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गूगल के 15 वर्ष - देखिए 1809 गूगल डूडल एक ही स्थान पर!

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गूगल के 15 वर्ष पूरे होने पर खुद गूगल ने, सदा की तरह अपने लिए एक डूडल बनाया, परंतु वह उतना हिट नहीं हुआ जितना गूगल द्वारा अब तक के बनाए गए तमाम डूडल को मिला कर बनाया गया एक जिफ़ एनीमेशन.डेनियल स्टकी ने पूरे दस घंटों की मेहनत से यह जिफ़ एनीमेशन बनाया है जिसमें गूगल के अब तक के जारी तमाम डूडल शामिल हैं. चूंकि यह बड़ा और विशाल - 15 एमबी फ़ाइल है, अतः आपके इंटरनेट कनेक्शन की गति पर निर्भर करते हुए, हो सकता है कि पूरा जिफ़ एनीमेशन देखने में कुछ समय लग जाए. मुझे तो इसे देखते पंद्रह मिनट हो चुके हैं, पर यह अभी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा जो भी हो, गूगल के सारे डूडल एक ही जगह देखने में आनंद ही आएगा. और हाँ, आप ध्यान पूर्वक देखेंगे तो आपको भारत से संबंधित ढेरों डूडल भी दिखेंगे - जैसे कि रवींद्र नाथ टैगोर जयंती, मोहनदास करमचंद गांधी जयंती, आलम आरा की 80 वीं वर्षगांठ इत्यादि, इत्यादि.यह जि़फ एनीमेशन देखने के लिए यहाँ जाएं -http://motherboard.vice.com/blog/every-google-doodle-in-one-gifवैसे, इन डूडल को सर्च कर आप अलग-2 यहाँ भी देख सकते हैं -http://www.google.com/doodles/finder/2013/All%20doodles

ग्लोसबी - एक नया, शानदार अंग्रेज़ी-हिंदी ऑनलाइन शब्दकोश

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ऑनलाइन अंग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोशों की भीड़ में एक और शब्दकोश?इसमें नया क्या है?तो, पहले तो इसके डेवलपरों का स्वकथन ही देख लें -"We are working to provide the best online dictionary ever, covering all major languages...."सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ ऑनलाइन शब्दकोश...चलिए थोड़ी जांच परख करते हैं -यह चित्र देखें जो season का हिंदी अर्थ बताने के लिए जेनरेट हुआ है -आप भी चाहें तो इस लिंक पर इसे देख सकते हैं -http://glosbe.com/en/hi?q=seasonहुम्म... दिख तो बड़ा अच्छा रहा है... नीचे और स्क्रॉल करेंगे तो शब्द के उपयोग के उदाहरण भी मिलेंगे. पब्लिक डोमेन में उपलब्ध ट्रांसलेशन मेमोरी से ली गई सामग्री (जैसे कि केडीई डेस्कटॉप वातावरण के लिए किए गए मेरे अंग्रेज़ी-हिंदी अनुवाद) भी यहाँ है, जो इसे समग्र बनाने में सहायक है, और एक हद तक डेवलपरों के दावे को सही ठहराता है.आपका क्या अनुभव है?--

मानुस का जाने अदरक का स्वाद!

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प्याज को रोने वालों, जरा अदरक चख के तो देखो!!

वर्धा ब्लॉग सेमिनार 2013 : फ़ेसबुक, ट्विटर और ब्लॉग की जंग में जीत किसकी?

पिछले सेमिनार की भांति इस वर्ष भी हमने वर्धा में अपनी उपस्थिति आभासी दर्ज करवाई. अलबत्ता इस बार कुछ अलग तरीके से.एक ऑडियो विजुअल प्रस्तुति तैयार कर भेजा गया, जिसे बताया गया कि सेमिनार के उद्घाटन सत्र में दिखाया गया तोलोगों को अच्छा खासा पसंद आया.अब, जाहिर सी बात है कि इसमें कोई दो मत नहीं कि यदि किसी प्रस्तुति में यूनुस ख़ान की मख़मली, खनकदार, शानदार आवाज़ हो तो उस प्रस्तुति को हजार गुना प्रभावी तो होना ही था.बहरहाल, आप ये प्रस्तुति यू-ट्यूब पर इस लिंक से देख-सुन व डाउनलोड कर सकते हैं -http://www.youtube.com/embed/Uuq7WxHHbhIयदि आपका ब्राउजर आधुनिक किस्म का है, और नीचे यू-ट्यूब प्लेयर दिख रहा है तो आप इस वीडियो प्रस्तुति को नीचे दिए गए प्लेयर में प्ले बटन दबाकर यहीं पर देख सकते हैं. हाँ, स्पीकर फुल वॉल्यूम में ऑन करना न भूलिएगा :). -यदि प्रस्तुति के पाठ (टैक्स्ट) धुंधले नजर आ रहे हों तो वीडियो HD मोड में चलाएं.

