टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

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पता नहीं कैसे होता है, पर जानने की इच्छा बड़ी है।

अभी तो केवल मध्यम वर्ग के पहुँच में आई है सोसल नेटवर्किंग तो टेरेरिज्म फैल रहा है. जब सभी जनता के हाथ में यह सुविधा आएगी तो बदलाव की बयार बहेगी. उसी बदलाव में जीव और जगत का कल्याण दिख रहा है. शासक और प्रकाशक साहबों!
चोरी, छिनारा हत्या और अत्याचार में, साथ साथ और समान हैं।
जब जनता के भले की बात आई, तो हिंदु और मुसलमान हैं।।

सारा दोष विपक्ष का ही है या जनता का.इन बेचारों का कोई कसूर नहीं.इनमें कोई दोष नहीं.मजे की बात यह है कि पुरे देश में जहाँ भी सत्तारूढ़ दल के खिलाफ कुछ कहा जाता है वह खुद को निर्दोष ही बताता है.

एस के यादव जी से मैं जबर इत्तेफाक रखता हूँ.

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