टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

November 2012

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यहाँ जनता भोजन उपलब्ध है - वह भी आदेशानुसार. भोजन फ़ॉर मैंगो पीपुल?

जरा और दरयाफ़्त किया तो पता चला कि सिर्फ देखने-दिखाने के लिए छाप कर चिपकाया गया है. यानी भोजन नदारद! जनता भोजन आप सिर्फ देख सकते हैं, खा नहीं सकते.

तो अब सवाल ये है कि अंबानीज़, वाड्राज़ भोजन कहाँ मिलता होगा?

खा तो ख़ैर, मैं इसे भी नहीं सकता, मगर देख तो सकता हूँ. यदि कोई बताए (चित्रादि के लिंक भी चलेंगे!) कि कहां मिलता है तो दर्शन लाभ लेने की कोशिश करूंगा!



दीपावली आता है और हमारे आपके लिए तो जैसे मुसीबतों का पहाड़ ले आता है. और मैं घर की रँगाई-पुताई से लेकर नए लिबास-जूतों या इसी तरह के दीगर खर्चों की बात नहीं कर रहा. मैं तो बधाईयों की बात कर रहा हूँ!
अब देखिए ना, अपना मेल बॉक्स दीपावली के सप्ताह भर पहले से जेनुइन क़िस्म के (कतई स्पैम नहीं!) ईमेलों से भरने लग जाता है. और नित्य कोई तीन-चार गुना ज्यादा ईमेल चला आता है इन दिनों. सबमें घुमा-फिरा कर एक ही बात कही जाती है – दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ! लफ़्जों के खेल, चित्रों के अखाड़ों, मल्टीमीडिया ऑडियो-वीडियो संलग्नकों के सर्कसों - सबका सार यही होता है – दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ!

एक भारी मुसीबत और है. वो है अलादीन के जिन्न की तरह आपके आगे पीछे लगा हुआ आपका मोबाइल फोन. अभी पता नहीं किसने और किसलिए यह अजीब तुलनात्मक गिनती कर डाली कि भारत में जितने तो शौचालय नहीं हैं उससे कई गुना मोबाइल फ़ोन हैं – नंबर डायल करो और बात करने के लिए, सॉरी – बधाई देने के लिए जिन्न की तरह बंदा हाजिर! बहरहाल, बात बधाईयों की हो रही थी. तो आपका मोबाइल भी हर दूसरे मिनट कालर ट्यून बजा कर टां टूं करता है और इसका इनबॉक्स पीं पीं करते हुए हर घंटे फुल हो जाता है. यानी बधाईंयाँ सुनते भी रहें और दुबले पर दो आषाढ़ की तरह एक और अतिरिक्त झंझट कि एसएमएस पढ़ते रहें और खाली करते रहें नहीं तो यह हर एसएमएस पर अतिरिक्त रूप से आगाह करता है कि बक्सा खाली करो! बक्सा खाली करो! – उलटी-सीधी किस्म की भाषाओं, बोलियों और मल्टीमीडिया युक्त इन एसएमएसों का अंततः यही संदेश होता है – दीपावली की हार्दिक बधाईयां!

समस्या यहीं समाप्त नहीं होती कि आपको बधाईयाँ मिलती हैं. आप तो गर्व कर सकते हैं कि आपको संसार में सबसे ज्यादा दीपावली की बधाईयाँ मिल रही हैं. असल समस्या आगे होती है. अब आपको भी हर एक को प्रत्युत्तर में धन्यवाद देना होगा, बदले में हार्दिक बधाईयाँ टिकाने ही होंगे अन्यथा क्या पता अगला बुरा मान जाए. भई, मुझे तो लगता है, पर, प्रत्याशित-अप्रत्याशित बधाईयों का प्रत्युत्तर देना मुसीबत से कम अगर किसी को लगता हो तो वो व्यक्ति सचमुच वंदनीय है.

