July 2012

पहले पहली बात.

स्पीच टू टैक्स्ट प्रोग्राम के बारे में अकसर लोग मुझसे पूछते रहते हैं और इसी बात के मद्देनजर मैंने आरंभिक जानकारी युक्त एक पोस्ट श्रुतलेखन राजभाषा पर यहाँ लिखा था. और उस प्रोग्राम को स्वयं के उपयोग के लिए ऑनलाइन खरीदी से मंगवाया भी था, चूंकि एक-दो नहीं, बल्कि कई स्रोतों से यह जानकारी पुख्ता हुई थी कि सीडैक द्वारा जारी किया गया श्रुतलेखन राजभाषा नामक सॉफ़्टवेयर 90 प्रतिशत से अधिक शुद्धता के साथ आपके द्वारा माइक्रोफ़ोन में बोली गई वाणी को हिंदी यूनिकोड में टाइप करता है.

 

परंतु जब मेरे पास यह सॉफ़्टवेयर आया और मैंने इसके हेल्प फ़ाइल में दिए अनुसार सेटिंग कर प्रयोग किया तो पाया कि यह तो कुछ का कुछ आउटपुट देता है जिसे आप संपादन कर भी प्रयोग में नहीं ला सकते.

 

अपने इस अनुभव को मैंने अपनी टिप्पणी में दर्ज किया था क्योंकि पाठकों ने पूछा था कि यह वास्तव में काम का है भी या नहीं. और चूंकि यह मेरे काम में नहीं आ रहा था तो मैंने लिखा था - मेरे रुपए 6 हजार गए पानी में!

 

अब असल बात

जब आप इंटरनेट पर ब्लॉग और ट्विटर जैसे दमदार माध्यमों में अपनी बात कहते हैं, तो उसकी अनुगूंज दूर तक सुनाई देती है. जब श्रुतलेखन राजभाषा मेरे काम का नहीं प्रतीत हुआ और उलटे सीधे आउटपुट देने लगा था तो मैंने सोचा कि यह भी सीडैक के चित्रांकन जैसे ओसीआर सॉफ़्टवेयर की तरह है जो काम का नहीं है. और इसी बात को ध्यान में रख कर मैंने न तो सीडैक को कोई कम्प्लेन किया और न ही कोई तकनीकी सहायता मांगी, चूंकि सॉफ़्टवेयर में दिए अनुसार तमाम सेटिंग कर मैं इसका प्रयोग कर चुका था. और मुझे लगा कि सीडैक को कम्प्लेन करना या वहाँ से सहायता मांगना अर्थहीन ही होगा.

 

परंतु आज अचानक सुबह सीडैक पुणे से फोन आया. वहाँ सॉफ़्टवेयर आर्कीटेक्ट पर्सन पल्लवी जी ने मुझसे समस्या पूछी कि श्रुतलेखन राजभाषा में मुझे क्या समस्या आ रही है.

मुझे आश्चर्य मिश्रित प्रसन्नता हुई कि मैंने तो कोई कम्प्लेन सीडैक में दर्ज नहीं की थी, सिर्फ अपने ब्लॉग पर टिप्पणी की थी, और उसे लीना महेन्दले जी ने पुनर्प्रकाशित किया था.  जाहिर है, इंटरनेट पर घूमता हुआ यह शिकायत सीडैक तक पहुंच ही गया. और इस बात पर अधिक आश्चर्य हुआ कि इंटरनेट पर की गई शिकायत नुमा पोस्ट के आधार पर मुझे तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाई गई, और मेरी शिकायत दूर की गई!

 

पल्लवी जी का धन्यवाद.

श्रुतलेखन राजभाषा हिंदी टैक्स्ट टू स्पीच प्रोग्राम के ठीक ठीक  काम करने के लिए विंडोज 7 हेतु पल्लवी जी ने मुझे कुछ अतिरिक्त सेटिंग करने को कहा, जिसे अपनाने पर मेरा यह प्रोग्राम बढ़िया काम करने लगा. मैंने कुछ पाठ में तो स्वचालित टंकण में शुद्धता का प्रतिशत 95 से 98 प्रतिशत तक पाया. यह पूर्ण विराम और अन्य विराम चिह्नों को नहीं लगाता है, तथा एकाध शब्दों में हेराफेरी कर देता है, जिसे लगता है कि सही उच्चारण से दूर भी किया जा सकता है.

 

मैंने रचनाकार की इस पोस्ट की सामग्री को ब्रोशर में दिए गए पाठ को श्रुतलेखन राजभाषा में बोल कर ही स्वचालित टंकित किया है, और प्रति लाइन गलती की संख्या एक से भी कम रही!

 

और यह है पल्लवी जी द्वारा सुझाए गए अतिरिक्त सेटिंग - विंडोज 7 के लिए (विंडोज एक्सपी में थोड़ा अलग हो सकता है, पर इसे करना होगा) :

    • कंट्रोल पैनल में जाएं और हार्डवेयर एंड साउंड पर क्लिक करें
    • जो विंडो खुलेगा उसमें बोल्ड अक्षरों में लिखे साउंड पर क्लिक करें
    • अब जो विंडो प्रकट होगा उसमें रेकार्डिंग टैब पर क्लिक करें
    • डिफ़ॉल्ट माइक्रोफ़ोन डिवाइस को चुन कर नीचे दिए गए प्रॉपर्टीज बटन पर क्लिक करें
    • माइक्रोफ़ोन प्रॉपर्टीज विंडो खुलेगा जिसमें लेवल्स टैब पर क्लिक करें
    • अब जैसा कि नीचे चित्र में दिखाया गया है, माइक्रोफ़ोन और माइक्रोफ़ोन बूस्ट के स्लाइडर को पूरी तरह दाईं ओर खींच कर ले आएं और माइक्रोफ़ोन 100 पर और माइक्रोफ़ोन बूस्ट 30डीबी पर सेट करें और एप्लाई पर क्लिक करें. ओके पर क्लिक करें. श्रुतलेखन राजभाषा अब आपका डिक्टेशन लेने को तैयार है.

