October 2012

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लगता है कि माइक्रोसॉफ़्ट अपने नए ताजातरीन विंडोज 8 ऑपरेटिंग सिस्टम को हर किसी के गले में एक तरह से मुफ़्त में ठूंसना चाहता है ताकि चहुँ ओर विंडोज का ही साम्राज्य बना रहे. और इसीलिए विंडोज 8 के संस्करण बेहद सस्ते में बेचे जा रहे हैं.

यदि आपके कंप्यूटर विक्रेता ने आपके कंप्यूटर में पायरेटेड विंडोज एक्सपी, विंडोज 7 या ऐसा ही कोई अन्य संस्करण डाला हुआ है और आपको गाहे बगाहे इसके जेनुइन नहीं होने की चेतावनी मिलती रहती है और इसके अपग्रेड इत्यादि की सुविधा नहीं मिलती है तो आप सिर्फ 699 रुपए (14.99 डॉलर)  खर्च कर अपने विंडोज को जेनुइन बनाने की सुविधा पा सकते हैं. खासतौर पर भारतीय उपमहाद्वीप के उपयोगकर्ताओं के लिए तो यह सुविधा अभी भी उपलब्ध है.

दरअसल (जिसे डेलिबरेट लूप-होल - यानी जान बूझ कर छोड़ी गई कमी बताया जा रहा है) आपके वर्तमान विंडोज एक्सपी या विंडोज 7  इंस्टालेशन को सिर्फ 699 रुपए में विंडोज 8 से अपग्रेड करने के लिए एक विकल्प माइक्रोसॉफ़्ट ने दिया है , यदि आपने अपना कंप्यूटर 2 जून 2012 से 31 जनवरी 2013 के बीच खरीदा है. और इसकी पुष्टि के लिए आपसे ऑनलाइन सिर्फ कुछ मूलभूत जानकारियाँ और एक डिक्लेरेशन मांगा जाता है और कुछ नहीं.

चूंकि किसी तरह का ऑनलाइन वेरीफ़िकेशन नहीं किया जा रहा तो आप इस तरह इस सुविधा का लाभ आप अपने पुराने याने उक्त अवधि से पहले खरीदे गए  कंप्यूटरों व पायरेटेड इंस्टाल किेए गए विंडोज संस्करणों पर भी ले सकते हैं.  इस हिसाब से वैसे यह भी अवैध और पायरेसी जैसी ही चीज हुई, मगर इसमें माइक्रोसॉफ़्ट की मौन सहमति मिलती तो दिखती ही है.

इस बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएं -

http://techpp.com/2012/10/27/windows-8-promo-code/

निर्णय लेने से पहले उक्त लेख पर आई टिप्पणियों पर भी गौर कर लें.

 

डिस्क्लेमर - इस लेख का उद्देश्य महज पाठकों को ज्ञान देना है.  उत्पाद के किसी तरह की ब्रांडिंग, कैनवासिंग, पाइरेसी इत्यादि को बढ़ावा देना या अन्य किसी व्यापारिक नफा-नुकसान का उद्देश्य नहीं है.

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कल अखबार था रवि,

आज हो गया है रद्दी।

सर्टिफ़िकेट जारी हो गया है कि पैदा होने के लिए अपना एमपी पूरे देश में सबसे खराब, सबसे रद्दी जगह है. अब एमपी में पैदा तो हो लिए, जिस पर अपना कोई दखल नहीं था. सोचते हैं कि मामले को कम्पनसेट करने के लिहाज से अब कम से कम मरने के लिए तो सबसे शानदार जगह का जुगाड़ पहले से क्यों न कर लें!

जैसे 'नेता' शब्द एक गाली के रूप में प्रचलित हो गया है, उसी तरह से एमपी वाला के भी बदलने के खतरे हैं. किसी को बताओ कि भोपाल, एमपी से हूँ, तो वो दन्न से पूछेगा - क्या पैदा भी वहीं हुए थे? या नहीं भी पूछेगा तो मन में कहेगा ही - साला यहीं, इस सबसे खराब जगह में पैदा भी हुआ होगा!

इस खतरे से बचने के लिए संभावित माता-पिताओं को डिलीवरी के समय एमपी से अन्यत्र कहीं ले जाना चाहिए. भले ही एमपी का बार्डर शामगढ़ क्यों न हो. रद्दी जगह में पैदा होने के ताउम्र मलाल या लांछन से तो बच सकेंगे. माता पिताओं को यह संतुष्टि रहेगी कि उन्होंने अपने बच्चे के लिए इतना कुछ किया और बच्चे भी अपने माता-पिता का अहसान मानेंगे कि उन्होंने रद्दी जगह पैदा होने से बचाया.

पर, जो आलरेडी रद्दी एमपी में पैदा हो गए हैं, उन्हें अपना आखिरी सांस लेने के शानदार स्थान का जुगाड़ कर लेना चाहिए. नहीं तो लोग बोलेंगे - साला पैदा भी रद्दी जगह हुआ और मरा भी रद्दी जगह. कम से कम किसी शानदार जगह तो जाकर मरता!

एक बार एक शादीशुदा रचनाकार ने शाइरी ठोंकी - मेरी तो ख्वाहिश है कि मेरी आखिरी सांसें उनके आगोश में निकले. तो दन्न से किसी ने पूछा ये 'उनके' कौन हैं? किसी ने उनकी यह शाइरी उनकी पत्नी तक पहुँचा दी. नतीजतन उन रचनाकार महोदय को अपनी वर्तमान सांसें लेना भी भारी पड़ गईं.

