मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

फ़ेसबुक में चिपके रहने का एक और ठोस बहाना!

9 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. अब तो चिपकने का बहाना भी मिल गया।

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  2. बाजार में रहने का एक नया उपाय,ग्राहक जाना नहीं जाना चाहिए.प्रतियोगिता का समय है.

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  3. ई-पण्डित की साइट खुल क्यों नहीं रही है ?

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    1. कोई अस्थायी समस्या मालूम होती है, अब खुल रही है। शायद केबल कटने से छायी भारतव्यापी समस्या का ही कुछ असर पड़ा हो।

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    2. भाई, ईपण्डित का सही लिंक यहाँ लिख दीजिये। आपके प्रोफाइल पर मिलते जुलते नामों की लंबी लिस्ट दिखती है, जिसमें कई ब्लोगस क्लिक करने पर बिना किसी पोस्ट के पाता हूं और फिर हर लिंक को क्लिक करने का धैर्य न होने के कारण खाली हाथ लौट आता हूं।

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    3. यह बात सही है. शायद ईपण्डित ने अपने मिलते जुलते नामों से कोई अन्य बंदा ब्लॉग न बना ले इसलिए उन्हें पंजीकृत कर रखा है. बहरहाल, उनका ताजा लिंक शायद यह है -

      http://epandit.shrish.in/

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    4. आभार! वैसे किसी कारणवश वह पेज भी लोड नहीं हो पा रहा है।

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