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सी-डैक का और पल्लवी जी का धन्यवाद. सी-डैक के ही श्री दीपक मोतीरमानी जी का भी धन्यवाद जिन्होंने भी आरंभिक सहायता मुहैया करवाई.

इस सॉफ़्टवेयर को मैं सभी को, जिन्हें इस तरह के सॉफ़्टवेयर की आवश्यकता है, खरीदने की सलाह दूंगा. परंतु वे इसका यूएसबी डांगल संस्करण ही खरीदें, इंटरनेट से एक्टिवेट होने वाला नहीं (क्योंकि उसमें सिर्फ 10 एक्टीवेशन की सीमा है).

 

और, अब मैंने अपनी टिप्पणी अद्यतन की है - यह प्रोग्राम तो है पूरा पैसा वसूल!

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वास्तु-शास्त्रियों के मुताबिक मैनिट – यानी मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉज़ी – संस्थान में एक फव्वारे को गलत दिशा में स्थापित किए जाने के कारण वहाँ नेगेटिव एनर्जी बह रही थी. और उस नेगेटिव एनर्जी को दूर भगाने के लिए उस खूबसूरत वाटर-फाउंटेन को ढहा दिया गया.

दरअसल, मेनिट समस्याओं से लंबे समय से ग्रस्त है. एक पूर्व मेनिट डायरेक्टर अपने कार्यकाल में घपलों घोटालों और अपने नजदीकियों को उपकृत करने और मनमानी नियुक्तियां देने में समस्या ग्रस्त रहे, तो वर्तमान में मेनिट के कुछ प्रोफ़ेसर तकनीकी कॉलेजों को स्वीकृति देने के मामले में घूस लेते रंगे हाथों पकड़े गए. कुछ छात्रों के साथ भी समस्याएं आती रही हैं. और यह सब नेगेटिव एनर्जी की वजह से होता रहा है.

फ़व्वारे को हटाने से शायद अब नेगेटिव इनर्जी का प्रवाह न हो, और संस्थान का भला हो! या फिर फ़व्वारे को नए सिरे से, जिस दिशा में स्थापित था उसकी उल्टी दिशा में स्थापित करें तो शायद पॉजिटिव एनर्जी बहने लगे, और समस्या ग्रस्त डायरेक्टर, प्रोफ़ेसरों और छात्रों का कल्याण हो!

मेनिट ने तो अपना भला कर लिया. पर, क्या आपने अपने बारे में सोचा है?

आप अपनी ऑनलाइन जीवनी से आक्रांत हैं? आप ब्लॉग पर, फेसबुक पर एक से एक धांसू पोस्ट पे पोस्ट लिखते हैं, हर दस मिनट में स्टेटस अपडेट करते हैं, मगर कोई नामुराद न तो कमेंट मारने आता है न लाइक करके जाता है. कोई गूगल प्लस में जोड़ता भी नहीं. जबकि दूसरे चार लाइन की पोस्ट मारते हैं तो चौबीसों लाइनों वाली चालीसों टिप्पणियाँ मिलती हैं. दूसरे जब स्टेटस अपडेट मारते हैं कि वो मुंह धो रहे हैं तो सैकड़ों लाइक हो जाते हैं जबकि आप देश की स्थिति के बारे में गंभीर से गंभीर स्टेटस अपडेट मारते हैं तो कोई मक्खी भी वहां मुंह नहीं मारती.

कारण समझ में आया?

वही, नेगेटिव एनर्जी. जो आपके कंप्यूटर और लैपटॉप के आजू बाजू प्रवाहित होते रहती है, वही आपके लिए समस्या पैदा करती है.

अब जरा देखें कि इसके लिए क्या किया जा सकता है. इस समस्या को लेकर मैंने कुछ जानकार वास्तुशास्त्रियों से बातचीत की तो उन्होंने अपनी ओर से कुछ समाधान मुझे बताए. मैं स्वार्थी नहीं बनना चाहता लिहाजा  आपके लिए वे सारे जबरदस्त समाधान लेकर आया हूँ. अब आपको सफल ब्लॉगर और फेसबुकिया बनने से कोई नहीं रोक सकता. बस निम्न उपाय आजमाएं.

· कंप्यूटर पर अपने बैठने की दिशा बदल दें. पूरब में बैठते हों तो पश्चिम की ओर मुख कर लें, और पश्चिम में मुख रहता हो तो पूर्व की ओर कर लें. बैठ कर लिखते हों तो लेटकर लिखें और यदि लेपटॉप में लेटकर आराम से लिखने की आदत है तो बैठ कर या फिर खड़े होकर लिखें. अति उत्तम समाधान के लिए बाबा श्री श्री खड़ेश्वर देव की तरह एक टाँग पर खड़े होकर भी लिख सकते हैं जिसमें परिपूर्ण धनात्मक ऊर्जा की पूरी गारंटी है, तब फिर नेगेटिव ऊर्जा तो आपके आसपास कहीं फटक भी नहीं पाएगी.

· आप कौन सा कीबोर्ड प्रयोग करते हैं? मैं रेमिंगटन-इनस्क्रिप्ट-फ़ोनेटिक की बात नहीं कर रहा. आईबाल, इंटैक्स या टीवीएस की बात कर रहा हूँ. जल्द से जल्द अपना ब्रांड बदलें. आपके वर्तमान ब्रांड का कीबोर्ड आपकी पोस्टों-अपडेटों में जबर्दस्त नेगेटिव एनर्जी भर रहा है.

· प्रोसेसर, ऑपरेटिंग सिस्टम कौन सा प्रयोग कर रहे हैं? आपके द्वारा वर्तमान में प्रयोग किए जा रहे सिस्टम में नेगेटिव ही नेगेटिव एनर्जी है. भला चाहते हैं तो वर्तमान को तत्काल तोड़ कर निकालें और बदल लें. तोड़ कर निकालने से नेगेटिव ऊर्जा का प्रवाह भी टूट जाएगा.

