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आसपास की कहानियाँ ||  छींटें और बौछारें ||  तकनीकी ||  विविध ||  व्यंग्य ||  हिन्दी || 2000+ तकनीकी और हास्य-व्यंग्य रचनाएँ -

जीरो लॉस थिअरी का जेनरेलाइजेशन

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जीरो लॉस की थिअरी का जेनरेलाइजेशन अपने फायदे के लिए आप भी कर सकते हैं. ये देखिए कुछ नमूने: · फिब्बल : योर ऑनर, बेशक मेरे मुवक्किल ने चोरी किया है, मगर उसने उस चोरी के माल का कोई जायज नाजायज उपयोग निजी या सार्वजनिक उपयोग हेतु नहीं किया है. जब उसका उपयोग ही नहीं हुआ तो जीरो लॉस थ्योरी के मुताबिक उसका कोई अपराध ही नहीं हुआ. यानी जीरो क्राइम... (स्रोत - तरकश ) · फिब्बल : योर ऑनर, बेशक मेरे मुवक्किल ने ये हत्या की है. मगर योर ऑनर, ये संसार नश्वर है. जो आता है वो जाता है. हर किसी को किसी न किसी दिन मरना है. यमराज किसी को जल्द बुलाता है तो किसी को देर से. फिर इस नश्वर संसार में आत्मा तो अजर अमर अमिट है. तो ऐसे में जीरो लॉस थ्योरी के मुताबिक कोई अपराध ही नहीं बनता... · फिब्बल : योर ऑनर, मेरे मुवक्किल ने बेशक भ्रष्टाचार कर करोड़ों बनाये हैं, मगर उसने उन्हें सुरक्षित स्विस बैंक में रखा है. इस तरह से देश का पैसा विश्व के सबसे सुरक्षित बैंक में सुरक्षित है योर ऑनर! जीरो लॉस थ्योरी के मुताबिक यहाँ भी कोई अपराध नहीं बनता. यानी जीरो करप्शन... · फिब्बल : योर ऑनर, मेरे मुवक्किल ने घूसखोरी, कमीशन ब…

आपका प्रिय फायरफाक्स ब्राउज़र अब मैथिली भाषा में उपलब्ध

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यदि आप मैथिली भाषी हैं, तो आपके लिए यह हर्ष का समय है.

लोकप्रिय ब्राउज़र फायरफाक्स अब मैथिली भाषा में उपलब्ध हो गया है.

मैथिली भाषा में फायरफाक्स कुछ इस तरह दिखेगा -




(चित्रों को बड़े आकार में देखने के लिए उस पर क्लिक करें)


अधिक जानकारी के लिए मैथिल आर मिथिला ब्लॉग की यह पोस्ट देखें

अपने आप को रोक नहीं पा रहे? ठीक है, आपके लिए मैथिली फायरफाक्स की डायरेक्ट डाउनलोड कड़ी यह है. यहाँ पर सबसे नीचे जाएं और लोकलाइजेशन टेस्टिंग विभाग में मैथिली डाउनलोड देखें. वहाँ आपको विंडोज, मैक तथा लिनक्स तीनों के लिए डाउनलोड लिंक मिलेंगे.

फायरफाक्स भोजपुरी व हिंदी समेत कई अन्य भारतीय भाषाएं - तेलुगु, असमी, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयाली, मराठी, ओड़िया, पंजाबी व तमिल में पहले से ही उपलब्ध है.

इस उपलब्धि हेतु राजेश रंजन, संगीता कुमारी व पूरी मैथिली टीम को बधाई!
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क्या आप भी हिंदी से डरते हैं?

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हिंदी से अब सचमुच डर लगता है भाई! भले ही आप लाख कसम खा लें, मगर आप भी मेरी तरह हिंदी से डरते होंगे. हिंदी ने मुझे बहुत डराया है. शुरू से. और अब भी डरता हूं. जब मैं हिंदी मीडियम में हिंदी स्कूल में पढ़ता था तो अपनी ‘उस हिंदी मीडियम’ के कारण मुहल्ले के कॉन्वेंटी छात्रों से बेहद डरता था. उच्च शिक्षा की बारी आई तो वहाँ भी हिंदी ने बहुत डराया. मेरी हिंदी भाषा वहाँ थी ही नहीं. मुझे एक विदेशी – अंग्रेजी भाषा के माध्यम से पढ़ाई करनी पड़ी. तो मैं पढ़ता अंग्रेज़ी में था, और उसका तर्जुमा मन ही मन हिंदी में कर फिर उसे हिंदी में समझता था. परीक्षा में अंग्रेजी माध्यम में उत्तर लिखने होते थे तो उत्तर पहले सोचता हिंदी में था, फिर उसका तर्जुमा मन ही मन अंग्रेजी में करता था और लिखता था. यही हाल अंग़्रेजी में मौखिक परीक्षा के समय होता था. इस तरह मेरी हिंदी ने मुझे बहुत बहुत डराया. खैर, जैसे तैसे पढ़ाई पूरी की. नौकरी में आए. यहाँ भी तमाम सरकारी पत्राचार अंग्रेज़ी में. ऊपर से तुर्रा ये कि हर साल 14 सितम्बर को ये फरमान आए कि हिंदी में काम करो हिंदी में काम करो. उस दौरान ऐसे ही उत्साह में एक बार हमने अपने…