इस खबर के मुताबिक अगर आप भारत में गोआ और मणिपुर के अलावा कहीं भी अन्यत्र पैदा हुए हैं, तो आप भी मेरी तरह ही रद्दी जगह में ही पैदा हुए हैं. रद्दी का मामला थोड़ा ऊपर नीचे है, उन्नीसा-बीसा है तो क्या हुआ, है तो रद्दी जगह ही. तो आप भी मेरी तरह मामले को कम्पनसेट करने के लिहाज से मरने के लिए शानदार जगह का जुगाड़ पहले से क्यों नहीं कर के रख लेते?

पैदा होने और मरने के शानदार और सबसे रद्दी जगहों की चर्चा तो हो गई. मगर ये मौजूं सवाल तो हाल फिलहाल जीने के लिए है बंधु. आप क्या समझते हैं, आप जहाँ, जिस शहर में अभी जैसे तैसे रह रहे हैं, ले दे के जी रहे हैं,  क्या वो वाकई शानदार है या है एकदम रद्दी?

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व्यंज़ल

आऊँ कैसे तुझसे मिलने

तेरा शहर बड़ा है रद्दी

 

शहरों में नई होड़ है

कि कौन ज्यादा है रद्दी

 

देखो साठ साल में तो

संसद भी हो गया है रद्दी

 

जीना आसाँ होगा भी

ये सवाल ही है रद्दी

 

कल अखबार था रवि

आज हो गया है रद्दी

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क्या कभी आपके मन में ये अफसोस हुआ है कि आप या आपके पति/पत्नी कलेक्टर क्यों न हुए?

क्या आप या आपके बच्चे कलेक्टर बनने का सपना पाले हुए हैं?

यदि हाँ, तो अफसोस भूल जाएं, और उस तुच्छ सपने को त्याग दें - अभी, तुरंत.

 

आधुनिक भारत के दो प्रमुख, टॉप प्रोफ़ेशनों - कलेक्टरी और नेतागिरी के बीच अंतरंग संबंध की है ये बानगी !

पेश है (आमतौर पर होने वाले?) बेहद मनोरंजक वार्तालाप के मुख्य अंश जो दैनिक भास्कर में 9 अक्तूबर 2012 को छपे:

"गुड्डू और भूरिया बोले- हमें समझा रहे हो कलेक्टर

 
रतलाम जिला सतर्कता समिति की बैठक में कलेक्टर के देरी से पहुंचने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया व सांसद प्रेमचंद गुड्डू नाराज हुए। उनके बीच कुछ इस तरह से वार्तालाप हुआ-

अंदर आते ही सांसद कांतिलाल भूरिया- कहां है कलेक्टर।

गुड्डू- ये कोई तरीका है। कलेक्टर अभी तक नहीं पहुंचे। मजाक बना रखा है।

(इसी बीच कलेक्टर अंदर पहुंचते हैं।)

गुड्डू- तुम हो कलेक्टर, तमीज है तेरे को?

कलेक्टर- बैठिए, बैठिए।

गुड्डू- क्या बैठिए, बैठिए

भूरिया- आप अफसर हैं और समिति के सेक्रेटरी हैं। अध्यक्ष आ गया है सांसद आ गए। आपके पते नहीं हैं। ऐसे प्रोटोकाल का पालन करते हो।

गुड्डू- प्रोटोकाल क्या होता है पता है तुझको। हम कब से बाहर खड़े हैं।

भूरिया- सर्किट हाउस पर हमने बुलाया, आपने मना कर दिया, मैं नहीं आ सकता।

कलेक्टर- प्लीज बैठिए।

गुड्डू और भूरिया दोनों- तुम्हारे कहने से बैठेंगे, हमें समझा रहे हो।

कलेक्टर- आप बैठिए।

गुड्डू- प्रोटोकॉल सीखो पहले। तुम्हारी कलेक्टरी भूला दूंगा।

कलेक्टर- मैं रिक्वेस्ट कर रहा हूं, तुम ऐसे बात करोगे तो ठीक नहीं होगा।

भूरिया और गुड्डू- क्या कर लोगे आप, गलती आपकी और हमें सिखा रहे हो।

भूरिया- कौन लिख रहा है प्रोसिडिंग, निंदा प्रस्ताव पास करिए हमारी ओर से। मीटिंग के सेके्रटरी हो आप। आपको तौर-तरीके याद नहीं।

गुड्डू- तुम्हारे जैसे कई कलेक्टर देखे हैं। व्यवहार ठीक करो, नहीं तो हम इलाज भी कर देंगे। एम. गीता को भी मैंने बैठा दिया है। आपके यहां के मालपानी को भी बाबू बनाकर बैठा दिया है।

भूरिया - मीटिंग का एजेंडा आज भिजवा रहे हो। तुम्हे प्रोटोकाल की जानकारी नहीं है।

गुड्डू (जिला पंचायत सीईओ से)- प्रोसिडिंग कौन लिख रहा है। हमारी ओर से कलेक्टर का निंदा प्रस्ताव लिखो। हमारे यहां 8-9 घंटे मीटिंग होती है। खाना-पीना सब होता है। यहां एजेंडा भी नहीं बना।  "

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टायलेट मंदिर दोऊ सामने जाऊं काके बताय

बलिहारी प्रेशर आपनो जल्दी टायलेट जाय

वैसे, समस्त ब्रह्मांड में किसी मंत्री का सर्वकालिक सत्यवचन इसे माना जाना चाहिए. या ये भी कहा जा सकता है कि भारत के किसी मंत्री ने पहली बार सत्यवचन कहे हैं.

