्ति।
झटफोटोः हिंदी इंटरफ़ेस युक्त चित्र आकार परिवर्तक सॉफ्टवेयर।
प्रभासाक्षी.कॉमः
हिंदी का प्रमुख समाचार-विचार पोर्टल।
लोकलाइजेशनलैब्सः हिंदी में यूनिकोड एनकोडिंग को बढ़ावा देने के लिए पोर्टल।
वेबसाइटः http://www.balendu.com
ईमेलः balendu@gmail.com

गूगल ने अंततः आधिकारिक रूप से हिंदी में ऐडसेंस की घोषणा कर दी.

नीचे उनके ब्लॉग पर दी गई जानकारी है -

 

AdSense now speaks Hindi

Posted: Sunday, December 14, 2014

We're proud to announce that AdSense now supports Hindi, one of India's most widely spoken languages.
With over 500 million speakers around the world*, a wealth of quality Hindi content is available on the web.  We’re excited to launch AdSense Hindi language support today to help fuel even more quality content creation on the web, and to help advertisers connect with a rapidly growing online audience.
If you have a website in Hindi, you'll now be able to earn money by displaying Google AdSense ads on your website. To get started:

  1. Make sure your website is compliant with the AdSense program policies.
  2. Sign up for an AdSense account by enrolling your Hindi website.
  3. Once your AdSense account has been approved, simply add the AdSense code to start displaying relevant ads to your users.

ऐडसेंस कार्यक्रम में आपका स्वागत है!
Welcome to AdSense!

 

हिंदी इंटरनेट का एक नया युग प्रारंभ होने को है!

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फुरसतिया “अनूप शुक्ल” की एक पुस्तक ई-बुक / प्रिंट ऑन डिमांड के माध्यम से  पोथी.कॉम पर सद्य:प्रकाशित हुई है.

पुस्तक के पीडीएफ ई-बुक की कीमत 50 रुपए है.

पुस्तक को इस लिंक पर जाकर खरीदा जा सकता है.

ध्यान दें कि पीडीएफ़ बुक को डाउनलोड एस्सेलरेटर जैसे प्रोग्राम से डाउनलोड नक ब्राउज़र से ही डाउनलोड करें, अन्यथा फ़ाइल सही प्राप्त नहीं होती है.

 

पुस्तक तो फ़ेसबुक में पहले ही अघोषित रूप से, बाजार में आने से पहले ही बेस्ट सेलर हो चुकी है, क्योंकि पब्लिक की भारी डिमांड से ही इस पुस्तक को प्रकाशित किया गया है, इसकी कीमत रखी गई है और इसे प्रकाशित होने पर अनिवार्य और आवश्यक रूप से खरीदने का प्रॉमिस किया गया है. इसलिए इस चर्चित किताब को खरीदें और पढ़ें – जैसे कि मैंने खरीदा है. Smile

वैसे तो इस पीडीएफ किताब को किसी  तरह के पासवर्ड से सुरक्षित आदि नहीं किया गया है, परंतु जैसा कि चित्र में दर्शित है - हर पन्ने पर सबसे नीचे खरीदार का ईमेल पता प्रकाशित किया गया है.

 

फुरसतिया को अग्रिम बेस्ट सेलर किताब के लिए ढेरों बधाईयाँ.

यह रचनाकार.ऑर्ग के एक हिंदी पृष्ठ पर आज छपा एडसेंस का हिंदी में फ़ेसबुक का विज्ञापन है -

 

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लगता है कि अब हिंदी ब्लॉगों और हिंदी के पृष्ठों के लिए गूगल एडसेंस विज्ञापन, वह भी हिंदी में,  आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो गया है.

शायद ब्लॉगों के दिन फिरें.

ब्लॉग पर फ़ेसबुक के विज्ञापन से तो यही दिख रहा है – फ़ेसबुकिया लोग ब्लॉगों की तरफ वापस दौड़ पड़ेंगे क्या?

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नया गूगल हिंदी इनपुट जिसे एंड्रायड स्मार्टफ़ोनों तथा टैबलेट के लिए गूगल प्लेस्टोर पर जारी किया गया है, उसमें अब हिंदी हस्तलेखन / हस्तलिपि पहचान की सुविधा आ गई है.

इसके माने क्या हैं?

इसका अर्थ है कि अब आप अपनी उंगली से या स्टायलस या नोट-2 जैसे उपकरणों में उपलब्ध डिजिटल पेन की सहायता से टचस्क्रीन पर हिंदी में लिख सकते हैं और वह डिजिटल फ़ॉर्म में अपने आप टाइप होता जाएगा. कुछ समय पहले इसमें बोलकर लिखने की सुविधा मिली थी. एक तरह से अब यह एक परिपूर्ण हिंदी इनपुट औजार हो गया है. यानी, पारंपरिक कीबोर्ड की छुट्टी.

 

मैंने थोड़ा सा त्वरित उपयोग किया तो पाया कि यह वाकई आपके टेढ़ेमेढ़े हस्तलेख को भी पहचानने की क्षमता रखता है. हाँ, यदि शब्द लिखने से पहले शिरोरेखा खींच लें तो परिणाम बढ़िया मिलता है. साथ ही, जैसा कि स्क्रीनशॉट में दर्शित है, आपको पूरा शब्द लिखने की भी जरूरत नहीं. प्रेडिक्टिव टैक्स्ट भी बढ़िया काम करता है.