हिंदी ब्लॉगिंग : स्वरूप, व्याप्ति और संभावनाएं

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डॉ. मनीष कुमार मिश्रा के संपादन में 250 से अधिक पृष्ठों में हिंदी ब्लॉगिंग संबंधी पचासेक उम्दा आलेखों को समेटे यह किताब हिंदी ब्लॉगिंग के भूत, वर्तमान और कुछ-कुछ भविष्य के परिदृश्य पर अच्छा खासा प्रकाश डालता है.आलेखों में कहीं कहीं विषय और कथ्य का दोहराव हुआ है, मगर इससे इस उम्दा किताब के कलेवर पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता. किताब की बहुत सी सामग्री इंटरनेट पर यत्र-तत्र प्रकाशित हो चुकी है, मगर उन्हें तरतीब से और विषयानुरूप उम्दा तरीके से सजाकर परोसा गया है जिससे पाठकों को हिंदी ब्लॉगिंग के स्वरूप को समझने में मदद मिलती है.किताब में ब्लॉग के तकनीकी पक्ष को अनछुआ रखा गया है, जो शायद इस किताब के विषय-वस्तु के अनुरूप ही रहा होगा, मगर यदि एक दो अध्याय तकनीकी पक्ष को लेकर दिए जाते तो यह किताब अपने आप में हिंदी ब्लॉगिंग की एक परिपूर्ण किताब का दर्जा प्राप्त कर सकती थी.तकनीकी पक्ष के अलावा इसमें सबकुछ है - इतिहास से लेकर इसके आज के स्वरूप में विस्तार लेने तक और यहां तक कि इसके सामाजिक और राजनैतिक प्रभाव और सरकारी लगाम लगाने के प्रयासों - सभी की गहराई से चर्चा की गई है.यदि आप हिंदी ब्लॉगिंग विषय …

महंगाई से कौन साला दुःखी होता है?

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आज के जमाने में महंगाई से दुःखी तो सिर्फ और सिर्फ आपका सुबह का अख़बार होता है. वो भी कहीं दो कॉलम सेंटीमीटर के नामालूम से समाचार फ्लैश में. बाकी तो हर तरफ खुशी ही खुशी छलकती और झलकती नजर आती है. महंगाई से सबसे ज्यादा खुश नेता होता है. महंगाई के चलते उसके भी रेट जो बढ़ जाते हैं. ट्रांसफर-पोस्टिंग और ठेके के लिए पहले चालीस प्रतिशत मिलते थे. मिलते तो अब भी चालीस प्रतिशत हैं, मगर चहुँओर महंगाई के चलते मामला लाखों से आगे बढ़ कर करोड़ों में पहुँच जाता है. अब, नेताजी खुश नहीं होंगे तो और कौन होगा? महंगाई से अफसर भी बहुत खुश रहता है. उसे वैसे भी बाजार में घेला भर भी खर्च नहीं करना पड़ता. घर का सारा राशन, सब्जी-भाजी और दीगर सामान तो मातहतों के जिम्मे है. ऊपर से महंगाई बढ़ने से महंगाई-भत्ता भी हर छठे चौमासे बढ़ जाता है. फिर, मलाईदार पद में बढ़ी हुई महंगाई के मुताबिक महंगी चाँदी जो काटने को मिलती है. महंगाई से उत्पादक और व्यापारी भी खुश रहता है. इधर पेट्रोल प्रति लीटर पाँच रुपए महंगा होता है तो व्यापारी के उत्पाद में एमआरपी में सात रुपए का इजाफ़ा हो जाता है. वो अपना उत्पाद दो रुपए महंगा कर खुश ह…

ज्यादा बिजली जलाई तो उपभोक्ताओं को जेल!