· आपने अपने ब्लॉग और फेसबुक पेज में कौन सी कलर थीम लगाई है? आपका वर्तमान कलर थीम तो नेगेटिव ऊर्जा से भरपूर है. वो तो आपको क्या आपके ब्लॉग प्रशंसकों और फेसबुक मित्रों को भी अपनी चपेट में ले रहा है. अपनी नहीं तो कम से कम दूसरों का भला तो करें. जल्द से जल्द थीम बदलें. एकदम डार्क थीम बहुत बेहतरीन होता है. क्योंकि पठन-पाठन में कठिनाई होने से टिप्पणियोँ और लाइक मिलने की संभावना बहुत बढ़ जाती है. क्योंकि यह तो सर्वविदित तथ्य है कि जितना ज्यादा पढ़ा और समझा जाता है, टिप्पणियों के प्राप्त होने, लाइक होने की संख्या उतनी ही कम होती जाती है.

· अब जरा बताएंगे कि आप अपने पीसी में मॉनीटर कौन सा प्रयोग करते हैं? कितने इंची वाला प्रयोग करते हैं? एलसीडी प्रयोग करते हैं या एलईडी? यही हाल लैपटॉप का भी है. अपना वर्तमान ब्रांड जो आपके साइबर दुनिया में नेगेटिव एनर्जी भर रहा है, उसे दन्न से बदल डालें. अभी.

· और, अंत में – सबसे बड़ा समस्याकारक है आपका कंप्यूटर टेबल. उसमें एक अतिरिक्त पाया लगवा लें जो नेगेटिव एनर्जी को दूर करता है और भरपूर पॉजीटिव ऊर्जा लाता है. वैकल्पिक रूप से आप टेबल का एक पाया तोड़ लें, और स्टेबल करने के लिए दीवार का सहारा लें. दीवार के सहारे नेगेटिव एनर्जी धरती में चली जाएगी, और आपका साइबर कल्याण होने में देर नहीं लगेगी. यदि आप ऑनलाइन कामधाम के लिए लैपटॉप/टैबलेट/मोबाइल फ़ोनों का प्रयोग करते हैं तो जल्द से जल्द इनसे छुटकारा पा लें. क्योंकि ये तो नेगेटिव ऊर्जा से भरपूर होते हैं. वापस पीसी का प्रयोग करना चालू कर दें और, ऊपर बताया गया टोटका अपनाएं. पॉजिटिव देवता जो पॉजिटिव ऊर्जा देते हैं आपका कल्याण करेंगे और नेगेटिव असुर को आपसे दूर रखेंगे.

आमीन!

उबुन्टु लिनक्स 12.x (या किसी भी अन्य लिनक्स संस्करण में) में हिंदी इनस्क्रिप्ट / रेमिंगटन / फ़ोनेटिक कीबोर्ड इंस्टाल कैसे करें

 

आसान है. इसके लिए आपको उबुन्टु लिनक्स 12.x में एक छोटा सा पैकेज एड-ऑन इंस्टाल करना होगा. उबुन्टु में आई-बस नामक एक बढ़िया कुंजी इनपुट औजार आता है, परंतु उसमें डिफ़ॉल्ट में चीनी भाषा का ही विकल्प होता है. आपको हिंदी भाषा के कीबोर्ड जोड़ने के लिए उसका कीबोर्ड एड ऑन पैक इंस्टाल करना होता है.

चरण दर चरण निम्न है -

 

आप अपने उबुन्टु कंप्यूटर में इंटरनेट चालू कर लें.

 

उबुन्टू स्टार्ट बटन पर क्लिक करें और सर्च बक्से में टाइप करें - terminal

 

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टर्मिनल का आइकन दिखेगा जैसे कि ऊपर के चित्र में दिख रहा है. उसे क्लिक करें.

टर्मिनल यानी कमांड प्राम्प्ट विंडो जैसा कि नीचे के चित्र में दिख रहा है, खुलेगा.

टर्मिनल पर जाकर यह कमांड दें - sudo apt-get install ibus-m17n

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यदि आपने कोई रूट पासवर्ड सेट किया होगा तो यह पासवर्ड के लिए पूछेगा नहीं तो इंस्टालेशन चालू हो जाएगा. जैसा कि नीचे के चित्र में दिया गया है, टर्मिनल के भीतर ही आपसे पूछा जाएगा कि फलां-फलां पैकेज इंस्टाल होंगे और इतनी जगह की आवश्यकता होगी. हाँ या ना करें - y/n - तो आप टाइप करें Y और एंटर कर दें.

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जब आपका आईबस पैकेज इंस्टाल हो जाएगा तो कोई एरर मैसेज नहीं आएगा. तब तो बधाई आपके कंप्यूटर में हिंदी के कीबोर्ड - इनस्क्रिप्ट, रेमिंगटन, फ़ोनेटिक इत्यादि स्थापित हो चुके हैं. अब आपको आईबस में इनेबल करना होगा.

उबुन्टू स्टार्ट बटन पर क्लिक कर सर्च बक्से में टाइप करें - ibus

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आपके सामने आईबस और कीबोर्ड-इनपुट-मैथड नामक दो आइकन दिखेंगे. कीबोर्ड-इनपुट-मैथड आइकन पर क्लिक करें.

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जैसा कि ऊपर के चित्र में दिख रहा है, आपके सामने आईबस प्रेफरेंसेस नामक एक सेटिंग विंडो खुलेगा. उसमें इनपुट मैथड टैब में क्लिक करें और सलेक्ट एन इनपुट मैथड पर क्लिक करें. आपके सामने तमाम दुनिया भर की भाषाओं के कीबोर्ड के नाम दिखेंगे. अपने माउस पाइंटर को हिंदी पर ले जाएं. वहाँ आपको आधा दर्जन हिंदी कीबोर्ड दिखेंगे. अपना मनपसंद कीबोर्ड चुनें. और फिर एड बटन पर क्लिक कर दें.