 

इस नए संस्करण में और भी सुविधाएँ हैं -

 

- नया इंटरफ़ेस

- हिन्दी हस्तलिपि

- वॉइस इनपुट

- हिंग्लिश शब्दकोश, जो उपयोगकर्ता द्वारा अंग्रेज़ी / हिंग्लिश में लिखते समय हिंग्लिश शब्दों के सुझाव देता है

- व्यंजन / स्वर के मिश्रित स्वरूपों का गतिशील परिवर्तन: हिन्दी कीबोर्ड में जब उपयोगकर्ता कोई व्यंजन लिखता है, तो शीर्ष पंक्ति में स्वर, व्यंजन/स्वर के मिश्रित स्वरूपों में परिवर्तित हो जाते हैं

- इमोजी कीबोर्ड

- टैबलेट पर नया हिन्दी कीबोर्ड

- अधिक सटीक लिप्यंतरण और योग्य हिन्दी सुझाव

 

इंस्टाल करने के बाद इसकी सेटिंग कैसे करें :

- Android 5.x और इसके बाद के संस्करणों में:
सेटिंग -> भाषा और इनपुट खोलें, “कीबोर्ड और इनपुट विधियां” अनुभाग के अंतर्गत, वर्तमान कीबोर्ड पर जाएं-> कीबोर्ड चुनें -> Google हिन्दी इनपुट चुनें इनपुट -> भाषा और इनपुट पर वापस आएं -> वर्तमान कीबोर्ड पर जाएं -> हिंग्लिश और हिन्दी Google हिन्दी इनपुट चुनें
इनपुट बॉक्स में टाइप करते समय आप स्क्रीन के निचले दाएं कोने पर कीबोर्ड आइकन पर क्लिक करके डिफ़ॉल्ट इनपुट विधि भी बदल सकते हैं.

- Android 4.x में:
सेटिंग -> भाषा और इनपुट खोलें, “कीबोर्ड और इनपुट विधियां” अनुभाग के अंतर्गत, Google हिन्दी इनपुट चेक करें, फिर डिफ़ॉल्ट क्लिक करें और “इनपुट विधि चुनें” डायलॉग. में “हिन्दी” चुनें
इनपुट बॉक्स में टाइप करते समय आप सूचना क्षेत्र में “इनपुट विधि चुनें” का चयन करके भी डिफ़ॉल्ट इनपुट विधि बदल सकते हैं.

 हिंग्लिश, हिन्दी या हस्तलिपि कीबोर्ड को कैसे सक्षम/अक्षम करें?
सेटिंग->भाषा और इनपुट->Google हिन्दी इनपुट->कीबोर्ड पर जाएं, कीबोर्ड प्रकार चुनें अनुभाग के अंतर्गत, अपना इच्छित कीबोर्ड चुनें.

कीबोर्ड थीम कैसे बदलें?
सेटिंग->भाषा और इनपुट->Google हिन्दी इनपुट->कीबोर्ड->कीबोर्ड थीम में अपनी इच्छित थीम चुनें.

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इस प्रोग्राम का उपयोग कैसे करें?

हिन्दी लिप्यंतरण (ट्रांसलिट्रेशन)
- लिप्यंतरण मोड चालू/बंद करने के लिए अंग्रेज़ी कीबोर्ड पर बटन “a->अ” को टॉगल करें.
- लिप्यंतरण मोड में आप अंग्रेज़ी वर्णों में हिन्दी शब्द लिख सकते हैं और एप्लिकेशन उन्हें हिन्दी में रूपांतरित कर देगा
- उदाहरण के लिए “hindi” लिखें और फिर आपको सूची से शब्द हिंदी प्राप्त होगा.

अंग्रेज़ी
- अंग्रेज़ी कीबोर्ड पर लिप्यंतरण मोड बंद करके (“a->अ” बटन दोबारा दबाकर), आप अंग्रेज़ी में लिख सकते हैं

हिन्दी कीबोर्ड
- अंग्रेज़ी से हिन्दी कीबोर्ड के बीच स्विच करने के लिए ग्लोब बटन को टॉगल करें
- व्यंजन लिखने के बाद स्वर स्वचालित रूप से मात्रा में परिवर्तित हो जाते हैं.
- वर्णों के परिवर्तित रूप (स्वर और व्यंजन) लिखने के लिए वर्णों को लंबे समय तक दबाएं. उदाहरण के लिए, “ई” को लंबे समय तक दबाए रखकर आप “ई” या “ी” लिख सकते हैं, “क”को लंबे समय तक दबाए रखकर आप क, कं, क्र या र्क लिख सकते हैं.

इसे अपने एंड्रायड मोबाइल / टैबलेट पर डाउनलोड करने के लिए प्ले स्टोर पर Google Hindi Input सर्च करें या फिर निम्न कड़ी पर जाएं -

https://play.google.com/store/apps/details?id=com.google.android.apps.inputmethod.hindi

विंडोज़ विस्टा की याद होगी आपको. एक असफल ऑपरेटिंग सिस्टम अपग्रेड.

एंड्रॉयड लॉलीपॉप भी विस्टा का भाई निकला. शुरुआत में इसके अपग्रेड रिलीज को किन्हीं ज्ञात वाईफाई बग के कारण आगे खिसकाया गया और अंततः जब अपग्रेड आया है तो कई क्षेत्रों से समस्याओं की रिपोर्टें आ रही हैं.

मेरे स्वयं के, नेक्सस ५ में एयर ऑडियो और स्ट्रीएम्बल्स जैसे महत्वपूर्ण ऐप्प या तो नहीं चल रहे या समस्या पैदा कर रहे हैं.

भारत में जोर शोर से एंड्रॉयड वन नाम से लॉलीपॉप युक्त जो स्मार्टफोन जारी किया गया था उनमें भी तमाम समस्याएं थीं और जिन्होंने इसे खरीदा है वे बुरी तरह से पछता रहे हैं.

बहरहाल, संतोष इस बात का है कि सारी समस्याएं सॉफ़्टवेयर की हैं जिन्हें दूर किया जा सकता है.