सॉफ़्टवेयर स्थानीयकरण में मानक लाने के लिए FUEL के बढ़ते कदम

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(फ़्यूल के जनक - राजेश रंजन जिन्होंने कंप्यूटरों के स्थानीयकरण के लिए हिंदी का स्टाइल गाइड भी लिखा है)फ़्यूल (FUEL – फ्रिक्वेंटली यूज्ड एन्ट्रीज़ फ़ॉर लोकलाइज़ेशन) के बारे में मैं कोई पांच वर्ष पूर्व लिख चुका हूं - कि यह क्या है, इसकी अहमियत क्या है और सॉफ़्टवेयर प्रोग्रामों के स्थानीयकरण के लिए क्यों यह एक जरूरी औजार है.हर्ष की बात यह है कि फ़्यूल परियोजना की शुरुआत राजेश रंजन ने सॉफ़्टवेयरों में प्रयोग में होने वाले हिंदी के शब्दों से सन 2008 में की और सन 2013 तक आते आते यह 40 से अधिक भाषाओं में स्थानीयकरण हेतु इस परियोजना को अपना लिया गया है और यह विस्तार जारी है.शुरूआत में केवल डेस्कटॉप कंप्यूटिंग की चुनिंदा शब्दावली का मानकीकरण किया गया था, अब इसे विस्तार देकर मोबाइल कंप्यूटिंग तथा वेब कंप्यूटिंग के लिए भी जारी किया गया है. भविष्य में इसके और भी क्षेत्रों में विस्तार करने के प्रयास जारी हैं.पिछले दिनों 6-7 सितम्बर को कोर्टयार्ड बाय मैरियट, पुणे में सीडैक व रेडहैट के संयुक्त प्रायोजन में फ़्यूल की द्वि-दिवसीय संगोष्ठी संपन्न हुई जिसमें विषय-विशेषज्ञ वक्ता के रूप में मैं भी शामिल ह…

शुक्र है, कि फ़ाइलें ग़ायब हैं!

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गड़बड़ी तो ख़ैर फ़ाइलों में ही है ना!

सेमसुंग स्मार्ट मोबाइल फ़ोन हिंदी समेत 9 भारतीय भाषाओं में तथा एण्ड्रायड युक्त टचस्क्रीन कंप्यूटिंग उपकरणों में हिंदी हस्तलेखन से व हिंदी बोल कर गूगल खोज की सुविधा उपलब्ध

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पिछले महीने सेमसुंग ने अपने गैलेक्सी सीरीज के कुछ ख़ास फ़ोनों को  हिंदी समेत 9 भारतीय भाषाओं - बंगाली, मलयालम, गुजराती, कन्नड़, मराठी, पंजाबी, तमिल, तेलुगु में जारी किया – इसका अर्थ है कि फ़ोन का लगभग पूरा इंटरफ़ेस इन भाषाओं में दिखेगा तथा उपयोगकर्ता कुछ खास ऐप्प भी इन भाषाओं में डाउनलोड कर चला सकेंगे. यह सुविधा गैलेक्सी एस4, ग्रांड, टैब3 में उपलब्ध है तथा स्टार में जल्द ही उपलब्ध होगा. आश्चर्यजनक रूप से नोट2 श्रेणी के गैलेक्सी फ़ोनों में यह सुविधा नहीं दी गई है जो कि समझ से परे है. वैसे, हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड - इन 5 भाषाओं में रोबोसॉफ़्ट विवो नामक एण्ड्रायड फ़ोन दक्षिण भारत की एक कंपनी कोई साल भर पहले से बाजार में उतार चुकी है, परंतु यह ज्यादा प्रचलित हो नहीं पाई थी. इसी तरह विशटेल नामक कंपनी अपने एण्ड्रायड टैब हिंदी भाषा में ला चुकी है. सोनी के कुछ एण्ड्रॉयड फ़ोनों में हिंदी इंटरफ़ेस पिछले कुछ समय से पहले से ही उपलब्ध है.  देखना यह होगा कि भारतीय भाषाओं के यह पैक एण्ड्रायड फ़ोनों के दूसरे निर्माताओं को जारी होते हैं या नहीं - जिसकी संभावना थोड़ी कम ही है. तो यदि आपके पा…

रात में और क्या क्या बंद हो सकते हैं?

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यह तो बड़ा ही नायाब आइडिया निकाला है सरकार ने. अंदर की खबर से उड़ते उड़ते पता चला है कि सरकारी बाबुओं ने इसी सिलसिले में इसी किस्म के और भी कई नए नवेले, नायाब प्रस्ताव बनाए हैं. कुछ आपकी जानकारी के लिए पेश किए जा रहे हैं – · रात में किसी भी तरह का भोजन किया जाना बंद हो सकता है – आखिर खाद्य सुरक्षा योजना के लिए खाद्य कहां से आएगा? और, आएगा भी तो उसके लिए पैसा कौन देगा? · रात में बिजली-बत्ती जलाना बंद हो सकता है – कुछ वर्ष पूर्व मध्य प्रदेश में रात में दुकानें खुला रखने पर प्रतिबंध लग चुका है – क्योंकि रात में लोगों की बिजली बत्ती गुल रहेगी तो सरकार की बहुत सारी नाकामियों के अंधकार में दबे रहने की अच्छी संभावना है. · रात में किसी भी तरह की यात्रा बंद की जा सकती है. इससे मल्टी-फ़ैक्टर फ़ायदे होंगे – सड़कों को रौशन नहीं करना होगा, यातायात व्यवस्था के लिए केवल दिन में ही ट्रैफ़िक पुलिस की आवश्यकता होगी इत्यादि. और, यदि रात में पेट्रोल-डीज़ल नहीं मिलेगा तो वैसे भी कौन बेवकूफ़ रात में यात्रा करेगा! · रात में टीवी चैनलों व रेडियो का प्रसारण बंद हो सकता है. इसके पीछे खास वजह तो पता नहीं चल…

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