आप देखेंगे कि आपका पसंदीदा कीबोर्ड नीचे इनपुट मैथड में शामिल हो गया है. क्लोज बटन पर क्लिक करें.

उबुन्टू स्टार्ट बटन पर क्लिक करें और सर्च बक्से में टाइप करें - ibus

आपके सामने आईबस नामक आइकन दिखेगा. उसे क्लिक करें, वह प्रारंभ हो जाएगा. आपको स्क्रीन के ऊपर कीबोर्ड का छोटा सा आइकन दिखेगा. आप उस पर क्लिक करेंगे तो अंग्रेजी समेत हिंदी का विकल्प दिखेगा. आप अपनी भाषा हिंदी या अंग्रेजी चुन कर टाइप कर सकते हैं. कीबोर्ड टॉगल - डिफ़ॉल्ट रूप में बायाँ आल्ट और शिफ़्ट कुंजी होता है.

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अब भी कोई समस्या हो तो टिप्पणी में दर्ज करें.

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इंडलिनक्स विकि साइट पर भारतीय भाषाओं के लिए यूनिकोड फ़ॉन्टों को डाउनलोड करने के लिंक जुटाए गये हैं. इसमे दर्जनों हिंदी यूनिकोड फ़ॉन्टों को डाउनलोड करने के लिंक भी हैं, जिनमें बहुत से मुक्त स्रोत के भी  हैं जिनका आप बखूबी प्रयोग कर सकते हैं.

लिंक है -

http://www.indlinux.org/wiki/index.php/IndicFontsList#Devanagari

 

फ़ॉन्ट को डाउनलोड करने के बाद इंस्टाल करने की विधि -

विंडोज एक्स पी - विंडोज़>फ़ॉन्ट फ़ोल्डर खोलें और मेन्यू से इंस्टाल न्यू फ़ॉन्ट चुन कर डाउनलोड किया फ़ॉन्ट फ़ाइल चुनें.

विंडोज 7 - डाउनलोड किए फ़ॉन्ट फ़ाइल में दायाँ क्लिक कर इंस्टाल विकल्प चुनें

लिनक्स - होम फ़ोल्डर में .font (यह छुपी फ़ाइल होती है) या यूजर फ़ॉन्ट फ़ोल्डर में फ़ॉन्ट कॉपी करें.

माइक्रोसॉफ़्ट बिंग अंग्रेज़ी-हिंदी मशीनी अनुवाद भी अब दिनों दिन बेहतर होता जा रहा है. खासकर छोटे वाक्यों और कंप्यूटिंग-आईटी संबंधी वाक्यांशों को यह बेहतर स्वचालित अनुवाद करता है.

मैंने गूगल ट्रांसलेट और माइक्रोसॉफ़्ट-बिंग ट्रांसलेट दोनों की मशीनी अनुवाद की तुलना करने के लिए एक पैराग्राफ कुछ यूँ रचा -

आप देखेंगे कि इसमें छोटा सा सामान्य आम बोलचाल वाला वाक्य है तो एक बड़ा जटिल सा वाक्य भी है. स्पाइस गर्ल के एलबम टू बिकम वन गीत का एक टुकड़ा है और अंत में केडीई कंप्यूटर अनुप्रयोग से एक छोटा कंप्यूटर मेन्यू / संदेश वाक्य.

My name is Ravi
I want to read blog posts written by my friends, but I hardly had time to read it as all my online time wastes in watching youtube videos!
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Spice Girls
2 Become 1
Candle light and soul forever
A dream of you and me together
Say you believe it
Say you believe it
Free your mind of doubt and danger
Be for real  Don't be a stranger
We can acheive it
We can acheive it
Come a little bit closer baby
Get it on
Get it on
Cuz tonight
Is the night
When 2 become 1
I need some love like I never needed love before
--

<note>You should write in English.</note>
Thank you for being part of KDE!
&Reload
<a href=\"#\">Examples</a>
<strong>Do you want to proceed with the reporting process?</strong>

--

इसका स्वचालित अनुवाद माइक्रोसॉफ़्ट बिंग ने कुछ यूँ किया -




(चित्र को बड़े आकार में देखने के लिए उस पर क्लिक करें)



मेरा नाम है रवि
मैं अपने दोस्तों के द्वारा लिखा ब्लॉग पोस्ट को पढ़ने के लिए चाहता हूँ, लेकिन मैं शायद ही इसे पढ़ने के रूप में मेरे सभी ऑनलाइन समय खर्च करता है youtube वीडियो देखने में करने के लिए समय था!
--

स्पाइस गर्ल्स
2 बनें 1
मोमबत्ती की रोशनी और आत्मा हमेशा के लिए
तुम और मैं एक साथ का एक सपना
आपको लगता है कि यह कहना
आपको लगता है कि यह कहना
अपने मन संदेह और खतरे की नि: शुल्क
असली के लिए हो एक अजनबी मत बनो
हम इसे प्राप्त कर सकते हैं
हम इसे प्राप्त कर सकते हैं
एक छोटा सा बच्चे के करीब आ
इस पर मिल
इस पर मिल
Cuz आज की रात
रात है
जब 2 1 बन गए
मैं कुछ प्यार की जरूरत है जैसे मैं कभी नहीं प्यार से पहले की जरूरत
--

<note> आप चाहिए. अंग्रेजी में लिखने </note>
केडीई का हिस्सा होने के लिए धन्यवाद!
और फिर से लोड करें
< a href = \ \ "# \" > उदाहरण </a>
<strong> सूचना देने की प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ने के लिए क्या आप चाहते हैं? </strong>
-----------------
 
और गूगल ट्रांसलेट ने कुछ यों आउटपुट दिया -




                                  (चित्र को बड़े आकार में देखने के लिए उस पर क्लिक करें)