अर्द्धपारदर्शी परिधानों और रत्नजटित-प्लेटिनम-आभूषणों से सुसज्जित परियों का नृत्य चल रहा था और नेपथ्य में घंटियों की सुमधुर स्वर लहरियां बज रही थीं. धीरे-धीरे घंटियों की सुमधुर स्वर लहरियां तेज होती गईं और अंततः कर्कश स्वर में बदल गईं और, साथ ही, इधर जब मादक परियां भी धुंधलके में गुम हो गईं तब थोड़ा सा होश आया. घंटियों का कर्कश स्वर मेरे स्मार्टवॉच से निकल रहा था जिसमें मैंने सुबह साढ़े पाँच बजे का अलार्म सेट किया हुआ था. धत् तेरे की! यह भी कोई वक्त होता है सुबह जागने का? सर्वांगसुंदरी परियों का सान्निध्य जाने अब फिर कब हासिल हो!

बहरहाल, मैंने अपने स्मार्टवॉच के उस कर्कश (हाँ, सुबह सुबह जागते समय सुमधुर घंटियों की आवाजें भी कर्कश ही लगती हैं!) अलार्म को दूर से ही, जेस्चर कंट्रोल से बंद किया. मुझे आज अपनी यात्रा शुरू करनी थी, जिसके लिए मेरे स्मार्टफ़ोन का उतना ही स्मार्ट कैलेंडर पिछले पंद्रह दिनों से मुझे स्मार्ट बनाए दे रहा था, यह बता-बता कर कि भइए, इस तारीख को तुम्हारी एक यात्रा है और उसके लिए न केवल तुम्हें तैयार रहना है, बल्कि तैयारी भी करनी है. तो, मैंने तैयारी पहले ही कर ली थी – टिकट स्मार्टफ़ोन में स्मार्ट तरीके से ईमेल व पीडीएफ़ में क्यूआर कोड के साथ पहले से ही सहेजे जा चुके थे. प्रिंटेड टिकट को हमने स्मार्ट तरीके से अलविदा जो कर दिया था.

तय समय पर जीपीएस तथा ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम सहित एक स्मार्ट टैक्सी घर के दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई. इसके लिए मेरे स्मार्टफ़ोन के उतने ही स्मार्ट ऐप्प ने पहले ही चेता दिया था कि यदि आपने पहले से टैक्सी बुक नहीं की तो समय पर अपनी उड़ान पकड़ने के लिए आपको समस्या आ सकती है – और कोई आधा दर्जन टैक्सी सेवा प्रदाताओं में से खोज-खंगाल कर सबसे सस्ती और सबसे अच्छी सेवा का विकल्प पेश किया था, जिसे नजरअंदाज करना कोई स्मार्ट बात नहीं होती. और, बताने की जरूरत नहीं कि टैक्सी का किराया नेटबैंकिंग से बुकिंग करते समय ही अदा करने की स्मार्टनेस भी दिखानी ही थी, क्योंकि इसमें कोई बीस प्रतिशत छूट जो मिलनी थी. स्मार्ट सोच, स्मार्ट गेन!

घटना-रहित उड़ान पूरी कर समय पर होटल पहुंच गए क्योंकि रनवे पर न तो भैंस मिली, न कुत्ते व पक्षियां. होटल का स्मार्ट सिस्टम अपने स्वागत के लिए पहले ही तैयार था, क्योंकि कमरे की बुकिंग पहले से ही कर रखने की स्मार्टनेस हमने जो दिखाई थी. कमरे की पारंपरिक चाबी के बजाय हमें स्मार्ट कार्ड थमाया गया, जिसका उपयोग करने के लिए, जाहिर है, अतिरिक्त स्मार्टनेस की आवश्यकता होती थी. कमरे का दरवाजा खोलने के लिए उसमें लगे स्मार्ट-लॉक में इस स्मार्ट कार्ड को स्वाइप करने पर दरवाजा खुलता था. कमरे की बिजली अबाधित चले, उसके लिए स्मार्ट कार्ड को एक निश्चित खांचे में सदैव रखे रहना होता था. नाश्ते, भोजनादि के लिए होटल के रेस्त्रां में यह स्मार्टकार्ड स्वाइप होते ही आपके होटल बिल में राशि जोड़ देता था, जो चेकआउट के समय उतने ही स्मार्ट तरीके से आपके खाते से अपने-आप ही राशि जमा कर लेने वाला था.

चूंकि शहर बड़ा था, और यहाँ उतने ही बड़े मॉल थे, अतः कुछ खरीदारी करने का सोचा गया. एक बड़े मॉल पर पहुँचे तो वो स्मार्ट का बाप निकला. प्रवेश द्वार पर अनावश्यक रूप से (हमें पहले से पता है, हम भी स्मार्ट हैं!) यह बताया गया कि यदि आपके स्मार्टफ़ोन में एनएफसी है तो उसे चालू कर लें, आपको बड़ा स्मार्ट अनुभव मिलेगा. ग़नीमत यह थी कि यह नहीं कहा गया कि बिना एनएफसी स्मार्टफ़ोन वाले ग्राहक, जो स्मार्ट नहीं हैं, कृपया बाहर ही रहें. तो, एनएफसी की कृपा से उस मॉल में जब, जिधर से गुजरे, उपभोक्ता सामानों की नई-नई रेंज, उसमें आकर्षक छूट आदि आदि के बारे में दनादन संदेश अपने स्मार्टफ़ोन में आने लगे. अब जब नए सामान दिखें, उनमें आकर्षक छूट मिले, तो भले ही आवश्यकता हो न हो, आदमी को इन्हें खरीद लेने की स्मार्टनेस तो दिखानी ही होती है. लिहाजा, जब मैं भी मॉल से बाहर निकला तो थोड़ा और स्मार्ट होकर निकला – यानी मेरे हाथ में तीन-तीन बड़े बैग थे – सामानों से भरे हुए! और, आपको बताता चलूं कि इन सामानों को अपने बैग में रखते-रखते ही मैंने अपने स्मार्टफ़ोन को टैप कर तुरंत भुगतान भी करते रहने की शानदार स्मार्टनेस दिखाई थी, इस वजह से बिल काउंटर पर लंबी लाइन में लगना ही नहीं पड़ा. वैसे, वस्तुतः बिल काउंटर पर कोई लाइन ही नहीं थी, हर कोई अपने स्मार्टफ़ोन को टैप करने में लगा था – बिल देना हो या न देना हो!