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करे कोई, भरे कोई!(दृश्य एक - हाईकोर्ट जज के सामने)सरकारी वकील (जिरह करता हुआ) - योर ऑनर! ये आम आदमी है. इसका जुर्म है कि इसने अपने तय कोटे 10 यूनिट बिजली से 0.1 यूनिट अधिक यानी 10.1 यूनिट बिजली जला ली. इसके इस शर्मनाक कुकृत्य ने देश के नेशनल ग्रिड को ठप्प होने में बेहद अहम भूमिका निभाई जिसके कारण पूरा देश कई घंटों तक अंधेरे में डूबा रहा और अरबों रुपयों का नुकसान हुआ. सबूत के तौर पर इसका बिजली का बिल पेश है योर ऑनर. इस अभियुक्त के विरुद्ध तमाम आरोप स्वयंसिद्ध हैं योर ऑनर. इसने देश के नेशनल पॉवर ग्रिड को कई घंटों तक ठप्प रखने की भयंकर साजिश की है ताकि देश की इकॉनामी बर्बाद हो जाए. यह एक तरह से भारत पर आतंकी हमला है योर ऑनर. देशद्रोह है. इसी लिए अभियुक्त को उसके इस कृत्य के लिए कड़ी से कड़ी सजा दी जाए.(दृश्य दो - जिला जज के सामने)सरकारी वकील (जिरह करता हुआ) - योर ऑनर! ये आम आदमी है. इसका जुर्म है कि इसने अपने तय कोटे से 250 ग्राम अधिक शक्कर का उपयोग कर लिया. इसके इस शर्मनाक कु-कृत्य ने देश की इकॉनामी बर्बाद होने में अहम भूमिका निभाई क्योंकि इसके इस कृत्य की वजह से देश में शक्कर का टोटा प…

इस स्पैम ईमेल को तो स्त्रियाँ यकीनन बेहद पसंद करेंगी!

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या यह इस बात का सबूत है कि अब स्पैमरों को यह मालूम हो गया है कि भारतीय स्त्रियाँ भी अब इंटरनेट का प्रयोग धड़ल्ले से करने लगी हैं!और, शायद ऐसे स्पैम-ईमेल तो स्त्रियाँ स्वयं सब्सक्राइब करें. नहीं?अपने स्पैम फोल्डर में निगाह फेर रहा था कि कहीं कोई महत्वपूर्ण ईमेल स्पैम तो नहीं हो गया है तो ये दिखा - पीले रंग में चमकाया हुआ -यूरेका! जार्जेट साड़ी - सुंदर कलात्मक. दिमाग की बत्ती जली. ये अपनी अक्खा ऑनलाइन जिंदगी का साड़ी का पहला स्पैम मिला था मुझे. अब तक सड़ियल नाईजीरियाई / लाटरी और वायग्रा जैसे स्पैमों से ही अधिकतर सामना होता रहा था. फ़ौरन लिंक को क्लिक किया. भले ही स्पैम क्यों न हो - था तो यह साड़ी के लिए ही न. क्या पता कोई नई डिजाइन, रंग की साड़ी दिख जाए. देखने में क्या जाता है.आप भी देखें :कोई साड़ी जमी? बीच वाला तो बड़ा प्यारा कलर है. है न? तो, लिंक आपको भी फारवर्ड करूँ?

पता है इस बार 15 अगस्त को लाल किले पर भाषण कौन दे रहा है???

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आदम और हव्वाहँय?और, पता है, इस आदम और हव्वा कार्टून को किसने बनाया है?

अरविंद लैक्सिकन की मानक हिंदी वर्तनी

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अरविंद लैक्सिकन इंटरनैट पर शब्दोँ का महाभंडार है, और उस की वैबसाइट पर अनेक प्रकार की रोचक पाठ्य सामग्री भी मिलती है. उस पर उपलब्ध कोश से लाभ उठाने के लिए इस साइट पर आप को ढेरोँ हिंदी इंग्लिश पर्याय ज़रूर मिलेँगे. साथ ही आप किसी भी शब्द पर क्लिक कर के, उस शब्द के भिन्न अर्थ भी देख पाएँगे, हिंदी या इंग्लिश भाषाओँ मेँ लिखने के लिए, हिंदी या इंग्लिश भाषाएँ सीखने, उन की समृद्ध शब्द संपदा मेँ पैठने के लिए, उन के शिक्षण और प्रशिक्षण के लिए आप, आप के मित्र अरविंद लैक्सिकन के निश्शुल्क संस्करण को बेहद उपयोगी पाएँगे. यह दोनोँ भाषाओँ की शब्दावली का संसार मेँ विशालतम संकलन है. रजिस्टर करने के लिए अपना नाम रोमन लिपि के लोअरकेस अक्षरोँ मेँ दो शब्दोँ के बीच कोई ख़ाली जगह छोड़े बिना अपना नाम इस प्रकार  arvindkumar  लिखेँ.  रजिस्टर किए बना कोश का लाभ नहीँ उठाया जा सकेगा. http://arvindlexicon.com/lexiconअरविंद लैक्सिकन मेँ हिंदी वर्तनी को पूरी तरह मानक और प्रामाणिक रखने की कोशिश की गई है. आज हिंदी पढ़ने वाले ‘अं’ ‘अँ’, ‘हंस’ ‘हँस’ की ही तरह ‘क’ ‘क़’, ‘ख’ ‘ख़’ और ‘ज’ ‘ज़’ जैसी ध्वनियोँ का अंतर लगभग भू…

कांग्रेस का पीएम बन नहीं सकता और बीजेपी का मैं बनने नहीं दूंगा...

