टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

August 2013

संवाद 1

 

"साहब, एक धांसू स्कीम लाया हूँ"
"..."


"अपने पास जो पनडुब्बी है न, उसके रेनोवेशन, अपग्रेडेशन का एस्टीमेट बनाते हैं..."
"..."


"एस्टीमेट पनडुब्बी की कीमत से भी ज्यादा बनाते हैं, पर आप पास करवा कर वर्क आर्डर करवा देना"
"..."


"फिर हम उस पनडुब्बी को अपने पास दो-चार महीने के लिए रख लेंगे, कुछ ऊपरी रंग-रोगन कर देंगे.."
"..."


"और आपको वापस डिलीवर कर देंगे"
"..."


"आप ऊपरी वेरिफिकेशन कर बिल पास करवा देना..."
"..."


"जब बिल पास हो जाए, और डिटेल वेरिफिकेशन से पहले और वर्करों से कम्प्लेन आने से पहले पनडुब्बी का काम तमाम कर देंगे..."
"वाह! वाह!! क्या धांसू स्कीम लाए हो यार! अभी के अभी प्रपोजल लाओ!!! हम आज के आज सेंक्शन करवाते हैं.. समझो प्लान एक्जीक्यूट हो गया!!!!"

--

संवाद 2

"साहब, एक धांसू स्कीम लाया हूं..."

"..."

"जमीन का एक टुकड़ा है. भाव एकदम हीरा. जंगल का है - वही पर्यावरण. तो उसे हमारे साथी के एनजीओ को 1 रूपए में सोशल कॉज के लिए अलॉट करवा दें"

"..."

"डर्ट सेटल हो जाने के बाद इसकी यूटीलिटी कमर्शियल में बदलवा लेंगे.."

"वाह! वाह!!! क्या स्कीम लाए हो यार!! समझो हो गया!!!"

 

संवाद 3

"साहब, एक धांसू स्कीम लाया हूं..."

"..."

"कुछ खदानें हैं हमारे आदमियों को बांट देते हैं..."

"..."

"जब हो हल्ला मचेगा तब फ़ाइलों को ग़ायब करवा देंगे - न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी..."

"वाह! वाह!! क्या शानदार स्कीम लाए हो! समझो हो गया!!!"

 

--

 

ऐसे संवाद अंतहीन हैं. कितना लिखेंगे, कितना बताएंगे?

आपके पास अलग किस्म का संवाद है? अरे! तब तो हमें जरूर बताओ भाई! कमेंट बॉक्स किसलिए है?

यदा कदा कुछ ऐसी टिप्पणियाँ मिल जाती हैं और ईमेल आ जाते हैं कि लगता है दिन सफल हुआ. एक ऐसा ही ईमेल आज मिला तो लगा कि अपनी पीठ थोड़ी सी खुद ही ठोंक लेनी चाहिए मुस्‍कान, इसलिए कि ब्लॉग लिखने का यह सिलसिला जब शुरू किया था तो लक्ष्य कुछ स्पष्ट नहीं था और अपनी बेतुकी तुकबंदियों और अव्यंग्य किस्म के व्यंग्यों को छाप कर संतुष्ट हो रहे थे. इस बीच हिंदी की तकनीकी समस्याओं को झेलते और उनका निवारण करते उनके दस्तावेज़ीकरण का विचार आया तो ये सिलसिला चल निकला. बहरहाल, नीचे ये ईमेल बांचें. ईश्वर करे आप सभी के ब्लॉग ऐसे ही सफल हों!

हैलो सर,

मैं आपसे और आपके ब्लॉग से बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ हूं.

आज फिर आपके ब्लॉग ने ही मेरी प्राब्लम सॉल्व की.

