टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

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लो , हम तो अभी तक नेतों को ही समझे बैठे थे

नेता तो खतरनाक से भी खतरनाक होते हैं :)

सुबह से छींक आ रही है, वेटनरी के पास जाते हैं।

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
--
रंगों के पर्व होली की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामंनाएँ!

खुदा ख़ैर करे,कम से कम एक वर्ग ने अपने समतुल्य को पहचान तो लिया.अब अपने को ज्यादा सोचने और तलाश करने की जरूरत नहीं.

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