इधर ट्विटरियों और फेसबुकियों की हालत तो और खराब है. आप फ़ेसबुकिये हैं तो आपकी वाल पे आपके पूरे पाँच हजार मित्रों, उनके मित्रों, उनके मित्रों के मित्रों के बधाई संदेश कोई सप्ताह भर पहले से चिपकने चालू हो जाते हैं तो सिलसिला छोटी-दीपावली के आगे दो सप्ताह तक भी थमता नजर नहीं आता. अब सवाल ये है कि इतनी सारी बधाईयाँ आदमी ले के कहाँ जाए, और यदि वो प्रत्युत्तर में हरेक के वाल पर अपनी बधाईयाँ व धन्यवाद चिपकाने लगे तो इसमें लगने वाले समय की गिनती के लिए स्टीफ़न हाकिंग को हायर करना पड़े!
इसीलिए सोचता हूँ कि प्रत्येक बधाई संदेशों के अलग-अलग प्रत्युत्तर देने (व मेरे अपने कोटे के, आप सभी पाठकों को मेरे प्रत्यक्ष बधाई संदेशों को देने) के बजाए अपने इस लेख के माध्यम से कुछ अ-हार्दिक क़िस्म की अ-बधाईयाँ (कु-बधाईयाँ नहीं,) आपको दे देता हूँ. वैसे भी, इस क़िस्म के अ-हार्दिक, अ-बधाईयों की दरकार आजकल हर किसी को है. अब यह आप पर निर्भर है कि आप इसे स्वीकारते हैं या नहीं. अलबत्ता आपकी इसी किस्म की अहार्दिक अबधाईयों को मैं तहे दिल से स्वीकार करूंगा. तो पेश है आपके लिए मेरी तरफ से कुछ अहार्दिक किस्म की अबधाईयाँ –

•    दीपावली पर आपके क्षेत्र-शहर का ट्रांसफ़ॉर्मर का फ़्यूज उड़ जाए/ जनरेशन बैठ जाए और इस कारण बिजली गुल हो जाए ताकि सजावट के लिए लगाए गए हजारों-लाखों झालरों में बिजली का अपव्यय न हो (और, यदि कंटिया नहीं लगी हो तो आपका बिल भी कम आवे,) और नतीजतन, कुछ ग्लोबल वार्मिंग कम हो, पर्यावरण को थोड़ा कम नुकसान हो, मानवता का भला हो.

•    दीपावली पर ईश्वर करे कि पटाखों पर पेट्रोल व सातवें एलपीजी सिलेंडर की तरह महंगाई की मार कुछ यूँ हो कि आप उन्हें खरीद न सकें, सिर्फ प्रतीकात्मक ही इक्का दुक्का फ़ोड़ सकें – ताकि आपके कानों की सुरक्षा हो और आपके पास-पड़ोस के पर्यावरण का संरक्षण हो.

•    आपके लिए ईश्वर से कामना है कि दीपावली (या ऐसे ही वार-त्यौहारों पर) में सप्ताह भर के लिए इंटरनेट, मोबाइल, टेलीफोन के नेटवर्क जाम हो जाएँ, बैठ जाएँ ताकि आप प्रत्यक्ष रूप आ-जाकर एक दूसरे के गले लगकर बधाईयों का आदान प्रदान कर सकें.

तो, आपके लिए ये थीं मेरी कुछ अहार्दिक, अबधाईयाँ. मेरे लिए आपकी भी ऐसी ही कुछ होंगी. ऐसी तमाम अहार्दिक, अबधाईयों का हार्दिक स्वागत है.

  

तकनीक दृष्टा विनय प्रजापति ने बड़ी मेहनत से  वर्ष 2012 के टॉप 15 हिन्दी ब्लॉगों की एक सूची जारी की है. इस सूची में छींटे और बौछारें 7 वें क्रम पर है. इससे पूर्व एक आलसी का चिट्ठा और परिकल्पना में भी आपके इस चहेते ब्लॉग को इसी वर्ष शीर्ष रैंकिंग मिल चुकी है. यह इस ब्लॉग के प्रति आप सभी के प्यार व उत्साहवर्धन का नतीजा है. आप सभी पाठकों व प्रशंसकों का हार्दिक धन्यवाद.

मैं कोशिश करूंगा कि आने वाले समय में अपने ब्लॉग लेखन में थोड़ी सी और नियमितता लाऊं - जो अभी हाल ही में थोड़ी अनियमित सी हो चली थी.

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आप सभी को दीप-पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!

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ये आईक्यू का फंडा बड़ा अजीब है. हो सकता है कि आपका आईक्यू ओसामा या अल-जवाहिरी के बरोबर हो! बहरहाल, ये आईक्यू का मामला गर्म इसलिए हुआ है कि भाजपाध्यक्ष नितिन गडकरी के मुताबिक स्वामी विवेकानंद और भाई दाऊद आईक्यू के मामले में एक समान हैं!