दरअसल बात ये है कि मेरा एक एग्ज़ाम क्लियर हुआ है उसमें मुझे सेकण्ड राउंड में टाइपिंग करनी है जिसके लिए इंग्लिश ओर हिन्दी (यूनिकोड इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड) पर टाइप करना है. अब प्राब्लम ये आई की उबुन्टु पर इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड कैसे इनस्टॉल होगा. इसके लिए मैंने कहां कहां क्या-क्या नहीं सर्च किया। डाउनलोड किया। रन किया पर हुआ कुछ नहीं. उबुन्टु में हिन्दी (बोलनगरी, हिंदीडबल्यूएक्स) भी डाली पर इनस्क्रिप्ट नहीं मिला. इसके बाद इंडियन गवर्नमेंट की लॅंग्वेज प्रमोशन की साइट मिली http://ildc.in/Hindi/hdownloadhindi.html जिस पर से मैंने लिनक्स का वर्जन भी इनस्टॉल किया पर हुआ कुछ नहीं. मना तो किया इसे अनइंस्टाल कर दूं पर उबुन्टु बहुत अच्छा लगता है. आज रात बस ऐसे ही सर्च किया गूगल पर "हाउ टू इनस्टॉल इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड इन उबुन्टु" आपका ब्लॉग मिला और प्राब्लम सॉल्व. आपका ब्लॉग स्क्रीन शॉट्स के साथ बहुत सिंपल है कोई दिक्कत नहीं होती.

मैंने उबुन्टु का प्रयोग करना आपके ब्लॉग को पढ़कर ओर ख़ासकर आपके द्वारा दी गई उबुन्टु हिन्दी पीडीएफ बुक से शुरू किया. मैंने 2010-11 से आपका ब्लॉग पढ़ना स्टार्ट किया था. शायद मैं रोज़ तो आपका ब्लॉग नहीं पढ़ता हू पर मैं जब भी कोई प्राब्लम उबुन्टु से रिलेटेड गूगल पर सर्च करता हूं तो आपका ब्लॉग मेरे सामने किसी ना किसी तरह आ जाता है और मेरी प्राब्लम सॉल्व हो जाती है.

बात तो आपसे बहुत सारी करना चाहता हू पर .......पर आज इतना तो बताने से मैं रुक नहीं सका.

धन्यवाद,

कपिल वशिष्ट

उबुन्टु वर्जन (12.10)

अब अगर मैं अधिकार से हिंदी कवियों को ललकार रहा हूँ तो इसकी कोई वजह है.

वजह यह है कि अब हिंदी के कवि अपनी कविताओं में मात्रा गिनने का श्रमसाध्य काम कंप्यूटर के भरोसे छोड़ सकते हैं.

जी हाँ, हिंदी के कवियों! आपकी सुविधा के लिए गीत-गतिरूप नामक एक ऑनलाइन औजार अब आ गया है जो आपकी कविताओं में मात्रा को एक क्लिक पर गिन कर दे देगा. तो यदि आपकी कविता की दो पंक्तियों के बीच कुल मात्राओं में कुछ फर्क नजर आए, तो आप उनमें सुधार कर लें.

हाँ, यदि आप मात्रा-हीन, छंद-हीन, नियम-हीन कविता करने वाले कवि हैं, तो फिर यह आपके किसी काम का नहीं.

आप इस औजार को सीधे इस लिंक http://manaskriti.com/vis/hindi-poem-vis/  पर क्लिक कर उपयोग कर सकते हैं.

उदाहरण के लिए मेरी दो पंक्तियों की इस अर्थहीन तुकबंदी को देखें -

मेरा कोई खयाल नहीं है
तुझसे तो ये सवाल नहीं है

इसे उक्त ऑनलाइन औजार पर मात्रा गणना के लिए विंडो में कॉपी-पेस्ट किया गया और वहाँ दिए विजुअलाइज बटन को क्लिक किया गया तो आउटपुट यह प्राप्त हुआ -

image

वाह! मेरी तुकबंदी में दोनों पंक्तियों में 17-17 मात्राएं. यानी यह बढ़िया कविता है. यदि मात्राएं 16-16 हो जाती तो क्या ये बढ़िया चौपाई न हो जाती? और, यदि इन मात्राओं को बढ़ाकर मैं 24-24 कर लूं, तो बढ़िया दोहा नहीं बन जाएगा?

गीत-गतिरूप के बारे में और जानने-समझने के लिए इस लिंक http://www.kaavyaalaya.org/hindipoetrystructure2a.shtml  को देखें.