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बीजेपी का पीएम बनने के ख्वाब देखने का अधिकार तो सिर्फ मेरा और सिर्फ मेरा है!व्यंज़लदूसरे की थाली में ज्यादा मालकिसी सूरत मैं ये होने नहीं दूंगामेरे सामने किसी और का फंडाशर्तिया ये मैं चलने नहीं दूंगाइस हमाम में सिर्फ मेरी धुलेगीकिसी और को धोने नहीं दूंगामुल्क मेरी विरासत है इसलिएबाकियों को मैं हगने नहीं दूंगाजब व्यंज़लों की बात हो  रविकिसी और को जमने नहीं दूंगा--

ईमानदारों की सरकार

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ईमानदारों के प्रयास ने रंग लाया और अंततः भारतीय इतिहास में पहली ईमानदार सरकार भारी बहुमतों से चुन ली गई. जनता ने भ्रष्ट उम्मीदवारों, भ्रष्ट पार्टी के उम्मीदवारों की जमानतें जब्त करवा दीं. और इस तरह आखिरकार भारत की पहली ईमानदार सरकार ने शपथ ले ही लिया. अत्यंत प्रसन्नता की बात थी कि अब प्रधान मंत्री भी ईमानदार थे, वित्त मंत्री भी और  दूरसंचार मंत्री भी. यहाँ तक कि विपक्ष के नेता भी ईमानदार थे और लोकसभा अध्यक्ष भी. जब प्रत्येक संसद सदस्य ईमानदार होगा तो ये सब तो ईमानदार होंगे ही.देश भर में हफ़्ते भर तक जश्न चलता रहा. चहुँओर खूब जुलूस निकाले गए, फटाके फोड़े गए, आतिशबाजियाँ हुईं. ईमानदारी के गुण गाए गए. जीते हुए ईमानदार प्रत्याशियों ने घर घर घूम घूम कर तमाम वोटरों को धन्यवाद दिया जिन्होंने अपने ईमानदार मतों का उतनी ही ईमानदारी से प्रयोग कर उन्हें बड़ी ईमानदारी से जिताया था. भोंदूराम भी बड़ा ईमानदार था. दरअसल अब तक उसके पास बेईमानी करने का न तो कोई संसाधन था और न तरीका. वो एक दिहाड़ी मजदूर था. सुबह काम पर निकलता, शाम तक काम करता, अपनी रोजी कमाता और मजे में रहता. ऐसे में उसके पास ईमानदारी के…

माइक्रोसॉफ़्ट की नई ऑनलाइन ईमेल सेवा : आउटलुक.कॉम - क्या यह हम हिंदी वालों के लिए काम का है?

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माइक्रोसॉफ़्ट ने हॉटमेल को री-ब्रांड कर एक नया अवतार दिया है. आउटलुक.कॉम के नाम से. उद्योग के पंडित इसे जीमेल का तोड़ और बेहतर विकल्प के तौर पर पेश करने में जुटे हैं. मैंने भी इसकी थोड़ी जांच परख की. विस्तृत समीक्षा नीचे है -अगर आपके पास विंडोज लाइव खाता है या हॉटमेल का खाता है तो आपको आउटलुक.कॉम के लिए अलग से नया खाता बनाने की जरूरत नहीं है. आप आउटलुक.कॉम पर इन खातों से लॉगइन कर सकते हैं. वस्तुतः यदि आपका हॉटमेल खाता है तो आपसे पूछा जाता है कि आप नया आउटलुक.कॉम वाला इंटरफेस रखना चाहेंगे या पुराना हॉटमेल का इंटरफेस. अब चूंकि नया आउटलुक.कॉम का इंटरफेस साफ सुथरा है तो अधिकांश जनता इसे ही चुनेगी. और यह एक बड़ी वजह है कि आउटलुक.कॉम की प्रशंसा के गीत गाए जा रहे हैं.मैंने आउटलुक का थोड़ा सा प्रयोग करने की कोशिश की तो पाया कि ये तो हम हिंदी वालों के लिए तो बिलकुल बेकार है. और जीमेल के सामने तो अभी इसमें हिंदी संबंधी कोई भी सुविधा नहीं.हिंदी लिखने के लिए अंतर्निर्मित औजार नहीं - जीमेल में आपको ट्रांसलिट्रेशन के जरिए हिंदी लिखने की सुविधा मिलती है. आउटलुक में अभी यह सुविधा नहीं है, और शायद आगे…

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