सवाल ये है कि टायलेट (शौचालय से गरीबी की बू आती है, जबकि टायलेट से अमीरी की खुशबू, इसीलिए हम इसी शब्द का प्रयोग करेंगे) मंदिर से ज्यादा पवित्र क्यों है. आइए, जरा पड़ताल करें.

तो पहले ये देखें कि आप मंदिर क्यों जाते हैं? (मंदिर की जगह आप गिरिजाघर, मस्जिद, गुरुद्वारा कुछ भी प्रतिस्थापित करने को स्वतंत्र हैं)

  • · मंदिर में आप अपने पिछले कर्मों के पाप धोने जाते हैं.
  • · मंदिर आप शांति की तलाश में जाते हैं
  • · मंदिर आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर की पूजा प्रार्थना करने जाते हैं
  • · मंदिर आप मृत्युपरांत स्वर्ग प्राप्ति के लिए जाते हैं
  • · मंदिर आप अपने अगले जन्म में शानदार जीवन प्राप्ति के लिए जाते हैं

अब जरा देखें कि आप टायलेट क्यों जाते हैं.

  • · टायलेट में आप पिछले दिन का पाप धोने जाते हैं. चाहे वो मूली के पराँठे हों या केएफसी का बर्गर सब कुछ धुलता है, और आपके किए गए पाप (खानपान) के मुताबिक होता है. यहाँ भी आप वही दुआ करते हैं कि कल बहुत पाप हो गया था, अब आगे कोई पाप नहीं करेंगे, मगर टायलेट से बाहर आने के घंटे भर बाद भूल कर उन्हीं मॅकडोनल्ड्स और डोमिनोज़ के चक्कर लगाते नजर आते हैं.
  • · टायलेट के भीतर की शांति का कोई मुकाबला कर सकता है? आपकी खुद की सांसें भी यहाँ सुनाई पड़ती हैं. और कभी कभी तो शांति के (शांति से निपटने) के लिए अपनी खुद की सांसें भी रोकनी पड़ती हैं.
  • · टायलेट आप इस लिए जाते हैं कि आप फिर से, ज्यादा अच्छे से पेट पूजा कर सकें. पेट पूजा से बड़ी बड़ी पूजा इस दुनिया में है ही नहीं. सर्वशक्तिमान परमेश्वर की भी नहीं!
  • · टायलेट आप टायलेटोपरांत की स्वर्गिक अनुभूति के लिए जाते हैं. जरा एक नंबर और दो नंबर के प्रेशर को घंटे भर क्या, दस पंद्रह मिनट के लिए ही सही, रिलीज होने से रोक देखिए. और इसके बाद जब आपका प्रेशर रिलीज होगा तो उस स्वर्गिक अनुभूति की कल्पना इस या उस जीवन के स्वर्ग से शर्तिया कम ही होगी. और, लगता है कि मनुष्य ने स्वर्ग की कल्पना इसी अनुभूति को भोग कर ही की होगी.
  • · टायलेट आप इसलिए जाते हैं कि आपका आगे का आने वाला समय शानदार हो. यही नहीं, आपके आसपास का वातावरण भी दुर्गंध रहित, आवाज रहित, कष्टरहित हो.

अब तो आप मानेंगे न कि टायलेट मंदिर से ज्यादा पवित्र है.

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टेक्नोलॉज़ी दिनोंदिन कितना छलांग मार रही है यह इसका अप्रतिम उदाहरण है. क्रेडिट कार्ड साइज के एक संपूर्ण एचडी सक्षम कंप्यूटर – रास्पबेरी पाई की कीमत महज ढाई हजार रुपए है, और इसकी मांग इतनी अधिक है कि पिछले छः महीने से लगातार यह मांग पर उपलब्ध ही नहीं है (आरएस कंपोनेंट पर आज की स्थिति में, ऑर्डर करने के बाद दो महीने का इंतजार करना होगा). यानी इसे खरीदने के लिए आपको प्रीऑर्डर कर बुक करना होता है. आप पूछेंगे कि इसके पीछे कारण क्या है, तो उत्तर है – क्रेडिट कार्ड के आकार के, इस डर्ट-चीप – बेहद सस्ते संपूर्ण कंप्यूटर सिस्टम जिसमें आप एसडी कार्ड या यूएसबी ड्राइव से लिनक्स का विशिष्ट संस्करण चला सकते हैं, जिसके उपयोग की अनंत संभावनाएं हैं! और यही इसके अत्यधिक मांग की वजह है. महज ढाई हजार रुपए के रास्पबेरी पाई को अपने एचडी टीवी से जोड़ कर उसे न सिर्फ स्मार्ट टीवी बना सकते हैं बल्कि उसे पूरे कंप्यूटर में बदल सकते हैं. परंतु इसके लिए आपको थोड़ा सा टैकी होना पड़ेगा.

 

और अब इसी लाइन पर चलते हुए आम जनता के उपयोग के लिेए टीवी और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक कंपनी अकाई ने ६,९९० रुपये की कीमत का एक स्मार्ट बॉक्स जारी किया है. कुछ चीनी कंपनियों के इसी तरह के स्मार्ट बॉक्स तो और भी सस्ते हैं. यह उपकरण किसी भी टेलीविजन के साथ जोड़ा जा सकता है भले ही वह सीआरटी, प्लाज्मा, एलसीडी या एलईडी हो. और यह स्मार्ट बॉक्स आपके सामान्य टीवी को न सिर्फ स्मार्ट टीवी में बदलता है, बल्कि यह आपके टीवी को एक संपूर्ण गूगल एण्ड्रॉयड पीसी के रूप में भी बदल देता है जिसमें आप कंप्यूटिंग की तमाम चीजें कर सकते हैं और एण्ड्रॉयड मार्केट से हर किस्म के एप्लिकेशन डाउनलोड कर उन्हें चला सकते हैं.