घर वापसी की यात्रा भी कोई कम स्मार्ट नहीं थी, जिसकी चर्चा फिर कभी. अभी तो आप यह बताएं कि मेरे इस संस्मरण को पढ़कर आप थोड़े बहुत स्मार्ट हुए भी या नहीं?

कोई छः वर्ष पूर्व, स्थानीयकरण में गुणवत्ता और मानकीकरण के उद्देश्य से हिंदी भाषा में प्रारंभ किया गया फ़्यूल नामक यह छोटा सा प्रयास अब तक 60 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं और विभिन्न मॉड्यूलों में विस्तृत हो चुका है, जिसकी तो कल्पना नहीं ही थी. और इसका विस्तार जारी है. इन पंक्तियों के लिखते समय जर्मनी भाषा के भी इस आयोजन में जुड़ने की खबरें आ रही हैं.

स्थानीयकरण में गुणवत्ता और मानकीकरण कितना आवश्यक है, यह आप नीचे दिए गए स्क्रीनशॉट से स्वयं समझ सकते हैं. ये स्क्रीनशॉट नवीनतम एंड्रायड फ़ोन के आधिकारिक हिंदी (नेक्सस 5 पर हिंदी इंटरफ़ेस) से लिए गए हैं. साथ ही, यदि आप गूगल मैप्स का उपयोग हिंदी में करते आ रहे हों तो शायद आपको पता हो कि पूर्व में यह हिंदी में गूगल मानचित्र कहलाता था, फिर इसे बीच में गूगल नक्शे कहा जाने लगा और अभी अभी इसे फिर से गूगल मानचित्र कहा जाने लगा है. यदि मानकीकरण हो, तो ऐसी समस्याओं से दूर रहा जा सकता है.

स्थानीयकरण में गुणवत्ता और मानकीकरण को बढ़ावा देने और उसे चहुंओर विस्तार देने के उद्देश्य से फ़्यूल गिल्ट (FUEL - Frequently Used Entries in Localization तथा GILT - Globalization, Internationalization, Localization and Translation) संगोष्ठी का आयोजन पिछले दिनों यशदा (यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन प्रबोधिनी), पुणे में हुआ. आयोजन की शुरुआत डॉ विजय भाटकर के दिलचस्प उद्बोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने भारत के प्रथम सुपर कंप्यूटर के निर्माण के समय के अपने अनुभवों को साझा किया. स्थानीयकरण से जुड़े व इतर क्षेत्र के कई पंडितों ने भी इस द्विदिवसीय आयोजन में अपने विचार रखे. समानांतर सत्र में कई वर्कशॉप भी चले.

इस आयोजन की उपलब्धि रही – फेलिक्स द्वारा फ़्यूल एग्रीकल्चर मॉड्यूल का आरंभिक संस्करण जारी करना तथा रविकांत द्वारा प्रस्तावित फ़्यूल फ़िल्म मॉड्यूल की सशक्त भूमिका पेश करना.

इस बेहद सफल आयोजन के पीछे राजेश रंजन, चंद्रकांत धूतामल, अंकित कुमार पटेल, मनोज गिरी, प्रवीण सातपुते समेत तमाम अन्य लोगों का सक्रिय, समर्पित भाव से सहयोग रहा.

उम्मीद करते हैं कि फ़्यूल अपने मकसद में कामयाब होगा, और आशा करें कि हमें नीचे दिए गए स्क्रीनशॉट जैसे अनुभव भविष्य में न हों!

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आपके एंड्रायड (साथ ही एपल के भी, विंडोज पर तो पहले से था) उपकरणों – यानी स्मार्टफ़ोनों व टैबलेटों के लिए माइक्रोसॉफ़्ट ने अपने ऑफ़िस सूट का ऐप्प निशुल्क उपयोग के लिए जारी कर दिया है.

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आइए, देखें कि इसमें हम हिंदी वालों के लिए क्या सुविधा है.

 

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ठीक है, हम क्लाउड के जरिए अपने कंप्यूटर, टैबलेट और स्मार्टफ़ोन सभी में अपना दस्तावेज़ काम में ले सकते हैं. परंतु केवल docx फ़ार्मेट में सहेजे गए. doc फ़ाइल को यह ऐप्प काम में नहीं ले सकता! चलिए, फिर भी कोई बात नहीं, आगे बढ़ते हैं -

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आपके पास विंडोज लाइव का खाता होना चाहिए. नहीं है तो एक निशुल्क बना सकते हैं.

 

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वाह, यह सेवा शर्तें पृष्ठ तो हिंदी में बढ़िया दिख रहा है. चलिए आगे देखें -

 

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ठीक है, एक नया दस्तावेज बनाते हैं.

 

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अरे! यह क्या? संपादन खिड़की में तो अर्धाक्षर सही नहीं दिख रहे. धत्तेरे की!

 

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फ़ॉन्टों में रंग रोगन तो बढ़िया कर सकते हैं.

 

 

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चलिए इस माइक्रोसॉफ़्ट में लिखे माल को दूसरे ऐप्प में खोलते हैं.

 

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गूगल डॉक में बढ़िया दिख रहा है.

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क्विक ऑफ़िस में भी बढ़िया दिख रहा है.

 

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अरे! कहीं अन्यत्र बनाए गए हिंदी सामग्री को भी माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस एंड्रायह ठीक से प्रदर्शित नहीं कर पाता.

 

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एक्सेल में भी यही हाल है.

