September 2013

गूगल के 15 वर्ष पूरे होने पर खुद गूगल ने, सदा की तरह अपने लिए एक डूडल बनाया, परंतु वह उतना हिट नहीं हुआ जितना गूगल द्वारा अब तक के बनाए गए तमाम डूडल को मिला कर बनाया गया एक जिफ़ एनीमेशन.

डेनियल स्टकी ने पूरे दस घंटों की मेहनत से यह जिफ़ एनीमेशन बनाया है जिसमें गूगल के अब तक के जारी तमाम डूडल शामिल हैं. चूंकि यह बड़ा और विशाल - 15 एमबी फ़ाइल है, अतः आपके इंटरनेट कनेक्शन की गति पर निर्भर करते हुए, हो सकता है कि पूरा जिफ़ एनीमेशन देखने में कुछ समय लग जाए. मुझे तो इसे देखते पंद्रह मिनट हो चुके हैं, पर यह अभी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा मुस्‍कान

जो भी हो, गूगल के सारे डूडल एक ही जगह देखने में आनंद ही आएगा. और हाँ, आप ध्यान पूर्वक देखेंगे तो आपको भारत से संबंधित ढेरों डूडल भी दिखेंगे - जैसे कि रवींद्र नाथ टैगोर जयंती, मोहनदास करमचंद गांधी जयंती, आलम आरा की 80 वीं वर्षगांठ इत्यादि, इत्यादि.

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यह जि़फ एनीमेशन देखने के लिए यहाँ जाएं -

http://motherboard.vice.com/blog/every-google-doodle-in-one-gif 

वैसे, इन डूडल को सर्च कर आप अलग-2 यहाँ भी देख सकते हैं -

http://www.google.com/doodles/finder/2013/All%20doodles

ऑनलाइन अंग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोशों की भीड़ में एक और शब्दकोश?

इसमें नया क्या है?

तो, पहले तो इसके डेवलपरों का स्वकथन ही देख लें -

"We are working to provide the best online dictionary ever, covering all major languages...."

 

सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ ऑनलाइन शब्दकोश...

चलिए थोड़ी जांच परख करते हैं -

यह चित्र देखें जो season का हिंदी अर्थ बताने के लिए जेनरेट हुआ है -

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आप भी चाहें तो इस लिंक पर इसे देख सकते हैं -

http://glosbe.com/en/hi?q=season

हुम्म... दिख तो बड़ा अच्छा रहा है... नीचे और स्क्रॉल करेंगे तो शब्द के उपयोग के उदाहरण भी मिलेंगे. पब्लिक डोमेन में उपलब्ध ट्रांसलेशन मेमोरी से ली गई सामग्री (जैसे कि केडीई डेस्कटॉप वातावरण के लिए किए गए मेरे अंग्रेज़ी-हिंदी अनुवाद) भी यहाँ है, जो इसे समग्र बनाने में सहायक है, और एक हद तक डेवलपरों के दावे को सही ठहराता है.

आपका क्या अनुभव है?

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पिछले सेमिनार की भांति इस वर्ष भी हमने वर्धा में अपनी उपस्थिति आभासी दर्ज करवाई. अलबत्ता इस बार कुछ अलग तरीके से.

एक ऑडियो विजुअल प्रस्तुति तैयार कर भेजा गया, जिसे बताया गया कि सेमिनार के उद्घाटन सत्र में दिखाया गया तोलोगों को अच्छा खासा पसंद आया.

अब, जाहिर सी बात है कि इसमें कोई दो मत नहीं कि यदि किसी प्रस्तुति में यूनुस ख़ान की मख़मली, खनकदार, शानदार आवाज़ हो तो उस प्रस्तुति को हजार गुना प्रभावी तो होना ही था.

बहरहाल, आप ये प्रस्तुति यू-ट्यूब पर इस लिंक से देख-सुन व डाउनलोड कर सकते हैं -

http://www.youtube.com/embed/Uuq7WxHHbhI

यदि आपका ब्राउजर आधुनिक किस्म का है, और नीचे यू-ट्यूब प्लेयर दिख रहा है तो आप इस वीडियो प्रस्तुति को नीचे दिए गए प्लेयर में प्ले बटन दबाकर यहीं पर देख सकते हैं. हाँ, स्पीकर फुल वॉल्यूम में ऑन करना न भूलिएगा :). -

यदि प्रस्तुति के पाठ (टैक्स्ट) धुंधले नजर आ रहे हों तो वीडियो HD मोड में चलाएं.