मेरा नाम रवि है
मैं मेरे दोस्तों के द्वारा लिखा ब्लॉग पोस्ट को पढ़ने के लिए चाहते हैं, लेकिन मैं शायद ही यूट्यूब वीडियो देखने में अपने सभी ऑनलाइन समय कचरे के रूप में इसे पढ़ने के लिए समय था!
-

स्पाइस गर्ल्स
1 2 बनें
मोमबत्ती की रोशनी में और हमेशा के लिए आत्मा
आप और मुझे एक साथ एक सपना
कहते हैं कि आप इस पर विश्वास
कहते हैं कि आप इस पर विश्वास
शक और खतरे से अपने मन मुक्त
असली के लिए एक अजनबी नहीं हो.
हम इसे प्राप्त करने के कर सकते हैं
हम इसे प्राप्त करने के कर सकते हैं
एक छोटा सा बच्चा करीब आओ
उस पर जाओ
उस पर जाओ
cuz आज रात
रात है
जब 2 एक बन
मैं कुछ प्यार की जरूरत है जैसे मैं पहले कभी नहीं की जरूरत है प्यार

-
<note> आप अंग्रेजी में <नोट /> लिखना चाहिए.
आप केडीई का हिस्सा होने के लिए धन्यवाद!
पुनः लोड और
<a href=\"#\"> उदाहरण </ a>
<strong> आप रिपोर्टिंग प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं </ strong>?
--

क्या आप बता सकते हैं कि कौन बेहतर है?

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एक शोध से पता चला है कि ब्लॉग, फ़ेसबुक और ट्विटर आपके दिल दिमाग में चिंता, असुरक्षा की भावनाएँ भरने का काम ज्यादा करते हैं. इसमें शोध की क्या जरूरत थी? जिस दिन से हम ब्लॉगिंग में घुसे हैं, ट्विटर पर खाता खोला है और फ़ेसबुक में पहला लाइक मारे हैं, कसम से दुनिया बदल गई है. चिंता के मारे हलाकान हो गए हैं. रात दो बजे भी ईमेल अलर्ट आता है तो उठ कर कमेंट एप्रूव करते हैं, एक ट्वीट मारते हैं और फेसबुक वाल में किसी को चिकोटी काट कर फिर दोबारा सोने की बेकार कोशिश करते हैं.

दुनिया इतनी कमीनी कभी नहीं रही. फ़ेसबुक से पहले दुनिया कितनी शांत और आरामप्रद थी! है ना? न थी इस तरह रात दो बजे उठने की चिंता और न किसी तरह की ब्लॉग-ट्विटर-फ़ेसबुकिया असुरक्षा की भावना!!!

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व्यंज़ल

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जितना ट्विटरिया रहा हूँ मैं

उतना ही चिंतिया रहा हूँ मैं

 

दुनिया में क्या कम गम थे

ऊपर से फ़ेसबुकिया रहा हूँ मैं

 

लोग कहते बस फकत हैं झूठ

बहुत बड़ा ब्लॉगिया रहा हूँ मैं

 

उठते बैठते सोते नहाते धोते

कहां नहीं इंटरनेटिया रहा हूँ मैं

 

जिंदगी में बचा क्या रवि

जब देखो गूगलिया रहा हूँ मैं

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यदि शीर्षक से आपको कुछ समझ में नहीं आए, तो कृपया मुझे कोसें नहीं.

यह पाठ संजीव कपूर के खाना खजाना के हिंदी पृष्ठों में से लिया गया है.

संजीव कपूर का खाना खजाना अंग्रेज़ी में लंबे समय से इंटरनेट पर उपलब्ध है, और यदा कदा अपनी जिव्हा को नया 'टेस्ट' देने वहाँ चक्कर लगाता रहता हूँ.

अभी उधर लंबे समय बाद जाना हुआ तो पाया कि हिंदी में पढ़ने का लिंक भी उपलब्ध हो गया है. जाहिर है उस लिंक पर तो जाना ही था.
परंतु वहाँ जाकर यह मिला -

ये भी मिला -


और ये भी :


आपके मुँह का स्वाद बिगड़ा या नहीं?

संजीव कपूर खाना खजाना  जैसे बड़े और स्थापित जाल स्थल से तो ये उम्मीद नहीं थी. जाहिर है, अंग्रेजी साइट का हिंदी में बेहद ही सड़ियल अनुवाद औने-पौने दामों में करवा दिया गया है. गनीमत, अर्थ का अनर्थ नहीं है नहीं तो कद्दू की सब्जी में करेले का स्वाद भी आ जाता!

स्टक्सनेट जब पकड़ में आया तो इसे वायरसों का बाप कहा गया.

स्टक्सनेट के बारे में कुछ जानकारी यहाँ है.

तब अनुमान लगाए गए थे कि इसे अमरीकी-इजराइली सरकार द्वारा साइबर वार के रूप में ईरान के परमाणु संयंत्रों को बेकार करने के लिए जारी किया गया था.

बाद में खुद अमरीकी राष्ट्रपति ने इस बात को स्वीकार किया.

अभी हाल ही में स्टक्सनेट से भी भयंकर, मारक मालवेयर पकड़ा गया है जिसे नाम दिया गया है - फ्लेम.

देखिए कि फ्लेम की क्या खासियतें हैं -

1. फ्लेम एक की-लॉगर और एक स्क्रीन-ग्रेबर है -

2. फ्लेम के निर्माण में SSH, SSL, और LUA जैसी सुरक्षा लाइब्रेरी का प्रयोग किया गया है

3. फ्लेम स्थानीय ड्राइव (हार्ड-डिस्क) और नेटवर्क ड्राइव पर सभी ऑफ़िस दस्तावेजों, पीडीएफ फाइलों, ऑटोडेस्क फ़ाइलों और फ़ाइलों को खोजता है. वहाँ दस्तावेजों से पाठ के तमाम अंश निकालने के लिए यह आई-फ़िल्टर्स का उपयोग करता है और फ़ाइलों से सिर्फ टैक्स्ट मैटर निकालता है, और उसे एक स्थानीय SQLLite डेटाबेस में संग्रहित करता है और फिर उसे मैलवेयर ऑपरेटरों को चुपके से भेजता है. इस तरह वे मैलवेयर को यह हिदायत दे सकते हैं कि वास्तव में दिलचस्प सामग्री कहाँ है और कहां से इसे प्राप्त करना है.