 

स्मार्ट बॉक्स में इंटरनेट व फ़ाइल ट्रांसफर के लिए वाई-फाई सुविधा है, ईथरनेट पोर्ट है, 3 ​​जी डांगल से हाईस्पीड इंटरनेट चला सकते हैं तथा सिम कार्ड से 2 जी नेटवर्क का लाभ ले सकते हैं. इसमें 1.25 गीगा हर्त्ज प्रोसेसर है जिसमें एण्ड्रॉयड 2.3 जिंजरब्रेड संस्करण है. इसमें 4 जीबी आंतरिक भंडारण, माइक्रो एसडी कार्ड स्लॉट, एचडीएमआई पोर्ट, और 4xUSB 2.0 पोर्ट भी है. इस उपकरण से आप लगभग सभी लोकप्रिय ऑडियो और वीडियो को चला सकते हैं.

 

" जिस तरह से भारत में टेलीविजन देखा जाता है यह स्मार्ट बॉक्स उस आदत को पूरी तरह से बदलने की तैयारी में है. दर्शकों को अपने मौजूदा टीवी को बदले बिना पूर्ण एचडी में देखने की सुविधा प्रदान करता है. आप अपने मौजूदा टीवी को एक स्मार्ट टीवी में इस बॉक्स के जरिए अपग्रेड कर सकते हैं. यूँ तो बाजार में अब बहुत से स्मार्ट टीवी आ रहे हैं, मगर उनकी कीमत अधिक है. और ऊपर से यह विकल्प आपके मौजूदा टीवी को बहुत ही कम और वाजिब दाम में कंप्यूटर में बदल कर स्मार्ट-टीवी बना देता है.

 

वैसे, यदि आप एक्सबॉक्स 360 जैसे गेमिंग डिवाइस लेते हैं और उसे अपने टीवी से जोड़ते हैं तो भी उनमें कुछ सीमित तरीके से आपके टीवी को स्मार्ट बनाने के विकल्प मिलते हैं – जैसे कि वेब ब्राउज करना, ईमेल चेक करना इत्यादि. मगर यह स्मार्ट बॉक्स तो आपके टीवी को पूरी तरह से गूगल एण्ड्रॉयड युक्त पीसी में ही बदल देता है.

 

और ये हैं इस स्मार्ट बॉक्स की तकनीकी विशेषताएँ:

 

एण्ड्रॉयड 2.3 ऑपरेटिंग सिस्टम

1.25 गीगा हर्त्ज सीपीयू

अंतर्निर्मित वाई-फाई और ईथरनेट पोर्ट

3 जी डांगल और 2 जी नेटवर्क की सुविधा

वाई - फाई हॉटस्पॉट

पूर्ण एचडी वीडियो प्लेबैक के लिए एचडीएमआई पोर्ट

ए वी पोर्ट

4 x USB 2.0 पोर्ट

एसडी / एमएमसी कार्ड स्लॉट (32 जीबी तक का समर्थन करता है)

हेड फोन्स और माइक्रोफ़ोन जैक

वायरलेस माउस (वायरलेस कीबोर्ड अलग से जोड़ सकते हैं)

4GB आंतरिक मेमोरी

अंतर्निर्मित आईएम (गूगल टॉक, स्काइप, याहू) और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों (फ़ेसबुक, लिंक्डइन, ट्विटर)

का समर्थन

यूट्यूब वीडियो

कंप्यूटर गेम

कैलेंडर और कैलकुलेटर सुविधा

साथ ही -

गूगल प्लेस्टोर अनुप्रयोगों के माध्यम से असीमित उपयोग

 

अब, आपको अपने स्मार्ट बन चुके टीवी से आखिर और क्या चाहिए?

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(शामिख फराज)

पॉलीकोला एक नये तरीके का सर्च इंजन है. इसको अनोखा कहने के पीछे भी एक कारण है. इसकी विशेषता यह है कि इसमें जो भी जानकारी आप चाहते है, वो दो सर्च इंजन में एक साथ देखी जा सकती है.

इसका इतिहास भी थोड़ा अजीब है. इसकी शुरूआत 2005 में हुई. शुरू में इसका नाम "गाहूयूगल.कॉम" रखा गया लेकिन कुछ विवादों के कारण इसका नाम बदलना पड़ा फिर "पॉलीकोला" रखा गया. यह दूसरे सर्च इंजन के मुकाबले तीव्र है और कोई भी जानकारी खोजते समय 70% तक समय की बचत करता है. यह अमेरिकी और यूरोपी देशों में प्रसिद्ध है और बहुत प्रयोग किया जाता है.