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(फ़्यूल के जनक - राजेश रंजन जिन्होंने कंप्यूटरों के स्थानीयकरण के लिए हिंदी का स्टाइल गाइड भी लिखा है)

फ़्यूल (FUEL – फ्रिक्वेंटली यूज्ड एन्ट्रीज़ फ़ॉर लोकलाइज़ेशन) के बारे में मैं कोई पांच वर्ष पूर्व लिख चुका हूं - कि यह क्या है, इसकी अहमियत क्या है और सॉफ़्टवेयर प्रोग्रामों के स्थानीयकरण के लिए क्यों यह एक जरूरी औजार है.

हर्ष की बात यह है कि फ़्यूल परियोजना की शुरुआत राजेश रंजन ने सॉफ़्टवेयरों में प्रयोग में होने वाले हिंदी के शब्दों से सन 2008 में की और सन 2013 तक आते आते यह 40 से अधिक भाषाओं में स्थानीयकरण हेतु इस परियोजना को अपना लिया गया है और यह विस्तार जारी है.

शुरूआत में केवल डेस्कटॉप कंप्यूटिंग की चुनिंदा शब्दावली का मानकीकरण किया गया था, अब इसे विस्तार देकर मोबाइल कंप्यूटिंग तथा वेब कंप्यूटिंग के लिए भी जारी किया गया है. भविष्य में इसके और भी क्षेत्रों में विस्तार करने के प्रयास जारी हैं.

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पिछले दिनों 6-7 सितम्बर को कोर्टयार्ड बाय मैरियट, पुणे में सीडैक व रेडहैट के संयुक्त प्रायोजन में फ़्यूल की द्वि-दिवसीय संगोष्ठी संपन्न हुई जिसमें विषय-विशेषज्ञ वक्ता के रूप में मैं भी शामिल हुआ था.

संगोष्ठी के प्रमुख वक्ता सैम पित्रोदा अपरिहार्य कारणों से पहुंच नहीं सके तो उन्होंने शिकागो से इंटरनेट के जरिए अपनी लाइव प्रस्तुति दी तथा सवाल जवाब खंड में श्रोताओं के बेबाक प्रश्नों के ठोस जवाब दिए.

सैम पित्रोदा से पूछा गया कि सीडैक समेत तमाम विश्वविद्यालयों में सरकारी पैसे - जो कि जनता की जेब से टैक्स के रूप में लिया गया पैसा है - से तैयार किए गए प्रोग्राम और डेटा आम जनता के लिए निःशुल्क उपयोग हेतु क्यों नहीं उपलब्ध करवाए जाते. सैम पित्रोदा ने कहा कि उनके व्यक्तिगत राय में ऐसा होना ही चाहिए, और वे भरसक प्रयास करते हैं, मगर उन्होंने माना कि भारतीय बाबूगिरी और विविध राज्यों की सरकारों में जमी लालफीता शाही और अनिर्णय की क्षमता इन कामों में आड़े आती है. उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस बाबत वे अवश्य ही कुछ करेंगे.

मैंने अपनी प्रस्तुति में उदाहरण देकर यह बताने की कोशिश की कि विशाल परियोजनाओं में जब कई टीमें सॉफ़्टवेयर-अनुवादों में एक साथ लगी होती हैं तो उनमें एकरूपता बनाए रखने में - खासकर तकनीकी शब्दावली, विदेशी स्थान व व्यक्तियों के नामों में - बहुत समस्याएं आती हैं - और इन मामलों में ट्रांसलेशन मेमोरी भी आमतौर पर काम में नहीं आती. तो ऐसे में फ़्यूल का विस्तार बेहद उपयोगी हो सकता है.

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(बाएं - इंडलिनक्स के संयोजक जी. करुणाकर, बीच में - आलोक कुमार)

संगोष्ठी में सुखद रूप से हिंदी ब्लॉग के आदिपुरुष - जिन्होंने 9211 नाम का पहला हिंदी का ब्लॉग अप्रैल 2003 में बनाया, और आरंभिक दिनों में नेट पर हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए सक्रिय भूमिका निभाई - आलोक कुमार से खास, बहुत दिनों से लंबित और बहु-प्रतीक्षित, पहली मुलाकात हुई.

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(आलोक कुमार और मैं)

समस्याओं को उठाने व उनके निदान के उपाय ढूंढने में संगोष्ठी बेहद सफल रही जिसके लिए इस संगोष्ठी से जुड़े समस्त व्यक्ति व संगठनों को बधाई व शुभकामनाएं.