 

"...यह कहा था गडकरी ने -
गडकरी ने रविवार को भोपाल में ओजस्विनी समारोह में स्वामी विवेकानंद के आईक्यू की तुलना आतंकी दाऊद इब्राहिम से कर डाली। उन्होंने कहा कि दाऊद ने अपने आईक्यू का उपयोग अपराध के क्षेत्र में किया तो वह अपराधी बन गया, जबकि विवेकानंद ने समाज,देश के हित में अपने आईक्यू का इस्तेमाल किया तो वे महान बन गए। आईक्यू दोनों जगह समान है, पर महत्वपूर्ण ये है कि बुद्धिमत्ता, कौशल का उपयोग किस तरह होता है...."

समाचार स्रोत - पत्रिका

 

जो भी हो, इस वक्तव्य से तो नितिन गडकरी के आईक्यू का पता पूरी तरह से लग जाता है!

कुछ इस तरह जैसे कि बहुत से फेसबुकिए, ट्विटरिए, ब्लॉगरिये के पोस्टों-टिप्पणियों और स्टेटस अपडेट से उनके आई-क्यू का पता पूरी तरह से लग जाता है.

पर, अब जरा आप भी  अपनी पड़ताल कर लें कि आपका अपना आईक्यू कितना है, और किसके बराबर है!

अपनी हिंदी सुधारने के लिए अब आपके पास विकल्पों की कमी नहीं रही.

हाल ही में भाषागिरी.कॉम ने हिंदी सुधारने - यानी हिंदी वर्तनी जाँच के लिए एक बेहतरीन प्रोग्राम जारी किया है - स्पेलगुरू.

आरंभिक जांच पड़ताल में यह प्रोग्राम उम्दा लग रहा है. इसका शब्द-भंडार भी विशाल है.

और, जो चीज इसे विशिष्ट बनाती है वह है इसका इंटेलिजेंट वर्तनी जांच सिस्टम जो आपके कर्सर पोजीशन और क्लिक के आधार पर आपको वर्तनी जांच की अलग अलग सुविधा प्रदान करता है.

जैसे कि यदि आप गलत वर्तनी वाले शब्द के शुरू में बायां क्लिक करेंगे तो शुरुआती अक्षर को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक शब्द का सुझाव देगा, और यदि आप शब्द के आखिर में दायां क्लिक करेंगे तो शब्द के अंतिम अक्षरों को ध्यान में रखते हुए शब्द का सुझाव देगा. यह आखिरी अक्षरों वाला सुझाव तुकांत कविता लिखने वालों के लिए शायद काम आये.

मैंने रचनाकार में प्रकाशित एक आलेख का वर्तनी जांच इस प्रोग्राम के जरिए किया - जिसका स्क्रीनशॉट नीचे है -
(चित्र को पूरे आकार में देखने के लिए उस पर क्लिक करें)

तो आप देखेंगे कि इसका शब्द भंडार काफी विस्त़त है और यह कुछ नाम और अंग्रेज़ी के शब्दों को ही नहीं पहचान पा रहा है, परंतु आप इन्हें भविष्य में प्रयोग के लिहाज से इसके शब्द भंडार में जोड़ भी सकते हैं.

यदि आप वर्तनी जांच की सुविधा वाला प्रोग्राम चाहते हैं तो यह आपके बेहद काम का है. इसमें कॉपी-पेस्ट कर मैटर के वर्तनी जांच की सुविधा तो है ही,  इस प्रोग्राम में बेसिक लेखन की भी सुविधा है. फ़ोनेटिक रोमन में भी हिंदी लिख सकते हैं.

और सबसे बड़ी बात ये है कि आप इसमें इस्की व यूनिकोड दोनों में ही हिंदी वर्तनी की जांच कर सकते हैं. इस तरह का यह शायद अकेला प्रोग्राम है.

अधिक जानकारी व डेमो डाउनलोड के लिए भाषागिरी.कॉम की साइट - http://www.bhashagiri.com/#!home/mainPage पर जाएं. वहाँ एक बढ़िया डेमो वीडियो भी दिया है जिसे आप जरूर देखें.

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