टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

फर्जी कौन?

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व्यंज़ल

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किसे कहें कौन फर्जी है

जिसे परखो वही फर्जी है

 

यह मैं किधर आ गया

इधर तो हवा भी फर्जी है

 

इलाज कैसे हो किसी का

हकीम नीम सब फर्जी है

 

बड़ा विरोधाभास है यहाँ

जो असल है वो फर्जी है

 

नून तेल गैस के दौर में

प्यार की बात फर्जी है

 

सभी तारीफें कर रहे तो

यकीनन फिर रवि फर्जी है

विषय:

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किसकी बातें माने हम अब, सबने ही फैलायी बातें।

दिग्गी जैसे फर्जी को अब भी लगे यह फर्जी.
समझाए कोई न कुछ समझे तो ये उसकी मर्जी.
क्या रविकर जी किस का कुछ कर लोगे ,
उस फर्जी को जब सब दिखे ही फर्जी

सुन्दर व्यंग रविकर जी बधाई

दिग्गी जैसे फर्जी को अब भी लगे यह फर्जी.
समझाए कोई न कुछ समझे तो ये उसकी मर्जी.
क्या रविकर जी किस का कुछ कर लोगे ,
उस फर्जी को जब सब दिखे ही फर्जी

सुन्दर व्यंग रविकर जी बधाई

बहुत सुन्दर कटाक्ष
इलाज कैसे हो किसी का

हकीम नीम सब फर्जी है

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