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पिछले महीने सेमसुंग ने अपने गैलेक्सी सीरीज के कुछ ख़ास फ़ोनों को  हिंदी समेत 9 भारतीय भाषाओं - बंगाली, मलयालम, गुजराती, कन्नड़, मराठी, पंजाबी, तमिल, तेलुगु में जारी किया – इसका अर्थ है कि फ़ोन का लगभग पूरा इंटरफ़ेस इन भाषाओं में दिखेगा तथा उपयोगकर्ता कुछ खास ऐप्प भी इन भाषाओं में डाउनलोड कर चला सकेंगे. यह सुविधा गैलेक्सी एस4, ग्रांड, टैब3 में उपलब्ध है तथा स्टार में जल्द ही उपलब्ध होगा. आश्चर्यजनक रूप से नोट2 श्रेणी के गैलेक्सी फ़ोनों में यह सुविधा नहीं दी गई है जो कि समझ से परे है. वैसे, हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड - इन 5 भाषाओं में रोबोसॉफ़्ट विवो नामक एण्ड्रायड फ़ोन दक्षिण भारत की एक कंपनी कोई साल भर पहले से बाजार में उतार चुकी है, परंतु यह ज्यादा प्रचलित हो नहीं पाई थी. इसी तरह विशटेल नामक कंपनी अपने एण्ड्रायड टैब हिंदी भाषा में ला चुकी है. सोनी के कुछ एण्ड्रॉयड फ़ोनों में हिंदी इंटरफ़ेस पिछले कुछ समय से पहले से ही उपलब्ध है.  देखना यह होगा कि भारतीय भाषाओं के यह पैक एण्ड्रायड फ़ोनों के दूसरे निर्माताओं को जारी होते हैं या नहीं - जिसकी संभावना थोड़ी कम ही है. तो यदि आपके पास इन मॉडल के अलावा अन्य एण्ड्रायड फ़ोन हैं, तो आपको निराशा हाथ लगेगी - नो हिंडी! 

इन भाषाओं में बदलने के लिए फ़ोन की सेटिंग में जाकर अपनी वांछित भाषा – जैसे कि हिंदी चुनना होगा और आपका फ़ोन संबंधित भाषा पैक डाउनलोड कर इसे लागू कर देगा.

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मराठी में सेमसुंग गैलेक्सी फ़ोन

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भाषा सेटिंग से चुनें भारतीय भाषाएं

इसके साथ ही हिंदी भाषा में हस्तलेखन पहचान के जरिए हिंदी में खोज करने की सुविधा भी टचस्क्रीन एण्ड्रायड उपकरणों में मिल चुकी है. चूंकि यह सुविधा गूगल की ओर से है, और ऑपरेटिंग सिस्टम स्तर पर है, अतः यह एण्ड्रायड के सभी ताज़ा संस्करण वाले फ़ोनों में उपलब्ध है. 

इसके लिए अपने एण्ड्रायड फ़ोन में क्रोम ब्राउज़र चालू करें, और नीचे की ओर दिए गए सेटिंग लिंक को टच करें, और क्रोम की सेटिंग में जाएं.

वहाँ हस्तलेखन के बाजू में दिए गए सक्षम करें बटन को चुनें. फिर वहीं पर नीचे दिए गए गूगल उत्पादों की भाषा में टैप कर सूची में से हिंदी चुनें और इस मेनू से बाहर निकलें.

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(क्रोम ब्राउज़र में हिंदी के लिए सेटिंग)

अब आप हिंदी हस्तलेखन में खोज करने के लिए तैयार हैं – अब आपको इंटरनेट पर खोज करने के लिए अक्षरों को टाइप करने की आवश्यकता नहीं है. यूआरएल में google.co.in टाइप करें और गूगल की साइट में जाएं. ब्राउज़र में निचले दाहिने ओर g के चिह्न को टच करें और हस्तलेखन सक्षम करें. अब आप यूआरएल टैक्स्ट बॉक्स में अपनी उँगली या स्टायलस से हिंदी में लिखें और आराम से खोज करें. हस्तलेखन थोड़ा साफ रहना चाहिए और यहाँ थोड़ी प्रैक्टिस की आवश्यकता होती है.