रिलायन्स ने जब ये धुंआधार प्रचार किया कि वो 2जी के रेट पर 3 जी दे रहा है तो सोचा कि चलो आजमा लिया जाए. परंतु अपने दशक पुराने इंटरनेटी अनुभव को याद रखते हुए, दूध का जला वाले हिसाब से, वहाँ दिए फ़ाइन प्रिंट पर निगाह दौ़ड़ाई तो फर्जीवाड़ा याने बेवकूफ़ बनाने का धंधा एकदम से समझ में आ गया.

पहले आप विज्ञापन देखें -

image

दिलकश - है ना? सिम खरीदने चलें? नहीं, नहीं, रुकिए, जरा फ़ाइन प्रिंट तो पढ़ लें -

ये है फ़ाइन प्रिंट -

image

फ़ाइन प्रिंट में लिखा है कि ये ऑफर डोंगल के लिए मान्य नहीं है, इस प्लान वाले सिम को डोंगल के साथ प्रयोग करने पर 3जी बैलेंस निरस्त कर दिया जाएगा.

तो भाई, ये बताएं कि ये ऑफर फिर किसके लिए है? मोबाइल में अचार डालने के लिए? है न ये बेवकूफ़ बनाने का आइडिया, सर जी?

3जी का सही उपयोग तो डोंगल या फिर नए मल्टीमीडिया युक्त स्मार्टफ़ोनों में (जिसमें टेथरिंग इत्यादि की सुविधा होती है, यानी वो डोंगल के रूप में भी काम करता है, तो क्या उसमें भी यह फ़ाइन प्रिंट लागू होगा?) उसी में हो सकती है. रिलायन्स का यह कदम तकनीकी रूप से बेवकूफ़ी भरा ही लगता है - डोंगल का 1जीबी 3जी डेटा शायद मोबाइल फ़ोनों के 1 जीबी 3जी डेटा से अलग होता हो!

यह तो हद ही हो गया. आज मुझे एक स्पैम ईमेल मिला जिसमें मेरा ही आईडी उपयोग में लिया गया था! यहाँ मेरा कोई ईमेल हैक नहीं हुआ, बल्कि मेरा प्रचलित आईडी जो मैं याहू, जीमेल इत्यादि में उपयोग करता हूं - raviratlami उसे चोरी कर लिया गया और किसी दूसरे ईमेल साइट में पंजीकृत कर उससे मुझे ही स्पैम ईमेल भेजा गया. स्क्रीनशॉट देखें-

image

ऐसे में आप कुछ नहीं कर सकते सिवाय अपना सिर धुनने के. ऑनलाइन ईमेल क्लाएंटों के स्पैम संदेशों को कड़ाई से फ़िल्टर करने के कारण ऐसे स्पैमर्स अब जेनुइन आईडी सकेल रहे हैं और उनसे ऐसे स्पैम संदेश भेज रहे हैं. और, यदि आपके मित्रों परिचितों को आपके इस तरह के आईडी से फिशिंग संदेश भेजे जाते हैं तो उनके इस जाल में फंसने के पूरे अवसर हैं. अतः ध्यान रखें और मित्रों-परिचितों के आईडी से प्राप्त ऐसे उलटे पुलटे संदेशों पर प्रतिक्रिया करने से पूर्व उनसे दूसरे संचार माध्यमों से तसदीक अवश्य कर लें.

कचरा ट्रक से बचाव का सिद्धांत आपको मालूम है? यदि नहीं तो फ़ौरन से पेश्तर इस लिंक http://ddmishra.blogspot.in/2013/08/blog-post_4.html  पर  जाएं, और इस सिद्धांत को सीखें, और अपनाएं.

भगवान आपका भला करेगा, जैसा कि उसने मेरा किया है! मुस्‍कान

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क्या आपको अपने कार्य का बाई-डिफ़ॉल्ट डेफ़िनिशन, परिभाषा, काम का दायरा याद है?* .

यदि नहीं तो अपडेट कर लें. यदि आपको याद न हों, और आपने परिभाषित कार्य से कुछ इतर किया तो दुर्गा शक्ति नागपाल की तरह परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें.