इसमें कोई भी खोज एक साथ दो सर्च इंजन में तो देखी ही जा सकती है, इसके साथ ही इसमें सर्च इंजन चुनने की भी आज़ादी है. दरअसल यह पांच सर्च इंजन को सपोर्ट करता है. GOOGLE.com, YAHOO.com, AOL.com, ASK.com & BING.com. इन पांच सर्च इंजन में से आप जो भी चाहे दो सर्च इंजन चुन सकते है और इन दोनों सर्च इंजन में आपको वो लिंक दिखाई देंगे जो आप खोजना चाहते थे. इसमें सर्च बार के नीचे पांच सर्च इंजन की लिस्ट दिखाई देती है और इसी के बराबर दूसरी ओर भी पांच सर्च इंजन की लिस्ट दिखाई देती है. आपको एक तरफ पहला सर्च इंजन और दूसरी तरफ दूसरा सर्च इंजन चुनना है. फिर ऊपर दी गई सर्च बार में वो लिखे जो आप खोजना चाहते है. आपको आपके द्वारा खोजी गई जानकारी के लिंक एक ही वेब पेज पर दो सर्च इंजन में एक साथ दिखाई देंगे.

पॉलीकोला में आप कोई भी सर्च इंजन अपनी सुविधा के अनुसार बदल भी सकते हैं. मान लीजिए आप गूगल और याहू चुनकर कुछ सर्च कर रहे हैं. लेकिन आप खोजी गई जानकारी से संतुष्ट नहीं है तो अपने अनुसार सर्च इंजन बदल लीजिए. आप BING और AOL पर खोज कर सकते है या कोई भी दो जो आप चाहे चुन सकते हैं. इसमें जो जानकारी आप खोजना चाहते है उससे जुड़े कुछ शब्द लिख कर जब सर्च पर क्लिक करेंगे तब एक साथ एक ही वेब पेज पर आधे भाग में पहले सर्च इंजन पर आपके द्वारा खोजी गई जानकारी के लिंक दिखाई देंगे और वेब पेज के बाकी बचे आधे भाग में दूसरे सर्च इंजन पर लिंक दिखाई देंगे. एक साथ दोनों सर्च इंजन के लिंक खोले भी जा सकते हैं और अपनी सुविधा अनुसार चाहे तो एक सर्च इंजन के लिंक खोल ले और दूसरे को ऐसे ही रहने दे.

इसमें सर्च बार के ऊपर आपको web, images, video & shopping नाम के चार लिंक और भी दिखाई देंगे. यदि इनमें से किसी के बारे में जानकारी चाहिए तो पहले ये आप्शन चुने फिर सर्च करे. इसके साथ ही आप इसको अपना होम पेज भी बना सकते है और फैवरिट में भी जोड़ सकते हैं.

सर्च को तेज़ और आसान बनाने वाले कुछ टिप्स

सर्च से जुड़े की-वर्ड को जैसे ही सर्च इंजन में डाला जाता है, हजारों रिजल्ट मिलते हैं। अब समस्या शुरू होती है कि इनमें से कौन से पेज को खोलकर देखा जाए, जिसमें जरूरत के मुताबिक रिजल्ट मिल सके। एक-एक कर पेज खोले जाते है कभी जल्द ही रिजल्ट मिल जाते है और कभी कई घंटे लग जाते। गहन और सटीक सर्च के लिए सर्च इंजन की भाषा समझना जरूरी है। सर्च को तेज़ बनाने के लिए जानिए कुछ टिप्स-

की-वर्ड्स का चयन (Selection of Keywords)

सर्च के लिए आपको सही की-वर्ड का selection करना होता है। जैसे अगर holidays india से आपको मनचाहे रिजल्ट नहीं मिल रहे हैं तो india vacation को आजमा सकते हैं। अगर आपको शब्दों की सही स्पेलिंग नहीं आती तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। गूगल और याहू जैसे अधिकतर सर्च इंजन सही स्पेलिंग खुद-ब-खुद दिखा देते हैं।

कैटेगरी का चयन (Selection of Category)

कई बार सही कैटेगरी नहीं चुनने की वजह से भी सर्च में समस्या आ सकती है। जैसे अगर आप देश दुनिया की कोई खबर तलाश रहे हैं तो आप वेब की बजाय न्यूज कैटेगरी में जाइए। इसी तरह इमेज, ग्रुप, मैप आदि कैटेगरी को चुनकर आप सर्च को तीव्र कर सकते हैं।

प्रिपोजिशन हटाएं (Remove Prepositions)

सर्च इंजन इस तरह डिजायन किए गए हैं कि अधिकतर प्रिपोजिशन उनमे प्रयोग नहीं हैं जैसे and, of, for, in जैसे शब्दों को ये इंजन अपनी सर्च में शामिल नहीं करते। इसलिए बेहतर है कि की-वर्ड्स में इस तरह के शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाए।

फ्रेज को कैसे तलाशें (How to search phrase)

मान लीजिए आपको the long and winding road एक साथ तलाशना है तो इसके लिए इन्वर्टेड कॉमा की मदद लेनी चाहिए। अगर आप इसे इन्वर्टेड कॉमा के बीच "the long and winding road" लिखकर सर्च करेंगे तो आपको केवल वे ही रिजल्ट मिलेंगे जिसमें ये सभी शब्द एक साथ इसी क्रम में हैं।

यदि वर्ड नहीं चाहिए (If word is not required)

कई बार ऐसा होता है कि आपको clinton पर सामग्री चाहिए पर वो नहीं जिसमें lewinsky के बारे में जिक्र हो। इसके लिए आप एक शब्द के बाद स्पेस देकर माइनस चिन्ह का प्रयोग कर सकते हैं। जैसे अगर आप clinton -lewinsky तलाशेंगे तो आपको वे ही रिजल्ट मिलेंगे जिनमें केवल क्लिंटन है और लेविंस्की नहीं।