4. फ्लेम - संक्रमित कंप्यूटर के माइक्रोफोन को चालू कर पास हो रही बातचीत और चर्चा को रिकॉर्ड कर इन चर्चाओं को ऑडियो फ़ाइलों के रूप में सहेज कर मैलवेयर ऑपरेटरों को भेज सकता है.

5. फ्लेम संक्रमित कंप्यूटर में और उससे जुड़े डिजिटल कैमरे की छवि फ़ाइलों को स्थानीय ड्राइव तथा नेटवर्क पर खोज सकता है. यह इन छवियों से वह जीपीएस स्थान निकालता है और इसकी जानकारी मैलवेयर ऑपरेटरों को वापस भेज सकता है.

6. फ्लेम संक्रमित कंप्यूटर के ब्लूटूथ को चालू कर यह जाँच करता है कि अगर वहाँ किसी भी मोबाइल फोन का ब्लूटूथ ऑन हो तो वह उसे ब्लूटूथ के माध्यम से जोड़ कर (iPhone, Android, नोकिया आदि स्मार्ट फ़ोन) उस फोन से पता पुस्तिका और अन्य जानकारी इकट्ठा कर उन्हें मैलवेयर ऑपरेटरों को भेज सकता है.

7. यदि संक्रमित (यूएसबी स्टिक से संक्रमण संभव है) कंप्यूटर बेहद सुरक्षित है और इसे बाहरी नेटवर्क से जोड़ा नहीं गया है तो यह उपर्युक्त तरीके से चोरी की गई जानकारी USB स्टिक में कॉपी करता है. इन जानकारियों को यह मालवेयर एन्क्रिप्टेड SQLLite डेटाबेस के रूप में कॉपी करता है, और जब ये यूएसबी स्टिक बाद में नेटवर्क से जुड़े किसी कंप्यूटर से जोड़े जाते हैं तो इसकी प्रतिलिपि मालवेयर ऑपरेटरों को भेजता है. यानी ये उच्च सुरक्षा के बंद वातावरण से भी डाटा चुरा सकने में सक्षम है.

8. अंततः जब फ्लेम पकड़ में आ ही गया तो इसके ऑपरेटर इसके सभी सबूतों को नष्ट करने और सक्रिय रूप से प्रभावित मशीनों से संक्रमण को हटाने में व्यस्त हो गए हैं.

9. फ्लेम के बारे में नवीनतम अनुसंधानों से साबित होता है कि फ्लेम वास्तव में वायरसों के बाप - स्टक्सनेट से जुड़ा हुआ है. इसमें मिलते जुलते फ़ाइलनामों का प्रयोग किया गया है और डेवलपमेंट प्लेटफ़ॉर्म भी मिलते जुलते हैं.

10. फ्लेम कंप्यूटरों को संक्रमित करने के लिए माइक्रोसॉफ़्ट अपडेट के रूप में स्थानीय प्रॉक्सी का उपयोग करता है और माइक्रोसॉफ्ट जेनुइन अपडेट के नाम पर नेटवर्क से जुड़े कंप्यूटरों को संक्रमित करता है.

इस नकली अद्यतन को असली रूप देने के लिए इसमें माइक्रोसॉफ्ट का फर्जी प्रमाणपत्र प्रयोग में लाया गया और कुछ विंडोज संस्करणों को धोखा देने के लिए जब यह पर्याप्त नहीं हुआ तो इसमें सुपरकंप्यूटर की सहायता से अत्याधुनिक क्रिप्टोग्राफ़िक तकनीक से इस काम को अमलीजामा पहनाया गया. और ये काम चुपचाप तरीके से वर्ष 2010 से जारी है.

 

आप कहेंगे – 2010 से?

जी हाँ.

और इसके कुछ नमूने एंटीवायरस कंपनियों के पास होने के बावजूद वे इसे पकड़ने में कामयाब नहीं हुए.

क्या आप अब भी अनुमान लगा सकने में अक्षम हैं कि फ्लेम को किसने जारी किया और फ्लेम के लक्ष्य कौन हैं?

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मसाला - एफ़सेक्यूर वेबलॉग से:

(http://www.f-secure.com/weblog/archives/00002383.html)




वैसे तो इस मार्गदर्शिका का शीर्षक भारतीय कार-उपयोगकर्ता-निर्देशिका बेहतर हो सकता था, मगर, फिर, ये पूरा इंडियन नहीं होता.

आप पूछेंगे कि ये इंडियन कार-यूजर्स-गाइड क्या ऑफ़ीशियल गाइड है और इसे क्या ट्रांसपोर्ट विभाग से जारी किया गया है.

तो बता दूं कि इसके ओरिजिन का तो पता नहीं क्योंकि यह मुझे एक दिन यूँ ही सड़क पर कार चलाते समय रास्ते में पड़ा हुआ मिल गया था. मगर इतना तय है कि इस गाइड को आप पढ़ेंगे और आत्मसात करेंगे तो भारतीय सड़कों में फर्राटे से कार दौड़ाने में एक्सपर्ट हो जाएंगे. इस गाइड को मोटा-मोटी आप पढ़ेंगे तो पाएंगे कि अधिकांश जनता इस खालिस इंडियन गाइडबुक का टू-द-पाइंट फालो करती है. अर्थ यह कि यदि आप इस मामले में निरक्षर हैं तो आगे पढ़ें, गुनें और अपनी कार-ड्राइविंग-लाइफ को बेहतर बनाएं.