कुछ आम-प्रचलित पदनामों के कार्यों की डिफ़ॉल्ट परिभाषाएं दी जा रही है.

  • नेता : ........ (है कोई माई का लाल जो इनकी परिभाषा देकर अपने लिए आफत मोल ले ले?)
  • आईएएस अधिकारी : नेताओं के भ्रष्टाचार में सक्रिय भागीदारी/साझेदारी के लिए (नहीं तो हश्र दुर्गा शक्ति नागपाल के समान तय समझें!)
  • सिविल इंजीनियर - गड्ढेदार सड़क, क्रेक और लीक करते हुए भवन बनवाने के लिए
  • बिजली इंजीनियर - बिजली कटौती ठीक से हो रही है या नहीं, तथा उपभोक्ता ठीक से बिल भर रहे हैं या नहीं यह सुनिश्चित करने के लिए
  • डॉक्टर - एमआर द्वारा सुझाए गए महंगी दवाइयां और पैथॉलॉजी सेंटर द्वारा सुझाए गए अनावश्यक, महंगे जांच लिखने के लिए
  • बाबू - जब तक खर्चा पानी न मिल जाए, फ़ाइल में कुछ न कुछ खामी निकाल कर रोकने के लिए
  • वकील - हर केस में अगली तारीख लगवाने के लिए
  • दूधवाला - पानी में दूध मिलाकर बेचने के लिए
  • पुलिस - एफआईआर दर्ज नहीं करने व हर संभव केस में उगाही के लिए
  • ऑटो/टैक्सी ड्राइवर - अधिकतम सवारी के साथ रॉग साइड से कट मारते हुए न्यूनतम समय में अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए

 

बहुत से नाम छूट रहे हैं. आप भी आमंत्रित हैं अपना योगदान देने के लिए.

(*केवल भारत भूमि में लागू)

पाठकों के लिए एक पहेली - जरा देखें तो कि आपका आईक्यू कितना है. ऊपर शीर्षक में %$#^  का अर्थ क्या है?

image

(नोकिया ल्यूमिया 920 - यूएसबी चार्जिंग पोर्ट पिघल कर खराब हो गया. चार्जिंग केबल पिघल कर चिपक गया जिसे काट कर निकालने के चक्कर में किनारे का कवर भी डैमेज हो गया)

इस आलेख - या कहें कि आपबीती को तो मुझे बहुत पहले ही लिख देना चाहिए था, परंतु फिर आलस्य और काम तो चल रहा है जैसे एटीट्यूड के चलते मामला टलता रहा. अभी अमित अग्रवाल के नोकिया ल्यूमिया विंडोज़ स्मार्टफ़ोनों के बारे में लिखे इस आलेख को पढ़ कर वहां अपनी त्वरित टिप्पणी तो दर्ज की ही, यह आपबीती भी अपने आप निकल कर यहां छप गई.

वैसे, इसमें दो मत नहीं है कि नोकिया के फ़ोनों के हार्डवेयर गुणवत्ता में शानदार रहते आए हैं और कई मामलों में उनका मुकाबला नहीं है, इसीलिए कुछ वर्ष पहले तक कंपनी का मोबाइल फ़ोनों के बाजार में पूरे विश्व में कब्जा भी था. परंतु कुछ अदूरदर्शी नीति और निर्णयों तथा नोकिया सर्विस सेंटरों की लापरवाही के कारण कंपनी अब डूबती दिख रही है.

तो अब आते हैं मुद्दे की बात पर. मैंने नोकिया सीडीएमए 6275i  फ़ोन का उपयोग कई वर्षों तक किया है और इसमें किसी किस्म की कोई समस्या कभी भी नहीं आई. यहाँ तक कि इसकी बैटरी की कैपेसिटी भी लंबे उपयोग के बावजूद 80 प्रतिशत तक बनी रही. और, इसीलिये जब मोबाइल-कनेक्टिविटी की आवश्यकता हुई और स्मार्टफ़ोन खरीदने की बारी आई तो मैंने एंड्राइड के शानदार फ़ोनों को अनदेखा कर नोकिया ल्यूमिया 920 के जारी होने का इंतजार किया क्योंकि इसमें पूरा और बढ़िया हिंदी समर्थन भी मौजूद था.

