आसपास की कहानियाँ ||  छींटें और बौछारें ||  तकनीकी ||  विविध ||  व्यंग्य ||  हिन्दी || 2000+ तकनीकी और हास्य-व्यंग्य रचनाएँ -

आखिरकार, सरकार ने ग़रीबों के फल-अंडे खाने पर प्रतिबंध लगा ही दिया!

image

--

व्यंज़ल

--

तेरी किस्मत में हवा है धूल है ग़रीब

फिर तू फल अंडे क्यों खाता है ग़रीब

 

रेमंड का सूट और नाइकी के जूते पहन

तू तो और भी ज्यादा लगता है ग़रीब

 

अब बस हैं अफ़सर नेता और ठेकेदार

ये देश किसी सूरत तेरा नहीं है ग़रीब

 

सियासी खेल में तुझे पता नहीं चलेगा

कौन है अमीर और कौन तो है ग़रीब

 

निजी जेट में तू भले चलता हो रवि

मगर मुहब्बत में तू बेहद है ग़रीब

टिप्पणियाँ

  1. हे, भगवान, क्या होगा अब।

    उत्तर देंहटाएं
  2. फल और अंडे या कोई भी पोष्टिक आहार खाने का अधिकार इन कुछ चुनिन्दा मुस्टंडों को ही होना चाहिए.बाकि जनता तो कर चुकाने, इन नेताओं का पेट भरने के लिए ही है.कैसे निर्लज हैं यह लोग.क्रांति कर इन सब को अपदस्थ कर देना चाहिए.

    उत्तर देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
कृपया ध्यान दें - स्पैम (वायरस, ट्रोजन व रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त)टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहां पर प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

विशाल लाइब्रेरी में से पढ़ें >

अधिक दिखाएं

---------------

छींटे और बौछारें का आनंद अपने स्मार्टफ़ोन पर बेहतर तरीके से लें. गूगल प्ले स्टोर से छींटे और बौछारें एंड्रायड ऐप्प image इंस्टाल करें.

इंटरनेट पर हिंदी साहित्य का खजाना:

इंटरनेट की पहली यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित व लोकप्रिय ईपत्रिका में पढ़ें 10,000 से भी अधिक साहित्यिक रचनाएँ

हिन्दी कम्प्यूटिंग के लिए काम की ढेरों कड़ियाँ - यहाँ क्लिक करें!

.  Subscribe in a reader

इस ब्लॉग की नई पोस्टें अपने ईमेल में प्राप्त करने हेतु अपना ईमेल पता नीचे भरें:

FeedBurner द्वारा प्रेषित

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

***

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद करें