1.    कार चलाना शुरू करने से पहले यह चेक कर लें कि आपके कार का हॉर्न ठीक से काम कर रहा है या नहीं. क्योंकि यही वह पुर्जा है जो इंडियन सड़कों में कार चलाते समय सबसे ज्यादा काम आता है. संशय हो तो दोबारा चेक कर लें और, हो सके तो इसकी आवाज भी जाँच लें कि समय के हिसाब से इसकी आवाज कम तो नहीं हो रही है. हो सके तो एकदम अलग किस्म का हार्न जैसे कि कुत्ते के भौंकने का या बच्चे के रोने का हॉर्न लगवाएं. मोटरबोट का हूटर वैसे बढ़िया रहता है, और वीआईपी कारों में लगने वाले डिफ़ॉल्ट हूटर की तो बात ही क्या. टायर में कम हवा चलेगा, इंजिन-ऑयल, लुब्रिकेंट, कूलेंट न हो तो चलेगा, मगर हॉर्न? नई बाबा नई!

2.    कार चलाते समय सड़कों के किनारे लगे चिह्न – स्पीड लिमिट, अंधा मोड़, हॉर्न न दें, ओवरटेक न करें इत्यादि इत्यादि के चिह्नों की ओर न तो ध्यान दें और न ही परवाह करें और न ही फ़ॉलो करें. क्योंकि यदि आप इन चिह्नों के हिसाब से चलेंगे तो आप भले ही किसी को न ठोंके, जरूर ही कोई न कोई आपको ठोंक देगा.

3.    सिंगल लेन में जा रहे हों, साइड देने की जगह न हो मगर उससे आपको व आपकी कार को फर्क नहीं पड़ता. आप तब तक हॉर्न पर हॉर्न बजाते रहें जब तक कि सामने चल रहा वाहन कहीं जादू से आपको साइड देने के लिए जगह न निकाल ले. फिर, हॉर्न है तो बजेगा ही, और बजाना भी चाहिए.

4.    बजाने से याद आया, कार में यदि स्टीरियो सिस्टम नहीं लगा है तो आपका कार कार नहीं है. तो सबसे पहला काम यही करें कि स्टीरियो सिस्टम लगवा लें. चीन ने दुनिया का बहुत भला किया है. हमारा भी बहुत किया है. पाँच सात सौ रुपल्ली से चीनी स्टीरियो सिस्टम मिलना चालू हो जाता है. वैसे भी जब आप कार से इंडिया के भीड़ भरे, शोर भरे रास्ते में जाते हैं तो एक लाख रुपए के असली बोस म्यूजिक सिस्टम और डुप्लीकेट चीनी बोसी म्यूजिक सिस्टम की आवाज में फर्क महसूस करना असंभव है. अब आपने स्टीरियो सिस्टम लगवा लिया. फाइन. अब जब लगवा लिया है तो जब भी ड्राइव करें, बजाएं. फुल वॉल्यूम में बजाएं. बाजा बजाने के लिए ही होता है. और सड़कों पर चलते समय स्टाइल से बजाने का आनंद ही अलग है. आप यह कर देखें और फर्क खुद महसूस करें.

5.    यूँ तो कार में साइड इंडीकेटर लगा होता है, मगर ये इंडियन सड़कों के लिए फालतू है. आप इसका प्रयोग भूल कर भी न करें. हो सकता है आपके इंडीकेटर देने से पीछे से चला आ रहा वाहन कन्फ्यूजिया जाए और आपके कार पर चढ़ जाए. आप बिना इंडीकेटर दिए मर्जी पड़े जिधर मुड़ें, पीछे आने वाला कौन आपकी कार का इंडीकेटर देख रहा होता है. वो तो आपकी कार के जिस ओर जगह होती है – दाएं, बाएं, या संभव हो तो ऊपर, वहीं से निकल लेने की जुगत में होता है. बाइ डिफ़ॉल्ट इंडियन ड्राइवर साइड इंडीकेटर को अनदेखा करने के लिए सेल्फ प्रोग्राम्ड होता है. इसलिए डिजास्टर को दूर रखें. आप अपवाद न बनें.

6.    चौराहों पर सिग्नल की परवाह यथासंभव न करें. यदि ट्रैफ़िक सिपाही चालान बनाने के लिए तत्पर खड़ा न हो तब तो सिग्नल की परवाह करने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता. कोशिश करें कि ट्रैफ़िक सिपाही का ध्यान दूसरी ओर हो तो आप दन्न से रेडलाइट जम्प कर निकल भागें. इस जमाने में बस समय ही तो कीमती है. उसकी परवाह करें. एक-एक मिनट का समय कीमती होता है ये ध्यान रखें. सिग्नल की परवाह कर अपना एक दो मिनट फालतू जाया न करें. और याद रखें कि आपके रास्ते में यदि चार सिग्नल हैं तो चार गुना समय बचेगा. और यदि आप इन चार सिग्नलों में रोज जाते आते हैं तो कल्पना करें कि पूरे साल भर और आपके पूरे जीवन भर में आप कितना समय बचा लेंगे!

7.    कार और कार के यात्रियों का इंश्योरेंस करवाना तो फालतू पैसा जाया करना है. इतिहास गवाह है कि इंश्योरेंस का पैसा सही दावा करने वालों को कभी नहीं मिला. इंश्योरेंस का पैसा नकली दावा करने वाले ही डकारते हैं. तो इंश्योरेंस कभी नहीं करवाएं, और यदि करवाएं भी तो पहले किसी एजेंट से फिक्स कर लें कि जितना प्रीमियम आप भर रहे हैं उसका कुछ नहीं तो तीन गुना क्लेम हर हाल में ले सकें.

8.    पार्किंग में या सड़कों में साइड में गाड़ी कभी खड़ी नहीं करें. एनवायरनमेंट के प्रति जागरूक बनें. पर्यावरण मित्र बनें. आप पार्किंग में या सड़कों में बाजू में गाड़ी खड़ी करने के एवज में गाड़ी आगे पीछे करेंगे, व्यवस्थित करेंगे और इस तरह से ज्यादा पेट्रोल जलाएंगे. इससे पर्यावरण अधिक प्रदूषित तो होगा ही, आपकी जेब में चूना भी लगेगा. लिहाजा, जहां रुकना है, बीच सड़क पर ही रुकें, अपना काम करें और फिर चलते बनें. यही सच्ची इंडियन ड्राइविंग है.