 

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इस फ़ाइल को सहेजने का संवाद तो ठीक है. माने सिस्टम में समस्या नहीं है, बल्कि माइक्रोसॉफ़्ट के फ़ॉन्ट रेंडरिंग में समस्या है.

यानी जब तक इस बग को ठीक नहीं कर लिया जाता, ये मुफ़्त का माल भी हमारे किसी काम का नहीं!

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बोस साउंडटच वाई-फ़ाई म्यूज़िक सिस्टम

जब मैंने विनीत कुमार के फ़ेसबुक स्टेटस पर यह पढ़ा -

“...लेकिन कभी तो विचार कीजिये कि जिस रेडियो को टीवी और इन्टरनेट के प्रभाव के तहत कबाड़ घोषित कर दिया गया, जो माध्यम rj की झौ-झौ करने के कारण बदनाम हो गया, रिश्तेदारों की जो भाषा विस्थापन के कारण विलुप्त सी होने लगी, उसे इस शख्स ने कैसे गली की दूकान की तरह फैला दिया..आप उस भाषा में कब बात करेंगे जिससे धंधे के चमकते रहने के बावजूद आत्मीय होने,जुड़ने का एहसास पैदा हो,लतियन जोन में रहकर भी कस्बे की बोली निकाल सकें...”

तो बरबस ही मेरा ध्यान मेरे नए नवेले वाई-फ़ाई (कृपया ध्यान दें, हाई-फ़ाई – यानी हाई डेफ़िनिशन नहीं) रेडियो पर ‘प्लेनेट रेडियो सिटी फ़न का एंटीना’ से स्ट्रीम हो रहे (माने कि, इंटरनेट से बज रहे) हनी सिंह के वाहियात, बेसुरे और शोर भरे रैप पर गया और मैंने तुरंत ही वह चैनल बदल दिया और इंटरनेट पर मौजूद हजारों-हजार (जी, हाँ!) रेडियो चैनलों में से एक, अपना पसंदीदा – ‘इंस्ट्रूमेंटल हिट्स’ लगा लिया, जहाँ फ्रैंक सिनात्रा का एक शानदार संयोजन बज रहा था.

वैसे, पारंपरिक रेडियो (माने एएम और एफएम) की बातें करें तो विनीत कुमार का कहना एक हद तक सही है कि टीवी और इंटरनेट के प्रभाव से वह कबाड़ हो गया है, और आरजे के झौं-झौं से बदनाम हो गया है. परंतु रेडियो का एक दूसरा अवतार भी आ चुका है, और क्या ख़ूब आया है. दरअसल एक तरह से रेडियो का कायाकल्प हुआ है और अब यह नए अवतार, नए रूप में आपके घर में, और आपके पॉकेट में (स्मार्टफ़ोन के जरिए) आकर आपका चौबीसों घंटे मनोरंजन करने को तैयार है. जहाँ सुनने के लिए आपके पास महज दर्जन भर नहीं, बल्कि हजारों हजार चैनल हैं जिनमें से सदैव स्ट्रीम हो रहे संगीत का मजा हर कहीं ले सकते हैं – जी, हाँ, बाथरूम में भी. बस, शर्त यह है कि आपके वाई-फ़ाई रेडियो को इंटरनेट की गति जरा ठीक ठाक मिले.

भूमिका जरा ज्यादा ही सौंदर्यात्मक हो गई? तो चलिए, वापस तकनीकी भाषा में लौट आते हैं. वैसे तो इंटरनेट रेडियो को आपके कंप्यूटर और इंटरनेट से जुड़े किसी भी उपकरण – जैसे कि आपके स्मार्टफ़ोनों / टैबलेटों पर अवतरित हुए एक अरसा हो गया, मगर सैकड़ों हजारों चैनलों के उपलब्ध होने के बावजूद इसे लोकप्रियता इस लिए नहीं मिली कि एक तो आपको इन्हें चलाने के लिए कंप्यूटिंग उपकरणों की आवश्यकता होती थी, दूसरे, इसके लिए अच्छी गुणवत्ता का ब्रॉडबैंड इंटरनेट भी चाहिए, और वह भी अनलिमिटेड किस्म का – क्योंकि इंटरनेटी रेडियो में अच्छी गुणवत्ता का संगीत सुनने के लिए न्यूनतम 128 केबीपीएस गति की स्ट्रीमिंग चाहिए. अब जब ब्रॉडबैंड इंटरनेट की पहुँच हर जगह हो रही है तो स्ट्रीमिंग रेडियो के साथ वाई-फ़ाई रेडियो सेटों का जमाना भी अब निकट ही है समझिए, जहाँ न तो पसंदीदा संगीत का टोटा होगा और न ही किसी आरजे की घटिया चुटकुलों की झौंझौ बरसात होगी.

तो, यदि आपके पास बढ़िया अनलिमिटेड ब्रॉडबैंड है (वाई-फ़ाई हो तो क्या कहने!, यूं 3 जी भी चलेगा, और 4जी तो दौड़ेगा) और यदि आप रेडियो सुनने और खासकर तमाम तरह के संगीत सुनने वाले मेरे जैसे दीवाने हैं तो आपके लिए कुछ विकल्प पेश हैं –

आपके पीसी – यानी कंप्यूटर/लैपटॉप/टैबलेट आदि के लिए:

आप इंटरनेट रेडियो को यहाँ दर्जनों तरीकों से चला सकते हैं, जैसे कि विविध भारती को यहाँ (ऐसे और भी लिंक हैं जिससे विविध भारती को इंटरनेट से सुना जा सकता है) क्लिक कर अपने ब्राउज़र से सुन सकते हैं, परंतु सबसे आसान है – वी-ट्यूनर की साइट पर यहाँ जाएं और पसंदीदा रेडियो पर क्लिक करें और उसके प्लेलिस्ट को अपने विनएम्प / विंडोज मीडिया प्लेयर / क्लासिक प्लेयर या एआईएमपी3 प्लेयर से चलाएं.