यूआरएल सर्च (URL)

यूआरएल या वेब एड्रेस में अगर आपको किसी शब्द की सर्च करनी है तो आप inurl की मदद ले सकते हैं। जैसे अगर आपको वे वेब एड्रेस चाहिए जिनमेंtime शब्द आता हो आप सर्च इंजन में inurl:time लिखकर एंटर करें। सभी रिजल्ट वे ही मिलेंगे जिनके वेब एड्रेस में कहीं न कहीं time शब्द आता है।

परिभाषा जानें (Know the defination)

अगर आपको किसी शब्द का अर्थ जानना है तो वेब डिक्शनरी पर जाने की जरूरत नहीं है। अगर आप define:time सर्च इंजन में डालेंगे तो आपको timeशब्द की परिभाषा मिल जाएगी। इसी तरह आप दूसरे शब्दों की परिभाषा और अर्थ जान सकते हैं।

आई एम फीलिंग लकी का मतलब

गूगल सर्च इंजन वक्त बचाने के लिए यह फेसिलिटी देता है जिसमें सर्च करते वक्त वही पेज खुलता है जो सबसे रेलेवेंट होता है। इसके लिए सर्च बॉक्स में की-वर्ड लिखकर सर्च की बजाय आई एम फीलिंग लकी बटन को प्रेस कीजिए। सबसे रेलेवेंट साइट के ही खुलने से वक्त की बचत होती है।

HAPPY SEARCHING !

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(इस अतिथि-आलेख (गेस्ट-पोस्ट) को विशेष रूप से शामिख फराज ने लिखा है)

शामिख फ़राज़

प्रवक्ता
कंप्यूटर साइंस विभाग
शफी डिग्री कॉलेज
बीसलपुर (पीलीभीत)

 

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पेश है डिजिटल सर्वाइवल गाइड.

31 अक्तूबर से पहले महानगरों को डिजिटल होना है, और अप्रैल आते आते भोपाल इंदौर सरीखे बड़े नगरों को भी. यानी यदि आप केबल से टीवी देखते हैं तो आपको सेटटॉप बॉक्स लगाना अनिवार्य होगा.

ठीक है, आपने सेटटॉप बॉक्स लगवाने का निर्णय ले लिया है. परंतु सवाल है कि कौन सा लगवाएं? क्या वो सड़ा वाला लगवा लें जो आपका केबल ऑपरेटर आपके माथे पर थोप कर चला जाएगा? भगवान के लिए, नहीं!

ये हैं कुछ चेक लिस्ट जिनके जरिए आप अपने मुताबिक सेटटॉप बॉक्स चुन सकते हैं या अपने केबल ऑपरेटर को बाध्य कर सकते हैं कि वो ऐसी सुविधाओं वाला सेटटॉप बॉक्स उपलब्ध करवाए.

सीआरटी टीवी के लिए

सीआरटी – यानी कैथोड रे ट्यूब वाले पुराने जमाने के भारी भरकम टीवी के लिए आप कोई सा भी सेट टॉप बॉक्स लगवा सकते हैं, क्योंकि इन पुराने जमाने के टीवी में आधुनिक टेक्नोलॉजी की टीवी – एचडी टीवी को दिखाने की सुविधा नहीं होती. यदि आपको आधुनिक टेक्नोलॉजी की एचडी टीवी और साथ ही 5.1 सराउंड सिस्टम युक्त होम थिएटर जैसा आनंद अपने टीवी से चाहिए तो जल्द ही ऐसे टीवी सेटों से छुटकारा पाएं और फ्लेट स्क्रीन, पतले एलसीडी, एलईडी या प्लाज़्मा टीवी खरीदें. प्लाज्मा को छोड़ कर बाकी एलसीडी और एलईडी टीवी आपके बिजली के बिलों को भी कम करते हैं क्योंकि ये कम बिजली खाते हैं. एलईडी टीवी सबसे कम बिजली की खपत करते हैं.

एलसीडी, एलईडी और प्लाज़्मा टीवी के लिए

· सबसे पहले तो यह देखें कि आपका टीवी सेट एचडी है या नहीं. यदि आपका टीवी सेट फुल एचडी 1080p है तब तो बहुत ही बढ़िया है. वैसे भी, यदि आपने अपना टीवी सेट हाल ही में एकाध वर्षों के भीतर खरीदा है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं. आजकल हर टीवी एचडी कैपैबल ही आ रहे हैं.

· यदि आपका टीवी एचडी कैपेबल है तो उसके इनपुट इंटरफेस चेक करें और देखें कि उसमें न्यूनतम 1 एचडीएमआई इनपुट की सुविधा है या नहीं.

· यदि आपके टीवी में एचडीएमआई इनपुट की सुविधा नहीं है तो या तो आपका टीवी एचडी नहीं है, या फिर एचडी रेडी नाम से आपको गलत टीवी थमा दिया गया है. और यदि ऐसा है तो फिर आप भी सामान्य कोई सा भी सेटटॉप बॉक्स लगवा सकते हैं. आपके लिए कोई ज्यादा विकल्प नहीं है.