9.    आपने ऑडी, बीएमडब्ल्यू या रेनॉल्ट खरीदी है. ठीक है, मगर ये बताएं, कि क्या आपने इसमें गैस किट लगा रखी है? यदि नहीं तब तो धिक्कार है आप पर, आपकी सोच पर. जितना जल्दी हो सके गैस किट लगवाएं और रसोई गैस भरवा कर अपनी गाड़ी चलाएं. आपके पास पैसा बहुत है इसका ये मतलब तो नहीं कि अपनी इकॉनामी को ही भट्टे में डाल दें. थोड़ी मितव्ययिता दिखाएं. इंडिया में जो गैस से कार न चलाए वो अपने परिवार से प्यार न करे! ठीक है, स्लोगन में राइम नहीं है, मगर कौन हम इसे विज्ञापन के लिए कापीराइट कर रहे हैं.

10.    अपनी कार में आप कितने लोगों को एक साथ लेकर चलते हैं? थम्ब रूल ये है कि पाँच सवारी पासिंग कार में आठ लोगों से कम लेकर कभी नहीं चलें. बन्टी, बबली, डुग्गू, बेबो सभी को भर कर चलें. आपकी कार पर सभी का पूरे परिवार, मित्रों का सभी का समान अधिकार होता है. और यदि आपको आफिस से आफिस के काम के लिए वाहन मिला है, तब तो यह सुनिश्चित करें कि घर का हर काम, घर के हर सदस्य व मित्रों का आना जाना उसी ऑफ़ीशियल कार से हो. ऑफ़ीशियल कार होते हुए निजी कार का प्रयोग करने की बेवकूफ़ी न करें. लोग हंसेंगे.

11.    ओवरटेक करते समय या साइड मुड़ते समय यथा संभव सामने जा रहे वाहन को कट मार कर निकलें. यदि आप जरूरत से ज्यादा सज्जनता दिखाएंगे या आगे-पीछे देख दाख कर ये काम करने की सोचेंगे तो अव्वल ये होगा नहीं और यदि हो भी गया तो दुर्घटना की संभावना बनी रहेगी. सामने वालों के पास भी आँखें हैं ये याद रखें, और उनके रीफ्लेक्शन पर भरोसा रखें.

नियम तो एक सैकड़ा भर और है, मगर अभी के लिए इतना ही. पहले इन नियमों को आत्मसात कर लें बढ़िया ड्राइवर बन कर बताएं, तब बाकी के नियम जारी किए जाएंगे.

-- टीप -- : इस गाइड को किसी भी दोपहिया/चौपहिया वाहन चालकों के लिए डिफ़ॉल्ट माना जाए. उनके लिए अलग से गाइडबुक जारी नहीं किए जाएंगे.
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अमित के पोस्ट - "कार ड्राइविंग और आप........." से प्रेरित
चित्र – उसी पोस्ट से

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वैसे तो यह मसाला बालेंदु दाधीच के वाह! मीडिया के लिए ज्यादा उचित था, परंतु चूंकि मामला कंप्यूटिंग से जुड़ा हुआ है, इसीलिए यहाँ छापने से अपने आप को रोक नहीं पाया.

यह समाचार आज के दैनिक भास्कर के मुख्य पृष्ठ पर प्रमुखता से छपा है, और पूरे राष्ट्र के लगभग तमाम एडीशन में है.

इस समाचार को पढ़ कर कोई भी तकनीकी जानकार हँस देगा कि दैनिक भास्कर जैसे बड़े अखबारों में भी समाचारों को चयन कर छापते समय पूरा चलताऊ एटीट्यूड दिखाते हैं.

कुछ समय पूर्व फ़ेसबुक में तथाकथित एक महान लिक्खाड़ ने सरकार व माइक्रोसॉफ़्ट को श्रेय दिया था यूनिकोड हिंदी फ़ॉन्ट तैयार करने में. यह समाचार भी उसी श्रेणी का है.

दरअसल समाचार में जो बताया गया है वो पेन ड्राइव से कंप्यूटर बूट करने का मामला है. यह काम कंप्यूटिंग के बाबा आदम के जमाने से होता आ रहा है. लिनक्स तंत्र के तमाम वेरिएंटों को आप यूएसबी पेन ड्राइव में इंस्टाल कर किसी भी कंपेटिबल कंप्यूटर को बूट कर सकते हैं. और जो बात लिखी  गई है वो कोई भी महज एक दो क्लिक से कर सकता है, आपके पास 128 मेबा या इससे अधिक का पेन ड्राइव होना चाहिए, और इसे तैयार करने के एक दो प्रोग्राम. कहने का अर्थ ये कि न तो इसमें कोई नई बात है और न ही कोई नया इन्नोवेशन. मैं पिछले चार वर्षों से अपने विंडोज लैपटॉप में लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग ऐसे ही करता आ रहा हूँ.  शायद औरंगाबाद के किसी अल्पज्ञानी (हम सभी कई मामलों में अल्पज्ञानी होते हैं, कोई सर्वज्ञ सर्वज्ञानी नहीं होता) पत्रकार ने बिना किसी तसदीक किए यह खबर बना दी और राष्ट्रीय एडीशन के उतने ही बड़े अल्पज्ञानी संपादक ने इसे जस का तस छाप दिया. और समाचार का शीर्षक भी गलत लिखा गया है - पेन ड्राइव में पूरा कम्प्यूटर - जबकि सही शीर्षक ये होगा - पेन ड्राइव में पूरा ऑपरेटिंग सिस्टम.

 

दैनिक भास्कर जैसे बड़े राष्ट्रीय अखबार से ऐसी उम्मीद नहीं थी. भास्कर हिंदी का बड़ा पाठक वर्ग है और इस समाचार से सारे पाठक मूर्ख बन गए!

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