आपके स्मार्ट टीवी / स्मार्टफ़ोन आदि के लिए:

ऐप्प/प्ले स्टोर में रेडियो (radio) से खोजें और अपना पसंदीदा ऐप्प चुनें. जैसे कि वीट्यूनर या ट्यूनइन रेडियो. ट्यूनइन रेडियो में वर्तमान में 50 हजार से अधिक रेडियो चैनल उपलब्ध हैं जिन्हें आप सुन सकते हैं. दर्जनों भारतीय रेडियो भी इसमें हैं. कुछेक स्मार्टफ़ोनों में क्रोम या ओपरा ब्राउज़र से भी सीधे सुन सकते हैं – जैसे कि प्लेनेट रेडियो सिटी के चैनल. वैसे, प्लेनेट रेडियो सिटी जैसे चैनलों के ऐप्प भी हैं जिनसे आप अपने स्मार्टफ़ोनों में ये रेडियो बखूबी चला सकते हैं.

और, अब अंत में असली वाई-फ़ाई रेडियो:

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प्योर कंपनी का मार्शल वाई-फ़ाई रेडियो – 50,000 से अधिक इंटरनेट रेडियो चैनल – सुनो जी भर के!

 

यदि आप वाकई रेडियो प्रेमी हैं, और यदि आप अपने एएम या एफएम रेडियो की गुणवत्ता से तंग आ चुके हैं या उसे भूल चुके हैं तो आप अपना पुराना रेडियो अभी ही ओएलएक्स पर बेच दें, और ले आएं नई टेक्नोलॉजी का, नया वाई-फ़ाई रेडियो (वस्तुतः स्ट्रीमिंग प्लेयर). आपके पास कुछ विकल्प हैं – प्योर / सोनोस या बोस में से कोई एक चुनें और वाई-फाई रेडियो सुनने का आनंद लें. इनमें न केवल इंटरनेट रेडियो सुन सकते हैं, बल्कि अन्यत्र कहीं भी संग्रहित किए गए आपके संगीत भंडार से होम नेटवर्क के जरिए अपना मनपसंद संगीत भी सुन सकते हैं. आजकल मरांज/यामाहा/ओंकयो/डेनन के कुछ उन्नत एवी रिसीवरों में भी इस तरह की सुविधा (एयरप्ले या डीएलएनए से चिह्नित) मिलने लगी है.

नोटपैड++ के नवीनतम संस्करण में आप हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा लगा सकते हैं, परंतु जो सुविधा इसमें मिलती है व हंस्पैल के पुराने संस्करण के साथ मिलती है जिसमें बहुत ही कम शब्द संख्या (केवल पंद्रह हजार) शामिल है जिससे वर्तनी जांच का सही सही काम नहीं हो पाता है.

इसके लिए श्रीदेवी कुमार जी ने एक नए संशोधित affix फ़ाइल और वृहद शब्दकोश के साथ एक नया संस्करण बनाया है जो प्रयोग में अधिक उत्तम है. मैंने वृहद शब्दकोश में परिवर्तन कर मेरे पास उपलब्ध शब्दकोश (कोई पौने दो लाख शब्द) को मिला कर उसमें कुछ सुधार किया है, जिसका उपयोग आप थोड़े से प्रयास से अपने नौटपैड ++ (या ओपन ऑफ़िस / लिब्रे ऑफ़िस में भी यह विधि अपना कर) में कर सकते हैं.

यदि आपके नोटपैड++ में हिंदी वर्तनी जांच सुविधा पहले से इंस्टाल नहीं है तो इसे प्लगइन > DSpellCheck > Change Current Language > Download More Languages विकल्प से हिंदी वर्तनी जाँच फ़ाइल डाउनलोड कर इंस्टाल कर सकते हैं.

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इसके बाद हिंदी शब्दकोश व नए हिंदी affix फ़ाइल को निम्न डाउनलोड लिंक – गूगल डिस्क से डाउनलोड करें :

https://drive.google.com/open?id=0B3QLKzA0EHYWdzBkN0NJQWhFYTA&authuser=0

 

फिर नोटपैड++ के प्लगइन इंस्टाल फ़ोल्डर (या ऐप्पडेटा फ़ोल्डर) में जाएं. यह कुछ इस तरह हो सकता है (नोटपैड ++ के नवीनतम संस्करण में)

:\Program Files\Notepad++\plugins\Config\Hunspell

या फिर -

:\Users\YOUR USER NAME\AppData\Roaming\Notepad++\plugins\config\Hunspell

 

वहाँ मौजूद hi_IN.aff तथा hi_IN.dic फ़ाइलों को ऊपर दिए गए डाउनलोड लिंक (यह ज़िप फ़ाइल है जिसे आपको पहले अनज़िप करना होगा) से डाउनलोड की गई नई फ़ाइलों से बदलना होगा.

आपका काम हो गया. नीचे स्क्रीनशॉट देखें. नोटपैड ++, नवीन हिंदी वर्तनी जाँच की सुविधा से संपन्न!

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यदि आपने भूतकाल में कभी भी, भूले से भी, अटारी और निंटेंडो गेम खेला हो, तो अपने उन दिनों के सुनहरी यादों को न केवल ताज़ा करने के लिए, बल्कि गेम में दो-दो हाथ करने के लिए मौका अब आपके पास उपलब्ध है, बिना किसी प्रयास के और सब कुछ निःशुल्क.

 

अपने फायरफाक्स (अभी इसके लिए ऑप्टीमाइज़्ड है, हालांकि अन्य ब्राउज़रों में भी खेला जा सकता है) ब्राउजर में इस कड़ी पर जाएं -

https://archive.org/details/internetarcade

आपको सैकड़ों आर्केड गेम के आइकन दिखेंगे. कुछ इस तरह :

 

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अपने पसंदीदा आर्केड गेम के आइकन पर क्लिक करें. एक नया विंडो खुलेगा जिसमें दाएं कोने पर गेम का एक स्क्रीनशॉट दिखेगा और नीचे Run का लिंक दिखेगा, जैसे कि नीचे दिए गए चित्र में स्पष्ट है.