· यदि आपके टीवी में एचडीएमआई इनपुट की सुविधा है तब तो बहुत अच्छा है. फिर आप अपने केबल ऑपरेटर से एचडी सेटटॉप बॉक्स के लिए कहें, और अपने पसंदीदा चैनलों के एचडी चैनलों की ग्राहकी लें. जैसे कि जी, सोनी, कलर व स्टार सभी सामान्य टीवी तो ब्रॉडकास्ट करते ही हैं साथ में एचडी में भी ब्रॉडकास्ट करते हैं. इसीलिए, सामान्य सेटटॉप बॉक्स से आप अपने एचडी टीवी का पूरा मजा नहीं ले पाएंगे क्योंकि एचडी सेटटॉप बॉक्स से ही एचडी चैनल देख सकते हैं. सिटी केबल जैसे बढ़िया केबल टीवी सेवा प्रदाताओं के द्वारा 30 एचडी चैनल दिखाए जाते हैं. एचडी चैनल देखना अलग ही अनुभव होता है. देखो तो जानो!

· एचडी सेटटॉप बॉक्स लगवाने के बाद सेटटॉप बॉक्स को टीवी से एचडीएमआई केबल से ही कनेक्ट करवाएं. नहीं तो आपका अज्ञानी केबल वाला वीडियो इनपुट से (या अन्य उपलब्ध इंटरफेस जैसे कि एसवीडियो या एवीआई से) आपके टीवी को जोड़ देगा और आपकी पिक्चर क्वालिटी वही घटिया आएगी और आप सिर धुनते रह जाएंगे कि ये एचडी है क्या बला – दिखता तो वैसे ही घटिया है. हो सकता है कि आपको एचडीएमआई केबल खरीदना पड़े. अच्छा केबल खरीदें जो कि हो सकता है 300-400 रुपए में मिले. घटिया केबल खरीदेंगे तो जल्द ही खराब होगा और क्वालिटी भी सही नहीं आएगी.

· यदि आपके पास हाईफाई म्यूजिक सिस्टम या होम थिएटर सिस्टम है तो सेटटॉप बक्से का डिजिटल साउंड आउटपुट जो शायद कोएक्सिएल केबल हो सकता है या फिर ऑप्टिकल केबल उससे जोड़ें. यदि सेटटॉप बॉक्स में अतिरिक्त एचडीएमआई आउटपुट है तो उसे भी एचडीएमआई केपेबल होमथिएटर सिस्टम के इनपुट में जोड़ सकते हैं. इससे आपका पूरा सिस्टम फुल एचडीएमआई हो जाएगा और आपको ऑडियो-वीडियो दोनों ही हाई-डेफ़िनिशन में मिलेंगे. आपकी टीवी का अंतर्निर्मित ऑडियो सिस्टम (बोस को छोड़ कर) बेहद घटिया किस्म का होता है चाहे वे कितनी ही दावेदारी कर लें. तो यदि आपको एचडी टीवी देखने का सही आनंद लेना है तो एचडीएमआई युक्त बढ़िया 5.1 एवी रिसीवर सिस्टम व कम्पेटिबल स्पीकर में इन्वेस्ट करना चाहिए. डेनन या मरांज ब्रांड का कोई भी सिस्टम चलेगा. हमारे जैसे मितव्ययी लोगों के लिए ओन्क्यो भी ठीक है.

· यदि आपका कार्य शेड्यूल थोड़ा अव्यवस्थित किस्म का है और आप आमतौर पर निर्धारित समय पर पसंदीदा सीरियल नहीं देख पाते हैं या आपको बीच बीच के लंबे-लंबे बारंबार दिखाए जाने वाले सड़ियल विज्ञापन जी भर कर बोर करते हैं तो आपको यकीनन ऐसा सेटटॉप बॉक्स लगवाना चाहिए जिसमें रेकॉर्डिंग की सुविधा हो. ताकि आप बाद में मनपसंद समय पर मनपसंद सीरियल रीप्ले कर देख सकें और विज्ञापनों को फास्टफारवर्ड कर हटा सकें. इसके लिए आपके सेटटॉप बक्से में न्यूनतम 500 जीबी की रेकॉर्डिंग स्पेस हो ताकि आप जी भर कर मनपसंद प्रोग्राम शेड्यूल कर रेकॉर्ड कर सकें. आपका केबल वाला इस तरह का सेटटॉप बॉक्स नहीं दे पा रहा हो तो आप डीटीएच में शिफ़्ट कर सकते हैं. सभी डीटीएच में अब रेकॉर्डिंग की सुविधा युक्त सेटटॉप बॉक्स आ रहे हैं. वीडियोकॉन में सर्वाधिक एचडी चैनल हैं, वहीं टाटास्काई में चैनल तो कम हैं, परंतु सीरियल रेकॉर्डिंग की अच्छी सुविधा है.

क्या अभी भी कुछ कन्फ़्यूजन बाकी है कि कौन सा सेटटॉप बॉक्स लेना चाहिए? जो भी हो, परंतु भगवान के लिए, अपने एलसीडी, एलईडी और प्लाज्मा टीवी में सामान्य चैनलों को जो कि 4:3 फ़ॉर्मेट में होते हैं, उन्हें 16:9 फ़ॉर्मेट में फैला कर तो न देखें! बिलकुल देहाती (टेक्नोलॉज़ी रूप में) कहलाते हैं आप!

यूँ तो ओपनऑफ़िस के नवीनतम संस्करण इंस्टाल कर आप सेटिंग में जाकर हिंदी स्पेल चेक एक्सटेंशन जोड़कर उसमें भी हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा जोड़ सकते हैं, मगर उसका वर्तनी जांच का शब्द संग्रह 85 हजार शब्दों का ही है और बहुत सारा उसमें गलत शब्द भी संग्रहित है. ऊपर से शब्दों का सुझाव देते समय उसमें डब्बे नजर आते हैं और समस्या बनी रहती है.

