रविवार, 7 जुलाई 2013

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6 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. बीच सड़क यात्रा में छोटी या बड़ी शंका आ जाना यातनासम है..

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  2. अच्छा अनुवाद पेश किया।

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  3. वाह। आनन्‍द ही आनन्‍द। निर्मल आनन्‍द।

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  4. अपने अनुभव,अपनी व्यथा.- कुछ पल ऐसे भी आ जाते हैं ज़िन्दगी में,जो यातनामय भी होते हैं,व झिझक वश किसी से शेयर भी नहीं कर पाते

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  5. अपने अनुभव,अपनी व्यथा.- कुछ पल ऐसे भी आ जाते हैं ज़िन्दगी में,जो यातनामय भी होते हैं,व झिझक वश किसी से शेयर भी नहीं कर पाते

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  6. दरअसल इनकी कस्टमर केयर सेवा में गधे बैठे होते हैं जि‍न्‍हें उनके ऊपर वाले गधों ने कुछ कुछ गधई नि‍र्देश दि‍ए हुए होते हैं . सबसे मज़े की बात ये कि‍ जैसे सचमुच के गधों के सींग नहीं होते, उसी तरह इन गधों के भी न तो नाम होते हैं और न ही टेलीफ़ोन नम्‍बर. ये गधे बबुआ कि‍स्‍म के गधे होते हैं जि‍न्‍हें पता नहीं होता कि‍ FAQ के अलावा भी एक अलग दुनि‍या होती है. मतलब ये कि‍ इनकी पूरी की पूरी दुनि‍या ही गदहामयी है . इनके मालि‍क गधे हैं, इनके नौकर गधे हैं, इनके कॉल-सेंटर/ कस्टमर केयर सेवा में गधे हैं और मेरे जैसे जो इनके ग्राहक हैं वो तो इन सबसे बड़े गधे हैं .

    मैं भी एअरटेल वालों को पि‍छले 12 साल में पता नही कि‍तनी बार इस तरह के काग़ज़ देता आया हूं और मुझे पूरा भरोसा है कि‍ आगे भी मुझे इसी तरह के काग़ज़ात देते रहने के अलौकि‍क सुख से ये बंचि‍त नहीं करेंगे. कभी कभी ख़्याल आता है कि‍ दुनि‍या भर में फैले तरह-तरह के ओम्‍बड्समेन्‍न की पगार जस्‍टीफ़ाई करने का मैं ज़रि‍या बनूं पर फि‍र मुस्‍करा कर टहल भर जाता हूं खुद से ये कह कर कि‍ -''चलो, छोड़ो यार, गोली मारो. ''

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