आमतौर पर छोटे छोटे शब्दों के हस्तलेखन को तो यह बढ़िया समझ लेता है – जैसे कि रवि. परंतु जैसे ही आप रतलामी जैसे बड़े और कठिन शब्द लिखने की कोशिश करते हैं तो मामला गड़बड़ाने लगता है. फिर भी है यह बहुत काम का और आने वाले समय में इस तकनीक में सुधार होना ही है. साथ ही कुछ सीमित मात्रा में हिंदी में बोले गए वाक्यांशों – जैसे कहानी को भी यह ठीक से पकड़ कर खोजता है. बोलकर खोजने के लिए हस्तलेखन बंद करना होता है और यूआरएल इनपुट क्षेत्र के दाहिने ओर दिए गए माइक्रोफ़ोन के चिह्न को टैप कर उसे चालू करना होता है. चालू करने के तुरंत बाद वह शब्द या वाक्यांश बोलना होता है जिसे यह स्वयं समझ कर इनपुट विंडो में डाल देता है. आपके पास मिलते जुलते वैकल्पिक शब्द भी उपलब्ध होते हैं, जिन्हें आप चुन सकते हैं. यहां पर भी, जाहिर है कि आपको अपनी आवाज को थोड़ा मॉड्यूलेट कर बोलना होगा ताकि यह आपके द्वारा बोले गए शब्द कहानी को कहानी ही समझे!

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हिंदी हस्तलेखन से खोज – टेक्नोलॉज़ी का एक और कमाल.

लगता है कि भाषाई कंप्यूटिंग मोबाइल फ़ोनों के जरिए आम जनता में घुसपैठ करने के लिए कमर कस कर तैयार खड़ी है. और जो काम पर्सनल कंप्यूटर नहीं कर पाए, वह ये मोबाइल कंप्यूटिंग उपकरण और फ़ोन शायद करें!

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यह तो बड़ा ही नायाब आइडिया निकाला है सरकार ने. अंदर की खबर से उड़ते उड़ते पता चला है कि सरकारी बाबुओं ने इसी सिलसिले में इसी किस्म के और भी कई नए नवेले, नायाब प्रस्ताव बनाए हैं. कुछ आपकी जानकारी के लिए पेश किए जा रहे हैं –

· रात में किसी भी तरह का भोजन किया जाना बंद हो सकता है – आखिर खाद्य सुरक्षा योजना के लिए खाद्य कहां से आएगा? और, आएगा भी तो उसके लिए पैसा कौन देगा?

· रात में बिजली-बत्ती जलाना बंद हो सकता है – कुछ वर्ष पूर्व मध्य प्रदेश में रात में दुकानें खुला रखने पर प्रतिबंध लग चुका है – क्योंकि रात में लोगों की बिजली बत्ती गुल रहेगी तो सरकार की बहुत सारी नाकामियों के अंधकार में दबे रहने की अच्छी संभावना है.

· रात में किसी भी तरह की यात्रा बंद की जा सकती है. इससे मल्टी-फ़ैक्टर फ़ायदे होंगे – सड़कों को रौशन नहीं करना होगा, यातायात व्यवस्था के लिए केवल दिन में ही ट्रैफ़िक पुलिस की आवश्यकता होगी इत्यादि. और, यदि रात में पेट्रोल-डीज़ल नहीं मिलेगा तो वैसे भी कौन बेवकूफ़ रात में यात्रा करेगा!

· रात में टीवी चैनलों व रेडियो का प्रसारण बंद हो सकता है. इसके पीछे खास वजह तो पता नहीं चला, परंतु जानकारों का कहना है कि एक पॉवरफुल नेता के कहने पर इसे अंजाम दिया जा रहा है क्योंकि चैनल वाले सरकार की नेगेटिव छवि दिखाते हैं वो भी रात के प्राइम टाइम में! और, वैसे भी जब रात में बिजली बत्ती नहीं रहेगी तो क्या स्टार प्लस और क्या तो कलर्स!

· इंटरनेट रात में बंद हो सकता है. इंटरनेट केवल ऑफ़िस टाइम में सुबह नौ से शाम पाँच बजे तक उपलब्ध रहेगा. दलील है कि भारत की पूरी आबादी सोशल मीडिया की दीवानी हुई जा रही है और दूसरे आवश्यक नैसर्गिक काम-धाम छोड़ इंटरनेट के जरिए वॉट्सएप्प और फ़ेसबुक पर चिपकी रह कर इंस्टाग्राम-एंग्रीबर्ड खेलते रहती है और सरकार विरोधी प्रोपेगंडा करती है जिसे दूर करना आवश्यक है. सोशल मीडिया से जागृत हुए अन्ना आंदोलन के बाद सरकार वैसे भी अब कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है.

· रात में रुपए में भुगतान और खरीदी बिक्री बंद हो सकता है – रुपए की गिरती कीमत से चिंतित सरकार ने यह फार्मूला निकाला है कि यदि रात में रुपए में लेन-देन बंद कर दिया जाए तो रूपए की गिरती कीमत पर अंकुश लगाया जा सकता है – कम से कम रात में तो रुपया नहीं ही गिरेगा.

(नोट - इस लेख को खास तौर पर रात में लिखा जा रहा है - क्या पता, आगे शायद रात में लेखन बंद हो जाए!)

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