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Run लिंक को क्लिक करें. एक नए विंडो में गेम लोड होता दिखेगा -

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दो पल इंतजार करें, और वाह! – ये रहा आपका बैगमेन आर्केड गेम – अब इंटरनेट आर्केड गेम के रूप में!

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मजे लें, और पुराने दिनों में लौट आएं. कुछ नहीं तो, नई पीढ़ी के लोगों को अपने जमाने के गेम दिखाएं!

अटारी गेम लाइब्रेरी भी यहाँ है - https://archive.org/details/atari_2600_library

दर्जन भर से अधिक, ओपन-सोर्स, यूनिकोड हिंदी देवनागरी वेब फ़ॉन्ट गूगल ने जारी किए हैं. इन्हें आप अपनी वेबसाइटों में आसानी से लगा सकते हैं.

ब्लॉगर जैसी सेवा में इसे अंतर्निर्मित आने में थोड़ा समय लग सकता है, परंतु आप ब्लॉग टैम्प्लेट सेटिंग में फ़ॉन्ट शैली या सीएसएस में मामूली परिवर्तन कर इसका उपयोग धड़ल्ले से कर सकते हैं.

 

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अधिक जानकारी के लिेए यहाँ http://www.google.com/fonts#ChoosePlace:select/Script:devanagari  देखें.

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न्यायालयों (आजकल कुछ अति सक्रिय)  और सरकारों (यदि कहीं कोई है,) ने दुपहिया सवार महिलाओं के लिए हेल्मेट को अनिवार्य कर दिया है. अब तक महिलाएं सड़कों पर मरें, गिरें, चोट खाएं, अपना हाथ-पैर तुड़वाएं, इससे सरकार को कोई सरोकार नहीं था, परंतु अचानक महिलाओं की सुरक्षा के प्रति सरकार का सरकारी प्रेम जागृत हो गया है. समाज में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं, यह दीगर बात है, मगर उन्हें सड़क पर, दुपहिया वाहन में बैठते वक्त सुरक्षित तो होना ही चाहिए. और, हेल्मेट उन्हें किस तरह सुरक्षित रखेगा, जैसा कि इससे पहले वाली लाइन में कहा गया है, भले ही यह दीगर बात हो, परंतु इस अनिवार्यता का दूरगामी प्रभाव हर घर, प्रांत और देश की इकॉनामी में होगा. पॉजीटिव होगा या निगेटिव, इसका ऑकलन तो भविष्य करेगा परंतु आज देश, प्रांत, समाज और व्यक्ति को इससे जूझना होगा.

आइए, देखें कि होगा क्या?

अचानक ही बाजारों में, मॉल में, और आपके मोहल्ले के नुक्कड़ में किराना की दुकानों में हर जगह हेल्मेट ही हेल्मेट नजर आने लगेंगे. वो भी बोरिंग काले और धूसर रंग के नहीं, बल्कि रंग बिरंगी, हजारों लाखों डिजाइनों में. इतने कि दुकानों में जगह नहीं होगी, मॉल हेल्मेटों से अटे पड़े रहेंगे. अभी तक होता यह था आप जहाँ भी जाते थे, पाते थे कि बाजारों में हर तरफ महिलाओं के परिधानों की दुकानें ही ज्यादा नजर आती थीं, अब हेल्मेट की दुकानें भी नजर आने लगेंगी. होगा यह कि नुक्कड़ का किरानी भी दाल-चावल के साथ चार दर्जन हेल्मेट भी बेचने के लिए रखेगा. परंतु – सभी लेडीज़ टाइप.

 

आपको अपने घर में एक अदद आलमारी अलग से रखनी होगी. जिसमें हर साड़ी और हर सलवार सूट के रंग से मैच करता हेल्मेट भरा होगा. हर महीने दो जोड़ी हेल्मेट खरीदना अनिवार्य होगा. या तो कोई छः माह पहले खरीदा गया हरे रंग का हेल्मेट आउट ऑफ फैशन हो गया होगा तो उसका रिप्लेसमेंट, नया फ़ैशनेबुल हेल्मेट लेना होगा या फिर बाजार में उस रंग का नए फ़ैशन का हेल्मेट आया होगा जिसे लेना आवश्यक होगा.

हेल्मेट का राज्य और देश की इकॉनामी में अच्छा खासा योगदान होगा. कई बड़े उद्योग खुलेंगे, तो कुटीर उद्योगों की चांदी हो जाएगी. स्थानीय डिजाइनरों से लेकर पेरिस के डिजाइनरों की हेल्मेट श्रृंखलाएं सुपर मॉल्स में मिलेंगीं. लक्मे फ़ैशन वीक में हेल्मेट एक अदद जरूरी आइटम होगा और रोहित बल जैसे फ़ैशन डिजाइनर के डिजाइन किए गए हेल्मेट प्रीमियम दामों में मिलेंगे, और उन्हें बाई इन्विटेशन ही खऱीदा जा सकेगा. ऐसे कस्टमाइज़्ड हेल्मेटों को पहन कर सड़क पर निकलने का अपना अलग ही मजा होगा. कहना नहीं होगा कि हेल्मेट के रूप-रंग-कीमत-डिजाइन-डिजाइनरों आदि पर स्त्री समूहों से लेकर मीडिया में बातचीत, बहस आदि की धुंआधार शुरूआत तो होगी ही, कुछ डेडिकेटेड चैनल्स भी आएंगीं और प्रकाशन संस्थाएं भी हेल्मेट टुडे जैसी सफल पत्रिकाएं प्रकाशित करने लगेंगी.