इस समस्या का समाधान उपलब्ध है. आपको  लिब्रे ऑफ़िस पोर्टेबल एडीशन का नवीनतम संस्करण डाउनलोड कर इंस्टाल करना होगा. परंतु इसमें भी हिंदी वर्तनी हेतु महज 15 हजार शब्द ही हैं. तो इसे हम वृहद, पौने दो लाख शब्दों के शब्द संग्रह से बदल कर बढ़िया हिंदी वर्तनी जांच युक्त ऑफ़िस सूट में बदल लेंगे. यह महज 2 आसान चरणों में संभव है.

1

लिब्रे ऑफिस पोर्टेबल एडीशन डाउनलोड कर किसी फ़ोल्डर में इंस्टाल करें. पोर्टेबल एडीशन की खासियत यह है कि आप इसे पेन ड्राइव में कॉपी कर या किसी भी अन्य डिरेक्ट्री या फ़ोल्डर में कॉपी कर कहीं पर भी चला सकते हैं. बार बार इंस्टाल करने की जरूरत नहीं.

पोर्टेबल एडीशन यहाँ से डाउनलोड करें. लिब्रे ऑफ़िस आप विंडोज, मैक या लिनक्स किसी के लिए भी डाउनलोड कर सकते हैं. परंतु नीचे कड़ी विंडोज के लिए दी जा रही है -

http://www.libreoffice.org/download/?type=win-x86&lang=hi&version=3.6.1

यहाँ पर आपको इंस्टाल योग्य लिब्रे ऑफिस तथा पोर्टेबल एडीशन दोनों को डाउनलोड करने के विकल्प मिलेंगे. आप चाहें तो इंस्टाल वर्जन भी डाउनलोड कर सकते हैं.

पोर्टेबल एडीशन का डायरेक्ट डाउनलोड लिंक है -

http://download.documentfoundation.org/libreoffice/portable/3.6.1/LibreOfficePortable_3.6.1.1_MultilingualAll.paf.exe 

डाउनलोड के बाद इस फ़ाइल को चला कर किसी फ़ोल्डर में इंस्टाल करें. इंस्टालेशन सेटिंग डिफ़ॉल्ट (मल्टीलिंग्वल ही) रहने दें, और कोई परिवर्तन न करें.

अब आपको इसका  हिंदी वर्तनी जांच का शब्द संग्रह जो कि 15 हजार शब्दों वाला है उसे बदल कर पौने दो लाख शब्दों वाले शब्द संग्रह से बदलना है. इसके लिए नीचे दिए गए चरण अनुसार करें -

2

फ़ाइल hi_IN.dic इस कड़ी से डाउनलोड करें -

http://goo.gl/IMspZ

ऊपर की लिंक काम न करे तो नीचे दी गई कड़ी पर जाएं और वहाँ से hi_IN.dic फ़ाइल डाउनलोड करें-

https://skydrive.live.com/#cid=60EACE63E15A752A&id=60EACE63E15A752A%21113 

अब इस फ़ाइल को लिब्रे ऑफ़िस की फ़ाइल से बदलना है.

लिब्रे ऑफिस के पोर्टेबल एडीशन में यह फ़ाइल आपके चुने गए फ़ोल्डर में कुछ इस प्रकार होगा -

\LibreOfficePortable\App\libreoffice\share\extensions\dict-hi

फ़ोल्डर dict-hi के भीतर hi_IN.dic फ़ाइल है. इसे हटा दें और ऊपर लिंक से डाउनलोड किए इसी नाम की फ़ाइल वहाँ कॉपी कर दें.

अब आप लिब्रे ऑफिस का कोई भी एप्लिकेशन चलाएं - जैसे कि लिब्रे ऑफ़िस राइटर. और वहां हिंदी में ऑन - द - फ्लाई वर्तनी जांच का भरपूर लाभ लें.

यदि किसी शब्द की वर्तनी गलत दिखती है (लाल रंग से रेखांकित होती है) तो आप उस शब्द पर दायाँ क्लिक कर सही वर्तनी का विकल्प देख सकते हैं, और चुन सकते हैं या फिर अपने शब्द संग्रह में जोड़ सकते हैं.

आप इस लिब्रे ऑफ़िस का यूआई हिंदी में भी कर सकते हैं - सेटिंग में जाकर डिफ़ॉल्ट अंग्रेजी को हिंदी में बदल लें - जैसा कि इस स्क्रीन शॉट में दिखाया गया है -

और इस तरह यह आपके लिए एक संपूर्ण ऑफ़िस सूट है - खालिस हिंदी में. और हाँ. इसमें हिंदी / अंग्रेज़ी द्विभाषी स्पेल चेक की एक साथ सुविधा भी मिलती है.

लिब्रे ऑफ़िस आम उपयोग के लिए निःशुल्क जारी किया जाता है. इसका हिंदी स्पेल चेक शब्द संग्रह भी निःशुल्क उपयोग के लिए जारी किया गया है. शब्द संग्रह में योगदान कर्ताओं के नाम यहाँ देखें.

libre-office-hindi-with-hindi-spell-check

 

पौने दो लाख शब्दों को बढ़ाने व उन्हें शुद्ध करने के प्रयास जारी हैं ताकि आपको एक परिपूर्ण हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा मिले. शब्द संग्रह का परिपूर्ण, अधिक शुद्ध, संशोधित नया संस्करण शीघ्र ही जारी किया जाएगा. इसके लिए इन पृष्ठों को देखते रहें.

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