परंतु इस फ़ोन को लेने के चार महीने बीतते न बीतते, इसमें एक बड़ी समस्या आ गई. एक दिन मैंने इस फ़ोन को सुबह-सुबह चार्जिंग के लिए आदतन लगा दिया. कोई दो घंटे के बाद जब एक कॉल आया तो मैंने इसे उठाया तो पाया कि चार्जिंग केबल जो कि फोन के मिनी यूएसबी पोर्ट से जुड़ा होता है और डेटा केबल का भी काम करता है, वह गर्म होकर उस मिनी यूएसबी पोर्ट पर पिघल कर चिपक गया है और पोर्ट भी पिघल गया है. गनीमत थी कि फ़ोन काम कर रहा था और उसमें कोई खराबी नहीं आई थी.

मैं तुरंत ही नोकिया सर्विस सेंटर भागा. चूंकि फ़ोन नया और वारंटी में था, इसीलिए उम्मीद थी कि इस समस्या का समाधान कर दिया जाएगा. वहां इसे देखते ही कह दिया गया कि ये तो मिस हैंडलिंग की वजह से हुए हार्डवेयर फेल का केस है और वारंटी में नहीं आएगा. मुझे बताया गया कि ओवर वोल्टेज/करेंट/स्पार्किंग के कारण ऐसा हुआ होगा. सुधारने का खर्च 10000 रुपए बताया गया. मैंने प्रतिवाद किया कि ये तो आइसोलेटेड किस्म का केस है जिस पर कंपनी को एनालिसिस करना चाहिए ताकि इस तरह के केस दोबारा न हों, और मुझे मोबाइल यूनिट तुरंत रीप्लेस करके देना चाहिए. मैंने यह भी प्रतिवाद किया कि 5 वोल्ट 1 एम्पीयर का रेगुलेटेड सप्लाई होता है, चार्जर में कोई खराबी नहीं हुई है, तो उसमें ओवर वोल्टेज जैसी समस्या कैसे आएगी. बहरहाल, सर्विस सेंटर के तकनीशियनों ने इसका फ़ोटो खींचा और कहा कि हम ऊपर इसकी फ़ोटो भेजकर बात करेंगे और सेट को मुंबई भेजेंगे, तो वहां जो निर्णय होगा, वही अंतिम होगा. और इसके लिए एक महीने का समय लगेगा. और वारंटी के तहत सेट के रीप्लेस/रिपेयर करने की कोई गारंटी नहीं थी.

जाहिर है, मैं कोई मूर्ख तो था नहीं, इसीलिए मैंने उन्हें अपना मोबाइल सौंपने से मना कर दिया.

चूंकि मोबाइल बढ़िया काम कर रहा था, और समस्या सिर्फ यूएसबी से चार्जिंग की थी क्योंकि यूएसबी चार्जिंग पोर्ट जल गया था, और क्योंकि डेटा ट्रांसफर के लिए ब्लूटूथ और वाईफ़ाई भी मौजूद है इसीलिए इस फ़ोन में मौजूद वैकल्पिक उपाय वायरलेस चार्जिंग अपनाया गया. अभी यह फ़ोन वायरलेस चार्जिंग के भरोसे जिंदा है.

रहा सवाल इसकी फ़ंक्शनलिटी का - तो महज एक बात से ही आपको पूरी पिक्चर क्लीयर हो जाएगी - रेखा के पास गैलेक्सी नोट 2 है जो कि प्रमुखतः उसके ड्राइंड आदि के डेमो के लिए अच्छा खासा काम आता है - तो इसमें मैं अपने लैन कंप्यूटर से जुड़कर फ़ाइल आदि भी हस्तांतरित/उन पर काम कर सकता हूँ, मगर विंडोज़ फ़ोन में तो यह अभी दूर की कौड़ी है. इसमें आप अपने मोबाइल में मौजूद फ़ाइलों को भी ठीक से नहीं देख सकते! स्मार्टफ़ोन के नाम पे पूरा डम्ब!

ईश्वर नोकिया [ल्यूमिया] को सद्बुद्धि दे!

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