टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

July 2013

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आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियां आपने पढ़ी ही होंगी. इनमें से चुनिंदा 333 कहानियों का संकलन वाह जिंदगी वाह!  सुंदर जीवन के 333 प्रसंग के नाम से प्रभात प्रकाशन ने पॉकेटबुक आकार में प्रकाशित किया है. इन प्रेरणाप्रद कहानियों को पढ़ने के लिए अब आपको कंप्यूटिंग / मोबाइल उपकरणों की आवश्यकता नहीं है - बल्कि इन्हें पुस्तक में पढ़ सकते हैं, और अपने प्रियजनों को उपहार स्वरूप भेंट कर सकते हैं. पुस्तक की कीमत बेहद कम रखी गई है - 150 रुपए मात्र. पुस्तक सीधे प्रभात प्रकाशन से मंगाया जा सकता है. उम्मीद है कि कुछ दिनों में यह फ्लिपकार्ट और इन्फ़ीबीम जैसे जाल स्थलों पर भी अच्छे खासे डिस्काउंट में उपलब्ध हो जाए.

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व्यंज़ल

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किसे कहें कौन फर्जी है

जिसे परखो वही फर्जी है

 

यह मैं किधर आ गया

इधर तो हवा भी फर्जी है

 

इलाज कैसे हो किसी का

हकीम नीम सब फर्जी है

 

बड़ा विरोधाभास है यहाँ

जो असल है वो फर्जी है

 

नून तेल गैस के दौर में

प्यार की बात फर्जी है

 

सभी तारीफें कर रहे तो

यकीनन फिर रवि फर्जी है














दोपहर में धूप बड़े दिनों के बाद निकली थी तो मौसम थोड़ा सुहाना हो चला था। परंतु शाम होते होते, देखते ही देखते घनघोर काली घटा छा गई और वो इतना झूम कर बरसी कि लगा दुनिया का सारा पानी आज यहीं उंडेल देगी। बीच बीच में बिजली चमका कर देखती भी जा रही थी कि कहीं कोई कोना सूखा तो नहीं रह गया।
आज जैसी बारिश कभी देखी नहीं।
खुदा खैर करे, कल के अखबार रंगीन न हों।

इससे पहले कि आप इंडियन ब्लॉगर एवार्ड्स 2013 के पुरस्कारों को लेकर आप कोई विवाद पैदा करें, पहले अपने अपनों के ब्लॉगों का नॉमिनेशन तो कर लें. क्योंकि अंतिम तारीख 20 जुलाई 2013 निकट ही है.

हिंदी भाषाई ब्लॉगों के लिए कुछ चुनिंदा नॉमिनेशन आ चुके हैं -

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और, इसमें आप अपना स्वयं के ब्लॉग को भी नॉमिनेट कर सकते हैं.

इस ब्लॉग पुरस्कार में क्या खास बात है?

वैसे तो बहुत सी बातें खास हैं, उदाहरण के लिए, भारतीय ब्लॉगों के लिए समर्पित संस्था इंडीब्लॉगर.इन ने 50 से अधिक पुरस्कार श्रेणियां घोषित की हैं, जिनमें भाषाई पुरस्कार – हिंदी भाषा समेत भी शामिल हैं, जो इसे अब तक का सर्वाधिक व्यापक ब्लॉग पुरस्कार का सही हकदार बनाती हैं. साथ ही एक बात महत्वपूर्ण है - इसकी जूरी में प्रतिष्ठित व बड़े नाम शामिल हैं. जिसे यहाँ देखा जा सकता है. और पुरस्कार ऑनलाइन वोट इत्यादि से नहीं, जूरी के निर्णयों से होगा.

तो, देर किस बात की? अपना स्वयं का या अपना पसंदीदा ब्लॉग आज ही यहाँ नॉमिनेट करें.

हिन्दी ओसीआर के नए संस्करण में एक नई सुविधा जोड़ी गई है. अब आप ओसीआर आउटपुट को हिंदी के यूनिकोड फ़ॉन्ट के अतिरिक्त रोमन आईट्रांस तथा कृतिदेव फ़ॉन्ट में भी ले सकते हैं.

नया संस्करण ज्यादा तेज, सटीक और बेहतर है. मैंने अपने मोबाइल फ़ोन के कैमरे से खींचे गए हिंदी पाठ का ओसीआर इस प्रोग्राम से किया तो आमतौर पर इसमें भी 95% से अधिक शुद्धता मिली. ठीक ढंग से स्कैन किए गए पाठ में तो शुद्धता का प्रतिशत 100% तक पहुँच जाता है.

हिंदी ओसीआर प्रोग्राम का डेमो संस्करण यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं -

http://www.indsenz.com/int/index.php 

 

Hindi OCR for Krutidev Hindi font हिंदी ओसीआर

स्क्रीन शॉट - हिंदी ओसीआर

 

इसी संस्करण के साथ मराठी ओसीआर भी जारी किया गया है. हिंदी / मराठी ओसीआर की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें अंतर्निर्मित शब्द संग्रह है जिससे स्वचालित वर्तनी जाँच के उपरांत पाठ को सही किया जाकर आउटपुट दिया जाता है, जिससे शुद्धता अधिक मिलती है.

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इसी की तो मुझे तलाश थी.

एक जमाने से तलाश थी.

यदि मैं डेवलपर होता तो इस ऐप्प को अपने लिए कब का बना चुका होता. और शायद इसे बेच कर करोड़पति बन चुका होता. यह है ही इंस्टैंट हिट टाइप का प्रोग्राम.

फ़ेसबुक मित्रता के जमाने में जहाँ, हर कोई – जी हाँ, हर जाना अंजाना – एक दूसरे का मित्र बनता जा रहा है, एक दूसरे के मित्र मंडलियों में शामिल होता जा रहा है, तो ऐसे में लाजमी हो जाता है कि बहुत से विशेष किस्मों के मित्रों से बचा जाए, उनसे जरा दूरी बना कर रखी जाए. शत्रु से निकटता तो भले ही कुछ मामलों में चल जाए, मगर फ़ेसबुकिया किस्म के मित्रों से? भगवान बचाए! कभी भी कहीं भी टैग कर देंगे और कभी भी कहीं भी च्यूंटी काट देंगे!

बहरहाल, तो बात “हेल इज़ अदर पीपुल” नामक इस ऐप्प की हो रही थी. स्मार्टफ़ोन के लिए जारी किया गया यह ऐप्प आपको आपके मित्रों से बचाएगा. ऐसे मित्रों से, जिनसे आप बचना चाहते हैं. वो भी रीयल टाइम में. यह ऐप्प आपके स्मार्टफ़ोन में स्थापित होकर स्थान सेवा का उपयोग कर, जीपीएस ट्रैकिंग के जरिए यह बताएगा कि आपको अभी एमजी मार्ग के कैफ़े कॉफ़ी डे में नहीं जाना है, क्योंकि वहाँ आपका एक खांटी फ़ेसबुकिया मित्र बैठा हुआ है, और अगर आप वहाँ गए तो आपके दो घंटे बरबाद. यह ऐप्प आपको ऐसे वैकल्पिक रास्ता भी सुझाएगा जिससे आप अपने मित्र से आमना-सामना जैसी फ़जीहत से भी बच सकेंगे.

है न कमाल?

अरे हाँ, याद आया. इधर आपसे बहुत दिनों से मुलाकात का प्रसंग नहीं बन रहा है. कहीं आपने इस ऐप्प का उपयोग करना प्रारंभ तो नहीं कर दिया है?

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