 

मामला स्त्रियों के हेल्मेटों के अनगिनत रूप-रंग की तरह अनगिनत खिंच सकता है. पर, आपने कभी गौर किया है कि पुरुषों के लिए हेल्मेट कैसे होने चाहिएं?

यदि पुरुषों के हेल्मेट में इलेक्ट्रॉनिक गजेट्स एम्बेड कर दिए जाएं तो यह भी सफल हो सकता है और बिना किसी प्रयास और कोर्ट ऑर्डर के हर पुरुष हेल्मेट लगा सकता है. यही नहीं, वो दो-दो हेल्मेट लेकर घूम सकता है. पुरुषों के हेल्मेटों में जीपीएस सिस्टम, एमपी3 प्लेयर, ऑडियो वीडियो रेकॉर्मडिंग और वॉट्सएप्प तथा फ़ेसबुक चलाने की सुविधा डाल कर देखें तो जरा!

इस पोस्ट के समेत, रचनाकार.ऑर्ग पर पिछले चार दिनों में प्रकाशित की गई पोस्टें इस जेबी कंप्यूटर के जरिये की जा रही हैं. फॉन्ट परिवर्तन में थोड़ी सी समस्या आ रही है और मोबाइल ब्लॉग क्लाएंट की सीमित सुविधाओं के कारण आ रही समस्याओं तथा छोटे कीबोर्ड के कारण होने वाली असुविधाओं के अलावा और कोई तकनीकी समस्या नहीं है.

इस छोटे कीबोर्ड में छोटा टचपैड भी है जो पेज नेविगेशन को आसान बनाता है.

अतः आपके पास होता है स्मार्टफोन नहीं, बल्कि फोन करने की अतिरिक्त सुविधा सहित एक परिपूर्ण जेबी कंप्यूटर!

टेक्नोलॉजी की जय हो!

यह मेरा पहला कंप्यूटर प्रोग्राम था जिसे मैंने सीखा था. इसे सिखाने वाला बंदा दूसरे शहर से आता था, और तब, फ्लाइंग अवर की तरह उस शिक्षक के पास १०० से अधिक घंटे का कंप्यूटिंग अनुभव था.

एक बात और, इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहले साल इसके लिए १० लाख डॉलर विक्रय का लक्ष्य था, परंतु हासिल हुए थे ५४० लाख!

धन्यवाद और अलविदा लोटस १२३. मेरा पहला कंप्यूटर प्रोग्राम.

अनिल अग्रवाल ने गूगल हिंदी वाइस इनपुट – यानी बोलकर हिंदी टाइप करने का एक वेब इंटरफ़ेस बनाया है.

इसे आप क्रोम ब्राउज़र से चला कर देख सकते हैं.

लिंक यह है -

 http://www.hindidictation.com/Index1.html

मैंने कुछ बोलकर लिखने की कोशिश की तो परिणाम यह रहा -

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परिणाम जाहिर है, ठीक ठाक है. अपने आम बोलचाल की अंग्रेज़ी भाषा जैसे कि टाइप, एक्यूरेसी आदि को भी यह ठीक पहचान लेता है, परंतु धन्यवाद को धंयवाद तथा है को हे टाइप करता है. आप बताएं कि आपका अनुभव कैसा रहा है?

एंड्रायड उपकरणों में सीधे-सीधे कृतिदेव फ़ॉन्ट की फ़ाइलों को देखने व उनमें काम करने की सुविधा वर्तमान में नहीं है.

मगर, कुछ सीमित मात्रा में, कुछ जुगाड़ से यह आप कर सकते हैं.

 

अपने एंड्रायड स्मार्टफ़ोन या टैबलेट में आप पहले तो ओपेरा ब्राउज़र (ध्यान दें, ओपेरा मिनी नहीं) डाउनलोड कर इंस्टाल करें.

अब आप यहाँ जाकर कृतिदेव से यूनिकोड फ़ॉन्ट कन्वर्टर नामक एचटीएमएल फ़ाइल डाउनलोड कर लें.

यदि आपने पहले से ईएस फ़ाइल एक्सप्लोरर फ़ाइल मैनेजर नामक ऐप्प इंस्टाल नहीं किया है तो वह भी कर लें.

 

अब आप ईएस फ़ाइल एक्सप्लोरर फ़ाइल मैनेजर खोलें. उसमें उस डाउनलोड डिरेक्ट्री में जाएं जहाँ आपने कृतिदेव से यूनिकोड फ़ॉन्ट कन्वर्टर एचटीएमएल फ़ाइल को रखा है. उस फ़ाइल के ऊपर टच करें. ईएस फ़ाइल एक्सप्लोरर आपसे पूछेगा कि इसे किसके साथ खोलें (यदि आपने इसे पहले से डिफ़ॉल्ट सेट नहीं किया है तो,).  ओपेरा ब्राउज़र चुनें.

image

 

कृतिदेव से यूनिकोड कन्वर्टर का विंडो ओपेरा में खुलेगा. जिस खिड़की पर कृतिदेव का इनपुट करना है वहां  कॉपी पेस्ट से कृतिदेव का मसाला डालें और कन्वर्ट बटन क्लिक कर उसे यूनिकोड  में बदलें और उपयोग में लें.

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न केवल कृतिदेव, बल्कि गूगल तकनीकी हिंदी समूह की तमाम कन्वर्टर फ़ाइलों का उपयोग आप अपने एंड्रायड उपकरणों से इस तरह से कर सकते हैं.

यदि इस काम के लिए आपके पास इससे कोई बेहतर या सरल किस्म का जुगाड़ हो तो कृपया टिप्पणी बॉक्स में दर्ज कर हमें भी बताएँ.

 

How to see / work / on Krutidev 010 hindi font and convert krutidev and other hindi font files to unicode in Android smartphone and tablets?

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