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सोमवार, 17 दिसंबर 2012

क्या आप भी 'हरित' होना नहीं चाहेंगे?

सड़क पर चलते चलते एक पेड़ के तने पर रखे इस उपकरण ने मेरा ध्यान खींचा -

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यह एक सोलर पैनल था जिसे बड़े तरतीब से पेड़ के तने पर इस तरह से रखा गया था कि दिन भर उस पर धूप पड़ती रहे.

उसे देख मैं रुका. पास ही एक पान का ठेला था. सोलर पैनल से तार का कनेक्शन पान के ठेले तक जा रहा था जहाँ पर एक बैटरी व चार्जर जुड़े थे.

और पान के ठेले पर मौजूद था - घनश्याम साहू. 'हरित पुरुष' - घनश्याम साहू -

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पेड़ के तने पर रखे सोलर पैनल को लेकर मेरी जिज्ञासा बढ़ी तो घनश्याम साहू ने बताया -

पहले वो आस पास से वैध-अवैध कनेक्शन लेकर और इमर्जेंसी लाइट जैसे साधनों से अपनी गुमटी को रात में रौशन रखता था. परंतु एक बार कहीं से पता चला कि 3 हजार रुपए (किसी गुमटी धारक के लिए यह रकम बड़ी है) में यह सोलर पैनल मिलता है जिससे इन सबकी जरूरत नहीं रहती तो पैसे जमा कर यह खरीद लिया और अब उसे अपनी गुमटी को रौशन करने के लिए किसी चीज के लिए एक पैसा भी खर्च करने की जरूरत नहीं रहती. उसने गुमटी को रौशन करने के लिए बेहद कम खपत करने वाले एलईडी लैंप की पट्टी भी लगवा ली है. उसका सोलर पैनल बरसात के दिनों में भी उसकी गुमटी को 5 घंटे तक भरपूर रौशन करने लायक बैटरी तो चार्ज कर ही लेता है.

क्या आप भी घनश्याम साहू की तरह हरित नहीं होना चाहेंगे?

मैंने अपने घर को सोलर पैनल से ऊर्जित करने के लिए कुछ समय पूर्व कुछ सोच-विचार किया भी था, परंतु इसकी उच्च आरंभिक लागत (750 वॉट के लिए कोई 80-90 हजार, वह भी 30 प्रतिशत सरकारी सबसिडी के उपरांत) ने मेरे पांव वापस खींच लिए. यदि इसकी कीमतें और भी कम हों - 750 वॉट के लिए 30-35 हजार के रेंज पर - तो मुझे लगता है कि मेरे जैसे ढेरों लोग इस पद्धति को अपनाएंगे और फलस्वरूप न सिर्फ वातावरण का भला होगा, बिजली की कमी से जूझ रहे देश को भी राहत मिलेगी.

11 टिप्‍पणियां:

  1. यदि इसमें राहत दी जाये तो देश का भला संभव है।

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  2. 80-90 हजार में भी कहाँ से मिल रहा है, कृप्या इस बारे में और जान्कारी दॆं ।

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    1. कई कंपनियाँ इस रेंज में 700-800 वॉट का सोलर पावर इंस्टाल कर रही हैं - जिसमें सोलर पैनल, बैटरी, इनवर्टर इत्यादि तमाम चीजें शामिल हैं. (30 प्रतिशत सबसिडी घटाकर)
      आप यहाँ से जानकारी ले सकते हैं -
      http://www.indiasolarsolutions.net/solar-pv-system.html

      http://www.adithyasolarenergy.com/solar-products.html#solar-home-lighting

      यहाँ भोपाल मप्र में रीन्यूएबल इनर्जी संबंधी एक मेला लगा था जिसमें इस तरह की कंपनियों के स्टाल लगे थे.

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  3. अच्छी जानकारी दी । सोलर पैनल फ़ायदेमंद है , लेकिन अगर ये थोड़ा और सस्ता हो तो आम आदमी के बहुत काम आ सकता है ।

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  4. तकनीक तो अच्छी है लेकिन मंहगी है, इसलिए इसे अगर उपयोग में लाना है तो सरकार को इसे सस्ता करने के लिए कार्य करना पड़ेगा.

    तभी इस से आम लोगो को और देश को लाभ हो सकेगा.

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  5. भाई साहब जानकारी के लिए प्रणाम

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  6. अभी तो इक्का दुक्का लोग ही 'हरित' हो रहे हैं, जब ज्यादा लोग हरित होने लगेगे तो कंपनियां दाम बड़ा देंगी और सरकार इसमें से सब्सिडी खत्म कर देगी.

    तकनीक अच्छी पर सस्ती होनी चाहिए, बिना सरकारी सब्सिडी के.

    बढिया जानकारी, साधुवाद.

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  7. जब मैंने अपना मकान बनवाया था तब यही व्‍यवस्‍था करनी चाही थी। किन्‍तु कीमत मेरी चादर से बाहर थी। आज भी बाहर ही है। इच्‍छा भी जस की तस बनी हुई है। किसी ने कहा था कि कागज के बने सोलर-सेल बनाने में कुछ लोग लगे हुए हैं। जिस दिन वे सफल हो जाऍंगे, उस दिन यह कीमत बहुत ही कम हो जाएगी - आपने जो तीस/पैंतरस हजार बताई है,उससे भी कम। सूचनार्थ निवेदन है कि जिन सज्‍ज्‍न ने मुझे, ललचानेवाली यह जानकारी दी थी, उनसे जीवित सम्‍पर्क बनाए हुए हूँ।

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  8. सोचा हमने भी था लेकिन भारी लागत के चलते हिचकिचा गये।

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  9. अभी पि‍छले हफ़्ते दि‍ल्‍ली के प्रगति मैदान में एल. ई. डी. पर एक अंतर्राष्‍ट्रीय प्रदर्शनी में जाना हुआ. मुझे जानकर अचंभा हुआ कि आज यह तकनीक इतनी प्रगति कर चुकी है कि सड़क पर रौशनी करने तक लि‍ए एल. ई. डी. का प्रयोग हो सकता है. यह केवल सोलर पर ही आधारि‍त नहीं है, आम बि‍जली चलि‍त लाइट भी इसमें प्रयोग हो रही है. इसका सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि इसमें बि‍जली की खपत आश्‍चर्यजनक रूप से कम हो जाती है. अब एल. ई. डी. का मतलब केवल मद्धि‍म प्रकाश ही नहीं रह गया है बल्‍कि जो मैंने देखा वह अत्‍यधि‍क चमकने वाले होर्डिंगों के रूप में उपलब्‍ध है. इस प्रदर्शनी को देखने के बाद मुझे दूसरी तरह के प्रचलि‍त लाइट बल्‍ब/ट्यूब का कोई वि‍शेष औचि‍त्‍य बचा नज़र नहीं आया. ये उत्‍पाद आज कई ऑनलाइन पोर्टल पर भी उपलब्ध हैं.

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